New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर में रिलायंस फाउंडेशन द्वारा संचालित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है. यह फैसला 25 अगस्त 2025 को जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान लिया, जिसमें वनतारा के संचालन और जानवरों की खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए. याचिकाओं में दावा किया गया है कि वनतारा ने भारत और विदेश से खासकर हाथियों को, अवैध तरीके से हासिल किया है, साथ ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संधियों (CITES) का उल्लंघन किया है. याचिकाकर्ता, वकील सीआर जया सुकिन ने आरोप लगाया कि वनतारा ने बिना कानूनी मंजूरी के जानवरों को स्थानांतरित किया, जिससे वन्यजीव तस्करी और धन शोधन जैसे गंभीर मुद्दे उठे. इसके अलावा, कोल्हापुर, महाराष्ट्र में स्थानीय निवासियों ने 36 साल की हथिनी महादेवी (माधुरी) को वनतारा स्थानांतरित करने का विरोध किया, जिसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंचा. SIT की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर करेंगे, जिसमें सेवानिवृत्त हाई कोर्ट चीफ जस्टिस राघवेंद्र चौहान, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले, और वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अनीश गुप्ता शामिल हैं. कोर्ट ने SIT को जानवरों की खरीद, पशु कल्याण मानकों, जल और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं, और वाइल्डलाइफ तस्करी जैसे मुद्दों की जांच करने का निर्देश दिया है. SIT को 12 सितंबर 2025 तक रिपोर्ट सौंपनी होगी और मामला 15 सितंबर को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी भी पक्ष पर संदेह नहीं दर्शाता, बल्कि एक स्वतंत्र तथ्य-जांच के लिए है. वनतारा ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन कोर्ट का यह कदम जांच की मांग को गंभीरता से लेने का संकेत है.




































