Hapur (UP): आज के दौर में लालच में लोग किस हद तक चले जाते हैं. एक ऐसा मामला सामने आया जिसकी चर्चा हो गई. यह सब तब हुआ जब एक व्यक्ति का गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था, लेकिन जब उसके चेहरे से कपड़े को हटाया गया तो वह प्लास्टिक का एक पुतला निकला. जो लोग अंतिम संस्कार करने के लिए उसे लेकर आए थे उन्हें मौके से पकड़ लिया गया. इसके बाद उन्होंने चौंकाने वाली बात बतायी कि वह ऐसा क्यों कर रहे थे. उनकी बातों से पुलिस भी हैरान रह गई.
दरअसल उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के ब्रजघाट की पहचान धर्म नगरी को लेकर है. ब्रजघाट में हर साल न सिर्फ लाखों लोग गंगा स्नान और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए आते हैं, बल्कि यहां गंगा किनारे अंतिम संस्कार भी किए जाते हैं. एक दिन दिल्ली नंबर वाली कार से दो लोग एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचे. उन्होंने यह बताया कि उनके यहां काम करने वाले नौकर की मृत्यु हो गई वह उसे लेकर आए हैं. रीति रिवाज के तहत चिता सजा दी गई और व्यक्ति को उस पर लिटा दिया गया. इसी बीच नगर पालिका कर्मचारी मृतक की एंट्री रजिस्टर में करने के लिए पहुंचे. यह एंट्री इसलिए की जाती है ताकि उसके आधार पर नगर पालिका गढ़मुक्तेश्वर द्वारा दाह संस्कार का प्रमाण पत्र जारी किया जा सके. ज्यादा लोग न देखकर पालिका कर्मचारी को शक हुआ इसलिए उसने व्यक्ति का चेहरा दिखाने को कहा तो वह लोग आनाकानी करने लगी, लेकिन जब चिता पर लेटे व्यक्ति के चेहरे से कपड़ा हटाया गया तो वह प्लास्टिक की डमी निकली. साथ आए लोगों को पकड़कर पुलिस के सपुर्द कर दिया गया.
पकड़े गए लोगों में कपड़ा कारोबारी कमल सोमानी और आशीष खुराना थे. यह दोनों दिल्ली के रहने वाले थे. मुख्य आरोपी कमल निकला. कारोबार में घाटा होने पर कमल ने अपने नौकर अंशुल की बीमा पालिशी करायी उसके नामिनी खुद बने. किसी भी स्थिति में अंशुल की मृत्यु के बाद 50 लाख रूपए कमल को मिलने थे.कुछ दिन पहले नौकर अंशुल बिहार अपने गांव चला गया. इधर कमल ने लोगों को बताया कि उनके नौकर अंशुल की तबियत खराब होने पर अस्पताल ले जाया गया जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई. कमल का कपड़ों का काम था. उसके यहां पहले से डमी थी. उसने डमी को कपड़ो में लपेटा और अंतिम संस्कार करने अपने दोस्ते के साथ ब्रजघाट पहुंच गया. यह पूरा खेल 50 लाख रूपए की बीमा राशि को हड़पने के लिए किया गया था. इस मामले के आने के बाद अब नियम को सख्त कर दिया गया कि अंतिम संस्कार के लिए जिस व्यक्ति को लाया जाएगा उसके उस व्यक्ति के चेहरे और आधार कार्ड को देखने के बाद ही रजिस्टर में एंट्री होगी जिसके बाद ही पालिका द्वारा दाह संस्कार प्रमाण जारी होगा.




































