Patna (Bihar): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विकास की राजनीति पर वोट की ‘डबल इंजन’ रफ्तार भारी पड़ती है. भाजपा-नीत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 202 सीटें जीतकर ऐतिहासिक लैंडस्लाइड जीत दर्ज की है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD)-नीत महागठबंधन (MGB) को महज 35 सीटों तक सीमित रहना पड़ा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पांचवीं बार सत्ता की कमान संभालेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘महिलाओं और युवाओं (महिला-यूथ) का नया MY फॉर्मूला’ बताते हुए पुराने ‘मुस्लिम-यादव’ समीकरण को खारिज कर दिया. विपक्ष ‘वोट चोरी’ का रोना रो रहा है, लेकिन ECI ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया.
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में हुए मतदान के नतीजे 14 नवंबर को घोषित हुए. NDA ने 200 से ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया, जो 2020 के 125 सीटों से दोगुना से ज्यादा है. भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने 89% स्ट्राइक रेट के साथ 90 सीटें जीतीं – 2010 के रिकॉर्ड के करीब. नीतीश कुमार की जेडीयू ने 80+ सीटें हासिल कर 2010 के बाद का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. चिराग पासवान की LJP(RV) ने 19 सीटें जीतकर 2020 की एक सीट से जबरदस्त छलांग लगाई.
बिहार की राजनीति पर असर: विकास vs वंशवाद, विपक्ष का संकट
यह जीत NDA के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बूस्टर है, खासकर 2029 लोकसभा चुनाव से पहले. पीएम मोदी ने दिल्ली में BJP मुख्यालय पर कहा, “बिहार ने विकासवाद को चुना, वंशवाद और तुष्टिकरण को ठुकराया। पुराना ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) फेल हो गया, नया ‘MY’ (महिला-यूथ) कामयाब।” उन्होंने विपक्ष के ‘चौकीदार चोर है’, ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “लोग अब सच्चे सामाजिक न्याय चाहते हैं, न कि तुष्टिकरण. “महागठबंधन की हार से RJD में संकट गहरा गया. लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया, कहा, “झूठे वादे करने वाली पार्टी से तंग आ गई।” कांग्रेस को महज 6 सीटें मिलीं – 1962 के 185 से गिरावट – जिसके बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने ECI पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया. RJD ने कहा, “उतार-चढ़ाव तो होते हैं, हम गरीबों की पार्टी हैं।” TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने INDIA ब्लॉक की कमान संभालने की पेशकश की.विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश की महिला कल्याण योजनाओं (जैसे 50% आरक्षण) और बेरोजगारी पर फोकस ने EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) को लामबंद किया. जातिगत हिंसा, अपराध और प्रवासन जैसे मुद्दों पर NDA का ‘जंगल राज vs विकास’ नैरेटिव चला. जन सुराज का फेल होना तीसरे विकल्प की कमी दर्शाता है. अब नीतीश सरकार नई कैबिनेट बनाएगी.




































