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जगन्नाथ रथयात्रा शुरू, CM भूपेंद्र पटेल ने सोने की झाड़ू से साफ की सड़क

गुजरात के अहमदाबाद में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा की शुक्रवार को शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने विधि-विधान के साथ पहिंद विधि से रथयात्रा की शुरुआत की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोने के झाड़ू से झाड़ू लगाकर रथयात्रा की शुरुआत की।

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा की शुक्रवार को शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने विधि-विधान के साथ पहिंद विधि से रथयात्रा की शुरुआत की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोने के झाड़ू से झाड़ू लगाकर रथयात्रा की शुरुआत की।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सोने के झाड़ू से झाड़ू लगाने के साथ ही अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हो गई अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा सरसपुर इलाके में जाएगी जिसे भगवान जगन्नाथ के मामा का घर कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ पुराने अहमदाबाद के प्रेम दरवाजा के रास्ते मंदिर में वापस लौटते हैं।

अहमदाबाद में ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा की तर्ज पर होने वाले इस आयोजन से पहले मंगला आरती हुई। 145वीं रथयात्रा से पहले मंगला आरती के बाद भगवान जगन्नाथ की आंखों पर बंधी पट्टी खोली गई। मंगला आरती में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। भगवान जगन्नाथ 2 जुलाई को पुराने अहमदाबाद में नगरयात्रा पर निकलेंगे। ये यात्रा 19 किलोमीटर लंबी होगी

पुरी में भी तैयारियां पूरी

ओडिशा के पुरी में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. दो साल बाद जगन्नाथ रथयात्रा में आम श्रद्धालु भी शामिल हो सकेंगे। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले इस तरह की खबरें थीं कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण इस बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल नहीं होंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा के आयोजन में परंपरा का निर्वहन करते हुए पहिंद विधि से यात्रा की शुरुआत भी की।


भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा: गृहमंत्री अमित शाह ने की मंगल आरती, रथ यात्रा को खींचने पहुंचे CM पटेल

गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। शुक्रवार सुबह गृहमंत्री अमित शाह ने मंदिर में पहुंचकर भगवान की मंगल आरती की। इसके बाद विधि विधान से जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा की शुरुआत हो गई।

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। शुक्रवार सुबह गृहमंत्री अमित शाह ने मंदिर में पहुंचकर भगवान की मंगल आरती की। इसके बाद विधि विधान से जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा की शुरुआत हो गई।

मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने विधि-विधान के साथ पहिंद विधि से रथयात्रा की शुरुआत की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोने के झाड़ू से झाड़ू लगाकर रथयात्रा की शुरुआत की। इस दौरान पूरे अहमदाबाद को किले में तब्दील कर दिया गया है। करीब 25 हजार जवान सुरक्षा के लिए तैनात हैं।

सुबह सबसे पहले गृहमंत्री अमित शाह भगवान जगन्नाथ के मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान की आरती की। अहमदाबाद में हर साल की तरह इस साल भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जा रही है। पुरी की तर्ज पर हर साल यहां भी रथयात्रा का आयोजन होता है। आज सुबह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सोने के झाड़ू से झाड़ू लगाने के साथ ही अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हो गई।

अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा सरसपुर इलाके में जाएगी जिसे भगवान जगन्नाथ के मामा का घर कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ पुराने अहमदाबाद के प्रेम दरवाजा के रास्ते मंदिर में वापस लौटते हैं। ये यात्रा करीब 19 किमी की होती है।


अमरनाथ यात्रा 2022: 'हर-हर महादेव', 'बम बम भोले' के जयकारों के साथ कड़ी सुरक्षा में शुरू हुआ यात्रा

अमरनाथ यात्रा के 2 रूट हैं। एक रूट पहलगाम से है और दूसरा रूट सोनमर्ग बालटाल से। पहलगाम से अमरनाथ 28 किलोमीटर है, वहीं बालटाल से ये दूरी करीब 14 किलोमीटर है। हालांकि पहलगाम के रास्ते को यात्री ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं।

नई दिल्ली: आज से अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू कश्मीर के बालटाल में पवित्र गुफा के रास्ते रवाना हो गया। यात्रा की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आतंकी खतरे को देखते हुए जवान यहां पूरी तरह से मुस्तैद हैं। यात्रियों की सुरक्षा में सीआरपीएफ के बाइक स्क्वॉड कमांडो को लगाया गया है। गौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा में रुकावट डालने के लिए आतंकी संगठन लश्कर पहले ही धमकी दे चुका है। ऐसे में सुरक्षाबल पूरी तरह से अलर्ट हैं।

अमरनाथ यात्रा के 2 रूट हैं। एक रूट पहलगाम से है और दूसरा रूट सोनमर्ग बालटाल से। पहलगाम से अमरनाथ 28 किलोमीटर है, वहीं बालटाल से ये दूरी करीब 14 किलोमीटर है। हालांकि पहलगाम के रास्ते को यात्री ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं।

जो श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर नहीं जा सकते उनके लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की गई है। चूंकि तीन साल बाद यात्रा हो रही है इसलिए इस साल श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। दरअसल साल 2019 में सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को रद्द किए जाने के मद्देनजर यात्रा बीच में ही स्थगित कर दी गई थी, जबकि साल 2020 और 2021 में कोविड-19 महामारी के चलते यात्रा नहीं हो पाई। 

करीब तीन साल बाद दक्षिण कश्मीर की पहाड़ियों में स्थित बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा गुरुवार से शुरू हो गई है। इस बार यह यात्रा 43 दिनों तक चलेगी। जम्मू-कश्मीर के बालटाल में अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था पवित्र गुफा के रास्ते रवाना हुआ। इससे पहले अधिकारियों ने बताया था कि पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने सभी तैयारियां कर ली हैं। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को जम्मू अधार शिविर से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। 


न्याय के देवता शनि जयंती आज, ऐसे करें शनि महाराज की पूजा

हिंदू धर्म के अनुसार शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस बार यह 30 मई को मनाई जाएगी। आपको बता दें इस दिन वट सावित्री का व्रत भी है। ऐसी मान्यता है, कि इसी दिन भगवान शनि का जन्म हुआ था। बता दें भगवान शनि सूर्य देवता के पुत्र हैं।


हिंदू धर्म के अनुसार शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस बार यह 30 मई को मनाई जाएगी। आपको बता दें इस दिन वट सावित्री का व्रत भी है। ऐसी मान्यता है, कि इसी दिन भगवान शनि का जन्म हुआ था। बता दें भगवान शनि सूर्य देवता के पुत्र हैं। हिंदू शास्त्र के अनुसार शनि देव कैसे भगवान है, जो व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार से फल देते है। यदि किसी की कुंडली में शनि की स्थिती खराब हो जाए, तो वह व्यक्ति मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से हमेशा परेशान रहता हैं। यदि आप भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि जयंती पर व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो यहां आप शनि जयंती की कथा हिंदी में देखकर पढ़ सकते है।


शनि कथा

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव की शादी राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुई थी। सूर्य देवता के 3 पुत्र मनु यमराज और यमुना थे। एक बार संज्ञा ने अपने पिता दक्ष से सूर्य के तीज के बारे में बताया। लेकिन राजा दक्ष ने अपनी पुत्री के बाद का ध्यान नहीं दिया और उन्होंने कहा कि तुम सूर्य देवता की अर्धांगिनी हो। पिता के ऐसा कहने पर संज्ञा ने अपने तपोबल से अपनी छाया को प्रकट की। जिसका नाम उन्होनें संवर्णा रखा। 

आगे चलकर छाया ने अपने गर्व से शनि देव को जन्म दिया। भगवान शनि देवता का वर्ण बेहद श्याम था। लेकिन जब सूर्य देवता को इस बात का पता चला कि उसकी संवर्णा उनकी अर्धांगिनी नहीं है, तो सूर्य देवता ने शनिदेव को अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया। उसी समय शनि देव की दृष्टि सूर्य देव पर पड़ी, जिसकी वजह से वह काले हो गए। तब सूर्य देवता शिव जी के शरण में गए। तब शिव जी ने उन्हें छाया (संवर्णा) से क्षमा मांगने को कहा। भगवान शंकर के ऐसा कहने पर भगवान सूर्य ने छाया से क्षमा मांगी।


30 वर्षों बाद खास संयोग

इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर शनि जयंती का त्योहार काफी खास और महत्व है। दरअसल 30 वर्षों के बाद सोमवती अमावस्या और शनि जयंती एक साथ है। इसके अलावा इस दिन पर ही वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा। जब अमावस्या की तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते है। सोमवती अमावस्या कृतिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के योग में शनि जन्मोत्सव का पर्व मनाना काफी खास है। ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती शनिदेव के स्वयं की राशि कुंभ में रहते ही है ऐसे में शनि जयंती का महत्व और भी अधिक हो जाता है।

शनि जयंती तिथि और शुभ मुहूर्त

सोमवार, 30 मई को उदय तिथि के कारण इस बार शनि जयंती मनाई जाएगी।
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का आरंभ- 29 मई को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू 
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की समाप्ति- 30 मई को शाम 4 बजकर 58 मिनट पर 

शनि जयंती पर ऐसे करें शनिदेव को प्रसन्न

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनि जयंती के मौके पर पीपल की जड़ में कच्चा दूध मिश्रित मीठा जल चढ़ाने व तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। शनि की साढ़ेसाती या ढय्या के चलते पीपल के पेड़ की पूजा करना और उसकी परिक्रमा करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। वहीं सुख-शांति में वृद्धि के लिए इस दिन पीपल का वृक्ष रोपना बहुत अच्छा माना गया है।

शनिदेव के दिव्य मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का इस दिन जप करने से प्राणी भयमुक्त रहता है।

शनिदेव के आराध्य भगवान शिव हैं। शनि दोष की शांति के इस दिन शनिदेव की पूजा के साथ-साथ शिवजी पर काले तिल मिले हुए जल से 'ॐ नमः शिवाय'का उच्चारण करते हुए अभिषेक करना चाहिए।

शनिदेव की प्रसन्नता के लिए जातक को शनिवार के दिन व्रत रखना चाहिए एवं गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए,ऐसा करने से जीवन में आए संकट दूर होने लगते हैं।

शनिदेव,हनुमानजी की पूजा करने वालों से सदैव प्रसन्न रहते हैं,इसलिए इनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए।


आस्था या अंधविश्वास: मां खीर भवानी के जल कुंड का रंग बदलकर हुआ लाल, कश्मीरी पंडितों ने कही खतरे की बात

कश्मीर के तुलमुला गांव में स्थित माता खीर भवानी के इस मंदिर का जल कुंड जब अपने आप रंग बदलने लगता है। इसे माता द्वारा दिए जाने वाले खतरे का संकेत माना जाता रहा है। इस कुंड को माता का स्वरूप माना जाता है। इसे देखने के बाद जल कुंड के बारे में जानकर भक्तों और स्थानीय निवासियों मे डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।

नई दिल्ली: कश्मीर में कई मंदिर स्थित हैं। जिनके दर्शन के लिए लोग देश-दुनिया से यहां पहुंचते हैं। जिनमें से एक मंदिर है माता खीर भवानी का, जिसे कश्मीरी पंडितों की कुल देवी के रूप में भी जाना जाता है। यह कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला इलाके में स्थित है। मंदिर परिसर में एक जल कुंड स्थित है। जिसका रंग इन दिनों बदल रहा है। जिसके बाद वहां रहने वाले हिंदुओं (कश्मीरी पंडित) में डर का माहौल बना हुआ हैं। जलकुंड का रंग सामान्य से लाल हो रहा है। कश्मीरी पंडितो के अनुसार यह खतरे के संकेत हैं। उनका कहना है कि जब कभी भी जलकुंड का रंग बदला है तो कश्मीर पर आफत आई है।

कश्मीर के तुलमुला गांव में स्थित माता खीर भवानी के इस मंदिर का जल कुंड जब अपने आप रंग बदलने लगता है। इसे माता द्वारा दिए जाने वाले खतरे का संकेत माना जाता रहा है। इस कुंड को माता का स्वरूप माना जाता है। इसे देखने के बाद जल कुंड के बारे में जानकर भक्तों और स्थानीय निवासियों मे डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। इस बात से यहां आने वाले भक्त भी काफी परेशान हैं। एक महिला भक्त ने बताया कि वह मंदिर में बीते 15 दिनों से रहती है, लेकिन इस समय कुंड का पानी सही नहीं लग रहा। उन्होंने कहा कि जल के बदलते रंग के कारण लग रहा है कि कश्मीर में  कुछ विपदा आने वाली है।

जल कुंड का रंग बदलकर रेडिश हो रहा है। इससे पहले भी जब 90 के दशक में कश्मीर से कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ था उस समय भी कुंड के जल का रंग काला हो गया था। उसके बाद आज से तीन साल पहले कोरोना संक्रमण फैलने से पहले भी कुंड के जल का रंग बदल गया था। जिसके बाद पूरे विश्व में कोरोना में लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाए। वहीं, अगर बात आज कल की करें तो राहुल भट्ट (Rahul Bhatt) की मौत होने से पहले इसका रंग मटमेला हो गया था। जिसके बाद भट्ट के साथ ही दो पुलिसवाले भी मारे गए और ब्लास्ट (Blast) हुआ। 

इतिहास में भी खीर भवानी मंदिर में स्थित जल कुंड ने खतरे से पहले ही इसके आने के संकेत दे दिए है। बताया जाता है कि जब भी कुंड के जल का रंग पीला, लाल, काला हो जाता है तब बड़ी आपता के आने का संकेत माना है। वहीं जब भी कुंड का रंग सफेद, नीला, या  हल्के रंगों में होता हैं तो उस समय वहां के लिए बेहतर माना जाता है। 90 के दशक में कश्मीर में हुए नरसंहार (Massacre) के समय भी जल ने अपना रंग बदल कर लाल कर लिया था। साथ ही आपको बता दें कि 1999 के समय जब भारत-पाक के बीच कारगिल युद्ध हुआ था तब भी जल का रंग बदलकर लाल है। वहीं, जब 2014 में बाढ़ आई और भीषण तबाही मचाई तो उस समय भी कुंड के जल के रंग में बदलाव देखने को मिला था। 

मंदिर के पुजारी ने बताया कि भक्तों की माता पर असीम आस्था है और माता भी अपने भक्तों पर आने वाले खतरों से पहले ही सचेत कर देती हैं। माता यह संकेत कुंड के जल के रंग को बदलकर देती हैं। पुजारी ने बताया कि भक्तों का मानना है कश्मीर में जारी खून-खराबा इसी बदले हुए रंग के कारण जारी है। अब यहां पर भक्तों का पहुंचना जारी है। भक्त एकत्र होकर माता को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ कर रहे हैं। जिससे कि कुंड के जल का रंग साफ हो जाए और कश्मीर में सुख-शांति का माहौल लौट आए। 


शुभ मुहूर्त में खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, PM मोदी के नाम पर की गई पहली पूजा

आज यानी शुक्रवार को प्रात: 6 बजकर 26 मिनट पर जय केदार के जयकारों के बीच भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल गए। पीएम नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा की गई।

देहरादून: आज यानी शुक्रवार को प्रात: 6 बजकर 26 मिनट पर जय केदार के जयकारों के बीच भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल गए। पीएम नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा की गई। सीएम धामी ने भी भी पूजा-अर्चना कर बाबा केदार का आशीर्वाद लिया।


अब छह माह तक बाबा के भक्त धाम में ही आराध्य के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे। बाबा के मंदिर को दस क्विंटल फूलों से सजाया गया है। वहीं, बृहस्पतिवार को भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली भक्तों के जयकारों के बीच अपने धाम पहुंची। विधि विधान के साथ बाबा की डोली को मंदिर के समीप विराजमान किया गया है। साथ ही अन्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया है।

 

शुक्रवार को आज प्रात: 6 बजकर 26 मिनट पर जय केदार के जयकारों के बीच भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल गए। बाबा की पंचमुखी मूर्ति केदार मंदिर में विराजमान हुई। विधिविधान और धार्मिक परंपराओं के तहत भगवान केदारनाथ के कपाट खोले गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा की गई। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूजा-अर्चना कर बाबा केदार का आशीर्वाद लिया।

कैसे पहुंचे केदारनाथ?


केदारनाथ मंदिर पहुंचने के लिए गौरीकुंड से आपको 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। क्योंकि सिर्फ वहीं तक आप साधन से पहुंच सकते हैं। 


बाबा केदारनाथ का धाम कात्युहरी शैली में बना है, जिसमें भूरे और बड़े पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है और मंदिर की छत लकड़ी से निर्मित है वहीं इसके शिखर पर कलश सोने का लगा है। 5 मई की सुबह गौरीकुंड से भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम प्रस्थान कर चुकी है। आज यानि 6 मई शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर केदारनाथ धाम के कपाट 6 महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे।


केदारनाथ का ये मंदिर तीन भागों में बंटा है, पहला- गर्भगृह, दूसरा- दर्शन मंडप और तीसरा सभा मंडप। दर्शन मंडप में दर्शनार्थी पूजा करते हैं, और सभा मंडप में तीर्थ यात्रि एकत्र होते हैं। वहीं गर्भ गृह मंदिर का भीतरी भाग है।

मंदिर की मान्यता


इस मंदिर की बहुत अधिक मान्यता है, यहां जो भी जाता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ये मंदिर एक 6 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित है। मंदिर के मुख्य भाग में मंडप और गर्भगृह है, वहीं प्रांगण में नंदी बैल विराजमान हैं। ये मंदिर किसने बनवाया था इसका कहीं भी प्रमाणिक उल्लेख नहीं है, लेकिन कुछ लोगों का मत है कि इसकी स्थापना गुरु शंकराचार्य ने की थी। 



एक मान्यता यह भी है कि जब पांडवों ने महाभारत का युद्ध जीता था, तो उन्हें इस बात का बहुत दुख था कि उन्होंने युद्ध में अपने हाथों से अपने सगे-संबधियों का वध किया है, इस पाप से खुद को मुक्त करने के लिए पांडव भगवान शिव का दर्शन करने काशी पहुंचे थे। 

भोलेनाथ को जब इस बात का पता चला तो वो नाराज होकर केदारनाथ चले गए और पांडवों से बचने के लिए वो बैल का रूप धरकर बैल के झुंड में सम्मलित हो गए, उस वक्त भीम ने अपना विराट रूप लिया और सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से निकलने लगे उस वक्त भगवान शिव अंतर्ध्यान होने ही वाले थे कि भीम ने भोलेनाथ को पकड़ लिया। पांडवों की लालसा को देखते हुए शिव जी प्रसन्न हुए और दर्शन देकर सभी पांडवों को पाप मुक्त किया। पांडवों ने केदारनाथ मंदिर का निर्माण कराया और आज भी यहां बैल के पीठ की आकृति-पिंड की पूजा होती है।


गंगोत्री, यमुनोत्री के कपाट खुले CM धामी ने की PM मोदी के नाम से पहली पूजा

अक्षय तृतीया पर्व पर मंगलवार से चारधाम यात्रा की शुरूआत हो गई। गंगोत्री धाम के कपाट 11:15 और यमुनोत्री के 12:15 बजे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

देहरादून: अक्षय तृतीया पर्व पर मंगलवार से चारधाम यात्रा की शुरूआत हो गई। गंगोत्री धाम के कपाट 11:15 और यमुनोत्री के 12:15 बजे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। 

कपाट उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा हुई है। मुख्यमंत्री ने ये पूजा की। कपाटोद्घाटन के लिए गंगोत्री और यमुनोत्री धाम को फूलों से भव्य सजाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हर्षिल हेलीपैड पहुंचे। इसके बाद वो कार से गंगोत्री धाम पहुंचे और कपाटोद्घाटन में भाग लिया।

यमुनोत्री धाम के कपाट भी खोल दिए गए। धाम में मां यमुना की डोली पहुंच चुकी है। दोपहर 12:15 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट विधिविधान के साथ खोल दिए गए।

वहीं चारधाम यात्रा को लेकर तीन दिन पहले शासन की ओर से यात्रियों की संख्या निर्धारण के आदेश के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यात्रा को लेकर कोई संख्या निर्धारित नहीं की गई है। अगर यात्री अधिक संख्या में आते हैं तो उसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।

मंगलवार सुबह 6:30 बजे डोली गंगोत्री के लिए रवाना हुई और सुबह ठीक 11:15 बजे गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए। मां यमुना की डोली मंगलवार सुबह शीतकालीन पड़ाव खरसाली से रवाना हुई और दोपहर 12:15 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट खोले गए, वहीं इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट छह मई को खोले जाएंगे। जबकि, बदरीनाथ धाम के कपाट आठ मई को खोले जाएंगे।

गौरतलब है कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के कोविड नेगेटिव जांच रिपोर्ट की अनिवार्यता नहीं है। केवल ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। चार धाम यात्रा के लिए सोमवार तक 4,31,809 श्रद्धालु अपना पंजीकरण करा चुके हैं।

केदारनाथ धाम के लिए सबसे ज्यादा 1,53,745 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। यमुनोत्री के लिए 73,441, गंगोत्री के लिए 75,698 व बदरीनाथ के लिए 1,25,347 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। श्री हेमकुंड साहिब के लिए 3578 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण किया है।

चारधाम यात्रा शुरू होने को लेकर गंगोत्री और जानकी चट्टी में बड़ी संख्या में यात्री पहुंचे हैं। गंगोत्री धाम में करीब तीन हजार और जानकी चट्टी में करीब दो हजार यात्री पहुंचे हैं। गंगोत्री धाम के मंदिर को 15 क्विंटल फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया है, जबकि यमुनोत्री धाम के मंदिर को तीन कुंतल फूलों से सजाया गया है।

दोनों धामों के विभिन्न पड़ावों पर भी यात्रियों की चहलकदमी बढ़ गई है। सबसे अधिक चहलकदमी गंगोत्री धाम, भैरव घाटी, हर्षिल, धराली, झाला, जसपुर, नेताला, उत्तरकाशी, बड़कोट, खरसाली, स्याना चट्टी, जानकी चट्टी पड़ाव पर है।


अक्षय तृतीया आज, जानिए-महत्त्व और पूजन का शुभ मुहूर्त

वैशाख मास की अक्षय तृतीया पर सोना की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस दिन घर में कोई नई चीज खरीदकर लाने के लिए भी इस तिथि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अक्षय तृतीया पर सोना, आभूषण, कार, गैजेट्स, कम्प्यूटर, होम अप्लाइंसेस, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की खरीदारी शुभ मुहूर्त में कर सकते है।

नई दिल्ली: वैशाख मास की अक्षय तृतीया पर सोना की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस दिन घर में कोई नई चीज खरीदकर लाने के लिए भी इस तिथि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अक्षय तृतीया पर सोना, आभूषण, कार, गैजेट्स, कम्प्यूटर, होम अप्लाइंसेस, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की खरीदारी शुभ मुहूर्त में कर सकते है।


अक्षय तृतीया तिथि एवं शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया तिथि आरंभ- 3 मई सुबह 5 बजकर 19 मिनट पर
अक्षय तृतीया तिथि समापन- 4 मई सुबह 7 बजकर 33 मिनट तक
रोहिणी नक्षत्र- 3 मई सुबह 12 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 4 मई सुबह 3 बजकर 18 मिनट तक होगा


इस साल 3 मई, अक्षय तृतीया पर ग्रहों की स्थिति बहुत खास रहने वाली है, जिसके कारण इस दिन मालव्य राजयोग, हंस राजयोग और शश राजयोग बन रहे हैं। अक्षय तृतीया पर इन राजयोगों का बनना बहुत शुभ है। इन राजयोग में कोई भी शुभ काम या मांगलिक काम करना बहुत अच्‍छा फल देगा। खरीदारी करने के लिए भी यह स्थितियां बहुत ही शुभ हैं।

अक्षय तृतीया के दिन को धार्मिक शास्त्रों में बेहद शुभ माना गया है। इस दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन जौ, गेहूं, चना, दही, चावल, फल और अनाज का दान करना चाहिए। इस बार अक्षय तृतीया 3 मई को मनाया जाएगा।


ईद के चांद का हुआ दीदार, राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने दी बधाई

नई दिल्ली: ईद मुस्लिमों का सबसे बड़ा त्यौहार है, जो कि बस आने ही वाला है। यह त्यौहार रमज़ान के पाक महीने के बाद अमन और भाईचारे का पैगाम लेकर आता है। ईद के दिन लोग नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगते हैं। 

सऊदी अरब में रविवार को चांद नहीं दिखाई दिया जिसके चलते यहां ईद 03 मई को मनाई जाएगी और भारत में त्योहार सउदी अरब के साथ ही मनाया जाएगा। ऐसा बहुत कम देखा गया है क्योंकि अक्सर सऊदी के बाद भारत में ईद होती है।  

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने ईद-उल-फितर की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई दी है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, 'ईद-उल-फितर के अवसर पर मैं सभी देशवासियों, विशेषकर मुस्लिम भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। ईद-उल-फितर का त्योहार रमजान के पवित्र महीने के दौरान रोजे रखने और विशेष इबादत करने बाद मनाया जाता है तथा रोजेदारों में भाईचारे और परोपकार की भावना का संचार करता है। इस दौरान गरीबों में अन्न, भोजन बांटने को विशेष महत्व दिया जाता है। यह त्योहार, लोगों को सौहार्दपूर्ण, शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण के लिए प्रयास करने की प्रेरणा देता है। आइए ईद के पाक मौके पर, हम सब, स्वयं को मानवता की सेवा तथा जरूरतमंदों के जीवन को संवारने के लिए फिर से समर्पित करने का संकल्प लें।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर ईद की बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं। यह शुभ अवसर हमारे समाज में एकता और भाईचारे की भावना को आगे बढ़ाएगा। मैं सभी देशवासियों को अच्छे स्वास्थ्य और संपन्नता की प्रार्थना करता हूं।

लखनऊ में मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने समुदाय के लोगों से अपील की है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम, कानूनों का पालन करें। लाउडस्पीकर और तमाम दूसरे नियमों का ख्याल रखें, लोग मस्जिदों के अंदर ही नमाज पढ़ें। 


3 मई से शुरू हो रही है चारधाम यात्रा, श्रद्धालु ऐसे कर सकेंगे दर्शन

चार धाम की यात्रा (Chaar Dham Yatra) का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी सामने आई है। उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। मंगलवार तारीख 3 मई से यमुनोत्री (Yamunotri), गंगोत्री (Gangotri0, बद्रीनाथ (Badrinath) और केदारनाथ (Kedarnath) धाम के कपाट खुल रहे हैं। इसके साथ ही चारधाम की यात्रा भी शुरू हो जाएगी।

नई दिल्ली: चार धाम की यात्रा (Chaar Dham Yatra) का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी सामने आई है। उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। मंगलवार तारीख  3 मई से यमुनोत्री (Yamunotri), गंगोत्री (Gangotri0, बद्रीनाथ (Badrinath) और केदारनाथ (Kedarnath) धाम के कपाट खुल रहे हैं। इसके साथ ही चारधाम की यात्रा भी शुरू हो जाएगी। 

बता दें कि यहां आने वाले यात्रीयों को चारधाम मंदिर (Chardham Mandir) की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपना और अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद ही भक्त यात्रा में शामिल हो सकेंगे। 

बद्रीनाथ धाम में हर रोज 15 हजार लोग, केदारनाथ धाम में 12 हजार लोग, गंगोत्री में सात हजार लोग और यमुनोत्री में 4 हजार लोग ही दर्शन कर सकेंगे। बता दें कि ये संख्या केवल पहले चरण के लिए यानी 45 दिनों के लिए ही निर्धारित की गई है।  

कपाट खुलने का समय 

1. यमुनोत्री के कपाट 3 मई को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर खुलेंगे
2. गंगोत्री धाम के कपाट 3 मई को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर खुलेंगे
3. बद्रीनाथ धाम के कपाट 6 मई को  विशेष पूजा अर्चना के साथ खुलेंगे। 
4. केदारनाथ धाम के कपाट 8 मई  को विशेष पूजा अर्चना के साथ खुलेंगे। 


हनुमान जयंती 2022: PM मोदी करेंगे 108 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, राज ठाकरे करेंगे महाआरती, NCP करने जा रही ये काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को हनुमान जयंती के अवसर पर गुजरात के मोरबी में भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण करेंगे।

नई दिल्ली: आज हनुमान जयंती है, देश भर में लेकर कई कार्यक्रम हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को हनुमान जयंती के अवसर पर गुजरात के मोरबी में भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण करेंगे। 

प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी। हनुमान मूर्ति स्थापना श्रृंखला की पहली मूर्ति वर्ष 2010 में उत्तर दिशा में यानी शिमला में स्थापित की गई थी। पीएमओ ने कहा कि दक्षिण दिशा में यह मूर्ति रामेश्वरम में स्थापित की जानी है और इसका काम भी आरंभ हो गया है।

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे पुणे के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में शनिवार को महाआरती करेंगे। मनसे के स्थानीय नेता अजय शिंदे ने कहा है कि यह मंदिर कुमठेकर रोड पर स्थित है और राज ठाकरे ने इसके जीर्णोद्धार में भी मदद की थी। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) पिछले कुछ समय से मस्जिदों से लाउडस्पीकरों हटाने की मांग कर रही है। यहां तक कि राज्य सरकार को मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का अल्टीमेटम भी इनकी ओर से दिया गया है।

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी पुणे में हनुमान जयंती पर कार्यक्रम हो रहे हैं। पुणे इकाई की तरफ से कहा गया है कि वह ‘सर्व धर्म' हनुमान जन्मोत्सव मनाएगी और कारेवनगर में हनुमान मंदिर में इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन करेगी।

इसके अलावा मध्यप्रदेश के खरगोन में रामनवमी हिंसा के बाद, भोपाल पुलिस शनिवार को हनुमान जयंती के जुलूस को लेकर हाई अलर्ट पर है और शांतिपूर्ण उत्सव सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन से इसकी निगरानी करने की बात कही गयी है। भोपाल के पुलिस आयुक्त, मकरंद देवस्कर ने शुक्रवार को कहा था कि ड्रोन के अलावा, पुलिस विभाग ने जुलूस पर नजर रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया है। भोपाल पुलिस ने 16 शर्ते रखी हैं। इसमें कहा गया है कि त्रिशूल, गदा के अलावा अन्य हथियार जुलूस में नही ले जा सकेंगे। डीजे पर बजने पर वाले गानों की लिस्ट भी देनी होगी और एक जुलूस में सिर्फ एक डीजे ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।


चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि आज, मां सिद्धिदात्री की होती है पूजा, जानिए-पूजन विधि, मंत्र, मुहूर्त, भोग

मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से रोग, भय और शोक से छुटकारा मिलता है और मां की कृपा से व्यक्ति सिद्धियां प्राप्त कर सकता है। नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ हवन करने की परंपरा है।

चैत्र मास की नवमी तिथि आज है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मां दुर्गा के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से रोग, भय और शोक से छुटकारा मिलता है और मां की कृपा से व्यक्ति सिद्धियां प्राप्त कर सकता है। नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ हवन करने की परंपरा है।

माता का रूप

देवी भागवत पुराण के मुताबिक, मां सिद्धिदात्री मां लक्ष्मी की तरह की कमल में विराजमान हैं। मां के चार भुजाएं है जिनमें वह गदा, शंख, चक्र और कमल का फूल लिए रहती हैं।


शास्त्रों के मुताबिक मां सिद्धिदात्री के पास आठ सिद्धियां है जो निम्न है- अणिमा, ईशित्व, वशित्व, लघिमा, गरिमा, प्राकाम्य, महिमा और प्राप्ति। माना जाता है कि हर देवी-देवता को मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई थी। इसलिए कहते हैं आज के दिन मां की विधि-विधान करना शुभ साबित हो सकता है।  

महानवमी मुहूर्त

नवमी तिथि का प्रारंभ- 10 अप्रैल देर रात 01 बजकर 32 मिनट से शुरू
नवमी तिथि समाप्त- 11 अप्रैल सुबह 03 बजकर 15 मिनट तक


सिद्धिदात्री की पूजा विधि

नवरात्रि की नवमी को मां दुर्गा की विधिवत तरीके से विदाई की जाती है। मां सिद्धिदात्री को फूल, माला, सिंदूर, फल, गंध आदि अर्पित करें। इसके साथ ही तिल और इससे बनी चीजों का भोग लगाएं। इसके अलावा आप चाहे तो खीर, हलवा, मालपुआ, केला, नारियल आदि चीजें भी अर्पित कर दें। इसके बाद जल दें। फिर दीपक, धूप जलाकर मां की आरती कर लें।  

मां सिद्धिदात्री का मंत्र

1- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे | ऊँ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल
ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
2- वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥
3- या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम


मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

महानवमी के दिन कन्या पूजन और हवन

नवरात्रि के आखिरी दिन हवन करने का विधान है। माना जाता है कि हवन करने के बाद ही पूजा का पूर्ण फल मिलता है। इसलिए इस दिन मां दुर्गा और कलश की विधिवत तरीके से पूजा करने के हवन जरूर करें। इसके अलावा अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। 

अगर आपने अष्टमी के दिन कन्या पूजन नहीं किया है तो आज 2 से 10 साल की कन्याओं को भोज के लिए आमंत्रित कर लें और उसे भोजन कराने के बाद दक्षिण आदि देकर विदा करें। 


आज चैत्र की नवरात्रि का आठवां दिन, मां महागौरी की होगी पूजा, पढ़िए-अष्टमी के दिन क्यों करते हैं कन्या पूजन

इनका ऊपरी दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रहता है और निचले हाथ में त्रिशूल है । ऊपर वाले बांये हाथ में डमरू जबकि नीचे वाला हाथ शान्त मुद्रा में है । मां का प्रिय फूल रात की रानी है और राहु ग्रह पर इनका आधिपत्य रहता है। इसलिए राहु संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए महागौरी की पूजा करनी चाहिए।

9 अप्रैल को चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और शनिवार का दिन है। अष्टमी तिथि देर रात 1 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। 9 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है। नवरात्रि के आठवें दिन को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है । 

आज मां दुर्गा की आठवीं शक्ति माता महागौरी की उपासना की जायेगी। इनका रंग पूर्णतः गोरा होने के कारण ही इन्हें महागौरी या श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है । इनके रंग की उपमा शंख, चन्द्र देव और कन्द के फूल से की जाती है । मां शैलपुत्री की तरह इनका वाहन भी बैल है । इसलिए इन्हें भी वृषारूढ़ा कहा जाता है।

मां का स्वरूप


इनका ऊपरी दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रहता है और निचले हाथ में त्रिशूल है । ऊपर वाले बांये हाथ में डमरू जबकि नीचे वाला हाथ शान्त मुद्रा में है । मां का प्रिय फूल रात की रानी है और राहु ग्रह पर इनका आधिपत्य रहता है। इसलिए राहु संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए महागौरी की पूजा करनी चाहिए। जो लोग अपने अन्न-धन और सुख-समृद्धि में वृद्धि करना चाहते हैं, उन्हें आज महागौरी की उपासना जरूर करनी चाहिए ।

पूजा विधि

अष्टमी के दिन सुबह सबसे पहले स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में लकड़ी की चौकी पर महागौरी की प्रतिमा स्थापित करें। मां के आगे दीप जलाएं और फल, फूल, प्रसाद का अर्पण करें। मां की आरती के बाद कन्या पूजन करें। 

आज महाअष्टमी के दिन देवी दुर्गा के महागौरी के निमित्त उपवास किया जाता है। लेकिन धर्मशास्त्र का इतिहास चतुर्थ भाग के पृष्ठ- 67 पर चर्चा में ये उल्लेख भी मिलता है कि पुत्रवान व्रती इस दिन उपवास नहीं करते। साथ ही वह नवमी तिथि को पारण न करके अष्टमी को ही व्रत का पारण कर लेते हैं।

अष्टमी के दिन पूजन का महत्व

देवी मां की पूजा के साथ ही कुमारियों और ब्राह्मणों को भोजन भी कराना चाहिए। विशेष रूप से कुमारियों को घर पर आदर सहित बुलाकर उनके हाथ-पैर धुलवाकर, उन्हें आसन पर बिठाना चाहिए और उन्हें हलवा, पूड़ी और चने का भोजन कराना चाहिए। भोजन कराने के बाद कुमारियों को कुछ न कुछ दक्षिणा देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लेना चाहिए। इससे देवी मां बहुत प्रसन्न होती हैं और मन की मुरादें पूरी करती हैं।

महागौरी के लिए मंत्र

आज इस मंत्र का 21 बार जप करके लाभ उठाना चाहिए, मंत्र है-

सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोsस्तुते।।


चैत्र नवरात्रि 2022: आज 7वां दिन, मां कालरात्रि की होती है पूजा, जानिए पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

सप्तमी तिथि आज रात 11 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी। आज नवरात्र का सातवां दिन है । नवरात्र के दौरान पड़ने वाली सप्तमी को महासप्तमी के नाम से जाना जाता है । आज मां दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जायेगी ।

आज चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और शुक्रवार का दिन है। सप्तमी तिथि आज रात 11 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी। आज नवरात्र का सातवां दिन है । नवरात्र के दौरान पड़ने वाली सप्तमी को महासप्तमी के नाम से जाना जाता है । आज मां दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जायेगी । 



पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब उन्हें कालरात्रि के नाम से जाना गया। मां कालरात्रि का वाहन गधा है और इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से ऊपर का दाहिना हाथ वरद मुद्रा में और नीचे का हाथ अभयमुद्रा में रहता है। जबकि बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड़ग है। 

मां का ये स्वरूप देखने में भले ही भयानक लगता है, किन्तु ये बड़ा ही शुभ फलदायक है । इसलिए देवी मां का एक नाम शुंभकारी भी है । ग्रहों में शनि ग्रह पर देवी मां का आधिपत्य बताया जाता है । इनके स्मरण मात्र से ही भूत-पिशाच, भय और अन्य किसी भी तरह की परेशानी तुरंत दूर भाग जाती है ।

पूजन विधि

मां कालरात्रि की पूजा सुबह के समय करना शुभ माना जाता है। मां की पूजा के लिए लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए। मकर और कुंभ राशि के जातको को कालरात्रि की पूजा जरूर करनी चाहिए। परेशानी में हो तो सात या नौ नींबू की माला देवी को चढ़ाएं। 

सप्तमी की रात्रि तिल या सरसों के तेल की अखंड ज्योति जलाएं। सिद्धकुंजिका स्तोत्र, अर्गला स्तोत्रम, काली चालीसा, काली पुराण का पाठ करना चाहिए। यथासंभव इस रात्रि संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

कालरात्रि को भोग

सप्तमी नवरात्रि पर मां को खुश करने के लिए गुड़ या गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगा सकते हैं।  

मां कालरात्रि दूर करेंगी सारी परेशानियां

अगर आपको भी किसी चीज़ का भय बना रहता है तो आज मां कालरात्रि का ध्यान करके उनके इस मंत्र का जप अवश्य ही करना चाहिए । मंत्र है-

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥

अगर आपके जीवन में हमेशा पैसों आभाव बना रहता है या आप अपनी आर्थिक स्थिति और बेहतर करना चाहते हैं, तो आज मां कालरात्रि को गुड का भोग लगा कर प्रणाम करके, उनके इस मंत्र का दो माला यानि 216 जाप करें । मंत्र है -

ॐ यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि।
संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमाऽऽपदः ॐ।।

अगर आप व्यापार में अपने विरोधियों को पछाड़ना चाहते है, तो आज देवी कालरात्रि के सामने गुग्गुल की धूप दिखाने के बाद पूरे घर में भी धूप दिखाएं । साथ ही उनके इस मंत्र का 108 बार जाप करें। मंत्र है-

ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।

अगर आप चाहते है कि आपके जीवन में खुशहाली बनी रही और परिवार के सभी सदस्यों में ताल-मेल बना रहे, तो आज स्नान आदि के बाद माता कालरात्रि को जीरे का भोग लगायें और लाल रंग के आसन पर बैठकर देवी कालरात्रि के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए । मंत्र है-

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा 

अगर आप हर क्षेत्र में सफलता पाना चाहते है तो आज एक मिट्टी की दियाली में दो कपूर की टिकिया जलाकर देवी कालरात्रि के सामने रखें और उनके इस मंत्र का जाप करें–

ॐ ऐं यश्चमर्त्य: स्तवैरेभि: त्वां स्तोष्यत्यमलानने
तस्य वि‍त्तीर्द्धविभवै: धनदारादि समप्दाम् ऐं ॐ। 

जप करने के बाद धूप को दोनों हाथों से लेकर अपनी आंखों पर लगाएं। 

अगर आप अपने दाम्पत्य जीवान में खुशहाली बनाये रखना चाहते है तो आज बेल के तीन पत्तों पर अपने पति या पत्नी का नाम गोरोंचन हल्दी का घोल बनाकर मोर पंख की कलम से लिख कर चांदी की डिबिया में भर कर माता कालरात्रि के चरणों में रख दें।

अगर आपके परिवार में किसी सदस्य के विवाह में अड़चने आ रही है तो उससे छुटकारा पाने के लिए आज सात केले, सात सौ ग्राम गुड और एक नारियल लेकर माता को अर्पित करें, नवमी को नारियल छ: बार, एक बार सीधा और एक बार उल्टा सर पर वार कर नदी में प्रवाहित कर दें, केला और गुड का भोग चन्द्रमा व सूर्य भगवान के लिये निकाल दें और उसी में से थोड़ा सा प्रसाद जिस सदस्य के विवाह में अड़चन आ रही है उसे ग्रहण करने को दें। बाकी बचे हुये केले व गुड़ गाय को खिला दें।


चैत्र नवरात्रि का छठवां दिन, महिषासुरमर्दिनी मां कात्यायनी की होती है पूजा

चैत्र नवरात्रि का आज यानी 7 अप्रैल 2022 को छठवां दिन है। छठवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां कात्यायनी की विधिवत पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है।

इनकी पूजा के प्रभाव से कुंडली में विवाह योग भी मजबूत होता है। मां कात्यायनी की भक्ति और ध्यान से मनुष्य को अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। मां कात्यायनी मां दुर्गा का छठा रूप है।

मां ने किया था महिषासुर का वध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया था। राक्षस महिषासुर का वध करने के कारण इन्हें दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी महिसासुरमर्दिनी कहा जाता है।आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा- विधि, मंत्र, भोग और आरती के बारे में। इस विधि से अगर मां की पूजा करेंगे तो मां अवश्य ही खुश हो जाएंगी।

कुछ ग्रंथों में यह भी वर्णन किया गया है कि वह देवी शक्ति का अवतार हैं और उन्हें यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले उनकी पूजा की थी। महिषासुर के अत्याचारों से जब संसार संकट में था, तब देवी कात्यायनी ने उसका वध कर दिया। जैसे ही वह राक्षस महिषासुर के सामने पहुंची, उसने सभी हथियारों से लैस सिंह से खुद को अलग कर लिया था राक्षस ने एक बैल का रूप धारण किया और देवी उसकी पीठ पर उछल पड़ी। अपने कोमल पैरों से उसके सिर को नीचे धकेला और फिर उसकी गर्दन मरोड़ दी। इसलिए उनका नाम महिषासुरमर्दिनी भी पड़ा है।

मां कात्यायनी का स्वरूप

मां कात्यायनी स्वरुप मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। मां का शरीर सोने की तरह चमकीला है। मां की चार भुजाएं हैं और मां सिंह यानी शेर की सवारी करती हैं। मां के एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प है। मां के दूसरे दोनों हाथ वर और अभयमुद्रा में हैं।

छठा नवरात्रि व्रत तिथि इस बार चैत्र नवरात्रि का छठा नवरात्रि व्रत और षष्ठी तिथि 07 अप्रैल 2022, दिन गुरुवार को है।
षष्ठी तिथि प्रारंभ-6 अप्रैल शाम  6:01 बजे 
षष्ठी तिथि समाप्त:7 अप्रैल रात 8:32 बजे 

मां का पसंदीदा रंग, भोग व मंत्र

मां कात्यायनी का पसंदीदा रंग लाल रंग है। मां के भोग की बात करतें तो इनको शहद बहुत प्रिय है। इस दिन भोग के रुप में मातारानी को शहद अर्पित किया जाता है। नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाने से आपकी आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है और वहीं मां आपको निरोगी काया का वरदान मिलता है।


मां को खुश करने का मंत्र

'ऊँ देवी कात्यायन्यै नम:' (108 बार जाप करें)

पूजा विधि 

नवरात्रि के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान के बाद लाल या पीले रंग का कपड़े धारण करें और गंगाजल से पूजास्थल को शुद्ध कर लें। इसके बाद गणेश जी और सभी देवी-देवताओं का आह्वान करे फिर माता को प्रणाम कर उनका ध्यान करें। मां को फल-फूल, कच्ची हल्दी की गांठ, रोली, सिंदूर और शहद अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर मां की आरती करें।


चैत्र के नवरात्रि का आज पांचवा दिन, स्कन्द माता की होती है पूजा, जानिए-पूजन विधि एवं शुभ मुहूर्त

आज चैत्र के नवारात्रि का पांचवा दिन है। आज मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप यानि मां स्कन्द माता की पूजा होती है। आज यानि 6 अप्रैल को चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और बुधवार का दिन है ।

आज चैत्र के नवारात्रि का पांचवा दिन है। आज मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप यानि मां स्कन्द माता की पूजा होती है। आज यानि 6 अप्रैल को चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और बुधवार का दिन है । 

पंचमी तिथि आज शाम 6 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। 6 अप्रैल को चैत्र नवरात्र का पांचवा दिन है। आज मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप, यानी मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है। आज राम राज्य महोत्सव के साथ ही श्री पंचमी भी मनाई जाएगी । आज के दिन लक्ष्मी जी की पूजा का भी विधान है । साथ ही आज हयव्रत भी है ।

देवताओं के सेनापति कहे जाने वाले स्कन्द कुमार, यानि कार्तिकेय जी की माता होने के कारण ही देवी मां को स्कंदमाता कहा जाता है । इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं । माता का रंग पूर्णतः सफेद है और ये कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं, जिसके कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है । देवी मां की चार भुजायें हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा में ये अपने पुत्र स्कन्द को पकड़े हुए हैं और इनके निचले दाहिने हाथ तथा एक बाएं हाथ में कमल का फूल है, जबकि माता का दूसरा बायां हाथ अभय मुद्रा में रहता है। माना जाता है कि देवी मां अपने भक्तों पर ठीक उसी प्रकार कृपा बनाये रखती हैं, जिस प्रकार एक मां अपने बच्चों पर बनाकर रखती हैं।

देवी मां अपने भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं। साथ ही स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि हमारा जीवन एक संग्राम है और हम स्वयं अपने सेनापति। अतः देवी मां से हमें सैन्य संचालन की प्रेरणा भी मिलती है। इसके अलावा आपको बता दूं कि मां स्कन्दमाता की उपासना व्यक्ति को बुध संबंधी परेशानियों से छुटकारा दिलाने में भी मदद करती हैं, क्योंकि बुध ग्रह पर स्कन्दमाता का आधिपत्य रहता है और आज तो बुधवार का दिन भी है । अतः अगर आपको भी बुध संबंधी किसी तरह की परेशानी है, आपका बिजनेस ठीक से नहीं चल रहा है, आपको व्यापार में मुनाफा नहीं मिल पा रहा है, तो आज बुधवार और सौभाग्य योग के संयोग में नवरात्र के पांचवें दिन आपको स्कन्दमाता की पूजा करके अवश्य ही लाभ उठाना चाहिए।

पूजा विधि

स्कंदमाता की पूजा के लिए सबसे पहले चौकी पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें। इसके बाद उस चौकी में श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें। फिर वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।

इसमें आसन, पाद्य, अ‌र्ध्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

स्कंदमाता के लिए मंत्र

साथ ही देवी मां के इस मंत्र का 11 बार जप भी करना चाहिए। मंत्र है-

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

आज स्कन्दमाता के इस मंत्र का जप करने से आपको बुध संबंधी परेशानियों से तो छुटकारा मिलेगा ही, साथ ही आपके घर में सुख-शांति और समृद्धि भी बनी रहेगी। 


स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो अस्कंध माता
पांचवा नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहू मै
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै
कई नामो से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कही पहाड़ो पर है डेरा
कई शेहरो मै तेरा बसेरा
हर मंदिर मै तेरे नजारे
गुण गाये तेरे भगत प्यारे
भगति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इन्दर आदी देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये
तुम ही खंडा हाथ उठाये
दासो को सदा बचाने आई
'चमन' की आस पुजाने आई


आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन, मां कुष्मांडा की होती है पूजा, जानिए-पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

आज यानि 5 अप्रैल, मंगलवार को नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार, अपनी मंद मुस्कुराहट व अपने उदर से ब्रह्मांड को जन्म देने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। मां कूष्मांडा तेज की देवी का प्रतीक हैं। मान्यता है कि ब्रह्मांड के सभी प्राणियों में जो तेज हैं, वह मां कूष्मांडा की देन है।

आज यानि 5 अप्रैल, मंगलवार को नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार, अपनी मंद मुस्कुराहट व अपने उदर से ब्रह्मांड को जन्म देने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। मां कूष्मांडा तेज की देवी का प्रतीक हैं।  मान्यता है कि ब्रह्मांड के सभी प्राणियों में जो तेज हैं, वह मां कूष्मांडा की देन है। 

जानें मां स्वरूप, भोग, पूजा विधि, शुभ रंग व मंत्र-

आज यानि नवरात्रि के चौथे दिन सुबह 8 बजे तक प्रीति योग रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। शास्त्रों के अनुसार, प्रीति व आयुष्मान योग को शुभ योगों में गिना जाता है। इन योगों में किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होने की मान्यता है। नवरात्रि के चौथे दिन हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय है।

मां कूष्मांडा का भोग-

मां कूष्मांडा को भोग में मालपुआ चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि इस भोग को लगाने से मां कूष्मांडा प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखती हैं।

नवरात्रि के चौथे दिन के शुभ मुहूर्त-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:35 ए एम से 05:21 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:59 ए एम से 12:49 पी एम9
  • विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त-06:29 पी एम से 06:53 पी एम
  • अमृत काल- 02:14 पी एम से 03:59 पी एम
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:07 ए एम से 04:52 पी एम
  • रवि योग- 06:07 ए एम से 04:52 पी एम

पूजा विधि-

  • सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान कर उनको धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें।
  • इसके बाद मां कूष्मांडा को हलवे और दही का भोग लगाएं। आप फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं।
  • मां का अधिक से अधिक ध्यान करें।
  • पूजा के अंत में मां की आरती करें। 

देवी कूष्मांडा मंत्र- 

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:


नवरात्रि 2022: आज के तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा की होती है पूजा, जानिए-पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

मां के हर रूप का महत्व है और हर रूप की अलग खासियत है। 4 अप्रैल को नवरात्रि का तीसरा दिन है और आज के दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी।

नवरात्रि के 9 दिन देवी शक्ति के 9 अलग-अलग रूप की पूजा होती है। पहेल दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कुष्मांडा, पाचंवे दिन स्कंद माता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री के रूप की पूजा की जाती है। 


मां के हर रूप का महत्व है और हर रूप की अलग खासियत है। 4 अप्रैल को नवरात्रि का तीसरा दिन है और आज के दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी।


शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि दोपहर 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। चैत्र शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया और सोमवार 4 अप्रैल को है। तृतीया तिथि दोपहर 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। 

आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है, यानि मां दुर्गा की तीसरी शक्ति की उपासना का दिन । आज मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की उपासना की जायेगी । देवी मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है । 

मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। जिनके दस हाथों में से चार दाहिनी हाथों में कमल का फूल, धनुष, जप माला और तीर है और पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है, जबकि चार बाएं हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार है और पांचवा हाथ वरद मुद्रा में रहता है, उनका स्वरूप भक्तों के लिए बड़ा ही कल्याणकारी है। ये सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिये तैयार रहती हैं । इनके घंटे की ध्वनि के आगे बड़े से बड़ा शत्रु भी नहीं टिक पाता है। अतः देवी चंद्रघंटा हर परिस्थिति में सभी तरह के कष्टों से छुटकारा दिलाने में सहायक है ।

पूजा विधि

माता की चौकी पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गौमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी,  तांबे या मिट्टीके घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।


नवरात्रि 2022: आज दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी की होगी पूजा, जानिए-पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कार्य में सदैव विजय प्राप्त होता है। मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों को सन्मार्ग दिखाने वाली हैं। माता की भक्ति से व्यक्ति में तप की शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य जैसे गुणों में वृद्धि होती है।

2 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। नवरात्रि के दौरान मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा- अर्चना की जाती है।  

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कार्य में सदैव विजय प्राप्त होता है। मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों को सन्मार्ग दिखाने वाली हैं। माता की भक्ति से व्यक्ति में तप की शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य जैसे गुणों में वृद्धि होती है। 


पूजन विधि, भोग और शुभ मुहूर्त

इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें।

घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें।

अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें।

मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।

धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।

मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।


मां को क्या पसंद है

देवी मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल का फूल बेहद पसंद है और इसलिए इनकी पूजा के दौरान इन्हीं फूलों को देवी मां के चरणों में अर्पित करें। चूंकि मां को चीनी और मिश्री काफी पसंद है इसलिए मां को भोग में चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं। मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्‍यंजन अति प्रिय होते हैं। इसलिए आप उन्‍हें दूध से बने व्‍यंजनों का भोग लगा सकते हैं। इस भोग से देवी ब्रह्मचारिणी प्रसन्न हो जाएंगी। इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य भी पाया जा सकता है।


श्लोक

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
 
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
 
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥


शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:37 ए एम से 05:23 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:50 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 06:27 पी एम से 06:51 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:09 ए एम से 12:37 पी एम
निशिता मुहूर्त- 12:01 ए एम, अप्रैल 04 से 12:47 ए एम, अप्रैल 04

अशुभ मुहूर्त-

राहुकाल- 05:06 पी एम से 06:40 पी एम
यमगण्ड- 12:25 पी एम से 01:58 पी एम
आडल योग- 06:09 ए एम से 12:37 पी एम
विडाल योग- 12:37 पी एम से 06:08 ए एम, अप्रैल 04
गुलिक काल- 03:32 पी एम से 05:06 पी एम
दुर्मुहूर्त- 05:00 पी एम से 05:50 पी एम


मां ब्रह्मचारिणी की आरती:

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो ​तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।


चैत्र नवरात्रि 2022: पहला दिन आज, जानिए-मां शैलपुत्री की पूजन विधि व शुभ मुहूर्त

मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा की विधिवत पूजा करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय रंग व भोग-

चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व की 02 अप्रैल, शनिवार से शुरुआत हो गई है। नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा- अर्चना की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा का विधान है। भक्त नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास भी रखते हैं।

मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा की विधिवत पूजा करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय रंग व भोग-

पूजन विधि: 

नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण मां को शैलपुत्री नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य और मान- सम्मान मिलता है। मां शैलपुत्री की पूजा करने से उत्तम वर की प्राप्ति भी होती है। मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र अतिप्रिय होते हैं। इस दिन मां को सफेद वस्त्र या सफेद फूल अर्पित करें। मां को सफेद बर्फी का भोग लगाएं।

पहले दिन बन रहे ये शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 04:38 ए एम से 05:24 ए एम।
अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:50 पी एम।
विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम।
गोधूलि मुहूर्त- 06:27 पी एम से 06:51 पी एम।
अमृत काल- 08:53 ए एम से 10:32 ए एम।
निशिता मुहूर्त-12:01 ए एम, अप्रैल 03 से 12:47 ए एम, अप्रैल 03, 05:02 ए एम, अप्रैल 03 से 06:43 ए एम, अप्रैल 03

पूजन सामग्री:

चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन कलश , सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), पवित्र स्थान की मिट्टी , गंगाजल , कलावा/मौली, आम या अशोक के पत्ते , छिलके/जटा वाला, नारियल , सुपारी अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला, लाल कपड़ा , मिठाई , सिंदूर , दूर्वा 

मां शैलपुत्री मंत्र- 

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।

मां शैलपुत्री भोग-

मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां शैलपुत्री प्रसन्न होती हैं।

नवरात्रि के पहले दिन का शुभ रंग-

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की अराधना का दिन होता है। मां शैलपुत्री का पसंदीदा रंग लाल है। 


30 जून से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, रक्षाबंधन तक चलेगी

राजभवन के अधिकारियों ने बताया कि इस बार अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होगी और परंपरा के अनुसार 43 दिन बाद रक्षाबंधन के दिन इसका समापन होगा।

जम्मू: कोरोना महामारी के कारण दो साल तक निलंबित रही अमरनाथ यात्रा इस साल 30 जून से शुरू होगी। राजभवन के अधिकारियों ने बताया कि इस बार अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होगी और परंपरा के अनुसार 43 दिन बाद रक्षाबंधन के दिन इसका समापन होगा। उन्होंने बताया कि कोविड के सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए यात्रा का आयोजन किया जाएगा।

वर्ष 2020 और 2021 में अमरनाथ यात्रा कोरोना महामारी की वजह से निलंबित कर दी गयी थी जबकि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त किए जाने से पहले यात्रा बीच में ही पांच अगस्त को स्थगित करनी पड़ी थी।



महाशिवरात्रि 2022: शिवालयों में लगी भक्तों की भीड़, देशभर में भोले की धूम, 21 लाख दीपों से जगमागयेगा महाकाल का धाम

बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि की धूम शुरू हो गई हैं। महाशिवरात्रि पर्व को ऐतिहासिक बनाने के लिए 21 लाख दीपों से बाबा महाकाल की नगरी को रोशन किया जाएगा। जिसके लिए पुलिस व प्रशासनिक की तरफ से कार्य योजना का पूरा प्लान तैयार कर लिया गया है।

नई दिल्ली: महाशिवरात्रि के अवसर पर मंगलवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का शिव मंदिरों में तांता लग गया। भक्तों ने राजधानी दिल्ली में आश्रम के दिव्य शक्ति मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं, मध्यप्रदेश स्थित उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी भगवान शंकर की पूजा की गई। 

बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि की धूम शुरू हो गई हैं। महाशिवरात्रि पर्व को ऐतिहासिक बनाने के लिए 21 लाख दीपों से बाबा महाकाल की नगरी को रोशन किया जाएगा। जिसके लिए पुलिस व प्रशासनिक की तरफ से कार्य योजना का पूरा प्लान तैयार कर लिया गया है। 

महाशिवरात्रि पर्व पर उज्जैन में लाखों की भीड़ का आने का अनुमान है, जिसके लिए ट्रैफिक जाम की समस्याओं से बचने के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्ग से जाना होगा। वहीं  VIP-VVIP प्रोटोकॉल वालों के लिए अलग मार्ग तय हैं। शहर की करीब 700 से अधिक होटल इस दौरान बुक हो चुकी है।



उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर बनने का प्रभाव इस बार शिवरात्रि के मौके पर देखने को मिल रहा है। व्यापारी समुदाय प्रसन्न हैं। केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में रावल भीमाशंकर की मौजूदगी में पंचांग गणना से की जाएगी।

पूजन का मुहूर्त

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय: शाम 06:27 से रात 09:29 तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय: रात 09:29 से 12:31 तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: रात 12:31 से 03:32 तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: रात 03:32 से सुबह 06:34 तक


शिव को चढ़ाएं बेलपत्र 

कहते हैं कि शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। बेल पत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए।

पूजन विधि

महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का पंचामृत से अभिषेक करें। चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र और वस्‍त्र आदि अर्पित करें। शिव जी के सामने दीप जलाएं और खीर का भोग लगाएं। महाशिवरात्रि के दिन सबसे पहले शिवलिंग में चन्दन के लेप लगाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराएं। दीप और कर्पूर जलाएं। पूजा करते समय ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। शिव को बिल्व पत्र और फूल अर्पित करें। शिव पूजा के बाद गोबर के उपलों की अग्नि जलाकर तिल, चावल और घी की मिश्रित आहुति दें। होम के बाद किसी भी एक साबुत फल की आहुति दें। सामान्यतया लोग सूखे नारियल की आहुति देते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप

1. शिव मोला मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
2. महा मृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
3. रूद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥


पत्नी को महारानी बनाकर रखते हैं इस नाम के लड़के

by न्यूज9इंडिया डेस्क

A अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लड़के: इस नाम के लड़के बेहद बातूनी और केयरिंग स्वभाव के होते हैं। ये अपनी हर जिम्मेदारी को अच्छे से निभाते हैं। ये लड़कियों का दिल जीतने में माहिर होते हैं। अपनी पत्नी से बेहद प्यार करते हैं और उनकी हर छोटी मोटी जरूरतों का ख्याल रखते हैं। ये अपनी पत्नी को बिल्कुल भी दुखी नहीं देख सकते। ये अपनी हमसफर को हर समय स्पेशल फील कराते हैं।

D अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लड़के: इस नाम के लड़के काफी प्यार करने वाले माने जाते हैं। इनके लिए इनकी लव लाइफ सबसे महत्वपूर्ण होती है। ये अपनी पत्नी को काफी सपोर्ट करते हैं। उनकी सारी बातें समझते हैं। लड़ाई-झगड़े से ये दूर रहते हैं। कुल मिलाकर ये अच्छे पति साबित होते हैं। अपनी पत्नी को सिर आंखों पर बैठाकर रखते हैं।

N अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लड़के: इस नाम के लड़के अपनी पत्नी से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। उनकी हर जरूरत का खास ख्याल रखते हैं। उन्हें हर चीज में सपोर्ट करते हैं। अपना अधिक से अधिक समय अपने हमसफर के साथ बिताना पसंद करते हैं। ये हद से ज्यादा रोमांटिक होते हैं।

P अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लड़के: जिन लड़कों का नाम इस अक्षर से शुरू होता है वो काफी इमोशनल नेचर के होते हैं। अपनी पत्नी की दिल से चाहते हैं और उन्हें खूब सम्मान देते हैं। ये अपनी पत्नी को खुश करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते। ये शांत स्वभाव के होते हैं। लाइफ के सभी जरूरी निर्णय ये अपनी पत्नी के सहयोग से लेते हैं। ये अपनी पत्नी को महारानी बनाकर रखते हैं।


8 मई को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

इस यात्रा वर्ष विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार आठ मई को सुबह 6 बजकर 15 मिनट में खुलेंगे, जबकि गाडू घड़ा (तेलकलश यात्रा) की तिथि 22 अप्रैल शुक्रवार है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

ऋषिकेश: इस यात्रा वर्ष विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार आठ मई को सुबह 6 बजकर 15 मिनट में खुलेंगे, जबकि गाडू घड़ा (तेलकलश यात्रा) की तिथि 22 अप्रैल शुक्रवार है।

नरेंद्र नगर (टिहरी) स्थित राजमहल में बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सादे धार्मिक समारोह में पूजा-अर्चना तथा पंचाग गणना पश्चात राज परिवार, श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति, श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत की उपस्थिति में धमार्चार्यों द्वारा पंचाग गणना के पश्चात श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय की गई। कार्यक्रम में कोविड प्रोटोकाल मानकों का पालन किया गया।

उल्लेखनीय है कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित होते ही उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2022 की तैयारियां शुरू हो गई है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने और बंद होने की एक विशेष प्रकिया है। बता दें कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी पर टिहरी जनपद के नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में तय होती है। वहीं, बदरीनाथ धाम के कपाट होने की तिथि विजयादशमी पर्व पर पूजा-अर्चना व पंचांग गणना के बाद तय की जाती है।

20 नवंबर को बंद हुए थे बदरीनाथ धाम के कपाट

बता दें कि बदरीनाथ धाम के कपाट बीते वर्ष 20 नवंबर को विधि-विधानपूर्वक शीतकाल के लिए बंद कर दिए थे। कपाट बंद होने के अवसर पर रिकार्ड 4366 श्रद्धालु बदरीनाथ धाम में मौजूद रहे। इस दौरान भगवान बदरी नारायण के दर्शन योग-ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में होते रहे। उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया पंच पूजाओं के साथ शुरू होती है।


बसंत पंचमी 2022: ऐसे करें सरस्वती पूजन, यहां जानें शुभ मुहूर्त

ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना और ज्ञान के महापर्व को वसंत पंचमी के रूप में जाना जाता है। इस अवसर पर प्रकृति के सौन्दर्य में बदलाव होता है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

आज देशभर में बसंत पंचमी मनाई जा रही है। ये त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का सूचक है। ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना और ज्ञान के महापर्व को वसंत पंचमी के रूप में जाना जाता है। इस अवसर पर प्रकृति के सौन्दर्य में बदलाव होता है। वृक्षों के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और बसंत में उनमें नई कोपलें आने लगती है जो हल्के गुलाबी रंग की होती हैं।

शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती को ब्रह्माजी ने प्रकट किया था ताकि उनकी मूक सृष्टि में ध्वनि का संचार हो। देवी सरस्वती वीणा और पुस्तक के साथ प्रकट हुईं। इनकी वीणा की तान से मूक सृष्टि में स्वर प्रकट हुआ। नदियों में कलकल की आवाज उत्पन्न हुई। पक्षियां चहचहाने लगी। आइए जानते हैं इस साल बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है....

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त-

पंचमी तिथि शुरूआत-  5 फरवरी सुबह 3 बजकर 48 मिनट पर
पंचमी तिथि समाप्त-  6 फरवरी सुबह 3 बजकर 47 मिनट पर
सिद्ध योग- शाम 5 बजकर 41 मिनट तक
अमृत सिद्धि योग सूर्योदय के समय
रवि योग- शाम 4 बजकर 9 मिनट से


वसंत पंचमी पूजा विधि

1. सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें और पूजा की सामग्री एकत्रित करें।
2. स्नान करने के बाद पूजा का संकल्प ले और सूर्यदेव को जल चढ़ाएं। 
3. इसके बाद मां सरस्वती का रंग पीला या फिर सफेद रंग के कपड़े पहनें।
4. मां सरस्वती की पूजा करने से पहले पूजा स्थल पर पट्टे के ऊपर देवी सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। 
5. इसके साथ बगल में भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करें।
6. इसके अलावा पुस्तक, पेन,वीणा या फिर कोई कलाकृति रखें।
7. पूजा की थाली में हल्दी, कुमकुम, चावल, गंगाजल और पीले रंग के पुष्य रखें।
8. इसके बाद गणेश आराधना करके के मां को पीले या सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें।
9.  मां को पीले रंग का तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करे।
10. सरस्वती वंदना मंत्र का जाप करें।


मकर सक्रांति 2022: श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी, COVID प्रोटोकॉल का हुआ पालन

संगम की रेती पर लगे माघ मेले के पहले स्थान पर्व मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

इनपुट एजेंसियां

प्रयागराज: संगम की रेती पर लगे माघ मेले के पहले स्थान पर्व मकर संक्रांति  पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। 

घाटों पर सुरक्षा के लिहाज से जल पुलिस के साथ-साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई है। साथ ही डीप वाटर बैरिकेडिंग की गई है। इसके अलावा पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है, घाटों पर भारी भीड़ ना उमड़े इसके लिए घाटों की संख्या मे बढ़ोतरी की गई है।

इस बार मेला क्षेत्र में 24 अलग-अलग घाट बनाए गए हैं। घाटों का विस्तार भी किया गया है, साथ ही सुरक्षा के लिहाज से 4 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की मेला क्षेत्र में तैनाती की गई है। जिसमें सिविल पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ, पीएसी, आरएएफ के अलावा आठ के कमांडो का दस्ता भी तैनात है। साथ ही एलआईयू की टीमें भी सादी वर्दी में मेला क्षेत्र में भ्रमण कर रही है।

इसके अलावा 13 अस्थायी पुलिस थाने और 26 पुलिस चौकी का भी निर्माण किया गया है। साथ ही सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए भी पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। एसपी मेला राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से सभी चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं, साथ ही कोविड को देखते हुए बेहद सावधानी बरती जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने संगम में निर्देश जारी करते हुए कहा कि संक्रांति स्नान और माघ मेला में वही व्यक्ति प्रवेश कर सकेंगे, जिनको कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। जिनको वैक्सीन नहीं लगी है या डोज अधूरी है, उन्हें मकर संक्रांति स्नान और माघ मेला में इजाजत नहीं मिलेगी।

घाटों पर विशेष निगरानी की जा रही है, साथ ही कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा के लिहाज से सतर्कता और सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी श्रद्धालु कल्पवास के लिए आ रहे हैं, उन्हें 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेकर आने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा अगर कोई श्रद्धालु नहीं लेकर आया है तो उसके लिए यहीं पर जांच की व्यवस्था की गई है। कोशिश है कि मेला हमेशा की तरह इस बार भी निर्विघ्न रुप से सकुशल संपन्न हो सके। इसके लिए मेला प्रशासन हर संभव कोशिश में जुटा है। 

श्रद्धालुओ का कहना है कि सभी ने आस्था की डुबकी लगाई है, और माँ गंगा से विनती की है कि जल्द से जल्द कोरोना महामारी दूर करे और पूरे विश्व मे शांति हो ।


मकर संक्रांति पर कोरोना का ग्रहण, हरिद्वार में गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे श्रद्धालु

हरिद्वार में लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे ने मकर सक्रांति के पर्व पर होने वाले गंगा स्नान पर रोक लगा दी है। इस आदेश के साथ हर की पौड़ी क्षेत्र पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

हरिद्वार: इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु हरिद्वार में गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे। दरअसल, कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन द्वारा गैदरिंग करने पर रोक लगाई गई है। जिला प्रशासन ने गंगा स्नान पर रोक लगा दी है।

बता दें कि हरिद्वार में लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे ने मकर सक्रांति के पर्व पर होने वाले गंगा स्नान पर रोक लगा दी है। इस आदेश के साथ हर की पौड़ी क्षेत्र पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।  जिलाधिकारी ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। इसके साथ ही ये भी कहा है कि आदेश न मानने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इतना ही नहीं संक्रमण ना फैल सके इसके लिए ही जिला प्रशासन द्वारा गंगा स्नान पर रोक लगाई गई है। हरिद्वार के साथ ही ऋषिकेश के भी सभी घाटों पर मकर संक्रांति के पर्व पर गंगा स्नान करने पर रोक लगा दी गई है। यहां भी श्रद्धालु मकर संक्रांति पर गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे।

 दरअसल कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर मकर संक्रांति के पर्व पर गंगा स्नान की इजाजत दे दी जाती तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचते इससे कोरोना के फैलने का खतरा और बढ़ जाता। ऐसे में एहतियातन गंगा स्नान पर रोक लगाई गई है।


वाराणसी: पहली बार काशी के कोतवाल काल भैरव ने पहनी पुलिस की वर्दी, दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

भगवान के सिर पर पुलिस टोपी, छाती पर एक ब्रॉच, बाएं हाथ में एक चांदी का डंडा और दाहिने हाथ में एक रजिस्टर, के साथ भगवान नए रूप में नजर आए। काल भैरव के इस नए रूप की खबर फैलते ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पहली बार काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव को पुलिस की वर्दी पहनाई गई। भगवान के सिर पर पुलिस टोपी, छाती पर एक ब्रॉच, बाएं हाथ में एक चांदी का डंडा और दाहिने हाथ में एक रजिस्टर, के साथ भगवान नए रूप में नजर आए। काल भैरव के इस नए रूप की खबर फैलते ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

बाबा काल भैरव सुनते हैं सबकी फरियाद

भक्तों ने कहा कि अगर बाबा रजिस्टर और कलम के साथ बैठे हैं, तो किसी की शिकायत अनसुनी नहीं होगी। वह महामारी संकट का भी ध्यान रखेंगे। बाबा काल भैरव मंदिर के महंत अनिल दुबे ने कहा कि पहली बार भगवान को पुलिस की वर्दी पहनाई गई है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए विशेष पूजा की गई है। बाबा से सभी पर दया करने का अनुरोध किया गया है। प्रदेश और देश में सुख-समृद्धि होने कि प्रार्थना की गई है। लोग स्वस्थ रहें और किसी को भी किसी भी तरह की समस्या का सामना ना करना पड़े।

भक्तों का मानना है कि काल भैरव के कई रूप हैं और पुलिस वाले के रूप में अपने अवतार में, वह उन सभी को दंडित करेंगे जो गलत करते हैं। एक भक्त प्रेमकांत तिवारी ने कहा कि बाबा काल भैरव काशी के कोतवाल हैं और अब जब उन्होंने वर्दी भी पहन ली है, तो वह गलत काम करने वालों से सख्ती से निबटेंगे।


1 जनवरी 2022 से इन राशियों के आने वाले हैं 'अच्छे दिन', भाग्य भी देगा पूरा साथ

by न्यूज9इंडिया डेस्क


नए साल में अब कुछ दिन ही शेष है। हर व्यक्ति के मन में ये जानने का उत्साह रहता है कि आखिर नया साल उसके लिए कैसा साबित होगा। नया साल लोगों के जीवन में खुशियां और उत्साह लाता है। यूं तो साल 2022 में मेष से लेकर मीन राशि वालों तक के जीवन में बदलाव देखने को मिलेंगे, लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नए साल में 4 राशि वालों को अपार लाभ होगा। जानिए इन राशियों के बारे में-

मेष- नए साल में मेष राशि वालों की आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धन संचय कर सकेंगे। नए साल में आपको पैतृक संपत्ति का लाभ मिल सकता है। साझेदारी के काम में जबरदस्त मुनाफा हो सकता है। इस दौरान आप मेहनत के बल पर धन अर्जित करेंगे।

वृषभ- नए साल में आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इस दौरान आपका सोया भाग्य जाग सकता है। जीवन में खुशियों के साथ सुख-समृद्धि आएगी। नए साल में कोई शुभ समाचार मिल सकता है। शेयर मार्केट में निवेश के लिए आपके लिए समय उत्तम है।

मिथुन- आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। इस दौरान आपको निवेश का लाभ मिल सकता है। आमदनी में वृद्धि के योग बनेंगे। प्रॉपर्टी से जुड़े व्यापार करने वाले जातकों को अचानक धन लाभ हो सकता है।

कन्या-  कन्या राशि वालों को व्यापार और नौकरी में नए अवसर प्राप्त होंगे। नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को शुभ समाचार मिल सकता है। व्यापारियों को जबरदस्त मुनाफा हो सकता है।

तुला- आपकी आर्थिक स्थिति समय के साथ बेहतर होती जाएगी। इस दौरान आपको भवन व वाहन सुख की प्राप्ति हो सकती है। धन संचय में आप सफल रहेंगे। आमदनी दोगुनी होने की संभावना है।


दुर्गा पूजा को UNESCO ने सांस्कृतिक विरासत की सूची में दर्ज किया, कहा-'बधाई हो इंडिया'

यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को 'सांस्कृतिक विरासत' की लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने लिखा ये हमारे लिए बड़े ही गर्व की बात है। दुर्गा पूजा हमारी परंपरा और संस्कृति का उदाहरण है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

कोलकाताः कोलकाता में मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने इंटैनि्जबल हैरिटेज यानी 'सांस्कृतिक विरासत' की लिस्ट में शामिल किया है। यूनेस्को ने अपने दिए एक बयान में कहा दुर्गा पूजा दस दिनों तक हर साल सितंबर-अक्तूबर महीने में मनाया जाता है। दस दिनों तक मनाए जाने वाले इस त्योहार का अर्थ केवल 'देवी की पूजा' तक ही सीमित नहीं है। बल्कि 'दुर्गा पूजा' व्यक्ति के 'अपने मूलभूत जड़ों तक वापस लौटने का त्योहार' है।

UNESCO ने कहा महालया से शुरू होती है पूजा

यूनेस्को के दिए बयान के मुताबिक, दुर्गा पूजा शुरू होने से कई दिनों पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मूर्तिकार कई दिनों पहले से ही गंगा किनारे से चिकनी मिट्टी लाकर देवी की प्रतिमा को आकार देने का काम शुरू कर देते हैं। दुर्गा पूजा महालया के दिन से शुरू हो जाती है,जब पहली बार मूर्ति की आंखें बनाई जाती है। दस दिनों तक पूरे नियम और श्रद्धा से पूजा अर्चना करने के बाद मूर्ति को वापस पानी में विसर्जित कर दिया जाता है।

बयान में आगे कहा गया है कि दुर्गा पूजा के इन दस दिनों के दौरान पूरे शहर में भी अलग अलग ढंग के आकर्षक पंडाल बनाए जाते हैं। जब दुर्गा पंडाल सजाया जाता है और सार्वजनिक पूजा का आयोजन किया जाता है। तब सभी धर्म के लोग इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ पूजा में सम्मिलित होते हैं।


यूनेस्को ने आगे कहा कि हम धर्म और कला के बेहतरीन उदाहरण के तौर पर दुर्गा पूजा को देखते हैं। इस पूजा में स्थानीय कलाकारों को भी अपने कला को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। हर छोटे बड़े मूर्तिकार अपनी कला की पेशकश करते हैं। दुर्गा पूजा हमारी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है जो आने वाले समय में आगे आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का काम करेगी।

पीएम मोदी ने बधाई दी

यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को 'सांस्कृतिक विरासत' की लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने लिखा ये हमारे लिए बड़े ही गर्व की बात है। दुर्गा पूजा हमारी परंपरा और संस्कृति का उदाहरण है।


13 दिसंबर को पीएम मोदी करेंगे काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का उद्घाटन, जानिए कैसा दिखेगा मंदिर

पीएम नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को आपमे संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का 13 दिसंबर को उद्घाटन करेंगे। बता दें कि ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक बड़ा प्रोजेक्ट है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को आपमे संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का 13 दिसंबर को उद्घाटन करेंगे। बता दें कि ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक बड़ा प्रोजेक्ट है।


लगभग 30 हजार स्क्वेयर फीट में फैले इस विशाल प्रोजेक्ट को श्रद्धालुओं की सुविधाओं में बढ़ोतरी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक यात्री सुविधा केंद्र समेत कई सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

उद्घाटन के अवसर पर देशभर के विख्यात संतों, ज्योतिर्लिंग के महंत, पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर को आमंत्रित किया गया है। बता दें कि इस प्रोजेक्ट के जरिए काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी पर स्थित ललिता घाट से लिंक किया जाएगा। पीएम मोदी 13 दिसंबर को ललिता घाट से इस कॉरिडोर में प्रवेश करेंगे और इसके उद्घाटन के बाद पैदल चलते हुए बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचेंगे।

कैसा होगा मंदिर और मंदिर परिसर


काशी विश्वनाथ प्रोजेक्ट को पीएम मोदी ने मार्च 2018 में लॉन्च किया था। इसके ब्लूप्रिंट के तहत प्रोजेक्ट का कुल क्षेत्रफल 03 हजार स्क्वेयर मीटर है जिसमें सप्ताह के दिनों में 15 हजार लोगों के पहुंचने की व्यवस्था , सप्ताहांत के दिनों में 40 हजार और सावन व शिवरात्रि जैसे कार्यक्रमों में ढाई से तीन लाख लोगों के शामिल होने पर पर्याप्त व्यवस्था का इंतजाम होगा।

इसके अलावा इसमें काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्री सुविधा केंद्र, अतिथि विश्राम गृह, लाइब्रेरी, म्यूजियम और आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र हर 25 फीट पर ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक स्थित होंगे।

इतना ही नहीं गंगा व्यू कैफे, 3500 स्क्वेयर फीट में फैला मंदिर चौक, सिटी म्यूजियम और नीलकंठ पवैलियन भी इस प्रोजेक्ट का अहम आकर्षण होगा।

मंदिर के मुख्य प्रांगण में कॉमन एरिया जैसे कॉरिडोर, घाट और यात्री सुविधा केंद्र, भोगशाला और नीलकंठ पवैलियन जैसी बिल्डिंग स्थित होगी, जिनका संचालन काशी विश्वनाथ धाम परिषद द्वारा किया जाएगा। 

इसके अलावा जलपान केंद्र, गंगा व्यू कैफे और अन्य सुविधाएं पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत लीज पर दी जाएगी।


संतों की मांग के आगे झुकी उत्तराखंड की सरकार, 'देवस्थानम बोर्ड' को किया भंग

मौजूदा सीएम पुष्कर धामी ने तीर्थ पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का साधू-संतो से वादा किया था। वैसे तो फैसला 30 अक्टूबर तक करना था लेकिन यहां भी एक माह की देरी हो गई। आखिरकार जीत साधू और संतों की हुई है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

देहरादून: आखिरकार साधू और संतों का विरोध रंग लाया और उत्तराखंड सरकार को देवस्थानम बोर्ड को भंग करना पड़ गया है। पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का फैसला पलट दिया है। उन्होंने देवस्थानम बोर्ड को भंग कर दिया है। इस बोर्ड का लंबे समय से विरोध हो रहा था और तीर्थ-पुरोहित इसे भंग करने की मांग पर आंदोलन कर रहे थे। 

बता दें कि देवस्थानम बोर्ड का गठन जनवरी 2020 में तब के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। इस बोर्ड के गठन के जरिए 51 मंदिरों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास आ गया था। उत्तराखंड में केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ चार धाम हैं। इन चारों धामों का नियंत्रण भी सरकार के पास आ गया था। तब से ही तीर्थ-पुरोहित इस फैसले को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए थे।

मौजूदा सीएम पुष्कर धामी ने तीर्थ पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का साधू-संतो से वादा किया था। वैसे तो फैसला 30 अक्टूबर तक करना था लेकिन यहां भी एक माह की देरी हो गई। आखिरकार जीत साधू और संतों की हुई है। 


दिल्ली की केजरीवाल सरकार बुजुर्गों को कराएगी रामलला के दर्शन, ऐसे करें आवेदन

दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराया जा रहा है और अब उसकी तीर्थ स्थानों की लिस्ट में अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अयोध्या को भी 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में शामिल किया गया है।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

नई दिल्ली: दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराया जा रहा है और अब उसकी तीर्थ स्थानों की लिस्ट में अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अयोध्या को भी 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में शामिल किया गया है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में हमने अयोध्या दर्शन को शामिल किया है। एक बुज़ुर्ग के साथ एक और व्यक्ति जा सकते हैं। दिल्ली से अयोध्या के लिए पहली ट्रेन 3 दिसंबर को जाएगी। दिल्ली सरकार के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।


कार्तिक पूर्णिमा आज, जानिए स्नान का सही समय

by न्यूज9इंडिया डेस्क

नई दिल्ली: ज्योतिष में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा को भगवान विष्णु के मत्स्यावतार का प्राकट्य हुआ था। इस वजह से इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने का महत्व शास्त्रों में वर्णित है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। जिसके कारण इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। वहीं सिख धर्म में इस दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का अवतरण हुआ था। 

कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान का महत्व-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। 

मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग से देवतागण भी आकर गंगा में स्नान करते हैं। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। अगर आपका गंगा स्नान के लिए जाना संभव नहीं है तो घर पर ही पवित्र जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

दान का महत्व-

कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन फल, अनाज, वस्त्र और गुड़ आदि चीजों का दान किया जा सकता है। शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं मिठाई, दूध और नारियल का दान करने से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

शुभ मुहूर्त-

पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होकर, 19 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक है। दान करने का शुभ समय 19 नवंबर को सूर्यास्त से पहले तक है।

तुलसी पूजन

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। अगर आप देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी पूजा नहीं कर पाएं हैं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


मां अन्नपूर्णा की रथ यात्रा वाराणसी रवाना, भक्तों में खुशी की लहर, कनाडा से लाई गई हैं मूर्तियां

एसीएस अवनीश अवस्थी ने बताया कि आज इस मूर्ति को उत्तर प्रदेश ले जाकर चार दिनों तक प्रदेश में मूर्ति का भ्रमण कराएंगे। 15 तारीख को प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इसे काशी विश्वनाथ धाम के नए मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

by न्यूज9इंडिया डेस्क

नई दिल्ली/लखनऊ/वाराणसी: माता अन्नपूर्णा रथ यात्रा गाज़ियाबाद के मोहन नगर पहुंची। यह यात्रा आखिर में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मन्दिर में पहुंचेगी। 15 नवंबर को मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। बता दें कि मां अन्पूर्णा समेत कई देवी देवताओं की मूर्तियां हाल ही में कनाडा से वापस भारत पहुंची हैं। इन मूर्तियों को चोरी कर लिया गया था।

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मां अन्नपूर्णा की मूर्ति कनाड़ा से वापस भारत आने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जो मूर्तियां भारत से चोरी की गईं थी, या ले ली गईं थी, वे अब लौट रही हैं। अब तक 200 ऐसी मूर्तियां वापस लाई गई हैं। मां का मूर्ति स्वरुप काशी लौटने की तैयारी में है, ये हमारे लिए गौरव का विषय है।