New Delhi: देशभर में पेट्रोल पंपों पर अब E20 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अनिवार्य रूप से उपलब्ध है. सरकार इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण घटाने का बड़ा कदम बता रही है, जबकि वाहन मालिकों की तरफ से इंजन खराब होने, माइलेज घटने और अन्य समस्याओं की शिकायतें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि E20 से वाहनों को कोई नुकसान नहीं हो रहा है. पेट्रोल में इथेनॉल क्यों मिलाया गया? सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) का मुख्य उद्देश्य भारत की कच्चे तेल आयात पर निर्भरता लगभग 85% घटाना, विदेशी मुद्रा बचाना, किसानों को फायदा पहुंचाना और पर्यावरण सुधारना है. 2014-15 से मई 2026 तक इस कार्यक्रम से 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत हुई है. किसानों को गन्ना, मक्का आदि कच्चे माल के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. प्रदूषण कम होने और कार्बन उत्सर्जन घटने का दावा किया गया है. 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य मूल रूप से 2030 तक था जिसे बाद में 2025 तक एडवांस किया गया और समय से पहले हासिल कर लिया गया. सरकार का कहना है कि यह आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन ट्रांजिशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
वाहनों की खराबी के क्या मामले आए?
सोशल मीडिया और वाहन मालिकों के फोरम पर शिकायतें माइलेज में कमी कई यूजर्स खासकर पुरानी कारों और बाइकों में 10-20% तक माइलेज घटने की शिकायत कर रहे हैं. इंजन संबंधी समस्याएं, फ्यूल पंप खराब होना, जंग लगना, कार्बन जमा होना, इंजन ओवरहीटिंग, परफॉर्मेंस में गिरावट और कुछ मामलों में इंजन सीज होने जैसे दावे किए. नितिन गडकरी ने लोकसभा और अन्य मंचों पर स्पष्ट रूप से कहा E20 पेट्रोल का इस्तेमाल स्वस्थ प्रवृत्ति है. यह ग्रीन ट्रांजिशन है, कम प्रदूषित और विदेशी मुद्रा बचाता है. उन्होंने बताया कि ARAI, SIAM और अन्य संस्थानों के लाखों किलोमीटर के परीक्षण में वाहनों के प्रदर्शन, ड्राइवेबिलिटी या धातु/प्लास्टिक पार्ट्स पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया.





































