Haridwar: उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में 28 जुलाई सुबह करीब 9 बजे एक दुखद हादसा हुआ, जिसमें भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए. यह हादसा मंदिर के सीढ़ी मार्ग पर हुआ, जहां सावन मास के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए एकत्र हुए थे. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंदिर मार्ग पर बिजली के तार में करंट आने की अफवाह के कारण अफरा-तफरी मच गई, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई. हालांकि, गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे और अन्य अधिकारियों ने करंट की बात को खारिज किया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है. हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया, जहां 13 गंभीर रूप से घायल लोगों को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है. शेष घायलों का इलाज हरिद्वार के जिला चिकित्सालय और मेला अस्पताल में चल रहा है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “मनसा देवी मंदिर मार्ग पर हुए इस हृदय विदारक हादसे में जानमाल की हानि अत्यंत दुखद है.” उन्होंने स्वयं हरिद्वार और ऋषिकेश के अस्पतालों में पहुंचकर घायलों का हाल जाना. उत्तराखंड सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर शोक जताया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “प्रभावित लोगों की हर संभव सहायता की जा रही है।” स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. हादसे के बाद मंदिर में दर्शन के लिए रास्ते को कुछ समय के लिए बंद किया गया था, लेकिन शाम 4 बजे स्थिति सामान्य होने पर इसे फिर से खोल दिया गया. हरिद्वार पुलिस ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर मार्ग पर वन-वे व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक, सीसीटीवी निगरानी, और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती आवश्यक है. यह हादसा धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण की खामियों को फिर से उजागर करता है.





































