Skip to main content
Follow Us On
Hindi News, India News in Hindi, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा ख़बरें, News

मकर सक्रांति 2022: श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी, COVID प्रोटोकॉल का हुआ पालन

संगम की रेती पर लगे माघ मेले के पहले स्थान पर्व मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।

इनपुट एजेंसियां

प्रयागराज: संगम की रेती पर लगे माघ मेले के पहले स्थान पर्व मकर संक्रांति  पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। 

घाटों पर सुरक्षा के लिहाज से जल पुलिस के साथ-साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई है। साथ ही डीप वाटर बैरिकेडिंग की गई है। इसके अलावा पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है, घाटों पर भारी भीड़ ना उमड़े इसके लिए घाटों की संख्या मे बढ़ोतरी की गई है।

इस बार मेला क्षेत्र में 24 अलग-अलग घाट बनाए गए हैं। घाटों का विस्तार भी किया गया है, साथ ही सुरक्षा के लिहाज से 4 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की मेला क्षेत्र में तैनाती की गई है। जिसमें सिविल पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ, पीएसी, आरएएफ के अलावा आठ के कमांडो का दस्ता भी तैनात है। साथ ही एलआईयू की टीमें भी सादी वर्दी में मेला क्षेत्र में भ्रमण कर रही है।

इसके अलावा 13 अस्थायी पुलिस थाने और 26 पुलिस चौकी का भी निर्माण किया गया है। साथ ही सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए भी पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। एसपी मेला राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से सभी चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं, साथ ही कोविड को देखते हुए बेहद सावधानी बरती जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने संगम में निर्देश जारी करते हुए कहा कि संक्रांति स्नान और माघ मेला में वही व्यक्ति प्रवेश कर सकेंगे, जिनको कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। जिनको वैक्सीन नहीं लगी है या डोज अधूरी है, उन्हें मकर संक्रांति स्नान और माघ मेला में इजाजत नहीं मिलेगी।

घाटों पर विशेष निगरानी की जा रही है, साथ ही कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा के लिहाज से सतर्कता और सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी श्रद्धालु कल्पवास के लिए आ रहे हैं, उन्हें 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेकर आने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा अगर कोई श्रद्धालु नहीं लेकर आया है तो उसके लिए यहीं पर जांच की व्यवस्था की गई है। कोशिश है कि मेला हमेशा की तरह इस बार भी निर्विघ्न रुप से सकुशल संपन्न हो सके। इसके लिए मेला प्रशासन हर संभव कोशिश में जुटा है। 

श्रद्धालुओ का कहना है कि सभी ने आस्था की डुबकी लगाई है, और माँ गंगा से विनती की है कि जल्द से जल्द कोरोना महामारी दूर करे और पूरे विश्व मे शांति हो ।


मकर संक्रांति पर कोरोना का ग्रहण, हरिद्वार में गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे श्रद्धालु

हरिद्वार में लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे ने मकर सक्रांति के पर्व पर होने वाले गंगा स्नान पर रोक लगा दी है। इस आदेश के साथ हर की पौड़ी क्षेत्र पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

हरिद्वार: इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु हरिद्वार में गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे। दरअसल, कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन द्वारा गैदरिंग करने पर रोक लगाई गई है। जिला प्रशासन ने गंगा स्नान पर रोक लगा दी है।

बता दें कि हरिद्वार में लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे ने मकर सक्रांति के पर्व पर होने वाले गंगा स्नान पर रोक लगा दी है। इस आदेश के साथ हर की पौड़ी क्षेत्र पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।  जिलाधिकारी ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। इसके साथ ही ये भी कहा है कि आदेश न मानने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इतना ही नहीं संक्रमण ना फैल सके इसके लिए ही जिला प्रशासन द्वारा गंगा स्नान पर रोक लगाई गई है। हरिद्वार के साथ ही ऋषिकेश के भी सभी घाटों पर मकर संक्रांति के पर्व पर गंगा स्नान करने पर रोक लगा दी गई है। यहां भी श्रद्धालु मकर संक्रांति पर गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे।

 दरअसल कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर मकर संक्रांति के पर्व पर गंगा स्नान की इजाजत दे दी जाती तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचते इससे कोरोना के फैलने का खतरा और बढ़ जाता। ऐसे में एहतियातन गंगा स्नान पर रोक लगाई गई है।


वाराणसी: पहली बार काशी के कोतवाल काल भैरव ने पहनी पुलिस की वर्दी, दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

भगवान के सिर पर पुलिस टोपी, छाती पर एक ब्रॉच, बाएं हाथ में एक चांदी का डंडा और दाहिने हाथ में एक रजिस्टर, के साथ भगवान नए रूप में नजर आए। काल भैरव के इस नए रूप की खबर फैलते ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पहली बार काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव को पुलिस की वर्दी पहनाई गई। भगवान के सिर पर पुलिस टोपी, छाती पर एक ब्रॉच, बाएं हाथ में एक चांदी का डंडा और दाहिने हाथ में एक रजिस्टर, के साथ भगवान नए रूप में नजर आए। काल भैरव के इस नए रूप की खबर फैलते ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

बाबा काल भैरव सुनते हैं सबकी फरियाद

भक्तों ने कहा कि अगर बाबा रजिस्टर और कलम के साथ बैठे हैं, तो किसी की शिकायत अनसुनी नहीं होगी। वह महामारी संकट का भी ध्यान रखेंगे। बाबा काल भैरव मंदिर के महंत अनिल दुबे ने कहा कि पहली बार भगवान को पुलिस की वर्दी पहनाई गई है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए विशेष पूजा की गई है। बाबा से सभी पर दया करने का अनुरोध किया गया है। प्रदेश और देश में सुख-समृद्धि होने कि प्रार्थना की गई है। लोग स्वस्थ रहें और किसी को भी किसी भी तरह की समस्या का सामना ना करना पड़े।

भक्तों का मानना है कि काल भैरव के कई रूप हैं और पुलिस वाले के रूप में अपने अवतार में, वह उन सभी को दंडित करेंगे जो गलत करते हैं। एक भक्त प्रेमकांत तिवारी ने कहा कि बाबा काल भैरव काशी के कोतवाल हैं और अब जब उन्होंने वर्दी भी पहन ली है, तो वह गलत काम करने वालों से सख्ती से निबटेंगे।


1 जनवरी 2022 से इन राशियों के आने वाले हैं 'अच्छे दिन', भाग्य भी देगा पूरा साथ


नए साल में अब कुछ दिन ही शेष है। हर व्यक्ति के मन में ये जानने का उत्साह रहता है कि आखिर नया साल उसके लिए कैसा साबित होगा। नया साल लोगों के जीवन में खुशियां और उत्साह लाता है। यूं तो साल 2022 में मेष से लेकर मीन राशि वालों तक के जीवन में बदलाव देखने को मिलेंगे, लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नए साल में 4 राशि वालों को अपार लाभ होगा। जानिए इन राशियों के बारे में-

मेष- नए साल में मेष राशि वालों की आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धन संचय कर सकेंगे। नए साल में आपको पैतृक संपत्ति का लाभ मिल सकता है। साझेदारी के काम में जबरदस्त मुनाफा हो सकता है। इस दौरान आप मेहनत के बल पर धन अर्जित करेंगे।

वृषभ- नए साल में आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इस दौरान आपका सोया भाग्य जाग सकता है। जीवन में खुशियों के साथ सुख-समृद्धि आएगी। नए साल में कोई शुभ समाचार मिल सकता है। शेयर मार्केट में निवेश के लिए आपके लिए समय उत्तम है।

मिथुन- आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। इस दौरान आपको निवेश का लाभ मिल सकता है। आमदनी में वृद्धि के योग बनेंगे। प्रॉपर्टी से जुड़े व्यापार करने वाले जातकों को अचानक धन लाभ हो सकता है।

कन्या-  कन्या राशि वालों को व्यापार और नौकरी में नए अवसर प्राप्त होंगे। नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को शुभ समाचार मिल सकता है। व्यापारियों को जबरदस्त मुनाफा हो सकता है।

तुला- आपकी आर्थिक स्थिति समय के साथ बेहतर होती जाएगी। इस दौरान आपको भवन व वाहन सुख की प्राप्ति हो सकती है। धन संचय में आप सफल रहेंगे। आमदनी दोगुनी होने की संभावना है।


दुर्गा पूजा को UNESCO ने सांस्कृतिक विरासत की सूची में दर्ज किया, कहा-'बधाई हो इंडिया'

यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को 'सांस्कृतिक विरासत' की लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने लिखा ये हमारे लिए बड़े ही गर्व की बात है। दुर्गा पूजा हमारी परंपरा और संस्कृति का उदाहरण है।

कोलकाताः कोलकाता में मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने इंटैनि्जबल हैरिटेज यानी 'सांस्कृतिक विरासत' की लिस्ट में शामिल किया है। यूनेस्को ने अपने दिए एक बयान में कहा दुर्गा पूजा दस दिनों तक हर साल सितंबर-अक्तूबर महीने में मनाया जाता है। दस दिनों तक मनाए जाने वाले इस त्योहार का अर्थ केवल 'देवी की पूजा' तक ही सीमित नहीं है। बल्कि 'दुर्गा पूजा' व्यक्ति के 'अपने मूलभूत जड़ों तक वापस लौटने का त्योहार' है।

UNESCO ने कहा महालया से शुरू होती है पूजा

यूनेस्को के दिए बयान के मुताबिक, दुर्गा पूजा शुरू होने से कई दिनों पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मूर्तिकार कई दिनों पहले से ही गंगा किनारे से चिकनी मिट्टी लाकर देवी की प्रतिमा को आकार देने का काम शुरू कर देते हैं। दुर्गा पूजा महालया के दिन से शुरू हो जाती है,जब पहली बार मूर्ति की आंखें बनाई जाती है। दस दिनों तक पूरे नियम और श्रद्धा से पूजा अर्चना करने के बाद मूर्ति को वापस पानी में विसर्जित कर दिया जाता है।

बयान में आगे कहा गया है कि दुर्गा पूजा के इन दस दिनों के दौरान पूरे शहर में भी अलग अलग ढंग के आकर्षक पंडाल बनाए जाते हैं। जब दुर्गा पंडाल सजाया जाता है और सार्वजनिक पूजा का आयोजन किया जाता है। तब सभी धर्म के लोग इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ पूजा में सम्मिलित होते हैं।


यूनेस्को ने आगे कहा कि हम धर्म और कला के बेहतरीन उदाहरण के तौर पर दुर्गा पूजा को देखते हैं। इस पूजा में स्थानीय कलाकारों को भी अपने कला को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। हर छोटे बड़े मूर्तिकार अपनी कला की पेशकश करते हैं। दुर्गा पूजा हमारी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है जो आने वाले समय में आगे आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का काम करेगी।

पीएम मोदी ने बधाई दी

यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को 'सांस्कृतिक विरासत' की लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने लिखा ये हमारे लिए बड़े ही गर्व की बात है। दुर्गा पूजा हमारी परंपरा और संस्कृति का उदाहरण है।


13 दिसंबर को पीएम मोदी करेंगे काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का उद्घाटन, जानिए कैसा दिखेगा मंदिर

पीएम नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को आपमे संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का 13 दिसंबर को उद्घाटन करेंगे। बता दें कि ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक बड़ा प्रोजेक्ट है।

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को आपमे संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का 13 दिसंबर को उद्घाटन करेंगे। बता दें कि ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक बड़ा प्रोजेक्ट है।


लगभग 30 हजार स्क्वेयर फीट में फैले इस विशाल प्रोजेक्ट को श्रद्धालुओं की सुविधाओं में बढ़ोतरी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक यात्री सुविधा केंद्र समेत कई सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

उद्घाटन के अवसर पर देशभर के विख्यात संतों, ज्योतिर्लिंग के महंत, पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर को आमंत्रित किया गया है। बता दें कि इस प्रोजेक्ट के जरिए काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी पर स्थित ललिता घाट से लिंक किया जाएगा। पीएम मोदी 13 दिसंबर को ललिता घाट से इस कॉरिडोर में प्रवेश करेंगे और इसके उद्घाटन के बाद पैदल चलते हुए बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचेंगे।

कैसा होगा मंदिर और मंदिर परिसर


काशी विश्वनाथ प्रोजेक्ट को पीएम मोदी ने मार्च 2018 में लॉन्च किया था। इसके ब्लूप्रिंट के तहत प्रोजेक्ट का कुल क्षेत्रफल 03 हजार स्क्वेयर मीटर है जिसमें सप्ताह के दिनों में 15 हजार लोगों के पहुंचने की व्यवस्था , सप्ताहांत के दिनों में 40 हजार और सावन व शिवरात्रि जैसे कार्यक्रमों में ढाई से तीन लाख लोगों के शामिल होने पर पर्याप्त व्यवस्था का इंतजाम होगा।

इसके अलावा इसमें काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्री सुविधा केंद्र, अतिथि विश्राम गृह, लाइब्रेरी, म्यूजियम और आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र हर 25 फीट पर ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक स्थित होंगे।

इतना ही नहीं गंगा व्यू कैफे, 3500 स्क्वेयर फीट में फैला मंदिर चौक, सिटी म्यूजियम और नीलकंठ पवैलियन भी इस प्रोजेक्ट का अहम आकर्षण होगा।

मंदिर के मुख्य प्रांगण में कॉमन एरिया जैसे कॉरिडोर, घाट और यात्री सुविधा केंद्र, भोगशाला और नीलकंठ पवैलियन जैसी बिल्डिंग स्थित होगी, जिनका संचालन काशी विश्वनाथ धाम परिषद द्वारा किया जाएगा। 

इसके अलावा जलपान केंद्र, गंगा व्यू कैफे और अन्य सुविधाएं पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत लीज पर दी जाएगी।


संतों की मांग के आगे झुकी उत्तराखंड की सरकार, 'देवस्थानम बोर्ड' को किया भंग

मौजूदा सीएम पुष्कर धामी ने तीर्थ पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का साधू-संतो से वादा किया था। वैसे तो फैसला 30 अक्टूबर तक करना था लेकिन यहां भी एक माह की देरी हो गई। आखिरकार जीत साधू और संतों की हुई है।

देहरादून: आखिरकार साधू और संतों का विरोध रंग लाया और उत्तराखंड सरकार को देवस्थानम बोर्ड को भंग करना पड़ गया है। पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का फैसला पलट दिया है। उन्होंने देवस्थानम बोर्ड को भंग कर दिया है। इस बोर्ड का लंबे समय से विरोध हो रहा था और तीर्थ-पुरोहित इसे भंग करने की मांग पर आंदोलन कर रहे थे। 

बता दें कि देवस्थानम बोर्ड का गठन जनवरी 2020 में तब के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। इस बोर्ड के गठन के जरिए 51 मंदिरों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास आ गया था। उत्तराखंड में केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ चार धाम हैं। इन चारों धामों का नियंत्रण भी सरकार के पास आ गया था। तब से ही तीर्थ-पुरोहित इस फैसले को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए थे।

मौजूदा सीएम पुष्कर धामी ने तीर्थ पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का साधू-संतो से वादा किया था। वैसे तो फैसला 30 अक्टूबर तक करना था लेकिन यहां भी एक माह की देरी हो गई। आखिरकार जीत साधू और संतों की हुई है। 


दिल्ली की केजरीवाल सरकार बुजुर्गों को कराएगी रामलला के दर्शन, ऐसे करें आवेदन

दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराया जा रहा है और अब उसकी तीर्थ स्थानों की लिस्ट में अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अयोध्या को भी 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में शामिल किया गया है।

नई दिल्ली: दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराया जा रहा है और अब उसकी तीर्थ स्थानों की लिस्ट में अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अयोध्या को भी 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में शामिल किया गया है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में हमने अयोध्या दर्शन को शामिल किया है। एक बुज़ुर्ग के साथ एक और व्यक्ति जा सकते हैं। दिल्ली से अयोध्या के लिए पहली ट्रेन 3 दिसंबर को जाएगी। दिल्ली सरकार के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।


कार्तिक पूर्णिमा आज, जानिए स्नान का सही समय

नई दिल्ली: ज्योतिष में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा को भगवान विष्णु के मत्स्यावतार का प्राकट्य हुआ था। इस वजह से इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने का महत्व शास्त्रों में वर्णित है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। जिसके कारण इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। वहीं सिख धर्म में इस दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का अवतरण हुआ था। 

कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान का महत्व-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। 

मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग से देवतागण भी आकर गंगा में स्नान करते हैं। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। अगर आपका गंगा स्नान के लिए जाना संभव नहीं है तो घर पर ही पवित्र जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

दान का महत्व-

कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन फल, अनाज, वस्त्र और गुड़ आदि चीजों का दान किया जा सकता है। शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं मिठाई, दूध और नारियल का दान करने से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

शुभ मुहूर्त-

पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होकर, 19 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक है। दान करने का शुभ समय 19 नवंबर को सूर्यास्त से पहले तक है।

तुलसी पूजन

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। अगर आप देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी पूजा नहीं कर पाएं हैं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


मां अन्नपूर्णा की रथ यात्रा वाराणसी रवाना, भक्तों में खुशी की लहर, कनाडा से लाई गई हैं मूर्तियां

एसीएस अवनीश अवस्थी ने बताया कि आज इस मूर्ति को उत्तर प्रदेश ले जाकर चार दिनों तक प्रदेश में मूर्ति का भ्रमण कराएंगे। 15 तारीख को प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इसे काशी विश्वनाथ धाम के नए मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

नई दिल्ली/लखनऊ/वाराणसी: माता अन्नपूर्णा रथ यात्रा गाज़ियाबाद के मोहन नगर पहुंची। यह यात्रा आखिर में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मन्दिर में पहुंचेगी। 15 नवंबर को मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। बता दें कि मां अन्पूर्णा समेत कई देवी देवताओं की मूर्तियां हाल ही में कनाडा से वापस भारत पहुंची हैं। इन मूर्तियों को चोरी कर लिया गया था।

Image


मां अन्नपूर्णा की मूर्ति कनाड़ा से वापस भारत आने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जो मूर्तियां भारत से चोरी की गईं थी, या ले ली गईं थी, वे अब लौट रही हैं। अब तक 200 ऐसी मूर्तियां वापस लाई गई हैं। मां का मूर्ति स्वरुप काशी लौटने की तैयारी में है, ये हमारे लिए गौरव का विषय है।