New Delhi: अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई से शुरू हुए ईरान युद्ध ने मध्य पूर्व को आग की लपटों में झोंक दिया. 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की जबकि ईरान ने जवाबी हमलों में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया. अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और इजराइल ने ऑपरेशन रोअरिंग लायन नाम दिया. पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या हो गई जो तेहरान में उनके आवास पर हवाई हमले में मारे गए. ईरानी राज्य मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की साथ ही उनकी बेटी दामाद और पोते की भी मौत हुई. इसके बाद ईरान ने ‘ट्रू प्रॉमिस IV’ ऑपरेशन के तहत इजराइल अमेरिकी बेस बहरीन, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और लेबनान पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए. अब तक ईरान में 200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, जबकि इजराइल और अमेरिकी पक्ष में दर्जनों हताहत.
यह युद्ध लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी का नतीजा है. मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है. इजराइल और अमेरिका इसे ‘अस्तित्व का खतरा’ मानते हैं. 2015 का JCPOA समझौता ट्रंप ने 2018 में तोड़ा था. 2025 में इजराइल ने ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए, लेकिन ईरान ने इसे जारी रखा. बैलिस्टिक मिसाइलें और प्रॉक्सी ग्रुप्स ईरान हिजबुल्लाह, हमास, हूती जैसे गुटों को समर्थन देता है, जो इजराइल पर हमले करते हैं. रिजीम चेंज का लक्ष्य ट्रंप ने इसे रिजीम चेंज बताया उनका कहना है कि ईरानी लोग अपनी सरकार से आजादी चाहते हैं. खामेनेई की मौत के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नए नेता की नियुक्ति में शामिल होगा. मोहम्मद खामेनेई खामेनेई के बेटे को लाइटवेट बताया. यदि अब की बात करें तो ईरान का एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’अमेरिकी हितों तेल, सैन्य बेस को चुनौती देता है. रूस और चीन ईरान को सपोर्ट कर रहे हैं.




































