New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई. यह मुलाकात सात साल बाद PM मोदी की चीन यात्रा के दौरान हुई, जो भारत-चीन संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही है. करीब 40 मिनट तक चली इस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति, व्यापार, आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की.
PM मोदी ने कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने हाल के वर्षों में सीमा पर स्थिरता और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने का स्वागत किया. वहीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मुलाकात को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि भारत और चीन, दुनिया की दो सबसे पुरानी सभ्यताओं के रूप में, वैश्विक मंच पर एकजुट होकर शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं. उन्होंने “ड्रैगन और हाथी” के एक साथ आने की जरूरत पर जोर दिया.
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और चीन पर लगाए गए 50% टैरिफ के कारण दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं. इस पृष्ठभूमि में, दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में स्थिरता लाने की आवश्यकता पर बल दिया। PM मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का मुद्दा भी उठाया, विशेष रूप से हाल के पाहलगाम हमले का जिक्र करते हुए, जिसे वैश्विक मंचों पर चर्चा का हिस्सा बनाया गया. SCO शिखर सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हुए, भारत ने 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति शी को आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों को “रीसेट” करने और वैश्विक कूटनीति में एक नई गति प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. यह मुलाकात न केवल भारत-चीन के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा दे सकती है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भी एक संतुलन स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है, खासकर अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच.




































