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शारदीय नवरात्रि 2021: जानें कलश स्थापना विधि, नवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि का पर्व 07 अक्टूबर से आरंभ होगा। इसे शरद या शारदीय नवरात्रि भी कहते हैं। शरद नवरात्रि का पर्व 15 अक्टूबर को समाप्त होगा।

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित होता है। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और उपासना की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि पर मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दिनों में माता रानी के भक्त मां उनकी विशेष कृपा पाने के लिए व्रत भी रखते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि का पर्व 07 अक्टूबर से आरंभ होगा। इसे शरद या शारदीय नवरात्रि भी कहते हैं। शरद नवरात्रि का पर्व 15 अक्टूबर को समाप्त होगा।

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कलश स्थापना कब

नवरात्रि का त्योहार कलश स्थापना से आरंभ होता है। शरद नवरात्रि में कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि यानी 07 अक्टूबर को होगी। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के त्योहार की विधि-विधान शुरुआत मानी जाती है।

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शारदीय नवरात्रि 2021 की प्रमुख तिथियां-

नवरात्रि प्रारंभ- 07 अक्टूबर 2021, गुरुवार
नवरात्रि नवमी तिथि- 14 अक्टूबर 2021, गुरुवार
नवरात्रि दशमी तिथि- 15 अक्टूबर 2021, शुक्रवार
घटस्थापना तिथि- 07 अक्टूबर 2021, गुरुवार

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किसलिए करते  हैं कलश स्थापना:

पूजा स्थान पर कलश की स्थापना करने से पहले उस जगह को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है। कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाया जाता है और उसमें हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा, आदि रखी जाती है। कलश को स्थापित करने के लिए उसके नीचे बालू की वेदी बनाई जाती है। जिसमें जौ बोये जाते हैं। जौ बोने की विधि धन-धान्य देने वाली देवी अन्नपूर्णा को खुश करने के लिए की जाती है। मां दुर्गा की फोटो या मूर्ति को पूजा स्थल के बीचों-बीच स्थापित करते है। जिसके बाद मां दुर्गा को श्रृंगार, रोली ,चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण अर्पित करते हैं। कलश में अखंड दीप जलाया जाता है जिसे व्रत के आखिरी दिन तक जलाया जाना चाहिए। 


विश्वकर्मा पूजा 2021: आज भगवान विश्वकर्मा का जन्मदिन, जानिए पूजन का शुभ समय

हिंदी पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 17 सितंबर को सुबह 6:07 बजे से लेकर 18 सितंबर शनिवार को दोपहर 3:36 बजे तक है। ध्यान रहे कि 17 सितंबर को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा।

आज भगवान विश्वकर्मा का जन्मदिन है। विश्वकर्मा पूजा का त्योहार हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दुनिया के पहले इंजीनियर व शिल्पकार का जन्म हुआ था।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मा के 7वें पुत्र हैं। इन्होंने सृष्टि के निर्माण में ब्रह्मा जी का सहयोग किया था। हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान विश्वकर्मा जयंती का पर्व कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। इस तिथि को इंजीनियरिंग संस्थानों, फैक्ट्रियों, कल-कारखानों व कामगार समूहों द्वारा मशीनों, हथियारों व औजारों की पूजा की जाती है। इस दिन ये लोग भगवान विश्वकर्मा की विधि -विधान से पूजा करते हैं। इससे भगवान विश्वकर्मा प्रसन्न होकर उनपर अपनी कृपा बरसते हैं। मान्यता है कि उनकी कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही व्यापार में तरक्की और उन्नति प्राप्त होती है।

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पूजन का शुभ मुहूर्त


हिंदी पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 17 सितंबर को सुबह 6:07 बजे से लेकर 18 सितंबर शनिवार को दोपहर 3:36 बजे तक है। ध्यान रहे कि 17 सितंबर को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा।

Vishwakarma Puja 2021: How to worship Lord Vishwakarma, know the complete  method here - Vishwakarma Puja 2021: कैसे करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा,  जानिए पूरी विधि विस्तार से यहां

राहुकाल का समय:

आज सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल है। यह राहुकाल कुल 1 घंटा 32 मिनट तक रहेगा।  इस दौरान विश्वकर्मा पूजा न करें। क्योंकि ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।  


विश्वकर्मा पूजन का महत्व


विश्वकर्मा जयंती के दिन इनकी विधि पूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही व्यापार में तरक्की और उन्नति होती है। कहा जाता है कि तकनीकी क्षेत्र से जुड़े जो भी लोग हर साल विश्वकर्मा जयंती पर इनके साथ अपने औजारों और अस्त्रों की पूजा करते हैं, उन्हें पूरे साल उनके हथियारों और औजारों से निर्वाध गति में  कम करने में किसी बाधा का सामना नहीं करना पड़ता है।

श्री विश्वकर्मा कथा

सूतजी बोले,प्राचीण समय की बात है,मुनि विश्वमित्र के बुलावे पर मुनि और सन्यासी लोग एक स्थान पर एकत्र हुए सभा करने के लिये। सभा मे,मुनि विश्वमित्र ने सभी को संबोधित किया। मुनि विश्वमित्र ने कहा कि,हे मुनियों आश्रमों में दुष्ट राक्षस यज्ञ करने वाले हमारे लोगों को अपना भोजन बना लेते,यज्ञों को नष्ट कर देतें है। जिसके कारण् हमारें पुजा-पाठ,ध्यान आदि में परेशानी हो रही है। इसलिए अब हमे तत्काल् उनके कुकृत्यों से बचने का कोई उपाय अवश्य करना चाहिए। मुनि विश्वमित्र की बातों को सुनकर वशिष्ठ मुनि कहने लगे कि एक बार पहले भी ऋषि-मुनियों पर इस प्रकार का संकट आया था । उस समय् हम् सब मिलकर ब्रह्माजी के पास गये थें। ब्रह्माजी ने ऋषि मुनियों को संकट से छुटकारा पाने के लिए उपाय बताया था।। ऋषि लोंगों ने ध्यानपूर्वक वशिष्ठ मुनि कि बातों को सुना और कहने लगे कि वशिष्ठ मुनि ने ठीक ही कहा है, हमें ब्रह्मदेव् के ही शरण में जाना जाना चाहिये।

ऐसा सुन सब ऋषि-मुनियों ने स्वर्ग को प्रस्थान किया। मुनियों के इस प्रकार कष्ट को सुनकर ब्रह्मा जी को बडां आश्चर्य हुआ,ब्रह्मा जी कहने लगे कि,हे मुनियों राक्षसों से तो स्वर्ग मे रहनें वाले देवता को भी भय लगता रहता है। फिर मनुष्यों का तो कहना ही क्या जो बुढापे और मृत्यु के दुखों में लिप्त रहतें हैं। उन राक्षसों को नष्ट करने में श्री विश्वकर्मा समर्थ है,आप लोग् श्री विश्वकर्मा के शरण में जाएँ। इस समय पृथ्वी पर अग्नि देवता के पुत्र मुनि अगिरा यज्ञों में श्रेष्ठ पुरोहित हैं, और जो श्री विश्वकर्मा के भक्त है। वही आपके दुखों को दुर कर सकते हैँ,इसलिए हे मुनियों,आप उन्ही के पास जायें। सूतजी बोलें,ब्रह्मा जी के कथन के अनुसार मुनि लोग अगिंरा ऋषि पास गयें। मुनियों की बातों को सुनकर अगिंरा ऋषि ने कहा, हे मुनियों आप लोग क्यों व्यर्थ् मे इधर-उधर मारे-मारे फिरते रहें है। दुखों को दुखों दुर करने मे विश्वकर्मा भगवान के अतिरिक्त और कोई भी समर्थ नही है।

अमावस्या के दिन,आप लोग अपने साधारण कर्मों को रोक कर भक्ति पूर्वक “श्रीविश्वकर्मा कथा” सुनों उनकी उपासना करो। आपके सारे कष्टों को विश्वकर्मा भगवान अवश्य दुर करेंगे। महर्षि अगिंरा के बातों को सुनकर सभी लोग अपने-अपने आश्रमों को चले गये। तत्प्रश्चात् अमावस्या के दिन,मुनियों नें यज्ञ किया। यज्ञ में विश्वकर्मा भगवान का पूजन किया। “श्री विश्वकर्मा कथा” को सुना। जिसका परिणाम यह हुआ कि सारे राक्षस भस्म हो गए। यज्ञ विघ्नों से रहित हो गया,उनकें सारे कष्ट दुर हो गयें। जो मनुष्य भक्ति-भाव् से विश्वकर्मा भगवान की पूजा करता है,वह सुखों को प्राप्त करता हुआ संसार में बङे पद को प्राप्त करता है।

जय श्री विश्वकर्मा।
जय जय श्री राधे।
श्री राधा- कृष्ण की कृपा से आपका दिन मंगलमय हो।
श्री कृष्ण शरणम ममः


इन राशि के जातकों पर होने वाली है मां लक्ष्मी की कृपा, शनि और गुरू आ रहे हैं एक साथ

इस शुभ योग के निर्माण से कुछ राशियों को फायदा होने जा रहा है। इन राशियों पर कुछ समय तक मां लक्ष्मी की विशेष कृपा रहेगी।

ज्योतिष में शनि और देवगुरु बृहस्पति को महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। इस समय शनि मकर राशि में विराजमान हैं। देवगुरु बृहस्पति भी 14 सितंबर को मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। देवगुरु बृहस्पति इस राशि में 21 नवंबर तक विराजमान रहेंगे। देवगुरु बृहस्पति और शनि के एक ही राशि में आने से शुभ योग बन रहा है।

इस शुभ योग के निर्माण से कुछ राशियों को फायदा होने जा रहा है। इन राशियों पर कुछ समय तक मां लक्ष्मी की विशेष कृपा रहेगी। आइए जानते हैं गुरु और शनि के एक ही राशि में आने से किन-किन राशि के जातकों पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसने वाली है:

मेष राशि़

  • मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।
  • नौकरी और व्यापार में तरक्की करेंगे।
  • स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
  • मान- सम्मान और पद- प्रतिष्ठा में वृद्दि होगी।
  • कार्यों में सफलता प्राप्त करेंगे।
  • आपके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना होगी।

वृष राशि

  • धन- लाभ होगा।
  • मां लक्ष्मी की विशेष कृपा रहेगी।
  • नौकरी और व्यापार के लिए समय शुभ है।
  • निवेश करने से लाभ होगा।
  • कार्यों में सफलता मिलेगी।

कर्क राशि

  • दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।
  • मां लक्ष्मी की कृपा से धन- लाभ होगा।
  • कार्यक्षेत्र में खूब मान- सम्मान मिलेगा।
  • पद- प्रतिष्ठा में वृद्दि होगी।
  • नौकरी और व्यापार में लाभ के योग बन रहे हैं।
  • कार्यक्षेत्र में आपके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की जाएगी।

मीन राशि

  • मां लक्ष्मी की विशेष कृपा रहेगी।
  • लेन- देन के लिए समय शुभ है।
  • कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे। 
  • परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त करेंगे।
  • वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।


नोट: इस लेख में लिखी बातों के सच होने का हम दावा नहं करते। कृपया अपनाने से पहले अपने वैदिक विद्वान से सलाह लें।


पंजाब: लोगों को खूब भा रहे चॉकलेट के बने गणपति

इस बार भी नदियों को और पर्यावरण को दुषित होने से बचाने का काम भी बखूबी जारी है और इको-फ्रेंडली गणपति की मूर्तियां इस बार कलाकार बना रहे हैं।

चंडीगढ़/लुधियाना: भगवान गणेश का आह्वान हो चुका है। लोग अपने-अपने घरों में, संस्थानों में भगवान गणपति की मूर्ति स्थापित कर रहे हैं। वहीं, नदियों को और पर्यावरण को दुषित होने से बचाने का काम भी बखूबी जारी है और इको-फ्रेंडली गणपति की मूर्तियां इस बार कलाकार बना रहे हैं।

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इस बार इको-फ्रेंडली मूर्ती बनाने के मामले में सबसे ज्यादा ध्यान पंजाब ने खीचा है। राज्य में इसबार गणेश चतुर्थी पर चॉकलेट से बनी हुई इको-फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ति का ट्रेंड बढ़ रहा है।

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लुधियाना में चॉकलेट गणेश मूर्ति तैयार करने वाले चमन शर्मा ने बताया, ''मुझे चॉकलेट के गणेश जी बनाते हुए 5-6 साल हो गए। ये हमने प्योर बेल्जियम चॉकलेट से तैयार किया है।'' चमन बताते हैं कि इस हर साल की अपेक्षा इस साल लोग ज्यादा चॉकलेट से बनी मूर्तियों को खरीद रह हें। 

वहीं, एक अन्य दुकानदार हरजिंदर सिंह कुकरेजा ने बताया, "हम पिछले 6 साल से चॉकलेट गणेश बना रहे हैं। हम लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि गणेश चतुर्थी को इको-फ्रेंडली तरीके से मनाया जा सकता है।"

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वहीं, चॉकलेट से बने गणपति की मूर्ति खरीदने आईं एक महिला ने कहा कि ये आइडिया बहुत अच्छा है क्योंकि मिट्टी के गणेश जी को पानी में विसर्जित करना होता है। इससे प्रदूषण भी होता है। इसे आप गर्म पानी में डालकर लोगों में बांट भी सकते हैं। जहां कोरोना बहुत ज़्यादा है वहां लोगों को अपने घरों में चॉकलेट गणेश जी ही बनाना चाहिए।

गोबर के बनाए गए गणपति

भोपाल में गाय के गोबर से बनी गणेश की मूर्तियों की मांग काफी बढ़ रही है। कांता यादव ने बताया, "गाय के गोबर को हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है, इसी थीम पर हमने गाय के गोबर से गणेश जी बनाए हैं। हमने सोशल मीडियो पर वीडियो अपलोड किया जिससे हमें अन्य राज्यों से भी ऑर्डर मिले हैं।"

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गणेश चतुर्थी 2021: रात्रि में भूलकर भी न करें ये काम, चंद्र देव हुए थे गजानन के गुस्से के शिकार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर रात्रि में चंद्र देव के दर्शन नहीं करने चाहिए।

आज गणेश चतुर्थी है। आज के दिन भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है। गणेश चतुर्थी से 10 दिनों के गणेश महोत्सव की शुरुआत जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर रात्रि में चंद्र देव के दर्शन नहीं करने चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा का दर्शन करने से झूठा कलंक अथवा आक्षेप लगने की संभावना होती है। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करना अपशगुन माना जाता है। लेकिन आज की रात्रि यानि गणेश चतुर्थी की रात्रि कुछ ऐसे भी काम हैं जिन्हें करना अपसकून माना जाता है।

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गलति से अगर चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो उन्हें प्रणाम कर लें और घर आकर के मिष्ठान अथवा फल फूल उनके निमित्त उनको समक्ष दिखा कर दान कर दें। गणेश जी के किसी मंत्र का जाप करें या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

Government Model Sanskriti Senior Secondary School,Dhatir, Palwal-121102 -  चंद्र कलाएँ या चंद्रमा की कलाएँ (Phases of the moon) साभार :- इंडिया वाटर  पोर्टल चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी ...


पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार अपने जन्म तिथि पर गणेश जी भोजन करके घर लौट रहे थे। उनके मोटे पेट को देखकर चंद्र देवता हंसने लगे तब गणेश जी ने उनको शाप दे दिया कि तुम्हारा शरीर प्रतिदिन शरीर घटता चला जाएगा और तुम अंत में मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे।

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उस शाप की मुक्ति के लिए भगवान शंकर की तपस्या की। तब शंकर भगवान जी उनसे प्रसन्न हो गये और चन्द्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। इसके बाद चंद्र देव ने गणेश जी से शाप मुक्ति का उपाय पूछा।

भगवान गणेश जी कहा मैं केवल आपको शाप से मुक्त होने का उपाय बताता हूं। केवल भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी को जिस दिन आप मेरा अपमान किया था उस तिथि को तुम्हारे दर्शन करने पर लोगों को झूठा आरोप या कलंक लग सकता है। शेष दिनों में आप जिस गति से घटोगे फिर उसी गति से बढ़कर पूर्णता प्राप्त करोगे।




मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म स्थल का दस वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र तीर्थस्थल घोषित, मांस-मदिरा पर प्रतिबंध

सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा दौरे पर लोगों से किया गया वादा आज पूरा कर दिया है। उनके निर्देश पर उत्तर प्रदेश शासन ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान ब्रज में मांस व मदिरा की बिक्री पर भी पाबंदी लगा दी है।

लखनऊ: सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश के धार्मिक पयर्टन स्थल केंद्र को लेकर बड़ा फैसला किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थल का दस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा दौरे पर लोगों से किया गया वादा आज पूरा कर दिया है। उनके निर्देश पर उत्तर प्रदेश शासन ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान ब्रज में मांस व मदिरा की बिक्री पर भी पाबंदी लगा दी है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसको लेकर एक ट्वीट भी किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण जन्म स्थल को केंद्र में रखकर दस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के कुल 22 नगर निगम वार्ड तथा क्षेत्र को तीर्थ स्थल के रूप में घोषित किया है।

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प्रदेश सरकार के इस निर्णय के तहत अब यहां पर दस किलोमीटर के क्षेत्र में शराब और मीट नहीं बिकेगा। इस क्षेत्र में मांस व मदिरा की बिक्री पर रोक को लेकर शीघ्र ही आदेश भी जारी कर दिया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ सरकार ने ब्रज क्षेत्र में हर साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के सम्मान में यह फैसला लिया है। अब तीर्थ स्थल क्षेत्र में शराब और मांस की बिक्री नहीं होगी। इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। भाजपा सरकार ने ब्रज में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए यह फैसला लिया है। गौरतलब है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने संतों की इच्छा के अनुरूप मथुरा तीर्थ क्षेत्र में मांस और मदिरा की बिक्री पर रोक लगाने का वादा किया था।



इन 5 राशियों वाले लोग होते हैं बड़े हिम्मती, जीवन में लेते हैं बड़े-बड़े रिस्क

अक्सर हमारे और आपके आस-पास ऐसे लोग मिल जाते हैं जिनकी प्रतिभा देखते ही बनती है। लोग आपस में बात करते रहते हैं और वह निर्णय ले लेते हैं। कभी-कभी रिस्क लेना उन्हें भारी भी पड़ जाता है लेकिन वह निराश होने की बजाय अगले रिस्क के लिए तैयार रहते हैं। तो हम आपको बता रहें हैं ऐसी पांच राशियों के बारे में जो जीवन में रिस्क लेते हैं चाहे उन्हें हार मिले या जीत।

अक्सर हमारे और आपके आस-पास ऐसे लोग मिल जाते हैं जिनकी प्रतिभा देखते ही बनती है। लोग आपस में बात करते रहते हैं और वह निर्णय ले लेते हैं। कभी-कभी रिस्क लेना उन्हें भारी भी पड़ जाता है लेकिन वह निराश होने की बजाय अगले रिस्क के लिए तैयार रहते हैं। तो हम आपको बता रहें हैं ऐसी पांच राशियों के बारे में जो जीवन में रिस्क लेते हैं चाहे उन्हें हार मिले या जीत।

मेष- मेष राशि के जातक आत्मविश्वासी और साहसी होते हैं। इन्हें रिस्की काम करने में मजा आता है। ये जीवन में कई बार ऐसे काम कर जाते हैं, जिन्हें देखकर सामने वाला हैरान रह जाता है। इनकी नेतृत्व क्षमता भी कमाल की होती है।

वृषभ- इस राशि के लोगों को चैलेंज लेने में मजा आता है। ये सरल और खुले विचारों के होते हैंय़ इनका दिमाग काफी तेज चलता है। कहा जाता है कि इस राशि के लोग रिस्क लेने से पीछे नहीं हटते हैं।

सिंह- सिंह राशि के लोग मुश्किलों में भी मुस्कुराते हुए नजर आते हैं। ये रिस्क लेने में माहिर होते हैं। कहा जाता है कि इस राशि के लोग जिस काम को ठान लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं।

वृश्चिक- इस राशि के जातक मेहनत से सफलता हासिल करते हैं। इस राशि के लोग ईमानदार और परिश्रमी माने जाते हैं। ये कभी रिस्क लेने से पीछे नहीं हटते हैं। इस राशि के लोगों पर मंगल देव की विशेष कृपा होती है।

धनु- धनु राशि के लोगों में चुनौतियों के सामना करने की क्षमता होती है। ये बुरे से बुरे समय में घबराते नहीं है। ये अपने काम बनाने की हर संभव कोशिश करते हैं।

नोट: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  


तस्वीरों में देखें: देशभर में धूम-धाम से मनाई जा रही कृष्ण जन्माष्टमी

आज भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देश के सभी मंदिरों में भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया जा रहा है और लोग कृष्ण भजनों पर जमकर झूम रहे हैं। तो आइए हम आपको बताते हैं कि कहां किस अंदाज में भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन मनाया जा रहा है।

नई दिल्ली: आज भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देश के सभी मंदिरों में भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया जा रहा है और लोग कृष्ण भजनों पर जमकर झूम रहे हैं। तो आइए हम आपको बताते हैं कि कहां किस अंदाज में भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन मनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के मौके पर लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

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दिल्ली: जन्माष्टमी के मौके पर श्रद्धालुओं ने राजधानी दिल्ली के बिरला मंदिर में पूजा की। 

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ओडिशा: कोरोना महामारी के बीच भुवनेश्वर में जन्माष्टमी के मौके पर भी इस्कॉन मंदिर बंद है, ऐसे में लोगों ने मंदिर के बाहर से ही पूजा की।

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उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में पहुंचकर कान्हा के दर्शन किए।

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दिल्ली: राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके के इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में पूजा की गई। इस दौरान मंदिर के अंदर भजन-कीर्तन भी किए गए।


जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने जन्माष्टमी का उत्सव मनाया।