April 18, 2026 8:27 pm

उत्तराखंड के धराली में बादल फटने से भारी तबाही, ऐसा देखा था पहला मंजर

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उत्तरखंड के उत्तरकाशी का धराली क्षेत्र जो भारी तबाही का शिकार हुआ.
Input By: Vinod Pundir (Sr. Journalist)

Dehradun: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में खीर गंगा नदी के पास बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई. इस प्राकृतिक आपदा के कारण तेज बहाव और मलबे ने धराली बाजार और आसपास के कई घरों को तहस-नहस कर दिया. खबरों के मुताबिक, इस हादसे में कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं. कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की भी आशंका जताई जा रही है. घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), सेना और स्थानीय पुलिस की टीमें राहत और बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं और स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सीएम धामी से बात कर स्थिति का जायजा लिया और केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया. धराली, जो गंगोत्री धाम के रास्ते में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, वहां खीर गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से बस्तियां और होटल-होमस्टे तबाह हो गए. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे महज कुछ सेकंड में पानी और मलबे का सैलाब गांव को बर्बाद कर गया. एक यूजर पत्रकार नितिन सबरंगी (Nitin Sabrangi) ने भी इसका वीडियो शेयर किया. 5 अगस्त की सुबह बादल फटने से खीरगंगा में आई बाढ़ के सैलाब की चपेट में घर, होटल, मोर्केट और होम स्टे सब आ गए. धराली बाजार पूरी तरह तबाह हो गया. यह स्थान गंगोत्री से 18 किलोमीटर और राजधानी देहरादून से करीब सवा 200 किलोमीटर दूर है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदियों से दूरी बनाए रखने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है. मौसम विभाग ने उत्तराखंड (Uttarakhand) के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिसके चलते प्रशासन हाई अलर्ट पर है. जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में हेलिकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है. गंगोत्री धाम का जिला मुख्यालय से संपर्क कट चुका है, और प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं. यह घटना उत्तराखंड में मानसून के दौरान बादल फटने की बार-बार होने वाली त्रासदियों की याद दिलाती है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी उजागर करती है.

 

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