April 18, 2026 4:52 pm

अंकिता भंडारी हत्याकांड में फिर उछला ‘VIP’ का नाम, मांगी CBI जांच, उर्मिला सनावर के वीडियो से मचा तूफान

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Dehradun: उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर राजनीतिक तूफान उठ गया. सोशल मीडिया पर अभिनेत्री उर्मिला सनावर जो खुद को पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताती हैं के वायरल वीडियो और ऑडियो से वीआईपी का नाम उछलने के बाद कांग्रेस, यूकेडी, महिला संगठनों और आम जनता ने सड़कों पर उतरकर सीबीआई जांच की मांग की.
दरअसल 19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर में वनंतरा रिजॉर्ट में रिषिकेष के नजदीक रिसेप्शनिस्ट थीं. 18 सितंबर 2022 को उसे रास्ते से हटाकर चीला नहर में फेंक दिया गया था. रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे, उनके यहां काम करने वाले सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया गया. 30 मई 2025 को कोटद्वार कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. दिसंबर 2025 के अंत में उर्मिला सनावर ने फेसबुक लाइव और ऑडियो रिलीज कर दावा किया कि मामले में एक वीआईपी जिसे उन्होंने गट्टू कहा शामिल था. उन्होंने बीजेपी के एक बड़े नेता का नाम लिया और आरोप लगाया कि अंकिता पर सेवा देने का दबाव था, जिससे इनकार करने पर हत्या हुई. ऑडियो में सुरेश राठौर के साथ बातचीत का दावा किया गया. इससे सियासत गरमा गई. वहीं दूसरी तरफ नेता ने अपना पक्ष देकर आरोपों का खंडन किया. कांग्रेस और यूकेडी ने देहरादून में प्रदर्शन किए. हजारों लोगों ने परेड ग्राउंड से सीएम आवास की ओर मार्च निकाला. इसमें तमाम संगठन और नारी शाक्ति शामिल रही. इसके अलावा राज्य के अलग अलग हिस्सों में भी जनसैलाब सड़कों पर आ गया. विपक्ष ने कहा कि एसआईटी जांच निष्पक्ष नहीं थी और बड़ा वीआईपी नेटवर्क छिपाया जा रहा है. इसलिए सीबीआई को जांच दी जाए और वीआईपी का खुलासा किया जाए. सीबीआई जांच से सच सामने आएगा.
दूसरी तरफ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अंकिता भंडारी केस कि जांच में कोई वीआईपी नहीं मिला. रिजॉर्ट रिकॉर्ड और स्टाफ की गवाही से यह साबित हुआ. उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ फर्जी ऑडियो/वीडियो फैलाने के लिए अलग एफआईआर दर्ज की गई. दोनों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन वे पेश नहीं हुए. इसमें एसआईटी जांच चल रही है. अंकिता भंडारी को न्याय के लिए जिस तरह लोग सड़कों पर निकल आए उससे मामला अब शांत होना थोड़ा मुश्किल दिखता है. इस केस और वीआईपी को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. उत्तराखंड की महिलाओं ने इसे अस्मिता का प्रश्न बना लिया है कि अंकिता भंडारी का पूरा सच सामने आना चाहिए.

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