Meerut (UP): वेस्ट यूपी के प्रमुख जिले मेरठ में आवास एवं विकास परिषद की चर्चाएं हैं. काम करने के तौर तरीके पर हर कोई हैरान है कि अवैध निर्माण को बढ़ावा देने का खेल कैसे खेला जाता है. वर्तमान में एक शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में नामी ज्वैलर्स का निर्माण भी चर्चाओं में है जिसमें अधिकारी कार्रवाई करने के बजाए जान बूझकर आंखें मूंद रहे हैं. पुराने अवैध निर्मार्णों की लंबी सूची की बात छोड़ भी दी जाए तो धड़ल्ले से नए निर्माण हर महीने हो रहे हैं. दरअसल आवास एवं विकास परिषद की चर्चाएं इन दिनों ज्यादा हैं क्योंकि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा शास्त्रीनगर सैंट्रल मार्केट स्थित अवैध कॉम्पलैक्स 661/6 के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए जा चुके हैं. इसके अलावा अन्य भी जद में हैं. इसके लिए 1.67 करोड़ का टेंडर हो चुका है. जिन लोगों ने अवैध कॉम्पलैक्स में दुकानें लीं वह परेशान हैं, क्योकि उनकी जीवन भर की पूंजी दाव पर लगी है. इस मामले के अलग देखकर लगता है जैसे अवैध निर्माण की एक मुहिम चल रही है, इसी तरह नामी जैना ज्वैलर्स ने अपने रसूख और पैसे के बल पर अवैध भव्य शोरूम खड़ा कर दिया. अधिकारियों ने कार्रवाई के नाम पर ही आंखे मूंद ली. शमन फाइल लखनऊ भेजकर निर्माण की छूट दे दी गई. शिकायतों के जरिए याद भी दिलाया गया, लेकिन बताते हैं के मोटी डील के चलते स्थानीय अधिकारी कार्रवाई ही नहीं करना चाहते.
आवास विकास क्षेत्र में नई योजनाए फिलहाल हैं नहीं. जो हैं उनमें डेवलपमेंट का अभाव है, कहीं फसलें उग रही हैं तो कहीं फ्लैट खंडहर हो रहे हैं. लोग कहते हैं कि अधिकारियों का डेवलपमेंट की तरफ ध्यान कम और अवैध निर्माण कराने की तरफ ज्यादा है. अनुमान के तौर पर शास्त्रीनगर, जागृति विहार जैसे एरिया में हर महीने 100 से ज्यादा अवैध निर्माण हो जाते हैं. जो हुए उन्हें छोड़ भी दिया जाए तो नए निर्माण रोकने में अधिकारी कैसे नाकाम साबित हो रहे हैं? यह कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल है. वर्तमान अधिकारियों के कारनामों की सूची लखनऊ तक जाने की तैयारियां हो रही हैं. दूसरी तरफ अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार कहते हैं कि सभी जिम्मेदारी से अपना-अपना काम कर रहे हैं. लेकिन अवैध निर्माण के जो मामले हमारे संज्ञान में आते हैं उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है.





































