Input By: L.K. Nagar
New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश के चर्चित बाइकबोट घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 394.42 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है. कुर्क की गई संपत्तियां 5 संस्थाओं कामाख्या एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, कामाख्या एजुकेशनल सोसायटी, गुरु नानक चैरिटेबल ट्रस्ट, एल्पाइन टेक्निकल एजुकेशन सोसायटी, एपी गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट और मीना आनंद के नाम पर दर्ज हैं.
बाइकबोट घोटाला गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (GIPL) और इसके प्रमोटर ग्रेटर नोएडा के संजय भाटी द्वारा संचालित एक पोंजी स्कीम से जुड़ा है. इस स्कीम के तहत निवेशकों को बाइक टैक्सी सेवा शुरू करने के नाम पर एक, तीन, पांच या सात बाइकों में निवेश करने का लालच दिया गया. निवेशकों को मासिक किराया और बोनस का वादा किया गया, लेकिन वास्तव में कई शहरों में बाइक टैक्सी सेवा शुरू ही नहीं हुई. निवेशकों से जुटाई गई रकम को विभिन्न कंपनियों के खातों में डायवर्ट कर मेरठ में अचल संपत्तियां खरीदी गईं और बैंकों से गिरवी रखी गई संपत्तियों को छुड़ाने में इस्तेमाल किया गया. ED की जांच में खुलासा हुआ कि इस घोटाले से जुटाए गए धन को शैक्षिक ट्रस्टों, सोसाइटियों और व्यक्तियों के माध्यम से लेयरिंग के जरिए छिपाया गया. कुर्क की गई संपत्तियों में 389.30 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां, 20.49 करोड़ रुपये की गिरवी छुड़ाई गई जमीन, और 5.12 करोड़ रुपये की सावधि जमा (FD) शामिल हैं. इससे पहले, ED ने 2020 और 2023 में 220.78 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं और 27 आरोपियों के खिलाफ चार चार्जशीट दाखिल की हैं, जिन पर गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने संज्ञान लिया. जांच अभी भी जारी है, और ED इस मामले में अन्य संलिप्त व्यक्तियों और संपत्तियों की जांच कर रही है. यह मामला निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का एक बड़ा उदाहरण है, जिसने हजारों लोगों को ठगा. ED की कार्रवाई से घोटाले के दोषियों पर शिकंजा कसने और निवेशकों के नुकसान की भरपाई की उम्मीद बढ़ी है.




































