Lucknow: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण और मनी लॉन्ड्रिंग के मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के खिलाफ जांच एजेंसियों का शिकंजा और कसता जा रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में छांगुर बाबा के पनामा कनेक्शन का खुलासा किया, जहां शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी. ईडी की जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा और उसके सहयोगी नवीन रोहरा ने पनामा में विदेशी नागरिकों के नाम पर शेल कंपनियां बनाई थीं, जिनके जरिए विदेशी फंडिंग को भारत में लाया गया. इन कंपनियों में शामिल नामों में अध्यक्ष एरियल रिकार्डो पाडिला गॉर्डन, कोषाध्यक्ष एनाबेल लोरेना लैंडिरेस मोंगे और सचिव ब्रेंडा पाटियो डे टोरेस शामिल हैं.
यूपी एटीएस और ईडी की संयुक्त जांच में यह भी पता चला है कि छांगुर बाबा ने पिछले तीन सालों में लगभग 500 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग हासिल की, जिसमें से अधिकांश राशि पाकिस्तान, दुबई, सऊदी अरब, तुर्की और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आई. नेपाल की सीमा से सटे जिलों में 100 से ज्यादा बैंक खातों के जरिए इस धन का लेन-देन किया गया. छांगुर बाबा का नेटवर्क न केवल धर्मांतरण तक सीमित था, बल्कि इसके तार आतंकी गतिविधियों और आईएसआई से भी जुड़े होने की बात सामने आई है. जांच में खुलासा हुआ कि छांगुर बाबा आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाता था, जिन्हें प्रलोभन, धोखे या दबाव देकर धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जाता था. इसके लिए कोडवर्ड्स जैसे ‘प्रोजेक्ट’, ‘काजल करना’ और ‘दीदार कराना’ का इस्तेमाल किया जाता था. बलरामपुर में छांगुर बाबा की 40 कमरों वाली आलीशान कोठी, जो सरकारी जमीन पर बनी थी, पर बुलडोजर कार्रवाई की गई, जिसमें 75% हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया. जांच एजेंसियां अब छांगुर के सियासी कनेक्शनों की भी पड़ताल कर रही हैं, जिसमें 2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अतीक अहमद के लिए प्रचार करने का आरोप शामिल है.





































