April 18, 2026 4:59 pm

नेपाल संकट: सोशल मीडिया बैन से भड़की Gen Z क्रांति, 22 मौतें, PM ओली का इस्तीफा, कैसे क्या हुआ

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New Delhi: नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन अब हिंसक क्रांति में बदल चुके हैं. युवाओं के नेतृत्व में चले इन विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया. संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और नेताओं के घरों में आग लगाने वाले प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू तोड़ दिया, जिसके बाद सेना को सड़कों पर उतारना पड़ा. मौतों का आंकड़ा 22 तक पहुंच गया, जबकि सैकड़ों घायल हैं. यह नेपाल की दशकों पुरानी सबसे बड़ी अशांति है, जो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ युवाओं का गुस्सा दर्शाती है. घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सब कुछ 4 सितंबर को शुरू हुआ जब नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, टिकटॉक और एक्स (पूर्व ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अचानक बैन लगा दिया. सरकार का दावा था कि ये प्लेटफॉर्म्स साइबर क्राइम, फेक न्यूज फैला रहे थे और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ रहे थे, लेकिन युवाओं ने इसे सेंसरशिप का हथियार माना, खासकर जब सोशल मीडिया पर नेताओं के ‘नेपो किड्स’ (राजनीतिक परिवारों के बच्चों) की लग्जरी लाइफ दिखाने वाले वीडियो वायरल हो रहे थे.
8 सितंबर को काठमांडू की सड़कों पर हजारों युवा उतर आए. ज्यादातर 13 से 28 साल के Gen Z थे, जो संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने रबर बुलेट्स, वॉटर कैनन और लाइव फायरिंग से जवाब दिया. नतीजा? कम से कम 19 मौतें और 100 से ज्यादा घायल. अस्पतालों में गोलियों के घाव वाले युवाओं की तस्वीरें वायरल हो गईं.
9 सितंबर को हिंसा चरम पर पहुंची. प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू तोड़ते हुए संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, नेपाली कांग्रेस कार्यालय और PM ओली व शेर बहादुर देउबा के घरों में आग लगा दी. सिंग्हा दुरबार (सरकारी कार्यालय कॉम्प्लेक्स) में भीषण आग लगी, जहां PMO स्थित है. जश्न मनाते युवा संसद में घुस गए, खिड़कियां तोड़ दीं और नारे लगाए. एयरपोर्ट बंद हो गया, जेलों से 900 कैदी फरार हो गए. सरकार ने सोशल मीडिया बैन हटा लिया, लेकिन गुस्सा शांत न हुआ. उसी शाम PM ओली ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने कहा, “देश की असाधारण स्थिति को देखते हुए मैं इस्तीफा दे रहा हूं ताकि राजनीतिक समाधान हो सके.”
क्यों बिगड़े हालात?
जड़ें आर्थिक और राजनीतिक संकट में नेपाल की 3 करोड़ आबादी में 90% इंटरनेट यूजर्स हैं, लेकिन प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 1300 डॉलर. युवा बेरोजगारी 20% से ऊपर है, जबकि अर्थव्यवस्था रेमिटेंस पर 30% निर्भर. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2025 में GDP ग्रोथ महज 4.5% रहेगी। भ्रष्टाचार चरम पर – हाल ही में एयरबस डील में 10 मिलियन डॉलर का घोटाला उजागर हुआ. सोशल मीडिया पर ‘नेपो किड्स’ के वीडियो ने असमानता को हाइलाइट किया, जहां नेता के बच्चे लग्जरी कारों में घूमते हैं, लेकिन आम युवा विदेश भाग रहे हैं. 2008 से 14 PM बदल चुके हैं. ओली का कम्युनिस्ट गठबंधन नेपाली कांग्रेस के साथ था, लेकिन युवा इसे पुरानी व्यवस्था मानते हैं. राजशाही खत्म होने के बाद की डेमोक्रेसी में युवाओं की आवाज दबी हुई थी. यह प्रदर्शन श्रीलंका 2022 और बांग्लादेश 2024 की तरह सिस्टम चेंज की मांग है. एमान इंटरनेशनल ने पुलिस की कार्रवाई को “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” कहा.

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