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पाक पीएम इमरान खान से इस बात पर खफा हुआ तालिबान, जानिए-क्या है पूरी बात

कुछ दिन पहले,इमरान खान ने यह बात स्वीकार की थी कि इस्लामाबाद ने एक 'समावेशी सरकार' के लिए तालिबान के साथ बातचीत शुरू की है, जिसमें देश में अल्पसंख्यक शामिल होंगे।

काबुल/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पीएम इमरान खान आए दिन तालिबान को लेकर बड़बोलापन दिखा रहे हैं। लेकिन अब यह बात तालिबान को अच्छी नहीं लग रही है। दरअसल कुछ दिनों पहले इमरान खान ने कहा था कि अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनानी चाहिए जिससे सरकार में सभी  समुदायों का प्रतिनिधित्व हो। हालांकि तालिबान को यह बात पसंद नहीं आई और उसने कहा है कि किसी देश को ऐसा कहने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में एक 'समावेशी' सरकार स्थापित करने के लिए कहने का किसी देश को कोई अधिकार नहीं है।


तालिबान के प्रवक्ता और उप सूचना मंत्री जबीहुल्ला मुजाहिद ने यह बात तब कही है जब पाकिस्तान और कई अन्य देश अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनाने की बात कह चुके हैं। एक समाचार पत्र ने मुजाहिद के हवाले से बताया, "पाकिस्तान या किसी अन्य देश को इस्लामिक अमीरात से अफगानिस्तान में 'समावेशी' सरकार स्थापित करने के लिए कहने का कोई अधिकार नहीं है।"

बता दें कि कुछ दिन पहले,इमरान खान ने यह बात स्वीकार की थी कि इस्लामाबाद ने एक 'समावेशी सरकार' के लिए तालिबान के साथ बातचीत शुरू की है, जिसमें देश में अल्पसंख्यक शामिल होंगे।

इससे पहले, तालिबान के एक अन्य नेता, मोहम्मद मोबीन ने भी व्यक्त किया था कि अफगानिस्तान किसी को भी देश में 'समावेशी सरकार' का आह्वान करने का अधिकार नहीं देता है। अफगानिस्तान के एरियाना टीवी पर एक डिबेट शो के दौरान उन्होंने कहा, "क्या समावेशी सरकार का मतलब सिस्टम में पड़ोसियों के अपने प्रतिनिधि और जासूस का होना है?"


न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने रद्द किया पाकिस्तान दौरा तो भड़क हुए पाक गृहमंत्री, कहा-'उनकी पूरी फौज से ज्यादा सैनिक तो हमने उनकी सुरक्षा में लगाए थे'

पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद भड़ उठे हैं। उन्होंने कहा कि जितनी न्यूजीलैंड के पास फौज है उससे ज्यादा सैनिक हमने उनकी टीम की सुरक्षा में लगाए थे।

इस्लामाबाद: न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान दौरे पर मैच के ठीक पहले जाने से मना कर दिया। इसके पीछे न्यूजीलैंड द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया। जिसके बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद भड़ उठे हैं। उन्होंने कहा कि जितनी न्यूजीलैंड के पास फौज है उससे ज्यादा सैनिक हमने उनकी टीम की सुरक्षा में लगाए थे।

पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख रशीद ने सोमवार को कहा कि न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम की सुरक्षा में उनके देश ने बड़ी संख्या में जवान तैनात किए थे। रशीद ने कहा कि जितनी न्यूजीलैंड के पास फौज नहीं है, उससे ज्यादा सैनिक तो पाकिस्तान ने कीवियों की सुरक्षा में लगाए थे। मीडिया से बात करते हुए रशीद ने कहा कि मुल्क की आवाम को उम्मीद नहीं खोनी चाहिए और एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब पूरी दुनिया की क्रिकेट टीमें मैच खेलने के लिए पाकिस्तान आएंगी।


बताते चलें कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने पहला वनडे मैच शुरू होने से ठीक पहले बीते शुक्रवार को सुरक्षा को खतरे का हवाला देते हुए पाकिस्तान का अपना वर्तमान दौरा रद्द कर दिया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसे एकतरफा फैसला करार देते हुए कहा था कि मेहमान टीम की सुरक्षा को किसी तरह का खतरा नहीं था। यह न्यूजीलैंड का पिछले 18 वर्षों में पाकिस्तान का पहला दौरा था जिसमें टीम को 3 वनडे और 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने थे।

बता दें कि पीसीबी ने एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने व्यक्तिगत स्तर पर न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से बात की और उन्हें बताया कि हमारे पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खुफिया प्रणाली है और मेहमान टीम के लिए किसी भी तरह का कोई सुरक्षा खतरा नहीं है। हालांकि इमरान खान के फोन का भी मेहमान टीम के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ा और यह दौरा रद्द हो गया।

वहीं, PCB चीफ रमीज राजा ने कहा कि दौरे से हटने पर न्यूजीलैंड को आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) को जवाब देना होगा। रमीज ने कहा, ‘बेहद ही निराशाजनक दिन। मुझे प्रशंसकों और हमारे खिलाड़ियों के लिए बहुत खेद है। सुरक्षा खतरे पर एकतरफा फैसला लेकर दौरे से हटना बहुत निराशाजनक है। खासकर जब वे इस खतरे को साझा भी नहीं कर रहे है। न्यूजीलैंड किस दुनिया में रह रहा है?  न्यूजीलैंड को आईसीसी में हमें जवाब देना होगा।’


रूस की यूनिवर्सिटी में अंधाधुध गोलीबारी, 8 की मौत, 19 घायल, खौफ में बिल्डिंग से कूदे छात्र

रूसी जांच समिति ने यह जानकारी दी। पर्म क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 19 लोग घायल हुए हैं। घायलों को लेकर आ रहे अलग-अलग आंकड़ों का फिलहाल मिलान नहीं हो सका है।

नई दिल्ली: आज रूस की यूनिवर्सिटी में में एक हैरान कर देने वाली गोलीबारी की घटना सामने आई है। इस गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गई है। घटना के बाद पूरी यूनिवर्सिटी में हडकंप मच गया और छात्र बिल्डिंग से कूदकर भागने लगे। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया है जिसमें देखा जा सकता है कि छात्र कितना डर गए थे। इस घटना में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है।

रूस के पर्म शहर के एक विश्वविद्यालय में सोमवार सुबह हुई गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गई जबकि छह अन्य घायल हो गए। रूसी जांच समिति ने यह जानकारी दी। पर्म क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 19 लोग घायल हुए हैं। घायलों को लेकर आ रहे अलग-अलग आंकड़ों का फिलहाल मिलान नहीं हो सका है।

यनिवर्सिटी में गोलीबारी की घटना से इतना खौफ फैल गयै कि स्टूडेंट अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदकर भागने लगे।

पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी प्रेस सर्विस के अनुसार, अज्ञात अपराधी ने एक गैर-घातक बंदूक का इस्तेमाल किया। विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया, और विश्वविद्यालय ने उन लोगों से परिसर छोड़ने का आग्रह किया जो ऐसा करने की स्थिति में थे।

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रूस के गृह मंत्रालय ने बताया कि बंदूकधारी को बाद में हिरासत में ले लिया गया। घटना के बाद जांच समिति ने हत्या की जांच शुरू कर दी है। सरकारी तास समाचार एजेंसी ने एक अनाम कानूनी स्रोत का हवाला देते हुए कहा कि कुछ छात्र एक इमारत की खिड़कियों से बाहर कूद गए। क्षेत्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक घायलों को गोलीबारी और इमारत से भागने की कोशिश में चोटें आई हैं।


'काबुल एयरस्ट्राइक में आतंकी नहीं, 10 निर्दोष मरे थे', अमेरिका ने कबूला अपना गुनाह

29 अगस्त को अमेरिका द्वारा काबुल एयरपोर्ट के समीप किये गए एयर स्ट्राइक में आतंकियों की नहीं, बल्कि निर्दोष 10 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 7 मृतक छोटे बच्चे थे। इसके लिए अमेरिका ने अब माफी मांगते हुए कहा है कि यह उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है।

न्यूयॉर्क: 29 अगस्त को अमेरिका द्वारा काबुल एयरपोर्ट के समीप किये गए एयर स्ट्राइक में आतंकियों की नहीं, बल्कि निर्दोष 10 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 7 मृतक छोटे बच्चे थे। इसके लिए अमेरिका ने अब माफी मांगते हुए कहा है कि यह उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। इससे वह सबक लेते हैं और भविष्य में इस तरह की गलती ना करने का प्रयास करेंगे।


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 29 अगस्त को किये गये एक ड्रोन हमले में सात बच्चों सहित 10 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई और ऐसी कोई आशंका नहीं है कि वे आईएसआईएस-के से जुड़े हुए थे या अमेरिकी सेना के लिए खतरा थे। 


अमेरिकी रक्षा सचिव (रक्षा मंत्री) लॉयड ऑस्टिन ने काबुल में हुए ड्रोन हमले के लिए शुक्रवार को माफी मांगी, जिसमें दस लोगों की मौत हो गई थी। ऑस्टिन ने एक बयान में कहा कि मैं ड्रोन हमले में मारे गए लोगों के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि हम क्षमा चाहते हैं और हम इस भयानक गलती से सीखने का प्रयास करेंगे।
वहीं, पेंटागन में जनरल केनेथ मैकेंजी ने कहा कि यह एक गलती थी, और मैं गंभीरतापूर्वक माफी मांगता हूं।

 अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड की एक जांच में पाया गया कि अमेरिकी हमले में एक निदोर्ष सहायता कर्मी और उसके परिवार के सदस्यों की मौत हो गई थी, जिनमें सात बच्चे भी शामिल थे। 


इस हमले को शुरू में 'न्यायसंगत' करार दिया गया था। हमले में मारी गई सबसे छोटी बच्ची सुमाया महज दो साल की थी। जांच में बताया गया कि सुरक्षा बलों ने कार में जिस चीज को रखते हुए देखा था, वह विस्फोटक नहीं बल्कि पानी के कंटेनर थे। 


पेंटागन ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने आठ घंटे तक उस व्यक्ति की कार को ट्रैक किया था, क्योंकि इसे आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट-खोरासान से जुड़े एक परिसर में देखा गया था। जांच में पाया गया कि कार की गतिविधि काबुल हवाईअड्डे पर हमले के लिए आतंकवादी समूह की योजनाओं के बारे में खुफिया एजेंसियों को मिली सूचनाओं से काफी हद तक मेल खाती है।

इसी दौरान, एक निगरानी ड्रोन ने कुछ लोगों को कार के ट्रंक में विस्फोटक लोड करते हुए देखा, लेकिन बाद में जांच में वे पानी के कंटेनर निकले।
सहायता कर्मी जमैरी अकमाधी की कार पर हवाई अड्डे से करीब तीन किमी दूर हमला किया गया। 

ड्रोन हमले के बाद कार में दूसरा बड़ा धमाका हुआ था, जिसके आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने शुरू में कहा था कि कार में विस्फोटक लदे हुए थे, लेकिन जांच में पाया गया कि संभवत: मार्ग में किसी प्रोपेन टैंक के कारण यह धमाका हुआ। पीड़ितों के रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने अमेरिका जाने के लिए आवेदन किया था और वे हवाई अड्डे पर जाने के लिए एक फोन कॉल का इंतजार कर रहे थे।


SCO शिखर सम्मेलन में भी पाकिस्तान का जागा 'तालिबान प्रेम', दुनिया से की मदद की अपील

आज पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से तालिबान का राग अलापते हुए कहा है कि दुनिया को अफगानिस्तान की मदद करनी होगी।

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: पडो़सी मुल्क पाकिस्तान का तालिबान प्रेम अब अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भी तालिबान के लिए मदद की गुहार लगा रहा है। अबतक वह सिर्फ अपने स्तर पर ही तालिबान से दोस्ती निभा रहा था। आज पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से तालिबान का राग अलापते हुए कहा है कि दुनिया को अफगानिस्तान की मदद करनी होगी। इमरान खान ने SCO को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान को बाहर से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

अपने संबोधन में पाक पीएम इमरान खान ने कहा कि इस्लामाबाद की ओर से अफगानिस्तान को मदद की जाती रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तालिबान को अपनी ओर से किए हुए वादों को पूरा करना होगा। इससे पहले भी इमरान खान कई बार तालिबान का खुलकर समर्थन कर चुके हैं।

इमरान ने आगे कहा कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट को टालने के लिए वैश्विक स्तर पर मदद करनी होगी। इमरान खान ने तालिबान का बचाव करते हुए कहा कि फिलहाल अफगानिस्तान की सरकार विदेशी मदद पर निर्भर है। इमरान खान ने कहा, 'तालिबान को उन वादों को पूरा करना होगा, जो उसने किए हैं। शांतिपूर्ण और स्थिर अफगानिस्तान से पाकिस्तान के भी हित जुड़े हैं और इसके लिए हम काम करते रहेंगे।' इसके साथ ही इमरान खान ने कहा कि अफगानिस्तान में कोई बाहरी दखल नहीं होना चाहिए।


भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने लताड़ा

वहीं, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा मानना है कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित है। क्षेत्र की समस्याओं का मूल कारण बढ़ती कट्टरता है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रमों ने कट्टरपंथ से उत्पन्न चुनौती को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि एससीओ को इस्लाम से जुड़े उदारवादी, सहिष्णु तथा एवं समावेशी संस्थानों और परम्पराओं के बीच मजबूत सम्पर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। 


गौरतलब है कि तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया था। उसके बाद से ही देश में अशांति का माहौल है। एक तरफ अमेरिका ने अपने फेडरल बैंक में जमा अफगानिस्तान की 9 अरब डॉलर की पूंजी को फ्रीज कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ आईएमएफ ने अपने संबंधों को खत्म कर लिया है। आईएमएफ का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान को मान्यता नहीं मिलती है, तब तक उसके संसाधनों तक उसकी पहुंच नहीं होगी। 


समुद्र में चीन को घेरने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने बनाया ‘ऑकस’, जानिए-क्या है पूरा प्लान

इससे ये देश अपने साझा हितों की रक्षा कर सकेंगे और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकेंगे।

नई दिल्ली: समुद्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहे चीन के लिए बुरी खबर है। अब उसे घेरने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्टेलिया एक साथ आगे आए हैं। ऐसे में ड्रैगन के मंसूबों पर पानी फिरना तय है। ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद प्रशांत में चीन को घेरने के लिए नया त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑकस (एयूकेयूएस) की घोषणा की है। इससे ये देश अपने साझा हितों की रक्षा कर सकेंगे और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकेंगे।

Are Asian allies backing the United States' new position on South China  Sea? | ORF

ऐतिहासिक नए गठबंधन यानी ऑकस को बुधवार को टेलीविजन पर प्रसारित एक संयुक्त संबोधन के दौरान डिजिटल माध्यम से शुरू किया गया। इस गठबंधन के तहत तीनों राष्ट्र संयुक्त क्षमताओं के विकास करने, प्रौद्योगिकी को साझा करने, सुरक्षा के गहन एकीकरण को बढ़ावा देने और रक्षा संबंधित विज्ञान, प्रौद्योगिकी, औद्योगिक केंद्रों और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने पर सहमत हुए।

Australian Warship Joins U.S. Exercise in South China Sea

ऑकस की पहले बड़ी पहल के तहत अमेरिका और ब्रिटेन की मदद से ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का एक बेड़ा बनाएगा, जिसका मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस अवसर पर कहा कि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी हैं। हम भले ही भौगोलिक आधार पर अलग हों, लेकिन हमारे हित और मूल्य साझे हैं। 

US Navy's improved littoral combat warships in Asia to be armed with  radar-evading precision missiles | South China Morning Post

वर्चुअल संबोधन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नई साझेदारी का मकसद मिलकर काम करना और हिंद-प्रशांत की सुरक्षा एवं स्थिरता को संरक्षित रखना है। मॉरिसन ने कहा कि अगले 18 महीनों में तीनों देश सर्वश्रेष्ठ मार्ग तय करने के लिए मिलकर काम करेंगे। बाइडन ने व्हाइट हाउस से कहा कि तीनों देश 20वीं सदी की तरह 21वीं सदी के खतरों से निपटने की अपनी साझा क्षमता को बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, हमारे राष्ट्र और हमारे बहादुर बल 100 से अधिक वर्षों से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।

Navy Recognition

तीनों नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया, दशकों पुराने हमारे गहरे रक्षा संबंधों को पहचानते हुए, हम अपनी संयुक्त क्षमताओं और अंतर-संचालन को बढ़ाने के लिए ऑकस के तहत त्रिपक्षीय सहयोग शुरू करते हैं। ये प्रारंभिक प्रयास साइबर क्षमताओं, कृत्रिम मेधा, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और समुद्र के भीतर अतिरिक्त क्षमताओं पर केंद्रित होंगे।

ड्रैगन ने जताया ऐतराज

वहीं, इस मसले पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। चीन ने कहा है कि वह इस समझौते पर करीबी नजर रखेगा, जो क्षेत्रीय स्थिरता को काफी कमजोर कर देगा और हथियारों की होड़ बढ़ाएगा तथा परमाणु अप्रसार की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचाएगा।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान की यह टिप्पणी हिंद-प्रशांत के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के एक नया त्रिपक्षीय सुरक्षा गठजोड़ की घोषणा करने के बाद आई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर और क्वांटम प्रौद्योगिकी भी इस समझौते के दायरे में आता है जिसे एयूकेयूएस के नाम से जाना जा रहा है।

दिलचस्प है कि 24 सितंबर को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की मेजबानी में क्वाड नेताओं की एक बैठक से हफ्ते भर पहले एयूकेयूएस की घोषणा की गई। क्वाड, चार देशों-भारत, आस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका-का एक समूह है।


ऑकस से हिंद-प्रशांत एवं अन्य क्षेत्रों में संबंधों को नया रूप मिलेगा। राष्ट्रपति जो बाइडन अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटा ली है, जबकि चीन के साथ तनाव बढ़ा है। प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका एवं अन्य का दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक कार्रवाई और जापान, ताईवान तथा ऑस्ट्रेलिया का विरोध किए जाने को लेकर चिंता है। समझौते की घोषणा करते हुए तीनों नेताओं ने चीन का जिक्र नहीं किया, जबकि चीन इस गठबंधन को भड़काने वाला कदम बताता है।

ब्रिटेन ने क्या कहा 

ब्रेग्जिट के तहत यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद ब्रिटेन दुनिया में अपनी मौजूदगी को नए सिरे से दर्शाना चाहता है। इसके तहत उसका झुकाव हिंद-प्रशांत की तरफ बढ़ा है। जॉनसन ने कहा कि इससे तीनों देश एक- दूसरे के और नजदीक आएंगे।


ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा

समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर कम से कम आठ परमाणु संपन्न पनडुब्बियां बनाएगा, जबकि फ्रांस के साथ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के समझौते को रद्द कर देगा। मॉरिसन ने कहा कि उन्होंने जापान और भारत के नेताओं को इस बारे में फोन किया है।

चीन ने क्या कहा

चीन ने कहा कि इस गठबंधन से क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता बुरी तरह प्रभावित होगी और परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने के प्रयास बाधित होंगे। अमेरिका और ब्रिटेन का यह अत्यंत गैर जिम्मेदाराना कार्य है कि वे परमाणु तकनीक का निर्यात कर रहे हैं।

फ्रांस ने क्या कहा 

ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस से कहा है कि वह इसके डीसीएनएस के साथ दुनिया के सबसे बड़े, 12 परंपरात पनडुब्बियां बनाने के ठेके को खत्म करेगा। यह ठेका अरबों डॉलर का है। फ्रांस इससे क्षुब्ध है और सभी पक्षों से जवाब मांग रहा है।

न्यूजीलैंड ने क्या कहा

नए गठबंधन से ऑस्ट्रेलिया के पड़ोसी न्यूजीलैंड को बाहर रखा गया है। इसकी लंबे समय से परमाणु मुक्त नीति रही है जिसमें परमाणु संपन्न पोतों के इसके बंदरगाह में प्रवेश पर प्रतिबंध भी शामिल है।


तालिबान के अफगान में लागू हुआ 'काला कानून', मंत्रालय में महिलाओं की नो एंट्री !

अब महिलाओं की एंट्री मंत्रालयों में बंद कर दी गई है। मंत्रालय के एक कर्मचारी ने कहा महिला मामलों के मंत्रालय वाले इमारत में केवल पुरुषों को जाने की इजाजत है।

काबुल: अफगान की तालिबानी हुकूमत ने एक और 'काला कानून' बनाया है। दरअसल, अब महिलाओं की एंट्री मंत्रालयों में बंद कर दी गई है। मंत्रालय के एक कर्मचारी ने कहा महिला मामलों के मंत्रालय वाले इमारत में केवल पुरुषों को जाने की इजाजत है। 


एक समाचार एजेंसी ने मंत्रालय के कर्मचारी के हवाले कहा है कि चार महिलाओं को इमारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद महिलाओं ने मंत्रालय के सामने ही सरकार के इस कदम का विरोध किया।

बता दें कि 20 साल के बाद तालिबान ने एक बार फिर अफगानिस्तान पर अपना कब्जा जमा लिया है। तालिबान के मौजूदा रवैये को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवादी समूह के इस शासन के तहत अफगान महिलाओं को अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ सकता है। 

वैसे भी तालिबान का असली चेहरा अभी तक कोई भूला नहीं है। पहले की सरकार में भी तालिबान अपना असली चेहरा दिखा चुका है। जिसमें महिलाएं बड़े पैमाने पर अपने घरों तक ही सीमित थीं। 

हालांकि, काबुल पर कब्जा जमाने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए तालिबान ने आश्वासन दिया था कि समूह इस्लाम के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करेगा। 

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि तालिबान इस्लाम के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करने के लिए प्रतिबंद्ध हैं। 

उन्होंने कहा था कि महिलाएं स्वास्थ्य क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में काम कर सकता हैं जहां उनकी जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं होगा लेकिन तालिबान के वादे सिर्फ झूठ साबित हो रहे हैं।


बता दें कि अमेरिका ने अपने सबसे लंबे युद्धों में से एक को समाप्त करते हुए अफगानिस्तान से अपने सैनिकों वापस बुला चुका है। 


तालिबान के लिए ब्लैकमेलिंग पर उतारू हुआ पाक, अलकायदा-IS का दिखा रहा डर

तालिबानी हुकूमत वाले अफगान को लेकर दो-चार देशों को छोड़कर पूरी दुनिया 'वेट एंड वाच' की स्थिति में है लेकिन पाकिस्तान, अफगान को मान्यता दिलाने में अपनी पूरी ताकत झोक दी है और अब ब्लैकमेलिंग पर भी उतारू हो गया है।

इस्लामाबाद/काबुल: पड़सो मुल्क पाकिस्तान अक्सर अपने कारनाओं को लेकर सुर्खियों में रहता है। ताजा मामले में वह दुनिया को आतंक का डर दिखाकर ब्लैकमेल करना चाह रहा है। दरअसल, तालिबानी हुकूमत वाले अफगान को लेकर दो-चार देशों को छोड़कर पूरी दुनिया 'वेट एंड वाच' की स्थिति में है लेकिन पाकिस्तान, अफगान को मान्यता दिलाने में अपनी पूरी ताकत झोक दी है और अब ब्लैकमेलिंग पर भी उतारू हो गया है।

अफगानिस्तान में तालिबान राज को दुनिया से मान्यता दिलाने के लिए पाकिस्तान ने पूरी ताकत झोंक दी है। खुद तालिबान के नेता इतनी जल्दबाजी में नहीं है, जितनी बेचैनी में इमरान खान और उनकी सरकार है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने कहा है कि दुनिया को 'वेट एंट वॉच' की पॉलिसी नहीं अपनानी चाहिए। उन्होंने इससे अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाने और आतंकवाद का खतरा बढ़ जाने का डर दिखाया है।

तालिबान ने मध्य अगस्त में पश्चिमी देशों की समर्थित निर्वाचित सरकार को बाहर करके अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया। तालिबान की ओर से घोषित अंतरिम सरकार में कई खूंखार आतंकी भी शामिल हैं। भारत सहित दुनिया के अधिकतर देशों ने अफगानिस्तान को 'वेट एंच वॉच' की पॉलिसी अपनाई है और तालिबान को अभी मान्यता देने के मूड में नहीं हैं। सभी बड़े देशों ने कहा है कि वह तालिबान सरकार की मानवाधिकार और महिलाओं के प्रति रवैये को देखने के बाद ही फैसला लेंगे। हालांकि, पाकिस्तान में प्रधानमंत्री, मंत्री और सेना तालिबान के दूत, प्रवक्ता और वकील के रूप में काम कर रहे हैं।      

यूसुफ ने कहा, ''इंतजार करो और देखो (अफगानिस्तान में नए निजाम के प्रति) का मतलब होगा बर्बादी।'' उन्होंने यह भी कहा कि 1990 के दशक में भी यही गलती की गई थी। पश्चिमी नेताओं ने अपनी गलती को माना और इसे ना दोहराने की बात कही थी। यूसुफ ने कहा कि दुनिया के हित में यही है कि वे तालिबान से अपनी चिंता को लेकर खद बात करें, जिसमें आतंकवाद, मानवाधिकार और समावेशी सरकार या अन्य मुद्दे शामिल हैं।   

इन दिनों पाकिस्तान से ज्यादा तालिबान की बात करने वाले यूसुफ ने कहा कि अफगानिस्तान को अकेला छोड़ देने पर यह भी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन सकता है। उन्होंने कहा, ''यदि इसका त्याग कर दिया जाता है तो सुरक्षा को लेकर खालीपन पैदा होगा। आप पहले ही जानते हैं कि इस्लामिक स्टेट पहले से वहां मौजूद है, पाकिस्तानी तालिबान भी है। अलकायदा है। हम सुरक्षा खालीपन का जोखिम क्यों ले?'' पाकिस्तान ने इससे पहले इसी महीने खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को काबुल भेजा था।


जिंदा है अफगान के तालिबानी सरकार का डिप्टी पीएम मुल्ला बरादर

एक बार खुद मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने अपना ऑडियो संदेश जारी करके खंडन किया था लेकिन अब तालिबान ने उसका वीडियो शेयर कर उसकी मौत का खंडन किया है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने सरकार बना ली है लेकिन उसके शीर्ष नेता अभी भी दुनिया का सामने नहीं आ रहे हैं। इस बीच पिछले कुछ दिनों से तालिबानी हुकूमत के डिप्टी पीएम मुल्ला बरादर को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था। वह कही दिखाई नहीं दे रहे थे ऐसे में उसकी मौत की बात मीडिया रिपोर्ट्स में आई। जिसके एक बार खुद मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने अपना ऑडियो संदेश जारी करके खंडन किया था लेकिन अब तालिबान ने उसका वीडियो शेयर कर उसकी मौत का खंडन किया है।

अब तालिबान की ओर से बरादर के इंटरव्यू का वीडियो ट्वीट किया गया है और उसकी मौत की खबरों का खंडन किया गया है। ये वीडियो अफगानिस्तान के सांस्कृतिक आयोग के मल्टीमीडिया ब्रांच के चीफ अमदुल्ला मुत्तकी ने ट्वीट किया है। इससे पहले मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने सोमवार को खुद एक ऑडियो संदेश में पुष्टि की कि वह जीवित है और घायल नहीं है। तालिबान के प्रवक्ता का कहना है कि तालिबान के डिप्टी पीएम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर की हत्या की अफवाहें सच नहीं हैं। वह पिछले 2 सालों से हैबतुल्लाह अखुंदजादा के बारे में यही बात कह रहा है, लेकिन पिछले 2 सालों में अब तक कोई भी नहीं उसे देखा या अब तक उससे सुना। इससे पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के प्रमुख फैज हमीद, बरादर और हक्कानी समर्थित समूहों के बीच झड़प के बाद काबुल पहुंचा था, जिसमें बरादर घायल हो गया था।


मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के बारे में

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबान का संस्थापक सदस्य है। वह अंतरिम तालिबानी सरकार में उप प्रधानमंत्री भी है। साल 2010 में पाकिस्तान की ISI ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद साल 2018 में उसे रिहा कर दिया गया। तालिबान में कई मदरसों का संचालन का जिम्मा उसके पास है। जानकारी के अनुसार, बरादर कतर की राजधानी दोहा में रहता है।


दरअसल, बरादर को कई दिनों तक सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है और वह तालिबान के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं था, जो 12 सितंबर को काबुल में कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी से मिला था। कतर में स्थित तालिबान के एक वरिष्ठ सदस्य ने भी विवाद और गरमागरम बहस की रिपोर्ट की पुष्टि की है।


तालिबान का खौफ: 736 अफगानी नागरिकों ने भारत में शरण के लिए करवाया नया रजिस्ट्रेशन

अफगानिस्तान पर तालिबानी हुकूमत काबिज होने के बाद वहां के नागरिक डरे हुए हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ७३६ नए अफगानी नागरिकों ने भारत में शरणार्थी के रूप में नया रजिस्ट्रेशन कराया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबानी हुकूमत काबिज होने के बाद वहां के नागरिक डरे हुए हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  ७३६ नए अफगानी नागरिकों ने भारत में शरणार्थी के रूप में नया रजिस्ट्रेशन कराया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) ने कहा है कि 1 अगस्त से 11 सितंबर तक कुल 736 अफगानों ने भारत में शरण के लिए नया रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसमें आगे कहा गया है कि भारत में अफगानों के पंजीकरण और सहायता के बढ़ते अनुरोधों को पूरा करने के लिए वह अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा कि वह वीजा जारी करने और समयसीमा बढ़ाने, सहायता और समाधान सहित अफगान नागरिकों से संबंधित मामलों पर सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है।

आंकड़ों के अनुसार, भारत में यूएनएचसीआर के लिए 'पर्सन आफ कंसर्न' की कुल संख्या 43,157 है। इनमें 15,559 रिफ्यूजी और शरण मांगने वाले अफगानिस्तान के लोग हैं। इसका मतलब उन लोगों से है, जिन्हें एजेंसी आंतरिक रूप से विस्थापित, शरण मांगने वाला, या बिना देश वाले व्यक्ति मानती है। संयुक्त राष्ट्र निकाय ने एक बयान में कहा कि 1 अगस्त से 11 सितंबर तक यूएनएचसीआर द्वारा नए पंजीकरण के लिए 736 अफगानों का नाम दर्ज किया गया है। जिन लोगों ने यूएनएचसीआर से संपर्क किया है, उनमें अफगान नागरिक हैं जो 2021 में आए है।

यूएनएचसीआर ने आगे कहा कि वह भारत में अफगानों के पंजीकरण और सहायता के बढ़ते अनुरोधों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र निकाय का कहना है कि वह अफगानिस्तान से आए लोगों के लिए अपने मानवीय प्रतिक्रिया कार्यक्रम को बढ़ा रहा है। इन लोगों को भोजन, नकद-आधारित सहायता और मुख्य राहत सामग्री जैसी बुनियादी सहायता प्रदान की जा रही है।

यूएनएचसीआर ने कहा कि उसने एक अफगानिस्तान आपातकालीन प्रकोष्ठ और अफगानों के लिए एक समर्पित सहायता पृष्ठ भी स्थापित किया है जिसमें पंजीकरण और सहायता के बारे में व्यापक जानकारी उपलब्ध है। इसमें कहा गया है, 'अफगान समुदायों के साथ सीधे जुड़ने और चौबीसों घंटे सवालों के जवाब देने के लिए अतिरिक्त 24/7 हेल्पलाइन की स्थापना की गई। इसपर प्रतिदिन 130 से अधिक काल आ रही है। इसमें मुख्य रूप से सहायता और पंजीकरण के बारे में पूछताछ की जा रही है।'

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में अब तालिबान की हुकूमत भी हो गई है। उसने 15 अगस्त 2021 को पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था हालांकि, पंजशीर घाटी में अभी भी उसे पंजशीर के लड़ाके कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यहां उसका कब्जा पूरा तरह नहीं हो पाया है।


अफगान में आंतरिक कलह से जूझ रही तालिबानी सरकार, बरादर ने काबुल छोड़ा

तालिबान सरकार में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बनाए गए मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के हक्कानी नेटवर्क से मतभेद के बाद उन्होंने काबुल छोड़ दिया है।

काबुल: बंदूकों के दम पर तालिबान ने अफगान की सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन सत्ता संभालना उसके बस के बात शायद नहीं है। अब तालिबानी गुटों में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और आपसी रार भी शुरू हो गई है। ताजा मामले में बरादर के काबुल छोड़ने की खबर है।

मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान सरकार में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बनाए गए मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के हक्कानी नेटवर्क से मतभेद के बाद उन्होंने काबुल छोड़ दिया है। पिछले सप्ताह राष्ट्रपति भवन में बरादर और हक्कानी नेटवर्क के नेता खलील उर-रहमान के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद दोनों नेताओं के समर्थक आपस में भिड़ गए। खलील उर-रहमान तालिबान सरकार में शरणार्थी मंत्री हैं।

बीबीसी ने एक शीर्ष तालिबानी नेता के हवाले से बताया है कि काबुल के राष्ट्रपति कार्यालय में अंतरिम कैबिनेट को लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस हुई थी। 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अलग-अलग समूहों के बीच नेतृत्व और सरकार गठन को लेकर संघर्ष रहा है। काफी गतिरोध के बाद अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा हो पाई थी।

खबर है कि तालिबान की राजनीतिक ईकाई की ओर से सरकार में हक्कानी नेटवर्क को प्रमुखता दिए जाने का विरोध किया जा रहा है। वहीं हक्कानी नेटवर्क खुद को तालिबान की सबसे फाइटर यूनिट मानता है। बरादर के धड़े का मानना है कि उनकी कूटनीति के कारण तालिबान को अफगानिस्तान में सत्ता मिली है, जबकि हक्कानी नेटवर्क के लोगों को लगता है कि अफगानिस्तान में जीत लड़ाई के दम पर मिली है।

बताते चलें कि दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुई कई दौर की वार्ता में अब्दुल गनी बरादर अगुवा के तौर पर थे। ऐसे में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का वह क्रेडिट लेते रहे हैं। वहीं हक्कानी नेटवर्क को तालिबानियों में सबसे खूंखार माना जाता है, जो पाकिस्तान की सेना से करीबी संबंध रखता है। 

वैसे तो तालिबान में कई स्तरों पर मतभेद है लेकिन कंधार प्रांत को लेकर ज्यादा ही मतभेद हैं। कंधार प्रांत से आने वाले तालिबान के नेताओं और उत्तर एवं पूर्वी अफगानिस्तान से आने वाले लोगों के बीच भी मतभेद हैं। कंधार को तालिबान का गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में वहां से ताल्लुक रखने वाले नेता सत्ता में अहम भागीदारी चाहते हैं। बीते कुछ दिनों से बरादर सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखे थे। इसके चलते ये अफवाहें भी थीं कि वह गोलीबारी में घायल हो गए हैं या फिर मौत हो गई है। 


काबुल में बरादर की गैर-मौजूदगी की वजह से सोशल मीडिया पर उसकी मौत की खबरें भी चलने लगी है। बीबीसी ने तालिबान सूत्रों के हवाले से कहा है कि बरादर काबुल छोड़ कंधार चले गए हैं। एक प्रवक्ता ने पहले कहा कि बरादर कंधार सुप्रीम नेता से मिलने गए हैं, बाद में बताया गया कि वह थक गए थे और अभी आराम करना चाहते हैं।

इस बीच सोमवार को बरादार के नाम पर एक ऑडियो टेप जारी किया गया, जिसमें वह कह रहे हैं कि मैं यात्राओं की वजह से बाहर हूं और इस वक्त  जहां भी हूं, ठीक हूं। इस ऑडियो टेप को तालिबान की कई आधिकारिक वेबसाइटों पर पोस्ट किया गया है, लेकिन इसकी सत्यता की निष्पक्ष रूप से पुष्टि नहीं हो पाई।


भारतीय मूल के अफगानी व्यवसायी को तालिबानियों ने हथियारों के दम पर किया अगवा !

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अफगान मूल के एक भारतीय मूल के अफगानी व्यवसायी को बंदूक की नोक पर उसकी दुकान के पास से अगवा कर लिया गया है।

काबुल: अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार बेशक दुनिया के सामने लंबे-चौड़े वादे कर रहा है कि वह शांति चाहता है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। तालिबानी लोगों को न सिर्फ परेशान कर रहे हैं बल्कि उनकी जिंदगी बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। 

ताजा मामले में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भारतीय मूल के एक अफगानी व्यवसायी को बंदूक की नोक पर उसकी दुकान के पास से अगवा कर लिया गया है। माना जा रहा है कि तालिबानियों ने ही भारतीय नागरिक को किडनैप किया है। हालांकि, इस घटना को लेकर अब भारत सरकार से संपर्क साधा गया है। 

इंडियन वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने को लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अफगान हिंदू-सिख समुदाय द्वारा जानकारी दी गई है कि अफगान मूल के एक भारतीय नागरिक बंसरी लाल अरेन्दे (50) को काबुल स्थित उसकी दुकान के पास से सोमवार को सुबह लगभग आठ बजे अगवा कर लिया गया। 

चंडोक ने बताया कि बंसरी लाल फामार्स्युटिकल उत्पादों के व्यवसायी हैं और इस घटना के समय वह अपने कर्मचारियों के साथ अपनी दुकान पर सामान्य दिनचर्या में लिप्त थे। उन्होंने बताया कि बंसरी लाल को उसके कर्मचारियों के साथ अगवा किया गया था, लेकिन उसके कर्मचारी किसी तरह भागने में सफल रहे, हालांकि अपहरणकतार्ओं ने उन्हें बेरहमी से पीटा है। बंसरी लाल का परिवार दिल्ली में रहता है। 

चंडोक ने कहा कि स्थानीय समुदाय संबंधित अधिकारियों के साथ सम्पर्क में है और स्थानीय जांच एजेंसियों ने इस सिलसिले में मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनके दोस्तों के अनुसार, बंसरी लाल का पता लगाने के लिए दिन में तलाशी ली गई। चंडोक ने कहा कि उन्होंने मामले के संबंध में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को सूचित कर दिया गया है और इस संबंध में तत्काल हस्तक्षेप और सहायता का अनुरोध किया गया है।


अफगानिस्तान में तालिबानी हुकुमत से बुलंदी पर ISI के हौसले, 100 से ज्यादा बार कश्मीर में घुसपैठ की आतंकियों ने की कोशिश

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद अब तक 105 बार आतंकियों ने कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की जिसमें वह 6 बार सफल हुए हैं। आतंकियों को घुसपैठ कराने आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी भरपूर सहयोग दे रही है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के हौसले बुलंद हो गए हैं। खासकर उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की। 

इस का अन्दाजा आप इस बात से लगा सकते  हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद अब तक 105 बार आतंकियों ने कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की जिसमें वह 6 बार सफल हुए हैं। आतंकियों को घुसपैठ कराने आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी भरपूर सहयोग दे रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आईएसआई ने पाकिस्तानी आर्मी की मदद से पाक अधिकृत कश्मीर (POK) और इंटरनेशनल बॉर्डर से आतंकी घुसपैठ के लिए जून से से लेकर अगस्त तक 105 बार कोशिश की।

भारतीय सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की अधिकतर कोशिशें नाकाम कर दीं लेकिन करीब छह जगह आतंकी घुसपैठ करने में सफल भी रहे हैं। यही नहीं, सुरक्षा बलों को खुफिया एजेंसियों से ये अलर्ट भी मिला है कि आतंकवादी संगठन आईएस केपी के प्रशिक्षित आतंकवादी भारत में धमाके कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक अफगान पाकिस्तान बॉर्डर स्पिन बोल्डक के नजदीक मौजूद आतंकी संगठन भारत स्थित आतंकियों से संपर्क साधने में जुटे हैं। इसमें वे सोशल मीडिया का सहारा लेकर उन्हें भड़का रहे हैं।

भारत में मौजूद आतंकियों को आईईडी बनाने और छोटे हथियार खरीदने के लिए फंड पहुंचाने का आश्वासन दिया जा रहा है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएस KP के निशाने पर राइट विंग के नेता, मंदिर, भीड़भाड़ वाली जगह और विदेशी नागरिक हैं।

एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नही करने की शर्त पर बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी हर एक एंगल से तालिबान की ताकत को कश्मीर के लिए भुनाना चाहती है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में कुछ वीडियो कश्मीर में इंटरसेप्ट भी किए गए हैं जिनसे ये पता चला है कि आईएसआई की सोशल मीडिया विंग कश्मीर में अफगानिस्तान के वीडियो दिखाकर लोगों को भड़काने की साजिश रच रही है। 

हालांकि, कश्मीर के युवाओं पर इस तरह के वीडियो का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है फिर भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।


तालिबान के अफगान में नया कानून, अवैध संबंध बनाने वालों को मारे जाएंगे पत्थर, चोरी करने पर काट दिए जाएंगे हाथ !

अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद तालिबान अब नया कानून भी बना रहा है। नए कानून के तहत अवैध संबंध बनाने वाले को पत्थरों से मारा जाएगा और चोरी करने वाले शख्स के हाथ काट दिए जाएंगे।

काबुल: अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद तालिबान अब नया कानून भी बना रहा है। नए कानून के तहत अवैध संबंध बनाने वाले को पत्थरों से मारा जाएगा और चोरी करने वाले शख्स के हाथ काट दिए जाएंगे।


अफ़ग़ानिस्तान अब पूरी तरह से तालिबान के कब्जे में है। वहां की अंतरिम सरकार अब अपने एजेंडे के आधार पर शासन कर रही है। नए शासन में 'सद्गुण के प्रचार और बुराई की रोकथाम' मंत्रालय भी है। 

इस मंत्रालय का नाम सुनने में भले ही सुंदर लग रहा है हो लेकिन इसके फरमान खुंखारी मानसिकता की पुष्टि कर रहे हैं। तालिबान शरिया कानून के कठोर संस्करण को लागू करने के लिए कुख्यात है। इसमें पुरुष साथी के बिना महिलाओं के घर के बाहर नौकरी पर जाना तक प्रतिबंध है। 

तालिबान के एक अधिकारी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य इस्लाम की सेवा करना है, जिसके लिए एक अच्छाई और सद्गुण मंत्रालय की जरूरत है। अफगानिस्तान के केंद्रीय क्षेत्र के लिए जिम्मेदार होने का दावा करने वाले मोहम्मद यूसुफ ने अमेरिकी दैनिक टैब्लॉइड को बताया कि तालिबान शासन उल्लंघन करने वालों को "इस्लामी नियमों" के अनुसार दंडित करेगा।


यूसुफ ने समझाया कि एक हत्यारा जिसने जानबूझकर अपराध किया है, उसे मार दिया जाएगा। अगर जानबूझकर नहीं किया है को तो एक निश्चित राशि का भुगतान करने जैसी सजा हो सकती है।

न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, तालिबानी अधिकारी ने कहा कि चोरों के हाथ काट दिए जाएंगे, जबकि "अवैध संभोग" में शामिल लोगों को पथराव किया जाएगा।यूसुफ ने दावा किया कि "अवैध संभोग" में शामिल पुरुषों और महिलाओं दोनों को एक ही कठोर तरीके से सजा दिया जाएगा।

न्यूयॉर्क पोस्ट ने यूसुफ के हवाले से कहा, “अगर कहानी में थोड़ा सा भी अंतर है, तो कोई सजा नहीं होगी। लेकिन अगर वे सभी एक ही बात, एक ही तरह और एक ही समय कह रहे हैं, तो सजा होगी। सुप्रीम कोर्ट इन सभी मुद्दों की अनदेखी करेगा। अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो हम दंडित करेंगे।” उसने कहा, "हम सिर्फ इस्लामी नियमों और विनियमों के साथ एक शांतिपूर्ण देश चाहते हैं। शांति और इस्लामी शासन ही हमारी एकमात्र इच्छा है।"


बता दें कि 1996-2001 के अपने पहले के शासन के दौरान, इस मंत्रालय ने अफगानिस्तान की सड़कों पर नैतिक पुलिस स्थापित की और अपराध के आधार पर उल्लंघन करने वालों को कोड़े मारे गए, पत्थर मारे गए और यहां तक ​​कि सार्वजनिक रूप से मार डाला गया।


Video: तालिबानियों ने अफगान के एक पूर्व नेता और नौकरशाह को गाड़ी की डिग्गी में भरकर किया अगवा

तालिबानियों द्वारा एक कार की डिग्गी में एक पूर्व नेता और एक नौकरशाह को कार की डिग्गी में भरकर अगवा कर लिया गया है। तालिबानियों की इस कृत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर सत्ता हासिल करने के बाद तालिबान अपनी असली हरकतों पर उतारू हो गया है। पहले तो उसने महिलाओं की आजादी छीनने का काम शुरू किया, फिर मीडिया की आजादी छीना और अब जन प्रतिनिधियों को अगवा तक कर ले रहा है। ताजा मामले में तालिबानियों द्वारा एक कार की डिग्गी में एक पूर्व नेता और एक नौकरशाह को कार की डिग्गी में भरकर अगवा कर लिया गया है। तालिबानियों की इस कृत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

देखें वीडियो


तालिबान के 'आका' पाकिस्तान की US ने लगाई क्लास, मुश्किल समय में अफगान में भारत की मौजदूगी को सराहा

एक बार फिस से पाकिस्तान को यूएस ने लताड़ लगाई है साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से खुशी मनाते पाकिस्तान को अब अमेरिका ने चेतावनी दे दी है। इतना ही नहीं मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी की सराहना भी की है।

नई दिल्ली: एक बार फिस से पाकिस्तान को यूएस ने लताड़ लगाई है साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से खुशी मनाते पाकिस्तान को अब अमेरिका ने चेतावनी दे दी है। इतना ही नहीं मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी की सराहना भी की है। 

अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान से उसके रिश्ते इस बात पर निर्भर करेंगे कि तालिबान के साथ उसके संबंध कैसे होने वाले हैं। यह बात दुनिया से छुपी नहीं है कि पाकिस्तान तालिबान का कितना बड़ा समर्थक है और उसने आतंकवादी समूह का कितना साथ दिया है। अब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा है कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर विचार करेगा और सोचेगा कि अफगानिस्तान के भविष्य में अमेरिका पाकिस्तान को क्या भूमिका निभाते देखना चाहेगा।

ब्लिंकेन ने इस दौरान अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी को भी सराहा। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदगी से अफगान में पाकिस्तान की नुकसानदेह गतिविधियों पर असर जरूर हुआ है।


अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं के हट जाने के बाद हुई पहली सार्वजनिक सभा में ब्लिंकेन ने कहा कि अफगानिस्तान से पाकिस्तान के ऐसे कई फायदे हैं जो हमारे लिए दिक्कत पैदा कर सकते हैं। ब्लिंकेन ने कहा, "पाकिस्तान अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर लगातार दो नाव की सवारी कर रहा है। वह तालिबानियों को पाल रहा है और दूसरी तरह आतंकवाद विरोधी कई गतिविधियों में हमारा भी सहयोग कर रहा है।" 

ब्लिंकेन की इस बातचीत के दौरान वहां मौजूद सांसदों ने सवाल किया कि क्या अमेरिका को अब पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को लेकर फिर से विचार करना चाहिए? तो ब्लिंकेन ने कहा कि प्रशासन जल्द ही ऐसा करेगा। उन्होंने कहा, "आने वाले हफ्तों में हम कई चीजों पर विचार करेंगे- पाकिस्तान ने पिछले 20 साल में जो भूमिका निभाई है उस पर और आने वाले हफ्तों में हम उसे जो भूमिका निभाते हुए देखना चाहते हैं उस पर भी। साथ ही इस बात भी विचार करेंगे कि ऐसा करने के लिए क्या कुछ करने की जरूरत पड़ेगी।"

पाकिस्तान के तालिबान के साथ गहरे संबंध रहे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी समर्थित सरकार तालिबान के साथ युद्ध लड़ रही थी वहीं पाकिस्तान आतंकी समूह का समर्थन करता रहा था - हालांकि इस्लामाबाद ने इन आरोपों से इनकार किया था। इसके अलावा कतर के बाद पाकिस्तान दूसरा ऐसा देशा है जिसका तालिबान पर सबसे अधिक प्रभाव है और 2001 में अमेरिका के आक्रमण के बाद कई बड़े तालिबानी नेता पाकिस्तान में ही पनाह लेने के लिए भाग गए थे। 

अफगानिस्तान से सेना की वापसी के मुद्दे से निपटने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने सोमवार को पुरजोर तरीके से बचाव किया। राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस साल अप्रैल में अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी का ऐलान किया था। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच तालिबान ने बेहद कम दिनों में अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जिसे लेकर अमेरिकी सांसदों ने बाइडन प्रशासन की आलोचना की थी।

अफगानिस्तान मामले पर संसद की समिति के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सोमवार को ब्लिंकन ने कहा, '' इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अधिक समय तक ठहरने से अफगान सुरक्षा बल या अफगान सरकार को और अधिक मजबूती मिलती या वे आत्मनिर्भर हो जाते। यदि समर्थन, उपकरण और प्रशिक्षण में 20 साल और सैकड़ों अरब डॉलर पर्याप्त नहीं थे, तो एक और साल, या पांच या दस साल से क्या फर्क पड़ेगा?''

बता दें कि अफगानिस्तान के घटनाक्रम के संबंध में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सुनवाई होनी है। ब्लिंकन सोमवार को संसद की विदेश मामलों की समिति के समक्ष पेश हुए और उन्हें सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष मंगलवार को पेश होना होगा।


भुखमरी की दहलीज पर तालिबान का अफगान, मान्यता नहीं मानवता के नाते अमेरिका भेजेगा 4 हजार करोड़ रुपये की मदद

एक आंकड़े के मुताबिक, अफगानिस्तान में सिर्फ 15 दिन का खाद्य सामग्री बची हुई है। ऐसे में वह अब दुनिया से खाने-पीने की चीजों के लिए गुहार लगा रहा है।

काबुल: बंदूकों के दम पर तालिबान ने अफगानिस्तान पर बेशक कब्जा कर लिया हो लेकिन हुकूमत चलाना उसके बसकी बात नहीं रही। आज आलम यह हो चुका है कि तालिबान का अफगान भुखमरी की कगार पर है। एक आंकड़े के मुताबिक, अफगानिस्तान में सिर्फ 15 दिन का खाद्य सामग्री बची हुई है। ऐसे में वह अब दुनिया से खाने-पीने की चीजों के लिए गुहार लगा रहा है।

खबर है कि अमेरिका मानवता के नाते उसे लगभग 4 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय मदद देने का एलान किया है। यह मदद अमेरिका द्वारा मानवता के नाते की जा रही है। हालांकि, अमेरिका ने अभी भी तालिबान को मान्यता ना देने की बात कही है। अमेरिका ने सोमवार को ऐलान किया है कि वह अफगानिस्तान को 6.4 करोड़ डॉलर यानी करीब 470 करोड़ रुपये की मानवीय सहायता भेजेगा। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान को भुखमरी और जन स्वास्थ्य संकट से बचाने के लिए 60 करोड़ डॉलर यानी करीब साढ़े 4 हजार करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया था। 


'द हिल' की खबर के मुताबिक, यह सहायता राशि यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट और यूएस विदेश मंत्रालय की ओर से दी जाएगी, जिसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचाया जाएगा। 

इस धनराशि को आवंटित करने के बाद इस साल अफगानिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी मानवीय सहायता 33 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई है। अमेरिका अब अफगानिस्तान को डोनेशन देने वाला सबसे बड़ा सहयोगी बन गया है। 


अफगानिस्तान: हर कदम पर तालिबान का साथ दे रहा पाक, ISI चीफ खुद बैठा है पंजशीर घाटी में

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन गई है लेकिन पंजशीर अभी भी उसके लिए बहुत दूर है। इस बीच खबर है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का चीफ खुद पंजशीर घाटी में डेरा डाले हुआ है और तालिबान की मदद में जुटा हुआ है।

काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन गई है लेकिन पंजशीर अभी भी उसके लिए बहुत दूर है। इस बीच खबर है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का चीफ खुद पंजशीर घाटी में डेरा डाले हुआ है और तालिबान की मदद में जुटा हुआ है।

ईरान के वरिष्ठ सांसद एवं अफगानिस्तान में देश के पूर्व राजदूत फदा हुसैन मालेकी ने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद वर्तमान में पंजशीर प्रांत में हैं। वह काबुल में तालिबान कैबिनेट के गठन में भी शामिल हैं।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मालेकी ने सुझाव दिया कि ईरान के विदेश मंत्रालय को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए और अफगान समस्या के समाधान के लिए रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान के बीच बैठक होनी चाहिए। वह ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के भी सदस्य हैं। 

मालेकी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आईएसआई प्रमुख पंजशीर में मौजूद हैं और तालिबान कैबिनेट के गठन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान के हस्तक्षेप करने और अफगानिस्तान में अमेरिकी स्थिति बनाए रखने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि ईरान सभी जातीय और धार्मिक समूहों की भागीदारी के साथ अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार की मांग कर रहा है। मालेकी ने कहा कि विदेश मंत्री का मानना है कि अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार का गठन किया जाना चाहिए ताकि सभी जातीय समूह सरकार में अपनी भूमिका निभा सकें।

उल्लेखनीय है कि काबुल में तालिबान ने कब्जे के बाद अफगानिस्तान में अपनी कार्यवाहक सरकार बनाई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के आईएसआई प्रमुख हमीद जाहिर तौर पर तालिबान नेतृत्व से मिलने के लिए पिछले सप्ताह काबुल गए थे। उत्तर पूर्व अफगानिस्तान के पंजशीर में प्रतिरोध बलों ने हालांकि आरोप लगाया कि वह अहमद मसूद के नेतृत्व में प्रतिरोध बलों पर तालिबान की जीत की निगरानी के लिए काबुल में थे।


अफगानिस्तान: ऑडियो टेप जारी कर बोला बरादर-'जिंदा हूं मैं'

बरादर ने सोमवार को एक ऑडियो बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया पर उसके निधन की खबर झूठी है। वह जिंदा है और ठीक है।

काबुल: तालिबान के अफगान के उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर की मौत की खबरें सोशल मीडिया पर फैली। नतीजन खुद बरादर ने ही आकर अपने जिंदा होने की जानकारी दी। सोमवार को एक ऑडियो बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया पर उसके निधन की खबर झूठी है। वह जिंदा है और ठीक है।

बरादर ने क्लिप में कहा, "मीडिया में मेरी मौत की खबर थी। पिछली कुछ रातों से मैं यात्रा कर रहा हूं। मैं इस समय जहां भी हूं, मेरे सभी भाई और दोस्त ठीक हैं।" उसने आगे कहा, "मीडिया हमेशा नकली प्रचार प्रकाशित करता है। इसलिए, उन सभी झूठों को बहादुरी से खारिज करें। मैं आपको 100 प्रतिशत पुष्टि करता हूं कि कोई समस्या नहीं है।"

अब्दुल गनी बरादर, जिसे अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार में पिछले हफ्ते नंबर दो का ओहदा दिया गया था, ने तालिबान द्वारा पोस्ट किए गए एक ऑडियो संदेश में मौत की अफवाहों के लिए "फर्जी प्रचार" को जिम्मेदार ठहराया है। 


कतर कार्यालय के तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने भी तालिबान के सह-संस्थापक की मौत की खबरों का खंडन करते हुए ट्वीट किया है। आपको बता दें कि ऑडियो संदेश को प्रमाणित करना संभव नहीं था, लेकिन इसे तालिबान की आधिकारिक साइटों पर पोस्ट किया गया है। इनमें नई सरकार के राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता भी शामिल हैं।

बताते चलें कि इससे पहले तालिबान के सर्वोच्च नेता, हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की भी कई वर्षों तक मृत्यु होने की अफवाह थी, जब समूह के प्रवक्ता ने कहा कि वह सत्ता संभालने के दो सप्ताह बाद "कंधार में मौजूद" थे।

वहीं, बरादर की मौत की खाबरें सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति महल में प्रतिद्वंद्वी तालिबान गुटों के साथ हुई गोलीबारी में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।


अफगान की नई सरकार पर भड़का तजाकिस्तान, पाकिस्तान को लपेटा, तालिबान को दी ये चेतावनी

अफगानिस्तान की नई तालिबानी सरकार में अल्पसंख्यको को ना शामिल किये जाने से तजाकिस्तान भड़क उठा है। उसने तालिबान को चेतावनी देते हुए पाकिस्तान पर भी गुस्सा जाहिर किया है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान की नई तालिबानी सरकार में अल्पसंख्यको को ना शामिल किये जाने से तजाकिस्तान भड़क उठा है। उसने तालिबान को चेतावनी देते हुए पाकिस्तान पर भी गुस्सा जाहिर किया है।


अफगानिस्तान में तालिबान राज में जिस तरह से अल्पसंख्यक समुदायों को नजरअंदाज किया गया है, उससे पड़ोसी तजाकिस्तान (ताजिकिस्तान) बहुत नाराज हो गया है। मध्य एशिया में भारत का रणनीतिक सहयोगी और अफगानिस्तान के पड़ोसियों में से एक ताजिकिस्तान ने काबुल में तालिबान सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इसकी वजह है कि तालिबान की सरकार में केवल पश्तून समुदाय की भागीदारी। 

तजाकिस्तान की आपत्ति इस बात को लेकर है कि यह तो केवल पश्तुनों की सरकार है, इसमें न तो ताजिक समुदाय को उचित भागीदारी मिली है और न तो हजारा को। तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने सख्त लहजे में तालिबान से सरकार में सभी अल्पसंख्यकों की भागीदारी के साथ अफगान में एक समावेशी सरकार लाने को कहा है। साथ ही नाम लिए बगैर पाकिस्तान को भी लपेटा है।

पिछले दो दशक से तजाकिस्तान पर राज कर रहे रहमोन ने का मानना है कि अफगानिस्तान की राजनीतिक समस्याओं को दूर करने के लिए सभी अल्पसंख्यकों की भागीदारी के साथ एक समावेशी सरकार बनाना आवश्यक है। 

दरअसल, तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार में अल्पसंख्यक समुदायों को बहुत ही कम जगह दी है। अफगान में नवनियुक्त 33 मंत्रियों में से 90 फीसदी मंत्री केवल पश्तून समुदाय के हैं, जबकि हजारा समुदाय का एक भी मंत्री नहीं है। ताजिक और उज्बेक लोगों को भी पर्याप्त प्रतिनिधत्व नहीं मिला है। इसी वजह से तजाकिस्तान तालिबान पर गुस्सा है। 

ताजिक राष्‍ट्रपति इमोमली रहमोन ने अपने अधिकारियों से देश (तजाकिस्तान) में कट्टरपंथियों के उभार और उनकी विचारधारा को फैलाने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई के लिए कहा है। इतना ही नहीं, ताजिक राष्ट्रपति ने नाम लिए बगैर पाकिस्तान पर ही हमला बोला है और कहा है कि पंजशीर घाटी में तालिबान की कब्जा करने की कोशिश को तीसरा देश (पाकिस्तान) मदद कर रहा है।

 खबरों की मानें तो पंजशीर में पाकिस्तान के स्पेशल फोर्सेस तालिबान की राह आसान कर रहे हैं। इतना ही हीं, तालिबान की ड्रोन से भी पाकिस्तान ने मदद की है। 


अफगान में ही हैं अहमद मसूद, जानिए- क्यों नहीं आ रहे सामने

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अहमद मसूद अभी भी अफगानिस्तान में हैं और वह तालिबान से निबटने के लिए काम कर रहे हैं।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने बेशक सरकार बना ली हो लेकिन पंजशीर अभी भी उसके लिए बहुत दूर है। पंजशीर के लड़ाके तगड़ी चुनौती दे रहे हैं। इस बीच खबर आई थी कि अहमद मसूद अफगानिस्तान छोड़कर किसी दूसरे देश भाग चुके हैं लेकिन यह खबर सही नहीं है। दरअसल, एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अहमद मसूद अभी भी अफगानिस्तान में हैं और वह तालिबान से निबटने के लिए काम कर रहे हैं।


ईरानी की न्यूज एजेंसी 'फार्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के तुर्की या किसी और देश भागने की अफवाहें झूठी हैं। मसूद अफगानिस्तान में ही किसी सुरक्षित ठिकाने पर मौजूद हैं।

तालिबान ने बीते हफ्ते ही यह ऐलान किया था कि अब तक अजेय रहे पंजशीर प्रांत पर भी उसने कब्जा कर लिया है। हालांकि, तालिबान से लोहा ले रही विद्रोही सेना नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट यानी एनआरएफ ने इस दावे को खारिज किया था। एनआरएफ का नेतृत्व अहमद मसूद और पूर्व अफगान उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह कर रहे हैं। सालेह ने खुद को अफगानिस्तान का केयरटेकर राष्ट्रपति भी घोषित किया था। 

बीते महीने 14 अगस्त को राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद ही तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण का ऐलान कर दिया था। हालांकि, पंजशीर घाटी पर अब तक उसका नियंत्रण नहीं हो सका था। वहीं, एनआरएफ का कहना था कि अभी भी वह पंजशीर के अहम इलाकों में मौजूद है और उनकी जंग जारी रहेगी। 

ताजिकिस्तान में अपदस्थ अफगान सरकार के राजदूत ने भी यह कहा था कि अहमद मसूद और अमरुल्लाह सालेह अफगानिस्तान से भागे नहीं है और उनकी सेना अभी भी तालिबान से लोहा ले रही है। राजदूत जाहिर अगबर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि वह सालेह से लगातार संपर्क में हैं और सुरक्षा कारणों की वजह से वे और रेजिस्टेंस लीडर्स किसी तरह के संवाद से दूर हैं। 


इस बीच अमरुल्लाह सालेह के भतीजे ने शनिवार को बताया कि तालिबान ने सालेह के भाई और उनके ड्राइवर को पंजशीर घाटी में मार गिराया है। उन्होंने बताया कि रोहुल्लाह सालेह अजीजी अपनी गाड़ी से कहीं जा रहे थे और तभी तालिबान लड़ाकों ने एक चेकपॉइंट पर उनकी गाड़ी रोकी और गोलियां बरसा दीं।


खुलासा: पाक ने की अफगान के खिलाफ तालिबान की मदद, मुल्ला बरादर के पासपोर्ट से खुली पोल

अब्दुल गनी बरादर और मुल्ला बरादर के पासपोर्ट और पहचान पत्र से यह बात साफ जाहिर हो गया है कि अफगान के खिलाफ पाकिस्तान ने तालिबान की जमकर मदद की थी।

काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के वो दावे सही साबित हो रहे हैं जिसमें वह पाकिस्तान पर तालिबान की मदद का आरोप लगा रहे थे। दरअसल, अब्दुल गनी बरादर और मुल्ला बरादर के पासपोर्ट और पहचान पत्र से यह बात साफ जाहिर हो गया है कि अफगान के खिलाफ पाकिस्तान ने तालिबान की जमकर मदद की थी।

बता दें कि अफगान में नवगठित तालिबान सरकार में उपप्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट और पहचान-पत्र सामने आया है। दोनों दस्तावेजों में उसका नाम मोहम्मद आरिफ आघा के रूप में दर्ज किया गया है। इससे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के काबुल पर कब्जे के अभियान में तालिबान को मदद देने की खबरों को एक बार फिर बल मिला है। इस तरह से यह साबित होता है कि तालिबान की अफगान की सत्ता में वापसी में पाकिस्तान ने जमकर मदद की है।

मुल्ला बरादर का पाकिस्तानी पहचान पत्र (संख्या : 42201-5292460-5) दस जुलाई 2014 को जारी किया गया था। इसमें उसका जन्म साल 1963 का बताया गया है। वहीं, पिता के नाम के कॉलम में सय्यद एम नजीर आघा लिखा है। यह पहचान-पत्र ताउम्र वैध है। पाकिस्तान के महापंजीयक ने बकायदा इस पर दस्तखत कर रखे हैं।

वहीं, मुल्ला बरादर के पाकिस्तानी पासपोर्ट की बात करें तो इसका नंबर ‘जीएफ680121’ है। यह भी दस जुलाई 2014 को जारी किया गया था।

पाकिस्तान पर लंबे अरसे से तालिबान को अफगान सुरक्षाबलों के खिलाफ अभियान में सैन्य, वित्तीय और खुफिया मदद मुहैया कराने के आरोप लगते आ रहे हैं। हालांकि, इस्लामाबाद ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें सिरे से खारिज किया है।

‘काबुल वॉचर्स’ का रिपोर्ट के मुताबिक, मुल्ला बरादर ने मुल्ला उमर के साथ मिलकर तालिबान की स्थापना की थी। वह पाकिस्तान के क्वेटा में रहता था और तालिबान की शूरा काउंसिल का सदस्य था। उसे मोहम्मद आरिफ आघा के नाम से भी जाना जाता था। अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों के साथ शांति समझौते के दौरान वह दोहा में शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनेकजई के साथ तालिबान के राजनीतिक मिशन की अगुवाई कर रहा था।


अमेरिका 9/11 आतंकी हमले की बरसी आज, अफगान में तालिबान ने टाला शपथ ग्रहण समारोह

काबुल/न्यूयॉर्क: अफगानिस्तान पर हथियारों के दम पर कब्जा जमाने के बाद आज तालिबानी सरकार का शपथग्रहण समारोह होना था और आज ही अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले की बरसी भी है। लिहाजा, तालिबान ने अब अपना इरादा बदल लिया है। रिपोर्ट की मानें तो तालिबान ने 9/11 आतंकी हमले की बरसी पर होने वाले अफगानिस्तान सरकार के शपथ-ग्रहण समारोह को रद्द कर दिया है। 


रूस की एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी नवगठित अंतरिम सरकार के शपथ-ग्रहण समारोह को सहयोगियों के दबाव के बाद रद्द कर दिया है।  बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि तालिबान की अंतरिम सरकार का शपथ ग्रहण 9/11 की 20वीं बरसी के दिन हो सकता है। 9/11 आतंकी हमला अमेरिका के इतिहास का काला दिन है, जिसमें करीब 3000 से अधिक लोगों की मौतें हो गई थीं।
तालिबान ने सरकार गठन से पहले चीन, तुर्की, पाकिस्तान, ईरान, कतर और भारत जैसे पड़ोसी देशों के साथ ही अमेरिका को भी शपथ ग्रहण में शामिल होने का न्योता दिया है।

तालिबान ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब अधिकतर देशों ने कह दिया है कि वे तालिबान को मान्यता देने में जल्दबाजी नहीं करेंगे। दो बार टालने के बाद तालिबान ने बीते मंगलवार को अंतरिम सरकार के गठन का ऐलान किया। हालांकि, रूस ने तालिबान के निमंत्रण को ठुकरा दिया है और कहा है कि वह शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होगा।

बता दें कि 20 साल पहले 2001 में अलकायदा के आतंकवादियों ने अमेरिका पर अब तक का सबसे भयानक हमला किया था। विमानों को हाईजैक करके आतंकवादियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंडर के ट्विन टावर और पेंटागन मुख्यालय से टकरा दिया था। इन हमलों में 3 हजार से अधिक लोग मारे गए थे। इसका बदला लेने के लिए ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैनिक अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान तालिबान को सत्ता से हटाया गया तो अलकायदा सहित कई आतंकी ठिकानों पर बमबारी की गई। 

दो दशक में अरबों डॉलर धन और हजारों सैनिकों की कुर्बानी के बावजूद अमेरिका तालिबान की जड़ें नहीं काट पाया। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से पहले ही तालिबान ने काबुल सहित पूरे देश पर कब्जा जमा लिया। अलकायदा और हक्कानी नेटवर्क सहित कई आतंकवादी संगठनों को अफगानिस्तान में एक बार फिर खुला मैदान मिल गया है, जहां से वह अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। 


तालिबान की अगवानी करने वाला रूस उसकी ताजपोशी में नहीं होगा शामिल, नहीं बताया कारण

स ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों मना किया, इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। वहीं कयासबाजियों का दौर तेज है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान शासन की अगवानी करने वाला रूस अब उसकी ताजपोशी से दूरी बनाकर रखेगा। क्रेमलिन स्थित रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। इससे पहले रूस के ऊपरी सदन के प्रवक्ता ने इस हफ्ते के शुरू में कहा था कि रूस के राजदूत स्तर के अधिकारी तालिबान सरकार के शपथग्रहण समारोह में हिस्सा लेंगे।

एक न्यूज एजेंसी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों मना किया, इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। वहीं कयासबाजियों का दौर तेज है। अनुमान लगाया जा रहा है कि तालिबान की अंतरिम सरकार का जो रूप स्वरूप है, उसने रूस को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।

बता दें कि तालिबान की अंतरिम सरकार में कई ऐसे नाम हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा वांटेड हैं। यहीं नहीं उनके नाम पर काफी बड़ा इनाम भी घोषित है। गौरतलब है कि तालिबान ने अपनी सरकार के शपथग्रहण में गिने-चुने देशों को ही आमंत्रित किया था। इसमें एक देश रूस भी था। 

यह भी बता दें कि तालिबान ने नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, चीन तुर्की, कतर, रूस, और ईरान को बुलावा भेजा था। सूत्रों का दावा था कि इन देशों से अच्छे संबंधों के आधार पर तालिबान ने इन्हें वरीयता दी है। हालांकि तत्काल रूप से किसी देश ने यहां पहुंचने के लिए हामी नहीं भरी थी। 


अफगानिस्तान: तालिबान का वीभत्स चेहरा एक बार फिर आया सामने, सालेह के भाई रोहुल्लाह को पीट-पीटकर मार डाला!

अमरुल्लाह लगातार तालिबान के खिलाफ बोलते और लड़ते आए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरुल्लाह सालेह के भाई रोहुल्लाह सालेह को तालिबान ने पंजशीर में बुरी तरह से टॉर्चर करने के बाद मार डाला है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करने बाद तालिबान की कायराना हरकतें जारी है। ताजा मामले में उसने अरुल्लाह सालेह के भाई रोहुल्लाह को पहले तो खूब टॉर्चर किया और फिर पीट-पीटकर मार डाला। 

बताते चलें कि अमरुल्लाह लगातार तालिबान के खिलाफ बोलते और लड़ते आए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरुल्लाह सालेह के भाई रोहुल्लाह सालेह को तालिबान ने पंजशीर में बुरी तरह से टॉर्चर करने के बाद मार डाला है। हालांकि तालिबान ने अब तक इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है। वहीं, दूसरी तरफ अमरुल्लाह सालेह ने अब तक इस मामले को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

अमरुल्लाह सालेह का जन्म पंजशीर में अक्टूबर 1972 में हुआ था। ताजिक मूल के अमरुल्लाह ने कम उम्र में ही अहमद शाह मसूद के तालिबान विरोधी आंदोलन को जॉइन कर लिया था। अमरुल्लाह सालेह निजी तौर पर तालिबान का दंश झेल चुके हैं। 1996 में तालिबानों ने उनकी बहन का अपहरण कर हत्या कर दी थी। 

सालेह राजनीति में आने से पहले जासूसी विभाग में रहे हैं। वह अफगानिस्तान खुफिया एजेंसी के प्रमुख रह चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में तालिबान ने ऊपर कई जानलेवा हमले किए हैं। सालेह मौजूदा वक्त में पंजशीर घाटी में हैं।

बता दें कि तालिबानियों को पंजशीर के लड़ाके कड़ी चुनौती दे रहे हैं। पंजशीर पर अभी तक तालिबान का कब्जा नहीं हो पाया है। हालांकि, तालिबान कई बार पंजशीर पर खुद के कब्जे की बात कहता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तालिबान के लिए पंजशीर बहुत दूर है।


अमेरिका व चीन के बीच रिश्तों की खटास होगी कम, 7 महीने में पहली बार बाइडन-चिनफिंग के बीच फोन पर हुई बात

व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडन ने चिनफिंग को यह संदेश दिया कि विश्व की दो बड़ी अर्थ व्यवस्थाएं रहते हुए दोनों देश प्रतिस्पर्धी रहें, मगर भविष्य में ऐसी कोई स्थिति न हो जहां दोनों देशों के बीच संघर्ष के हालात हो जाएं।

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने द्विपक्षीय रिश्तों की खटास को कम करने के इरादे से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से सात महीने में पहली बार फोन पर नब्बे मिनट तक बात की है। इसे लेकर व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडन ने चिनफिंग को यह संदेश दिया कि विश्व की दो बड़ी अर्थ व्यवस्थाएं रहते हुए दोनों देश प्रतिस्पर्धी रहें, मगर भविष्य में ऐसी कोई स्थिति न हो जहां दोनों देशों के बीच संघर्ष के हालात हो जाएं।

बाइडन के पदभार संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच कड़वाहट से भरे मुद्दों की कोई कमी नहीं है। चीन की ओर से किए जा रहे साइबर सुरक्षा उल्लंघन, कोरोनो वायरस महामारी से निपटने के तरीके से अमेरिका नाराज है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने चीनी व्यापार नियमों को 'जबरदस्ती और अनुचित' बताया था। हालांकि बाइडन की बातचीत का केंद्र तल्ख मुद्दों पर नहीं था। इसके बजाय उनके कार्यकाल में एनिश्चित रूप से एक मजबूत शुरुआत के लिए अमेरिका-चीन संबंधों के लिए आगे के रास्ते पर चर्चा करने पर केंद्रित था।


व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, 'दोनों नेताओं के बीच एक व्यापक, रणनीतिक चर्चा हुई जिसमें उन्होंने उन क्षेत्रों पर चर्चा की जहां हमारे हित मिलते हैं, और उन क्षेत्रों पर जहां हमारे हित, मूल्य और दृष्टिकोण भिन्न होते हैं।' अमेरिकी सरकार को उम्मीद है कि बढ़ते मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन और कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु संकट को रोकने सहित आपसी सरोकार के मुद्दों पर मिलकर काम कर सकते हैं।

वहीं, एएनआइ के मुताबिक शी चिनफिंग ने फोन पर कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे से ऐसे ही उलझते रहेंगे तो इससे समूचे विश्व को नुकसान होगा। लेकिन अगर दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे तो इससे विश्व का भी भला होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के आमंत्रण पर चिनफिंग ने खुश हुए कहा कि दोनों पक्षों को पर्यावरण परिवर्तन, महामारी से बचाव और विश्व के आर्थिक क्षति से उबरने की प्रक्रिया पर विचार करना चाहिए। इस प्रक्रिया में दोनों देशों को एक-दूसरे के मतभेदों का भी सम्मान बनाए रखना चाहिए।


अफगान में पाक ने जो किया उसके नतीजे वह जल्द भुगतेगा: ईरान के पूर्व राष्ट्रपति

उन्होंने यह भी कहा है कि पंजशीर के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के अधिकारी सीधे-सीधे तालिबान का साथ दे रहे हैं।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने में उसकी मदद करने वाले पाकिस्तान को जल्द ही नतीजें मिलेंगे और उसे भी इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। ऐसा कहना है ईरान के पूर्व राष्ट्रपति का। उन्होंने यह भी कहा है कि पंजशीर के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के अधिकारी सीधे-सीधे तालिबान का साथ दे रहे हैं।


महमूद अहमदीनेजाद ईरान के राष्ट्रपति रहे हैं। उन्होंने तालिबान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि पंजशीर की लड़ाई में पाकिस्तान के अधिकारी सीधे तौर पर शामिल हैं। 

उन्होंने पाकिस्तान को सलाह देते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में जो हुआ है उसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ने वाला है। इसका विस्तार पाकिस्तान तक हो सकता है। और जिन देशों ने इसे डिजायन किया है और समर्थक हैं उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि कोई यह न समझे कि मैं किसी अज्ञात भविष्य के बारे में बात कर रहा हूं। यह बहुत नजदीक है और जल्द ही होगा।

उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। और इसका सबसे खासा असर पाकिस्तान, भारत, चीन और ईरान जैसे देशों पर पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के हालात को सुलझाने के लिए भारत और ईरान को साथ आने की जरूरत है। राजनीतिक और मानवीय मुद्दों के ढांचे में इसे हल करने की योजना बनानी चाहिए।

वहीं, तालिबान सरकार को मान्यता देने को लेकर उन्होंने कहा है कि ऐसी सरकार को मान्यता देना जिसने हथियारों के बल पर सत्ता संभाली है और जिसकी कोई नीति नहीं है, यह शर्म की बात है। यह पूरे मानव समाज को नुकसान पहुंचाएगा।


तालिबानी फैसला: महिलाओं की जगह कैबिनेट में नहीं, उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए

अफगानिस्तान में तालिबान कैबिनेट के गठन हो चुका है लेकिन इसमें एक भी महिला को जगह नहीं दी गई है। इतना ही नहीं महिलाओं के प्रति तालिबान का वास्तविक चेहरा भी सामने आ चुका है। तालिबान ने कहा है कि महिलाओं की जगह कैबिनेट में नहीं है उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान कैबिनेट के गठन हो चुका है लेकिन इसमें एक भी महिला को जगह नहीं दी गई है। इतना ही नहीं महिलाओं के प्रति तालिबान का वास्तविक चेहरा भी सामने आ चुका है। तालिबान ने कहा है कि महिलाओं की जगह कैबिनेट में नहीं है उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए।


 अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। तालिबान के प्रवक्ता सैयद जकीरूल्लाह हाशमी ने कहा है कि महिलाओं को बच्चा पैदा करना चाहिए। उनका कैबिनेट में होना जरुरी नहीं है। हाल ही में तालिबान ने अपनी कैबिनेट बनाई है। इस कैबिनेट में 33 लोगों को शामिल किया गया है, लेकिन किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है। 

तालिबानी प्रवक्ता ने अब महिलाओं को लेकर कहा है कि एक महिला मंत्री नहीं बन सकती है। यह ऐसा है जैसे उसके गर्दन पर कोई चीज रख देना जिसे वो नहीं उठा सकती है। महिलाओं के लिए कैबिनेट में होना जरुरी नहीं है। उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। महिला प्रदर्शनकारी अफगानिस्तान की सभी महिलाओं का प्रतिधिनत्व नहीं कर रही हैं। 

अफगानिस्तान में अलग-अलग जगहों पर अपने अधिकार की मांग को लेकर महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। तालिबान द्वारा इन महिलाओं के साथ क्रूरता किये जाने की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। 

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली महिलाएं उनकी बंदूकों से डरे बिना सड़कों पर उतर रही हैं। इधर तालिबान सरकार के आंतरिक(गृह) मंत्रालय ने अफगानिस्तान में कई दिनों से जारी प्रदर्शनों को समाप्त कराने के लिए शासनादेश जारी किया है। 
     
आंतरिक मंत्री ने देश में सभी तरह के प्रदर्शनों को समाप्त कराने के लिए यह आदेश जारी किया है जिसके तहत प्रदर्शनकारियों को किसी भी तरह का प्रदर्शन करने के लिए पूर्व में अनुमति लेनी होगी। इसके अनुसार उन्हें प्रदर्शन में लगने वाले नारों और बैनरों के लिए भी पहले ही मंजूरी लेनी होगी। 

इस बात की संभावना बहुत कम है कि देश के कट्टरपंथी इस्लामी शासकों से अपने अधिकारों की मांग को लेकर लगभग रोजाना हो रहे प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही महिलाओं को नये नियमों के तहत प्रदर्शन करने की इजाजत होगी। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ''सभी नागरिकों के लिए घोषणा की जाती है कि वे मौजूदा वक्त में किसी तरह का प्रदर्शन किसी भी नाम के तहत करने का प्रयास न करें।''

सोशल मीडिया पर इस तरह के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां तालिबान के लड़ाकों द्वारा महिलाओं को पीटा जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तालिबान के लड़ाकों ने महिलाओं और पत्रकारों को डंडों और रायफल की बट से पीटा है। साथ ही कई पत्रकारों को गिरफ्तार कर उनकी पिटाई की है। 

तालिबान ने महिलाओं पर कपड़े पहनने, स्कूलों में लड़के-लड़कियों को एक साथ नहीं पढ़ने, ऑफिस में काम नहीं करने समेत कई अन्य चीजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

इयसको लेकर काबुल समेत अन्य शहरों में महिलाएं तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाएं सरकार में हिस्सेदारी की मांग कर रही है।


अब AK-47 बढ़ाएगी तालिबान के अफगान की इकॉनमी?, 'बंदूकधारी' हाजी मोहम्द को बनाया गया रिजर्व बैंक का मुखिया

अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक 'दा अफगानिस्तान बैंक' (DAB) के बंदूकधारी चीफ हाजी मोहम्मद इदरिस की तस्वीर भी वायरल हुई है। इसमें वह दफ्तर में बैठकर लैपटॉप चलाते दिख रहे हैं तो टेबल पर बंदूक भी रखा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबान ने किस तरह से कब्जा किया इसे पूरी दुनिया ने देख। रही सही कसर तालिबान के कैबिनेट में टॉप मोस्ट वांटेड आतंकियों को शामिल करके तालिबान द्वारा पूरी कर दी गई। पीएम, डीप्टी पीएम, गृहमंत्री, रक्षामंत्री समेत कई टॉप आतंकी अब अफगानिस्तान में माननीय बन चुके हैं। वहीं अब अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक यानि 'दा अफगानिस्तान बैंक' का चीफ भी एक बंदूकधारी को बनाया गया है।

तालिबानी कैबिनेट के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र की कालीसूची में नामित आतंकवादी हैं। इस बीच अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक 'दा अफगानिस्तान बैंक' (DAB) के बंदूकधारी चीफ हाजी मोहम्मद इदरिस की तस्वीर भी वायरल हुई है। इसमें वह दफ्तर में बैठकर लैपटॉप चलाते दिख रहे हैं तो टेबल पर बंदूक भी रखा है। 

हाल ही में तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इदरिस को डीएबी का मुखिया बनाए जाने की घोषणा की थी। भारत के रिजर्व बैंक की तरह डीएबी भी अफगानिस्तान का केंद्रीय बैंक है और बैंकिंग सेक्टर के साथ अर्थव्यवस्था भी काफी हद तक इसकी नीतियों पर निर्भर करती है।

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक ट्वीट में कहा था कि हाजी मोहम्मद इदरिस को "सरकारी संस्थानों और बैंकिंग मुद्दों को व्यवस्थित करने और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए" डीएबी का कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया गया है। हाजी मोहम्मद इदरिस अफगानिस्तान को जौजान का रहने वाला है और तालिबान के आर्थिक आयोग का प्रमुख रहा है। 

बताते चलें कि चीन और पाकिस्तान जैसे चंद मुल्कों को छोड़कर अधिकतर देशों ने अफगानिस्तान को आर्थिक मदद बंद कर दी है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अधिकतर बैंक बंद हैं तो लोगों को कैश की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जरूरी वस्तुओं की किल्लत की वजह से महंगाई आसमान पर जा चुकी है।


अफगान में तालिबान की सरकार लेकिन बड़ा सवाल-कहां गायब है तालिबानी सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा?

सवाल यह है कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा आखिर कहां है। तालिबान बार बार ये दावा कर रहा है कि अखुंदजादा जल्द ही सामने आना वाला है, लेकिन सरकार का ऐलान होने के बाद भी उसके नाम से तालिबान ने सिर्फ एक लिखित संदेश जारी किया है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान कैबिनेट का गठन हो गया है लेकिन अभी भी उसका सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा गायब है।  दरअसल, तालिबान ने हिबतुल्लाह अखुंदजादा को अपना सुप्रीम लीडर चुना है। लेकिन सवाल यह है कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा आखिर कहां है। तालिबान बार बार ये दावा कर रहा है कि अखुंदजादा जल्द ही सामने आना वाला है, लेकिन सरकार का ऐलान होने के बाद भी उसके नाम से तालिबान ने सिर्फ एक लिखित संदेश जारी किया है।

तालिबान की ओर से पहली बार आए उसके सुप्रीम लीडर के संदेश में न तो कहीं अखुंदजादा के दस्तखत हैं और न ही कहीं कोई मुहर लगी है। बस आखिर में उसका नाम जरूर टाइप किया हुआ है। हिबतुल्लाह अखुंदजादा तालिबान का सुप्रीम लीडर है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार बनने के बाद भी उसका सामने न आना कई सवाल खड़े कर रहा है।

सवाल इसलिए और भी गंभी हो जा रहे हैं क्योंकि अखुंदजादा के बारे में तालिबान प्रवक्ताओं से कई बार पहले भी सवाल हो चुके हैं और हर बार उनका जवाब यही होता है कि वो जल्द ही सामने आने वाले है। तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि हेबतुल्लाह अखुंदजादा कंधार में हैं और वो शुरु से कंधार में ही रह रहे हैं। बहुत जल्द वो आप सबके सामने भी आएंगे। लेकिन कब सामने आएंगे इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी जाती।

वैसे तो लिबान कई बार अखुंदजादा के बारे में इस तरह के दावे और वादे कर चुका है लेकिन सरकार के ऐलान के वक्त और उसके बाद भी उसका सामने न आना, उन कयासों को मजबूत कर देता है। जो अब तक अखुंदजादा के बारे में किए जा रहे थे।

हालांकि, तालिबान का यह भी इतिहास रहा है कि वह अपने सुप्रीम लीडर को मिस्ट्री बनाकर रखता है। लेकिन वो जंग का दौर था, अब तालिबान की सरकार बनने और उनके नेताओं के दावों के बाद भी अगर वो सामने नहीं आ रहा है, तो साफ है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल जारी है और इसे लेकर कई थ्योरी सामने आ रही है।


फिलहाल, अखुंदजादा को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इनमें से मुख्य रूप से यह बात सामने आ रही है कि अखुंदजादा को शायद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने अपने कब्जे में ले रखा है। क्योंकि, अफगान में तालिबानी सरकार के गठन में आईएसआई ने महत्तवपूर्ण भूमिका आदा की है। आखिरी बार उसे पेशावर में देखा गया था और उसके पाकिस्तान सेना के अस्पताल में भर्ती होने की चर्चा है। यह भी खबरें मिल रही है कि वह कोरोना से ग्रसित है। अब ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अखुंदजादा आईएसआई के इसारे पर काम कर रहा है और तालिबान वही काम अफगानिस्तान में करेगा जो उसके आका पाकिस्तान द्वारा इस्लामाबाद से आदेशित किया जाएगा।


अफागानिस्तान: सच दिखाने पर तालिबान की कायराना हरकत, पत्रकारों को पीट-पीटकर किया लहुलूहान

अफगानिस्तान के मामलों में पाकिस्तानी हस्तक्षेप के खिलाफ काबुल में हुए विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों पर तालिबान का कहर टूटा है और उसने न सिर्फ कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया, बल्कि हिरासत में उन्हें कठोर यातनाएं भी दीं और बुरी तरह पीटा।

काबुल: तालिबान दुनिया से किया अपना वादा अब लगातार तोड़ता जा रहा है। पहले तो महिलाओं की आजादी छीन ली और अब उन पत्रकारों पर हमले कर रहा है और उनके साथ ज्यादिती कर रहा है जो उसके कारनामों को दुनिया के सामने ला रहे हैं। ताजा मामले में तालिबानी आतंकियों द्वारा दो पत्रकारों को मार-मारकर लहुलूहान कर दिया है जिन्होंने उसके खिलाफ सच्चाई दिखाई थी।


अफगान में तालिबान राज में अब सच दिखाना पत्रकारों के लिए सजा हो गया है। पाकिस्तान ने तालिबान की किस कदर मदद की है, यह किसी से छिपी नहीं है, मगर तालिबान नहीं चाहता कि पत्रकार बिरादरी के लोग इस पर से पर्दा हटाएं। यही वजह है कि अफगानिस्तान के मामलों में पाकिस्तानी हस्तक्षेप के खिलाफ काबुल में हुए विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों पर तालिबान का कहर टूटा है और  उसने न सिर्फ कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया, बल्कि हिरासत में उन्हें कठोर यातनाएं भी दीं और बुरी तरह पीटा।

तालिबान द्वारा दो पत्रकारों की पिटाई की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। अफगानिस्तान को कवर करने वाले द न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस तस्वीर को शेयर किया है, जो तालिबानी जुल्म की कहानी बयां कर रही है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कल काबुल में दो पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया और बुरी तरह से पीटा गया है। 

लॉस एंजलिस के पत्रकार मरकस याम ने ट्वीट कर दावा किया कि तालिबानी जुल्म के शिकार ये दोनों अफगानी पत्रकार इटिलाट्रोज के रिपोर्टर हैं, जिनका नाम है नेमत नकदी और ताकी दरयाबी। महिलाओं के प्रदर्शन को कवर करने के दौरान इन्हें हिरासत में लिया गया और तालिबानी हुकूमत द्वारा बेरहमी से पीटा गया। इन्होंने अपने ट्वीट में एक हैशटैग का भी इस्तेमाल किया है- जर्नलिज्म इज नॉट अ क्राइम।


बताते चलें कि काबुल में मंगलवार को रैली को तितर-बितर करने के लिए तालिबान लड़ाकों ने गोलीबारी की और प्रदर्शन को कवर कर रहे कई अफगान पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया था।  काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के सामने अफगानिस्तान के आंतरिक मामले में पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, खासतौर पर इस्लामाबाद द्वारा पंजशीर में तालिबान विरोधी लड़ाकों के खिलाफ तालिबान की कथित मदद के विरोध में। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए गए हैं जिनमें पत्रकारों को रिहा करने की मांग की गई है। जिन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा किया गया उनमें से एक अफगान पत्रकार ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उसे तालिबान ने सजा दी। 

सुरक्षा कारणों से पहचान गोपनीय रखते हुए पत्रकार ने बताया, 'उन्होंने (तालिबान ने) मुझे जमीन पर नाक रगड़ने और प्रदर्शन को कवर करने के लिए माफी मांगने पर मजबूर किया।

उन्होंने बताया, 'अफगानिस्तान में पत्रकारिता करना कठिन होता जा रहा है।' अफगानिस्तान के टोलो न्यूज चैनल ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में उनका कैमरामैन वाहिद अहमदी भी शामिल हैं।


दुनियाभर में अफगान के राजदूतों ने की तालिबान से बगावत, नई सरकार और नए झंडे को मानने से इन्कार

सभी दुतावासों के जरिए जारी साझा बयान में कहा गया है कि तालिबान सरकार गैर-संवैधानिक है और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

काबुल: बंदूकों के दम पर सत्ता हासिल करने के बाद बेशक तालिबान ने अफगानिस्तान में सरकार का गठन कर लिया है लेकिन अब उसे दुनियाभर के अफगानी दूतावास के राजदूतों का विरोध झेलना पड़ रहा है। दरअसल, राजदूतों ने नई सरकार और नए झंडे को स्वीकार करने से मना कर  दिया है।

 मिली जानकारी के मुताबिक, पिछली गनी सरकार के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी करके ऐलान किया गया कि दुनिया भर में मौजूद सभी अफगानी राजदूत पिछली अफगानी सरकार को ही मानते हुए काम करते रहेंगे और नई तालिबानी सरकार को स्वीकार नहीं करते। सभी दुतावासों के जरिए जारी साझा बयान में कहा गया है कि तालिबान सरकार गैर-संवैधानिक है और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि नई तालिबानी सरकार ने औरतों के हक का भी हनन किया है। लिहाजा वो तालिबानी सरकार को मानने से इनकार करते हैं। इस बयान में बगावत के ऐलान के साथ ही ये भी साफ कर दिया गया है कि सभी मौजूदा अफगानी राजदूत अपने-अपने दुतावासों में तालिबानी नहीं बल्कि पुराना झंडा ही इस्तेमाल करते रहेंगे।


तालिबान के जरिए अफगानिस्तान को दिए गए नए नाम इस्लामिक अमिरात ऑफ अफगानिस्तान को भी मानने से साफ इनकार कर दिया है। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक पिछली अफगान सरकार के सभी राजदूत हामिद करजई और डॉ. अब्दुल्ला के लगातार संपर्क में थे। लिहाजा आज इस बगावत से साफ है कि भले ही करजई और डॉ. अब्दुल्ला ने औपचारिक तौर पर तालिबान की नई सरकार का विरोध नहीं किया हो लेकिन अब बिल्कुल साफ है कि वो इससे नाखुश हैं और ये विद्रोह संभवतः उन्हीं के इशारे पर हुआ है।


तालिबान पर मेहरबान चीन, 31 मिलियन डॉलर के पैकेज का किया ऐलान, पाकिस्तान ने दुनिया से की ये अपील

चीन ने अफगानिस्तान को यह मदद ऐसे समय पर दी है जब तालिबान शासन के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती है तो देश खाद्य संकट का सामना कर रहा है।

काबुल/बीजिंग: अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होते ही सबसे पहले उसके साथ 'दोस्ताना रिश्ते' की बात कहने वाले चीन ने अब उसके लिए अपना खजाना खोल दिया है। 

चीन ने बुधवार को अफगानिस्तान के लिए 200 मिलियन युआन (31 मिलियन यूएस डॉलर) मूल्य के अनाज, सर्दियों के सामान और कोरोना वायरस वैक्सीन की मदद देने का ऐलान किया है। 

चीन ने अफगानिस्तान को यह मदद ऐसे समय पर दी है जब तालिबान शासन के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती है तो देश खाद्य संकट का सामना कर रहा है। 


चीन पहला देश है जिसने 15 अगस्त को काबुल के साथ पूरे देश पर तालिबान का कब्जा होने के बाद अफगानिस्तान के लिए मदद का ऐलान किया है। चीन ने तालिबान की अंतरिम सरकार का समर्थन करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था बनाने और अराजकता को खत्म करने के लिए जरूरी कद है। 


अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल मीटिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि उनका देश अफगानिस्तान को 200 मिलियन युआन मूल्य के अनाज, सर्दियों की आपूर्ति, वैक्सीन और दवाइयां देगा। वांग ने कहा कि चीन ने अफगानिस्तान को पहले बैच में 30 लाख कोरोना टीके देगा। वांग ने कहा कि चीन अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करेगा। 


पाकिस्तान ने दुनिया से की ये अपील


पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की मदद का ऐलान करते हुए कहा कि यहां मानवीय संकट और आर्थिक संकट को रोकने की जरूरत है। कुरैशी ने चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक में यह बात कही।


अफगान में तालिबान की सरकार अवैध, उसके समानांतर सरकार बनाएंगे: अहमद मसूद

पंजशीर घाटी में तालिबान के खिलाफ विद्रोही गुट का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद ने तालिबान के समानांतर सरकार बनाने का ऐलान कर दिया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब देश में अपनी सरकार बना ली है। लेकिन अहमद मसूद ने एक बार फिर से दहाड़ भरी है और उन्होंने अफगान पर तालिबान की सरकार को अवैध बताते हुए कहा कि वह उसके समानांतर सरकार बनाएंगे। पंजशीर घाटी  में तालिबान के खिलाफ विद्रोही गुट का नेतृत्व कर रहे  अहमद मसूद ने तालिबान के समानांतर सरकार बनाने का ऐलान कर दिया है। विद्रोही गुट की तरफ से कहा गया है कि हम यहां एक वैध और ट्रांजिशनल प्रजातांत्रिक सरकार बनाएंगे। यह वैध सरकार लोगों के मत से बनेगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकार की जाएगी। 

रजिस्टेंस फ्रंट की तरफ से कहा गया है कि तालिबान की यह अवैध सरकार अफगानिस्तान के लोगों के लिए कतई ठीक नहीं और इससे यहां अस्थिरता आएगी। यह अफगानिस्तान की शांति और सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। इससे पहले अहमद मसूद ने अपना एक वीडियो भी जारी किया था और इस वीडियो में उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों से तालिबान के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए कहा था। 

रजिस्टेंस फोर्स ने ग्लोबल एजेंसी यूएन, यूएनएचआरसी, ईयू और अन्य संगठनों से अपील की है कि वो तालिबान को सपोर्ट ना करें। इससे पहले तालिबान ने सोमवार को कहा था कि उसने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, विद्रोही गुट इसे गलत बता रहे हैं और कह रहे हैं कि पंजशीर घाटी पर तालिबान का पूरी तरह से कब्जा नहीं हुआ है। 


फ्रांस की नामी सीमेंट कंपनी ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से की थी डेढ़ करोड़ डॉलर की डील, कोर्ट ने माना दोषी

दुनिया के लिए आतंक का पर्याय रहे खुंखार आतंकी संगठन इस्लामिट स्टेट से फ्रांस की एक नामी सीमेंट कंपनी ने डेढ़ करोड़ डॉलर की डील की थी। अब इस मामले में कोर्ट ने सीमेंट कंपनी को दोषी करार दिया है।

पेरिस: दुनिया के लिए आतंक का पर्याय रहे खुंखार आतंकी संगठन इस्लामिट स्टेट से फ्रांस की एक नामी सीमेंट कंपनी ने डेढ़ करोड़ डॉलर की डील की थी। अब इस मामले में कोर्ट ने सीमेंट कंपनी को दोषी करार दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, नामी सीमेंट कंपनी लाफार्ज पर मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होने के आरोपों को सही पाया गया है। सीमेंट कंपनी लाफार्ज ने ISIS समेत कई सशस्त्र समूहों को सीरिया में डेढ़ करोड़ अमेरिकी डॉलर दिए थे। इस मामले में कंपनी पर मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होने के आरोप को सही पाया गया है। फ्रांस की शीर्ष अदालत ने निचली कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें लाफार्ज पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया गया था। 

एक इंटरनेशनल न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक लाफार्ज पर खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट सहित कई समूहों को लगभग 1.53 करोड़ डॉलर का भुगतान करने का आरोप है ताकि देश के युद्ध के शुरुआती वर्षों में उत्तरी सीरिया में कंपनी की सीमेंट फैक्ट्री को चालू रखा जा सके। उसके इस काम को मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होना माना गया है।

बता दें कि लाफार्ज का 2015 में स्विस समूह होलसीम में विलय हो गया था और 2011 में उपजे संघर्ष के बाद सीरिया में एक कारखाने को चालू रखने के अपने प्रयासों के लिए कंपनी के खिलाफ जांच की जा रही है। अब इस मामले में शीर्ष अदालत के फैसले से कंपनी को झटका लगा है। यही नहीं इसने कारोबारी जगत की छवि को भी धूमिल करने का काम किया है।


UN में 'आतंक के आका' पाकिस्तान ने फिर अलापा 'कश्मीर राग', भारत ने लगाई लताड़, कहा-'हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देना तुम्हारा काम'

एक बार फिर से भारत ने पाकिस्तान द्वारा यूएन में कश्मीर राग अलापने पर उसे जमकर लताड़ लगाई है। साथ ही भारत ने कहा है कि पाकिस्तान का काम हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

नई दिल्ली: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कई बार संयुक्त राष्ट्र में भारत द्वारा बेइज्जत किया जा चुका है लेकिन एक कहावत है कि 'कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती' और पाकिस्तान इस कहावत को चरित्रार्थ करता रहता है। एक बार फिर से भारत ने पाकिस्तान द्वारा यूएन में कश्मीर राग अलापने पर उसे जमकर लताड़ लगाई है। साथ ही भारत ने कहा है कि पाकिस्तान का काम हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की आलोचना करते हुए भारत ने कहा कि पाक अपने घर और अपनी सीमाओं के पार हिंसा की संस्कृति को लगातार बढ़ावा दे रहा है। भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल करने को लेकर भी भारत ने इस्लामाबाद को लताड़ लगाई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि शांति की संस्कृति केवल एक अमूर्त मूल्य या सिद्धांत नहीं है जिस पर केवल सम्मेलनों में चर्चा हो और इसका जश्न मनाया जाए, बल्कि सदस्य देशों के बीच वैश्विक संबंधों में सक्रिय रूप से इस पर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकियों को सपोर्ट करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मंगलवार को शांति की संस्कृति पर उच्च स्तरीय मंच के दौरान अपने वक्तव्य में भारत ने ये बातें कहीं।

जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर विषय के इतर भारत के खिलाफ जहर उगला और कश्मीर मसले को उठाया तो जवाबी हमले में भारत की विदिशा मैत्रा ने कहा कि आज हमने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल द्वारा भारत के खिलाफ हेट स्पीच के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल करने का एक और प्रयास देखा। उन्होंने कहा कि चाहे हो घर हो या सीमा पार, पाकिस्तान लगातार 'हिंसा की संस्कृति' को बढ़ावा दे रहा है। हम ऐसे सभी प्रयासों को खारिज और निंदा करते हैं।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में जब पाकिस्तान को बोलने का मौका मिला तो उसने उलुल-जुलूल बकना शुरू कर दिया और भारत के खिलाफ जहर उगलने लगा। इस्लामाबाद के दूत मुनीर अकरम ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाया और दिवंगत पाकिस्तान समर्थक नेता सैयद अली शाह गिलानी के बारे में महासभा हॉल में अपनी टिप्पणी की, जो पूरी तरह फोरम के विषय पर केंद्रीत न होकर से भारत पर केंद्रित था। इसके बाद भारत ने जवाबी हमला किया और पाकिस्तान की लताड़ा। 

मैत्रा ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आतंकवाद, जो असहिष्णुता और हिंसा की अभिव्यक्ति है, सभी धर्मों और संस्कृतियों का विरोधी है। उन्होंने कहा कि दुनिया को उन आतंकवादियों से चिंतित होना चाहिए जो इन कृत्यों को सही ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं और जो इसमें उन आतंकियों समर्थन करते हैं। यह रेखांकित करते हुए कि भारत मानवता, लोकतंत्र और अहिंसा के संदेश को फैलाना जारी रखेगा।

उन्होंने आगे कहा कि भारत विशेष रूप से धर्म के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा का आधार बनाने के लिए ऑब्जेक्टिविटी, गैर-चयनात्मकता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को लागू करने के अपने आह्वान को दोहराता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसे मुद्दों पर सेलेक्टिव होने से बचना चाहिए जो शांति की संस्कृति में बाधा डालते हैं।


इंडोनेशिया: जेल में आग लगने से 40 से ज्यादा कैदियों की मौत, 50 झुलसे

इंडोनेशिया की एक जेल में अचानक आग लग जाने से 40 से ज्यादा कैदियों की मौत हो गई है और 50 से भी ज्यादा कैदियों के आग में झुलसने की खबर है। झुलसे कैदियों को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

नई दिल्ली: इंडोनेशिया की एक जेल में अचानक आग लग जाने से 40 से ज्यादा कैदियों की मौत हो गई है और 50 से भी ज्यादा कैदियों के आग में झुलसने की खबर है। झुलसे कैदियों को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इंडोनेशिया की राजधानी के निकट बुधवार तड़के एक जेल में आग लगने से कम से कम 41 कैदियों की मौत हो गई, वहीं 39 अन्य झुलस गए। न्याय मंत्रालय के सुधार विभाग के प्रवक्ता रिका अपरिआंती ने कहा कि यह आग राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित तांगेरांग जेल के 'सी ब्लॉक में लगी। इस जेल में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अपराधियों को रखा जाता है। अधिकारी आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं।


उन्होंने बताया कि इस जेल की क्षमता 1225 कैदियों को रखने की है लेकिन यहां दो हजार से अधिक कैदियों को रखा गया था। आग लगने के वक्त जेल के 'सी ब्लॉक में 122 कैदी थे। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सैनिकों को आग बुझाने के काम में लगाया गया।

मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका और सभी कैदियों को अस्पताल पहुंचाया गया। बता दें कि जेल से भागने के लिए और दंगों के कारण आग लगना इंडोनेशिया में आम है, जेलों में भीड़भाड़ एक समस्या बन गई है जो खराब फंडिंग से जूझ रही हैं।


अफगानिस्तान: तालिबानी कैबिनेट में खुंखार आतंकियों की भरमार, कोई करोड़ों का इनामी तो कोई है यूएन की लिस्ट में, बड़ा सवाल- दुनिया कैसे देगी मान्यता ?

अफगानिस्तान में तालिबानी कैबिनेट का गठन हो चुका है। लेकिन कैबिनेट में करोड़ों को इनामी आतंकियों के साथ-साथ ऐसे भी आतंकियों को जगह दी गई है जिन्हें यूएन ने आतंकी घोषित कर रखा है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबानी कैबिनेट का गठन हो चुका है। लेकिन कैबिनेट में करोड़ों को इनामी आतंकियों के साथ-साथ ऐसे भी आतंकियों को जगह दी गई है जिन्हें यूएन ने आतंकी घोषित कर रखा है। 

तालिबान की नई सरकार में मुल्ला हसन अखुंद को अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। दो लोगों को अंतरिम उपप्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, इनमें एक नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का है, जिन्होंने अमेरिका के साथ हुई बातचीत का नेतृत्व किया और अफगानिस्तान से अमेरिका की पूरी तरह विदाई से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए।

तालिबान के प्रवक्ता द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, आमिर खान मुत्तकी को अंतरिम विदेश मंत्री बनाया गया है, जबकि भारतीय सैन्य अकादमी से पढ़ चुके अब्बास स्टानकजई को विदेश उप मंत्री नियुक्त किया गया है।

वहीं, कुख्यात हक्कानी नेटवर्क का नेतृत्व करने वाले सिराजुद्दीन हक्कानी को अंतरिम गृह मंत्री बनाया गया है जबकि मुल्ला याकूब को अंतरिम रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। मुल्ला याकूब के पिता मुल्ला मोहम्मद उमर ने तालिबान की स्थापना की थी। 

5 खुंखार आतंकियों को कैबिनेट में जगह

तालिबान सरकार में कम से कम पांच ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें यूएन यानी संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी घोषित कर रखा है। इसके अलावा, तालिबान ने अब उसी सिराजुद्दीन हक्कानी को अफगानिस्तान का नया गृहमंत्री बना दिया है, जो मोस्ट वांटेड आतंकवादी है, जिसके सिर पर अमेरिका ने इनाम घोषित कर रखा है।

सिराजुद्दीन हक्कानी का नाता पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके से है। खूंखार आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क को चलाने वाले सिराजुद्दीन हक्कानी के बारे में कहा जाता है कि वो नॉर्थ वजीरिस्तान के मिराम शाह इलाके में रहता है। हक्कानी नेटवर्क के इस शीर्ष आतंकवादी का नाम FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में अभी भी शामिल है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आतंकियों से भरी इस सरकार को दुनिया कैसे मान्यता देगी।


ये हैं खुंखार आतंकी जिनसे सजी है तालिबानी कैबिनेट

मुल्ला हसन अखुंद (प्रधानमंत्री)

  • 'रहबरी शूरा' के प्रमुख के रूप में 20 साल तक काम किया और मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदजादा के करीब माने जाता है
  • 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबान की पिछली सरकार के दौरान विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था
  • तालिबान के जन्मस्थान कंधार का रहने वाला है
  • अफगानिस्तान में तालिबान सरकार का मुखिया बना मुल्ला हसन अखुंद संयुक्त राष्ट के वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल है
  • संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध रिपोर्ट ने अंखुद को उमर के करीबी सहयोगी और राजनीतिक सलाहकार के रूप में डिस्क्राइब किया है


मुल्ला बरादर (उप प्रधानमंत्री)

  • 1994 में तालिबान के गठन में वह भी शामिल था
  • 1996 से 2001 तक जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर राज किया, तब मुल्ला बरादर ने अहम भूमिका निभाई थी और रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था
  • बरादर को कभी मुल्ला उमर का करीबी माना जाता था
  • संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध नोटिस (यूएन सैंक्शन नोटिस) में कहा गया है कि तालिबान सरकार के पतन के बाद बरादर ने गठबंधन बलों पर हमलों के लिए जिम्मेदार एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में कार्य किया

अब्दुल सलाम हनाफी (दूसरा उप-प्रधानमंत्री)

  • मई 2007 में उत्तरी अफगानिस्तान के जॉज़ुजान प्रांत का प्रभारी बनाया गया था
  • मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संयुक्त राष्ट्र ने उस पर प्रतिबंध लगा रखा है
  • माना जाता है कि अब्दुल सलाम हनाफी ही यूएस-अफगानिस्तान शांति समझौते की कुंजी था
  • मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल रहा है


सिराजुद्दीन हक्कानी (गृह मंत्री)

  • हक्कानी का नाम वैश्विक स्तर के आतंकवादियों की सूची में हैं
  • अमेरिका ने उसके बारे में सूचना पर 50 लाख डॉलर (73 करोड़ 36 लाख और 65 हज़ार) का इनाम घोषित कर रखा है
  • हक्कानी नेटवर्क के इस शीर्ष आतंकवादी का नाम FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में अभी भी शामिल है
  • सिराजुद्दीन हक्कानी के कारनामों की लिस्ट भी काफी बड़ी है


आमिर खान मुतक्की (विदेश मंत्री)

  • मुतक्की खुद को हेलमंद का रहने वाला बताता है
  • पिछली तालिबान सरकार में शिक्षा मंत्री के साथ-साथ संस्कृति और सूचना मंत्री कार्यभार संभाला था
  • मुतक्की को बाद में कतर भेजा गया, उसे शांति आयोग और वार्ता दल का सदस्य नियुक्त किया गया
  • उसने अमेरिका के साथ बातचीत की


'आतंक के आका' पाकिस्तान के 'कंट्रोल' में रहेगा तालिबान, ISI चीफ के दौरे के बाद तय हुआ पीएम का नाम

बेशक अफगानिस्तान की हुकूमत तालिबान करेगा लेकिन उसका पूरा रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान के पास ही होगा। यानी तालिबान के अफगान का पीएम काबुल में जरूर बैठेगा लेकिन उसे वही करना होगा जो उसका इस्लामाबाद में बैठा आका कहेगा।

इस्लामाबाद/काबुल: जिस बात की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी आखिरकार वही होने जा रहा है। बेशक अफगानिस्तान की हुकूमत तालिबान करेगा लेकिन उसका पूरा रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान के पास ही होगा। यानी तालिबान के अफगान का पीएम काबुल में जरूर बैठेगा लेकिन उसे वही करना होगा जो उसका इस्लामाबाद में बैठा आका कहेगा।

तालिबान सरकार के प्रमुख के रूप में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद का नाम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद के पिछले हफ्ते अचानक काबुल आने के कुछ दिनों बाद आया है। 

आईएसआई प्रमुख ने अपनी यात्रा के दौरान मुल्ला बरादर और हिज्ब-ए-इस्लामी नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार से मुलाकात की थी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि हमीद के कहने पर ही पीएम पद के लिए नाम तय हुआ है।

उस वक्त मीडिया रिपोर्ट में यह कहा गया था कि हमीद ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए काबुल का दौरा किया था। उधर, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने एक संवाददाता सम्मेलन में सोमवार को कहा था कि जल्द ही नई सरकार की घोषणा की जाएगी। हालांकि उन्होंने सरकार के ऐलान को लेकर तारीख के बारे में नहीं बताया।

मुजाहिद ने इस बात से भी इनकार किया कि नई सरकार के गठन को लेकर तालिबान नेतृत्व के भीतर कोई मतभेद है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अंतिम निर्णय ले लिए गए हैं, हम अब तकनीकी मुद्दों पर काम कर रहे हैं। हालांकि इससे पहले मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का नाम अफगानिस्तान में नई सरकार के प्रमुख नेता के रूप में सामने आया था। 

बरादार तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के करीबी दोस्त थे। जब तालिबान ने आखिरी बार अफगानिस्तान पर शासन किया था तब बरादर ने उप रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था।


अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार, मोहम्मद हसन बने पीएम, अब्दुल गनी बरादर बने डिप्टी PM, जानिए-कैबिनेट में किस-किस को मिली जगह

तालिबान की नई सरकार में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को तालिबानी सरकार का प्रधानमंत्री बनाया गया है। अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का नया उप प्रधानमंत्री बनाया गया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर 15 अगस्त को कब्जा करने के बाद आखिरकार आज देश में तालिबान की सरकार बन गई है। तालिबान ने अपनी नई सरकार का ऐलान कर दिया है। तालिबान की नई सरकार में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को तालिबानी सरकार का प्रधानमंत्री बनाया गया है। अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का नया उप प्रधानमंत्री बनाया गया है।

एक न्यूज एजेंसी से मिले इनपुट के मुताबिक, तालिबान की सरकार में सिराज हक्कानी को आंतरिक मामलों का मंत्री बनाया गया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मुल्ला मोहम्मद हसन को अहम जिम्मेदारी दी गई है। 

तालिबान के को-फाउंडर रहे अब्दुल गनी बरादर को उप प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।

खूंखार हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को आंतरिक मामलों का मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा सिराजुद्दीन हक्कानी को तालिबान के उपनेता की जिम्मेदारी भी दी गई है।


काबुल में एक सरकारी कार्यालय में तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि यह कैबिनेट अभी पूरा नहीं है, यह सिर्फ कार्यकारी है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हम देश के अन्य हिस्सों से भी लोगों को इस कैबिनेट में शामिल करने की कोशिश करेंगे।


अफगान में तालिबानी सरकार! मुल्ला मोहम्मद हसन होंगे सरकार के मुखिया, इस खुंखार आतंकी को गृहमंत्री बनाने की तैयारी

अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करनेवाले तालिबान ने अब देश में सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है या फिर यह भी कहना सही होगा कि सरकार बनाने को लेकर सारी तैयारियां लगभग पूरा हो चुकी हैं और जल्द ही नई सरकार का एलान हो जाएगा।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करनेवाले तालिबान ने अब देश में सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है या फिर यह भी कहना सही होगा कि सरकार बनाने को लेकर सारी तैयारियां लगभग पूरा हो चुकी हैं और जल्द ही नई सरकार का एलान हो जाएगा।

इस बीच खबर है कि तालिबान की सरकार का नेतृत्व मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को दिए जाने की तैयारी है। वह अब तक तालिबान की शीर्ष निर्णयकारी संस्था 'रहबरी शूरा' के प्रमुख रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के सरगना मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदजादा ने हसन को यह जिम्मेदारी देने का फैसला लिया है। इसके अलावा मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को उनके डिप्टी के तौर पर नियुक्त करने का फैसला हुआ है।

इसके अलावा बरादर के साथ ही मुल्ला अबदस सलाम को भी हसन अखुंद के डिप्टी के तौर पर नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। कई सूत्रों के हवाले से द न्यूज इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अगले सप्ताह तक सरकार गठन का ऐलान हो सकता है। मुल्ला हसन फिलहाल तालिबान की शीर्ष निर्णयकारी संस्था रहबरी शूरा के मुखिया हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुल्ला हसन कंधार के रहने वाले हैं, जहां से तालिबान का जन्म हुआ था। वह तालिबान के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। वह 20 साल तक रहबरी शूरा के हेड रहे हैं और उन्हें हेबतुल्लाह अखुंदजादा का करीबी माना जाता रहा है। तालिबान की 1996 की पिछली सरकार में हसन विदेश मंत्री और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर के पद पर थे। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को डिफेंस मिनिस्टर की जिम्मेदारी मिल सकती है। 

यह भी खबर है कि याकूब मुल्ला हेबतुल्ला का छात्र रहा है। इस सरकार गठन की खास बात यह है कि तालिबान के एक और धड़े हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को होम मिनिस्टर की जिम्मेदारी मिल सकती है। वह जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे हैं, जिन्होंने सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया था।

वहीं अमीर खान मुत्तकी को विदेश मंत्री बनाने की तैयारी है। सिराजुद्दीन हक्कानी को ग्लोबल आतंकी घोषित किया गया है। एफबीआई की वेबसाइट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सिराजुद्दीन हक्कानी की जानकारी देने पर 50 लाख अमेरिकी डॉलर का ऐलान किया था। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक सिराजुद्दीन पाकिस्तान में रहता रहा है। 



यूएस द्वारा घोषित किए गए खुंखार आतंकी को गृहमंत्री बनाने की तैयारी

हक्कानी पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके में रहता रहा है। इसके अलावा उसके आतंकी संगठन अलकायदा से भी करीबी संबंध रहे हैं। काबुल के एक होटल में 2008 में हुए आतंकी हमले में सिराजुद्दीन हक्कानी वॉन्टेड रहा है। इस हमले में एक अमेरिकी नागरिक समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी।

माना जाता रहा है कि हक्कानी ने पाकिस्तान से बैठे-बैठे ही अफगानिस्तान में कई आतंकी हमले कराए थे, जिसमें अमेरिका और नाटो सेनाओं को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा 2008 में हामिद करजई की हत्या की साजिश रचने के मामले में भी सिराजुद्दीन हक्कानी की संलिप्तता रही है।


अफगान छोड़ने से पहले अरबों डॉलर का हथियार जला गई थी अमेरिकी फौज, तालिबानियों को सता रहा है माइंस का डर !

अमेरिकी फौज ने अरबों डॉलर के हथियार, वाहन और अन्य सैन्य उपकरण जलाकर नष्ट कर दिए थे। वहीं, तालिबानी आतंकियों को अब उन स्थानों पर भी जाने से डर लग रहा है जहां अमेरिकी फौज के हथियार आदि जले-अधजले व नष्ट हुए पड़े हैं। तालिबानी आतंकियों को डर है कि कहीं वहां पर अमेरिकी फौज द्वारा माइंस ना बिछाए गए हों।

काबुल: अब तक ऐसी खबरें आ रही थी कि अमेरिका ने सिर्फ काबुल एयरपोर्ट पर उन सैन्य हथियारों और वाहनों को डिसेबल कर दिया था जिसे वह लेकर नहीं जा सके थे। लेकिन अब खबर आ रही है कि अमेरिकी फौज ने अरबों डॉलर के हथियार, वाहन और अन्य सैन्य उपकरण जलाकर नष्ट कर दिए थे। वहीं, तालिबानी आतंकियों को अब उन स्थानों पर भी जाने से डर लग रहा है जहां अमेरिकी फौज के हथियार आदि जले-अधजले व नष्ट हुए पड़े हैं। तालिबानी आतंकियों को डर है कि कहीं वहां पर अमेरिकी फौज द्वारा माइंस ना बिछाए गए हों।

अफगानिस्तान छोड़ने से पहले अमेरिकी अरबों डॉलर के हथियार और वाहनों को बर्बाद कर गए हैं। लोकल अफगान मीडिया ने तालिबान के हवाले से यह बात कही है। सोमवार को तालिबान ने रिपोर्टर्स को सीआईए के पूर्व ऑपरेशनल सेंटर के अंदर जाने की इजाजत दी थी। इस दौरान उसने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने यहां से जाने से पहले सभी मिलिट्री उपकरण, वाहन और कागजात को आग लगा दी थी। टोलो न्यूज ने इस बारे में खबर दी है। 

‘ईगल’ नाम का सीआईए का यह कैंप काबुल के देह सब इलाके में स्थित है। अमेरिकी खुफिया अफसर और अफगान की एनडीएस 01 फोर्सेज यहां पर तैनात थीं। अब यह इलाका तालिबान के कब्जे में है। अमेरिकी सेना ने जरूरी कागजात, सैकड़ों हम्वीज, सैन्य टैंक और हथियारों को नष्टकर दिया था। तालिबान ने टोलो न्यूज के हवाले से यह बात कही है। कैंप के कमांडर मौलवी अथनैन ने कहा कि उन्होंने यहां से वह सबकुछ नष्ट कर दिया जो इस्तेमाल हो सकता था। 

इस बीच अभी तालिबान ने इस कैंप के कई कमरों में प्रवेश नहीं किया है। उन्हें डर है कि यहां पर माइन्स बिछी हो सकती हैं। गौरतलब है कि 31 अगस्त की सुबह अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था।

गौरतलब है कि 20 साल तक चले लंबे युद्ध के बाद अमेरिकियों के यहां से जाने के बाद फिलहाल अफगानिस्तान बदहाल है। अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड जे ऑस्टिन-3 ने कहा कि वॉशिंगटन ने अफगानिस्तान से 6000 अमेरिकी नागरिकों निकाला है। यहां से उसने कुल 124000 नागरिकों को निकाला है। 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया हालांकि, पंजशीर घाटी में अभी भी उसका कब्जा नहीं है। 



पाकिस्तान के खिलाफ काबुल में नारेबाजी से भड़का तालिबान, करा दी फायरिंग

वैसे तो यह बात जग जाहिर हो चुकी है कि पाकिस्तान ही तालिबान का आका है और वह पाकिस्तान के लिए कुछ भी करने को तैयार है। लेकिन अब वह पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को भी नहीं झेल पा रहा है और पाकिस्तान विरोधी नारेबाजी करने पर फायरिंग कर दे रहा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर सत्ता हासिल करने वाला तालिबान बेशक दुनिया से तमाम तरीके के वादे कर रहा है और 'गुड ब्वाय' बनने का प्रयास कर रहा है लेकिन हकीकत इसके उलट है। वैसे तो यह बात जग जाहिर हो चुकी है कि पाकिस्तान ही तालिबान का आका है और वह पाकिस्तान के लिए कुछ भी करने को तैयार है। लेकिन अब वह पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को भी नहीं झेल पा रहा है और पाकिस्तान विरोधी नारेबाजी करने पर फायरिंग कर दे रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान में आम लोग लगातार पाकिस्तान का विरोध कर रहे हैं। काबुल की सड़कों पर लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद, आजादी और सपोर्ट पंजशीर के नारे लगा रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगान लोग अफगानिस्तान में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग विरोध-प्रदर्शन करते हुए काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास भी पहुंचे जहां पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट मुताबिक विरोध-प्रदर्शन कर रहे इन लोगों को तितर-बितर करने के लिए तालिबान ने हवाई फायरिंग की है।

जानकारी के मुताबिक, हज़ारों महिला और पुरुष प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि अफगानिस्तान को एक स्वतंत्र सरकार चाहिए न कि कोई पाकिस्तानी कठपुतली सरकार। लोग पाकिस्तान, अफगानिस्तान छोड़ो जैसे नारे लगा रहे हैं।

बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के सरकार गठन में हो रही देरी के बीच पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद 4 सितंबर को काबुल पहुंचे थे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हमीद ने तालिबान के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की है और सरकार में हक्कानी नेटवर्क के उचित प्रतिनिधित्व की बात उठाई है।

पाकिस्तान पर तालिबान को सपोर्ट करने के आरोप लगते रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स ने इस बात का सबूत भी पेश किया है कि  कैसे पाकिस्तान अफगानिस्तान सरकार को अस्थिर करके तालिबान का सहयोग कर रही है। अफगानिस्तान और अमेरिका के साथ सालों से जारी युद्ध में पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश रहा है जो तालिबान का समर्थक है। तालिबान ने लगातार पाकिस्तान को अपना दूसरा घर बताया है। हाल ही पाकिस्तान के केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान, तालिबान का 'संरक्षक' रहा है और लंबे वक्त तक उनकी देखभाल की है। पाकिस्तान, तालिबान शासन को मान्यता देने वाला सबसे पहला देश हो सकता है। 


अफगानिस्तान: अभी तालिबान के लिए पंजशीर 'बहुत' दूर है!

अब तक दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जीत के साक्ष्य दुनिया के सामने नहीं रख पाए हैं। 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान लगातार पंजशीर को कब्जाने की कोशिश में है पर उसे अबतक कड़ी टक्कर मिलती रही है।

काबुल: तालिबान यह दावा कर रहा है कि उसने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है लेकिन सच्चाई कुछ ही नजर आ रही है। या फिर यह कहना सही होगा कि तालिबान के लिए अभ पंजशीर 'बहुत दूर' है। दरअसल, तालिबान ने तीसरी बार पंजशीर पर जीत का दावा किया है। दूसरी ओर, पंजशीर के लड़ाकों का दावा है कि वे अब भी तालिबानियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

अब तक दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जीत के साक्ष्य दुनिया के सामने नहीं रख पाए हैं। 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान लगातार पंजशीर को कब्जाने की कोशिश में है पर उसे अबतक कड़ी टक्कर मिलती रही है।

पंजशीर घाटी में तालिबान के खिलाफ नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के जवान खड़े हैं। इस दल में स्थानीय सशस्त्र बल के लोग (मिलिशिया) और पूर्व अफगान सुरक्षा बल शामिल हैं। इसकी संख्या करीब नौ से दस हजार के बीच है। हाल में जारी तस्वीरों से पता लगता है कि ये संगठित ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त हैं।

बताते चलें कि काबुल ढहने के बाद पूर्व राष्ट्रपति अमरुल्ला साहेल और अफगान सरकार के तालिबान के सामने न झुकने वाले सैनिकबल पंजशीर चले गए थे, जहां वे मसूद के नेतृत्व में तालिबान को टक्कर दे रहे हैं।

इस बीच नेशनल रजिस्टेंस फोर्स के प्रवक्ता अली माइसम नाजारी ने समाचार एजेंसी रॉयर्ट्स से कहा कि वे तभी अपनी ओर से शांति वार्ता के लिए तैयार हो सकते हैं, जब तालिबान विकेंद्रीकृत राजनीति करने को राजी हो जाए। यानी इस तरह का शासन करे, जिसमें सामाजिक न्याय, समानता और सभी के स्वतंत्रता हो।

800 तालिबानी आतंकियों को मारने का दावा

15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से पड़ोसी राज्य पंजशीर के लड़ाकों ने अपनी जमीन की सुरक्षा बढ़ा दी थी। पंजशीर में मसूद का दावा है कि अब तक हुईं झड़पों में वे करीब 800 लड़ाकों को मार गिरा चुके हैं।


अफगानिस्तान में तालिबान सरकार! देश के झंडे का साथ-साथ राष्ट्रगान भी बदलेगा

अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है। तालिबान के अफगान में देश का झंड़ा बदलने के साथ-साथ देश का राष्ट्रगान भी बदला जाएगा।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है। तालिबान के अफगान में देश का झंड़ा बदलने के साथ-साथ देश का राष्ट्रगान भी बदला जाएगा।

एक समाचार चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अगली सरकार अफगानिस्तान के झंडे और राष्ट्रगान पर फैसला करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान प्रशासन सरकारी कर्मचारियों को वेतन भी देगा।

इस बीच, तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला बरादर को अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के नेता के रूप में बताए जाने की खबरों के बीच, जबीहुल्ला ने कहा कि मुल्ला हिबातुल्लाह अखुंदजादा जीवित है और जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आएगा। 


'हमारे लड़ाके खून के आखिरी बूंद तक लड़ेंगे', तालिबान के कब्जे के दावे पर गरजे अहमद मसूद

मसूद ने तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहने की हुंकार भरते हुए कहा कि हम अजेय हैं और तालिबान के खिलाफ आखिरी बूंद तक हमारे लड़ाके जंग करेंगे।

काबुल: एक तरफ तालिबान ने पंजशीर घाटी पर खुद का कब्जा होने का दावा किया है तो दूसरी तरफ उससे लोहा लेने वाले नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के नेता अहमद मसूद ने इसे खारिज किया है। मसूद ने तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहने की हुंकार भरते हुए कहा कि हम अजेय हैं और तालिबान के खिलाफ आखिरी बूंद तक हमारे लड़ाके जंग करेंगे।

मसूद ने कहा कि मैं अपने खून की आखिरी बूंद तक तालिबान से लड़ता रहूंगा। उनका यह बयान तालिबान के दावे के कुछ घंटों के बाद ही आया है, जिसमें उसने कहा था कि पंजशीर पर उन्होंने कब्जा जमा लिया है। सोशल मीडिया साइट फेसबुक पेज पर जारी एक ऑडियो संदेश में मसूद ने कहा, 'हमारी फोर्सेज अब भी पंजशीर में मौजूद हैं और तालिबान के खिलाफ जंग जारी है।'

इसके अलावा उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों से भी तालिबान के खिलाफ जंग में साथ आने की अपील की थी। इससे पहले तालिबान लड़ाकों की ओर से पंजशीर घाटी के गवर्नर हाउस पर तालिबानी झंडा फहराने का वीडियो सामने आया था। तालिबान का कहना है कि उन्होंने पंजशीर पर कब्जा जमा लिया है और अब लड़ाई को रोका नहीं जाएगा। तालिबान के मुताबिक अहमद मसूद ने उनसे सीजफायर और समझौते का प्रस्ताव रखा था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया है।

इसके अलावा अहमद मसूद ने पंजशीर की जंग में पाकिस्तान के भी शामिल होने का आरोप लगाया है। मसूद ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से तालिबान को पंजशीर में मदद की जा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय मूकदर्शक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मदद से ही तालिबान ने उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी थी। टोलो न्यूज के मुताबिक अहमद मसूद ने कहा, 'सभी देश पंजशीर में पाकिस्तान की संलिप्तता के बारे में जानते हैं, लेकिन चुप हैं। पाकिस्तान ने पंजशीर में सीधे तौर पर अफगानियों पर हमला किया है।'


अफगानिस्तान में सरकार बनाने जा रहा तालिबान, चीन और पाकिस्तान होंगे खास मेहमान

सूत्रों का दावा है कि तालिबान ने नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, चीन तुर्की, कतर, रूस, और ईरान को बुलावा भेजा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों को दम पर सत्ता हथियाने वाला तालिबान सरकार गठन की तैयारी कर रही है। ताजपोशी के मौके पर चीन और पाकिस्तान उसके खास मेहमान होंगे। सूत्रों का दावा है कि तालिबान ने नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, चीन तुर्की, कतर, रूस, और ईरान को बुलावा भेजा है। हालांकि अभी तक इस समारोह में तालिबान द्वारा भारत को आमंत्रित करने की बात सामने नहीं आई है। 


तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने काबुल में सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की। मुजाहिद ने कहा कि युद्ध खत्म हो चुका है। अब हमें एक स्थिर अफगानिस्तान की उम्मीद है। उसने यह भी कहा कि अब जो भी विद्रोह करेगा, देश और यहां के लोगों का दुश्मन होगा। प्रेस कांफ्रेंस में मुजाहिद ने यह भी कहा कि भगोड़े कभी भी इस देश का पुनर्निर्माण नहीं करेंगे। इसे हमें और हमारे देश के लोगों को ही करना होगा। मुजाहिद ने यह भी कहा कि वह काबुल एयरपोर्ट पर संचालन फिर से शुरू करने वाला है। इसके लिए कतर, तुर्की और यूएई से तकनीकी टीमें काम कर रही हैं।

गौरतलब है कि पंजशीर पर कब्जे के बाद पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो चुका है। तालिबान ने कहा कि उसने काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर प्रांत पर कब्जा कर लिया है। पिछले महीने 15 अगस्त को काबुल फतह करने के बाद देश का एकमात्र यही हिस्सा था, जहां तालिबान अभी तक जूझ रहा था। 

सालेह पंजशीर छोड़ ताजिकिस्तान भागे

वहीं, दूसरी तरफ तालिबान लड़ाके रातोंरात पंजशीर के आठ जिलों में फैल चुके हैं। हालांकि अपनी सुरक्षा के लिए इस सूत्र ने अपना और इलाके का नाम बताने से इंकार कर दिया। सोमवार को ही तालिबान ने इस बात की घोषणा कर दी थी कि पंजशीर पर अब उसका पूरी तरह से कब्जा हो चुका है। बताया जाता है कि इसके बाद अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह पंजशीर छोड़कर ताजिकिस्तान चले गए हैं। 


पंजशीर पर तालिबान का कब्जा, कहा-'बागियों को बख्शेंगे नहीं', अमरुल्लाह सालेह के ताजिकिस्तान भागने की खबर

पंजशीर घाटी पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में उसके राज के खिलाफ विद्रोह करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि यदि कोई भी विद्रोह करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और करारा हमला किया जाएगा।

by न्यूज9डेस्क

काबुल: तालिबान ने अफगान के बचे हुए क्षेत्र पंजशीर घाटी पर भी कब्जा कर लिया है। साथ ही तालिबान ने 'बागियों' को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं बख्सेगा। वहीं, दूसरी तरफ अमरुल्लाह सालेह के ताजिकिस्तान भागने की खबर है।

पंजशीर घाटी पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में उसके राज के खिलाफ विद्रोह करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि यदि कोई भी विद्रोह करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और करारा हमला किया जाएगा। इसके अलावा तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि अभी अफगानिस्तान में एक अंतरिम सरकार का ही गठन किया जाएगा, जिसमें बाद में बदलाव किए जा सकते हैं।

दरअसल तालिबान के ही अलग-अलग गुटों में सत्ता के बंटवारे को लेकर मतभेद की स्थिति है। शायद यही वजह है कि फिलहाल अंतरिम सरकार ही बनाई जा रही है ताकि स्थायी सरकार के गठन के लिए वक्त मिल सके।

एक समाचार एजेंसी से तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि पंजशीर घाटी में विद्रोहियों का नेतृत्व कर रहे पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह देश छोड़कर ही भाग गए हैं। तालिबान के प्रवक्ता ने दावा किया है कि अमरुल्लाह सालेह ताजिकिस्तान भाग गए हैं। हालांकि इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सालेह गुप्त ठिकाने में हैं और वहीं से लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके अलावा पंजशीर के एक और नेता अहमद मसूद ने ट्वीट कर बताया है कि वे सुरक्षित हैं। अमरुल्लाह सालेह लगातार जंग जारी रखने और तालिबान के आगे सरेंडर न करने की बात करते रहे हैं। 

हालांकि तालिबान के अभियान को आगे बढ़ता देख वह शायद देश छोड़कर निकल गए हैं। लेकिन आमतौर पर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले सालेह ने अपनी लोकेशन और पंजशीर के हालातों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। इस बीच तालिबान का कहना है कि वह अफगानिस्तान में हालात सामान्य बनाने की कोशिश में जुटा है। तालिबान का कहना है कि जल्दी ही काबुल से दूसरे देशों के लिए उड़ानों का संचालन शुरू हो सकेगा। इससे अफगानिस्तान में फंसे उन लोगों को राहत मिलेगी, जो कहीं और जाना चाहता है। इसके अलावा अफगानिस्तान का दुनिया से संपर्क फिर बहाल हो सकेगा।



अफगानिस्तान: पंजशीर घाटी पर तालिबान ने किया अपने कब्जे का दावा

हालांकि, अभी तक तालिबान से जंग लड़ रहे रेजिस्टेंस फोर्स का नेतृत्व करने वाले अहमद मसूद की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कुछ तस्वीरों में तालिबानी लड़ाकों को पंजशीर के गवर्नर ऑफिस के गेट के बाहर खड़ा देखा गया है।

काबुल: एक बार फिर से पंजशीर घाटी पर तालिबान द्वारा कब्जे का दावा किया जा रहा है। तालिबान ने सोमवार को ऐलान किया है कि अब तक अजेय रहा पंजशीर प्रांत पूरी तरह उसके कब्जे में है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह ने एक बयान जारी कर कहा कि इस जीत से हमारा देश पूरी तरह से युद्ध के दलदल से निकल चुका है।

Taliban sources say their forces take Panjshir before government formation  in Afghanistan

हालांकि, अभी तक तालिबान से जंग लड़ रहे रेजिस्टेंस फोर्स का नेतृत्व करने वाले अहमद मसूद की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कुछ तस्वीरों में तालिबानी लड़ाकों को पंजशीर के गवर्नर ऑफिस के गेट के बाहर खड़ा देखा गया है।

What is India big challenge in Afghanistan Pakistan and China are big  obstacles with Taliban influence Jagran Special

इससे पहले तालिबान ने रविवार को दावा किया था कि उसने पंजशीर प्रांत के सभी जिलों पर नियंत्रण कर लिया है। तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि पंजशीर के सभी जिला मुख्यालय, पुलिस मुख्यालय और सभी कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया है। तालिबान ने कहा कि विपक्षी बलों के कई हताहत भी हुए हैं। वाहनों, हथियारों को भी नुकसान पहुंचा है। 

Afghan security forces have repelled an overnight attack by the Taliban

इस दौरान रविवार को यह भी खबर आई कि रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता की और घाटी में तालिबान से लोहा ले रहे अहमद मसूद के करीबी फहीम दश्ती की भी तालिबानी हमले में रविवार को मौत हो गई थी। पंजशीर में तालिबान के आगे कमजोर पड़ने के बीच नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान ने एक बयान जारी कर सीजफायर करने की मांग की थी। 

गौरतलब है कि 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद से अब तक पंजशीर ही अफगानिस्तान का अकेला प्रांत था, जो तालिबान के नियंत्रण में नहीं था। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी एपी को बताया कि रविवार रात हजारों तालिबानी लड़ाकों ने पंजशीर के आठ जिलों पर कब्जा किया।


तालिबानी नेता मुल्ला बरादर से UN के मानवीय मामलों के अवर महासचिव ने की मुलाकात, जानिए-अफगानिस्तान को लेकर क्या हुई बात

उनकी ये मुलाकात काबुल में विदेश मंत्रालय में हुई। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज़ के मुताबिक इस मुलाकात की जानकारी तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने ट्वीट के ज़रिए दी है।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर कब्जा करने वाला तालिबान अब धीरे-धीरे दुनिया भर के नेताओं से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर चुका है। चीन और पाकिस्तान को हिमायती बनाने के बाद भारत के राजदूत से भी तालिबान ने मुलाकात की। अब मुलाकात के सिलसिले को तालिबान आगे बढ़ाता ही जा रही है। ताजा मामले में यूएन के मानवीय मामलों के अवर महासचिव मार्टिन ग्रीफिथ्स से तालिबानी नेता मुल्ला बरादर ने मुलाकात की है।

उनकी ये मुलाकात काबुल में विदेश मंत्रालय में हुई। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज़ के मुताबिक इस मुलाकात की जानकारी तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने ट्वीट के ज़रिए दी है। मोहम्मद नईम ने ट्वीट में जानकारी दी कि मुलाकात के बाद मार्टिन ग्रीफिथ्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अफगानिस्तान के साथ अपना समर्थन और सहयोग जारी रखेगा।


अफगानिस्तान के तालिबान शासकों ने रविवार को काबुल से और काबुल के लिए कुछ घरेलू यात्री उड़ानें शुरू कर दीं। इसके साथ ही उन्होंने अब तक अपने कब्जे से दूर पंजशीर प्रांत पर हमला तेज कर दिया है। अफगानिस्तान की राजधानी के उत्तर में स्थित छोटे से प्रांत पंजशीर में तालिबान विरोधी लड़ाकों का नेतृत्व अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह कर रहे हैं जिन्होंने लड़ाई की वजह से विस्थापित हुए हजारों लोगों के लिए मानवीय सहायता की अपील की।


तालिबान के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने रविवार को ट्वीट किया कि पंजशीर के आठ जिलों में से एक रोखा जिले पर तालिबान का नियंत्रण है। पंजशीर के लड़ाकों से तालिबान के कई प्रतिनिधिमंडलों ने बात की है जो विफल रही है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद सालेह पंजशीर पहुंच गए थे जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे कोई जीत नहीं सकता।


अफगानिस्तान: पंजशीर घाटी में तालिबान से जंग में अहमद मसूद की फौज के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत

रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़े कई ट्विटर हैंडलों से भी रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत की जानकारी दी गई है।

काबुल: तालिबान से जंग के क्रम में अहमद मसूद के प्रवक्ता की मौत की खबर सामने आई है। रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़े कई ट्विटर हैंडलों से भी रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत की जानकारी दी गई है। 

एक ट्वीट में लिखा है, 'भारी मन से हम रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती की तालिबानी आतंकियों के हमले में हुई मौत की जानकारी दे रहे हैं।' हालांकि, ट्वीट में इसके अतिरिक्त कुछ नहीं बताया गया है। 

बता दें कि पंजशीर में बढ़ते तालिबान के खतरे के बीच दश्ती अक्सर हर अपडेट ट्वीट किया करते थे। उन्होंने रविवार को भी ट्वीट कर यह जानकारी दी थी कि तालिबानी लड़ाकों को इस इलाके से खदेड़ दिया गया है।


दश्ती की मौत की खबर ऐसे समय आई है जब शुक्रवार रात से ही पंजशीर को लेकर तालिबान और रेजिस्टेंस फ्रंट के बीच जंग तेज हो गई है। फहीम दश्ती जमात-ए-इस्लामी पार्टी के वरिष्ठ नेता थे और साथ में वह फेडरेशन ऑफ अफगान जर्नलिस्ट्स के भी सदस्य थे।

गौरतलब है कि तालिबान ने पूरे अफगान पर कब्जा कर लिया है लेकिन पंजशीर के लड़ाके उसे कड़ी टक्कर दे रहे हैं।


पंजशीर के शेरों ने मार गिराए 600 तालिबानी आतंकी, एक हजार को किया कैद

एक तरफ तालिबान द्वारा पंजशीर पर खुद के कब्जे की बात कही जा रही है तो दूसरी तरफ उसके लड़ाकों के मरने और बंदी बनाये जाने की खबरें आ रही हैं।

काबुल: अफगानिस्तान के पंजशीर में तालिबान और विद्रोही बलों यानी रेजिस्टेंस फोर्सेस के बीच खूनी संघर्ष जारी है। इस बीच दोनों के बीच जंग तेज हो गई है। एक तरफ तालिबान द्वारा पंजशीर पर खुद के कब्जे की बात कही जा रही है तो दूसरी तरफ उसके लड़ाकों के मरने और बंदी बनाये जाने की खबरें आ रही हैं।


मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान और प्रतिरोध बलों की जंग में पंजशीर के उत्तर-पूर्वी प्रांत करीब 600 तालिबानी मारे गए हैं। स्पुतनिक ने अफगान रेसिस्टेंस बलों के हवाले से शनिवार को यह बात कही।

पंजशीर के रेजिस्टेंस फोर्स (प्रतिरोध बलों) का दावा है कि शनिवार सुबह से पंजशीर के विभिन्न जिलों में करीब 600 तालिबानियों का खात्मा किया गया। इतना ही नहीं, 1000 से ज्यादा तालिबानी लड़ाकों को कैद किया गया है या उन्होंने सरेंडर किया है। रेजिस्टेंस फोर्स के प्रवक्ता फहीम दास्ती ने यह ट्वीट किया।

स्पुतनिक के मुताबिक, प्रवक्ता ने आगे कहा कि तालिबान को अन्य अफगान प्रांतों से आपूर्ति प्राप्त करने में समस्या है। इस बीच, क्षेत्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी की वजह से पंजशीर प्रतिरोध बलों के खिलाफ तालिबान का अभियान धीमा पड़ गया है।

तालिबान से जुड़े सूत्र ने कहा कि पंजशीर में लड़ाई जारी है, लेकिन कैपिटल बाजारक और प्रांतीय गवर्नर के परिसर की ओर जाने वाली सड़क पर बारूदी सुरंग होने की वजह से तालिबान को अपनी कार्रवाई की धीमा करना पड़ा है। 

पंजशीर को नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट का गढ़ माना जाता है, जिसकी अगुवाई पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और पूर्व राष्ट्र अमरुल्ला सालेह कर रहे हैं। पुरानी सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद सालेह ने खुद को अफगानिस्तान का केयरटेकर यानी कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।


अफगानिस्तान: कुर्सी के चक्कर में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में झड़प, चली गोलियां, बरादर हुए घायल

अब कुर्सी के बंटवारे को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बीच झड़प होने की खबर है। इतना ही नहीं इस दौरान हक्कानी नेटवर्क द्वारा बरादर पर गोली चला दी जिससे वह घायल हो गया है।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर सत्ता हथियाने वाले तालिबान को लोकतंत्र की बात समझ में नहीं आ रही है। अब कुर्सी के बंटवारे को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बीच झड़प होने की खबर है। इतना ही नहीं इस दौरान हक्कानी नेटवर्क द्वारा बरादर पर गोली चला दी जिससे वह घायल हो गया है।


खबर है कि तालिबान के सह-संस्थापक अब्दुल गनी बरादर और हक्कानी गुट के बीच झड़प हुई है और इसमें गोली भी चली है। अफगानिस्तान की वेबसाइट पंजशीर ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस झड़प में अब्दुल गनी बरादर घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है  कि हक्कानी गुट ने ही गोली चलाई है।

पंजशीर ऑब्जर्वर ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि काबुल में बीती रात तालिबान के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर गोलीबारी हुई। पंजशीर के मुद्दे को कैसे हल किया जाए, इसे ललकेर अनस हक्कानी और मुल्ला बरादर के लड़ाकों के बीच असहमति थी और इसी को लेकर झड़प हो गई। हक्कानी की ओर से चलाई गई गोली में मुल्ला बरादर कथित तौर पर घायल हो गए हैं और उनका पाकिस्तान में इलाज चल रहा है। हालांकि, सूत्रों ने गोलीबारी की पुष्टि नहीं की है। 

इलाज के लिए पाकिस्तान ले जाया गया !


नॉर्दन अलायंस ने भी ट्वीट कर इस घटना का जिक्र किया है। नॉर्दन अलांयस का कहना है कि बरादर ने तालिबानियों को पंजशीर में नहीं लड़ने और काबुल आने को कहा है। इस झड़प में मुल्ला बरादर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए पाकिस्तान ले जाया गया है। 

अलायंस ने काबुल में तालिबानी नेताओं के बीच आपसी संघर्ष को नहीं दिखाने को लेकर मीडिया को लताड़ा है। अलायंस का कहना है कि सत्ता के लिए इन लोगों में आपस में लड़ाई जारी है।


अफगानिस्तान: तालिबानी सरकार का गठन टला, पंजशीर के लिए जंग तेज, अहमद मसूद बोले-'जारी रहेगी लड़ाई'

एक तरफ तालिबान पंजशीर पर कब्जा कर लेने का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ पंजशीर के शेर उसके दावे की हवा निकाल दे रहे हैं। अब तालिबान और पंजशीर के बीच जंग तेज हो गई है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा तो कर लिया है लेकिन पंजशीर के शेरों से उसे कड़ी चुनौती मिल रही है। अभी भी तालिबान और पंजशीर के बीच जंग जारी है। एक तरफ तालिबान पंजशीर पर कब्जा कर लेने का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ पंजशीर के शेर उसके दावे की हवा निकाल दे रहे हैं। अब तालिबान और पंजशीर के बीच जंग तेज हो गई है।


अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन को टाले जाने के बीच पंजशीर पर कब्जे को लेकर लड़ाई तेज हो गई है। हालांकि तालिबान ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा किया है, जिसके बाद इस जीत के जश्न में काबुल में जमकर फायरिंग की गई। तालिबान लड़ाकों की फायरिंग में 17 लोगों के मारे जाने और 41 के घायल होने की खबर है। पंजशीर घाटी पर नियंत्रण रखने वाले नार्दर्न अलायंस ने तालिबान के दावे को खारिज किया है। अलायंस ने कहा कि उसका पंजशीर पर अब भी नियंत्रण है।

तालिबान के एक कमांडर ने शुक्रवार को दावा किया, 'अल्लाह की रहम से अब हमारा पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण हो गया है। पंजशीर अब हमारे नियंत्रण में है।' इस दावे खबर पहुंचते ही काबुल में शुक्रवार रात जमकर हर्ष फायरिंग की गई। फायरिंग की खबर पर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने कहा, 'हवा में फाय¨रग करने से बचें और अल्लाह का शुक्रिया अदा करें। गोलियों से नागरिकों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गैरजरूरी गोलीबारी न करें।'


वहीं अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा कि उनके लोगों ने हथियार नहीं डाले हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, 'इसमें शक नहीं है कि हम मुश्किल हालात में हैं। हम तालिबान के हमले का मुकाबला कर रहे हैं। हमारा अब भी नियंत्रण है।' सालेह पंजशीर में तालिबान से मुकाबला कर रहे गठबंधन बलों नार्दर्न अलायंस के कमांडरों में एक हैं।

नार्दर्न अलायंस के प्रमुख अहमद मसूद ने भी तालिबान के कब्जे के दावे को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह अल्लाह, न्याय और आजादी के लिए संघर्ष करते रहेंगे। बता दें कि अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों पर नियंत्रण के बाद तालिबान ने गत 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था। लेकिन काबुल से 150 किलोमीटर दूर पंजशीर क्षेत्र पर अब भी तालिबान के नियंत्रण से बाहर है।


तालिबान को अपनी कठपुतली बनाने की फिराक में पाकिस्तान आर्मी, जानिए-कैसे

अफगानिस्तान में तालिबान ने हथियारों के दम पर बेशक सत्ता हासिल कर ली हो लेकिन सत्ता संचालन करने का अनुभव उसके पास नहीं है। ऐसे में उसका परम मित्र पाकिस्तान अब उसकी 'मदद' करेगा। ये अलग बात है कि मदद के बहाने पाकिस्तान की आर्मी उसे अपनी कठपुतली बनाने की फिराक में है।

इस्लामाबाद/काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने हथियारों के दम पर बेशक सत्ता हासिल कर ली हो लेकिन सत्ता संचालन करने का अनुभव उसके पास नहीं है। ऐसे में उसका परम मित्र पाकिस्तान अब उसकी 'मदद' करेगा। ये अलग बात है कि मदद के बहाने पाकिस्तान की आर्मी उसे अपनी कठपुतली बनाने की फिराक में है।


इमरान खान की सरकार को कंट्रोल कर रही पाकिस्तान की सेना अब अफगानिस्तान में भी तालिबान सरकार को अपने हाथों की कठपुतली बनाना चाहती है। तालिबान सरकार का गठन दो बार टाले जाने के बीच पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख काबुल पहुंचे हैं तो सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि इस्लामाबाद पड़ोसी देश में सरकार गठन में मदद कर रही है। बाजवा ने शनिवार को ब्रिटेन के विदेश सचिव डोमिनिक राब से कहा कि उनका देश अफगानिस्तान में समावेशी प्रशासन के गठन में मदद करेगा। 


जनरल बाजवा ने राब के साथ अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को लेकर चर्चा की। पाकिस्तान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल बाजवा ने बैठक में कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए लड़ता रहेगा और समावेशी प्रशासन के गठन में मदद करेगा। जनरल बाजवा ने यह बात ऐसे समय पर कही है जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के प्रमुख लेफ्टिनेंट जरनल फैज हमीद शनिवार को काबुल पहुंचे। तालिबान नेतृत्व सरकार गठन की प्रक्रिया को अब तक अंजाम नहीं दे सका है।

तालिबान ने अफगानिस्तान में नयी सरकार के गठन को अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने शनिवार को यह जानकारी दी। तालिबान एक ऐसी सरकार बनाने के लिये संघर्ष कर रहा है जो समावेशी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य हो। 

उम्मीद की जा रही थी कि तालिबान शनिवार को काबुल में नई सरकार के गठन की घोषणा करेगा, जिसका नेतृत्व संगठन के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कर सकते हैं। तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर काबिज होने के बाद दूसरी बार, काबुल में नई सरकार के गठन की घोषणा स्थगित की है। मुजाहिद ने कहा, ''नई सरकार और कैबिनेट सदस्यों के बारे में घोषणा अब अगले सप्ताह की जाएगी।''


पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद तालिबान कौंसिल के निमंत्रण पर शनिवार को काबुल पहुंचे। जनरल हामिद के नेतृत्व में आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल तालिबान नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तथा अन्य नेताओं से मिलेंगे। हाल ही में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक तालिबान की देखरेख की है।

 उन्होंने कहा, ''हम तालिबान नेताओं के संरक्षक हैं। सभी शीर्ष तालिबान नेता पाकिस्तान में ही पैदा हुए हैं। उन्हें पाकिस्तान में आश्रय, शिक्षा और घर मिला है। हमने उनके लिए सब कुछ किया है।'' इससे पहले हाल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तालिबान के साथ संबंधों को सीधे तौर पर उजागर करते हुए अपने बयान में कहा था कि दुनिया को अफगानिस्तान को नहीं छोड़ना चाहिए और ऐसा किये जाने पर इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे।


अफगानिस्तान: तालिबान की कायराना हरकत, काबुल में महिला एक्टिविस्ट को पीट-पीट कर किया लहूलुहान, महिलाओं ने खोला मोर्चा

एक्टिविस्ट नगरिस साद्दात का आरोप है कि शनिवार को एक प्रदर्शन के दौरान तालाबिन ने उनकी पिटाई की है। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं को अधिकार देने की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा था।

काबुल: हर समय बंदूक, गोलियों से बात करने वाले तालिबान को इस समय कुछ समझ नहीं आ रहा है। खुद को 'गुड बॉय' साबित करने में जुटा तालिबान दुनिया से तमाम तरह के वादे जरूर कर रहा है लेकिन उन वादों पर वह खरा नहीं उतर रहा। अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान के तेवर में थोड़ा भी बदलाव नहीं आया है। 

महिलाओं और  बच्चों के प्रति उसका कायराना हरकत जारी है। ताजा मामले में उसने एक महिला एक्टिविस्ट को पीट-पीटकर सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया है क्योंकि वह महिलाओं के हक में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी। वहीं, एक्टिविस्ट पर हुए हमले के बाद महिलाओं ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


मिली जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में एक महिला एक्टिविस्ट ने तालिबान पर उनकी बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है। यह महिला एक्टिविस्ट काबुल में एक प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर किये गये इस प्रदर्शन में शामिल इस महिला कार्यकर्ता का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में उनके सिर पर गहरी चोट नजर आ रही है और खून उनके चेहरे तक नजर आ रहा है। 


एक्टिविस्ट नगरिस साद्दात का आरोप है कि शनिवार को एक प्रदर्शन के दौरान तालाबिन ने उनकी पिटाई की है। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं को अधिकार देने की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा था।

टोलो न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि तालिबान इस प्रदर्शन का शुरू से ही विरोध कर रहा था और उसने प्रदर्शनकारी महिलाओं पर प्रेसिडेन्शियल पैलेक से पास आंसू गैस भी छोड़े। 
महिला एक्टिविस्ट और प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वो प्रेसिडेन्शियल पैलेस के गेट के सामने प्रदर्शन करना चाहती थीं। लेकिन तालिबान से इनकी इजाजत नहीं दी। कुछ पत्रकारों ने इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि तालिबान महिला प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ रहा है। 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तालिबान ने महिलाओं को वहां से हटाने के लिए गोलियां भी चलाईं। एक अन्य समाचार एजेंसी (Khaama Press News Agency) के मुताबिक तालिबान ने पत्रकारों से कहा कि वो वहां से हट जाएं। 

बता दें कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद महिलाओं के द्वारा किया गया यह चौथा प्रदर्शन था। इससे पहले हेरात प्रक्षेत्र और अन्य दूसरी जगहों पर महिला प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। 


जिस दिन तालिबान को पंजशीर पर जीत मिलेगी वह दिन घाटी में मेरा आखिरी दिन होगा: अहमद मसूद

पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर आई कि तालिबानियों द्वारा पंजशीर पर कब्जा कर लिया गया जिसका नॉर्दन अलायंस के चीफ अहमद मसूद ने खंडन करते हुए कहा है कि जिस दिन तालिबान पंजशीर को जीत लेगा उस दिन घाटी में उनका आखिरी दिन होगा।

काबुल: तालिबान को पंजशीर के लड़ाके तगड़ी चुनौती दे रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर आई कि तालिबानियों द्वारा पंजशीर पर कब्जा कर लिया गया जिसका नॉर्दन अलायंस के चीफ अहमद मसूद ने खंडन करते हुए कहा है कि जिस दिन तालिबान पंजशीर को जीत लेगा उस दिन घाटी में उनका आखिरी दिन होगा।

पंजशीर घाटी को तालिबान द्वारा कब्जा किए जाने की खबरों के बीच अहमद मसूद ने हुंकार भरी है और कहा कि जिस दिन तालिबान पंजशीर को जीत लेगा, उस दिन घाटी में मेरा आखिरी दिन होगा। पंजशीर में तालिबानी कब्जे की मीडिया रिपोर्ट को नॉर्दन अलायंस के मुखिया अहमद मसूद ने सिरे से खारिज किया और कहा कि यह पाकिस्तान और वहां की मीडिया की साजिश है। रेसिस्टेंस फोर्स के मुखिया ने कहा कि तालिबान से उनकी जंग जारी रहेगी। 

पंजशीर से रेसिस्टेंस फोर्स की कमान संभाल रहे और तालिबान को चुनौती देने वाले अहमद मसूद ने एक ट्वीट में कहा कि तालिबान के पंजशीर पर कब्जा करने की खबरें फर्जी हैं। उन्होंने कहा 'पंजशीर को जीतने की खबरें पाकिस्तानी मीडिया में घूम रही हैं। यह एक झूठ है। इसे जीतना पंजशीर में मेरा आखिरी दिन होगा,इंशाअल्लाह।'


बता दें कि नॉर्दन अलांयस के एक ट्वीट के मुताबिक, 'पंजशीर में गुरुवार रात की लड़ाई में 450 तालिबान मारे गए और 230 ने आत्मसमर्पण किया। वहीं, बदख्शां प्रांत के 170 तालिबानी रेसिस्टेंस फोर्स में शामिल हुए।' 

सालेह ने भी भरी हुंकार

इससे पहले खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले एवं पंजशीर घाटी में प्रतिरोध बलों में शामिल हो चुके अमारुल्लाह सालेह ने शुक्रवार को कहा कि वह देश से नहीं भागे हैं और प्रांत को घेरने वाले तालिबान तथा अल कायदा जैसे आतंकवादी समूहों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर दोषी ठहराया। एक वीडियो संदेश में, सालेह (जो पूवोर्त्तर प्रांत पंजशीर में अहमद मसूद के प्रतिरोध आंदोलन के साथ सेना में शामिल हो गए हैं) ने कहा कि उनके अफगानिस्तान से भागने से संबंधित रिपोर्ट 'पूरी तरह से निराधार' हैं।



सालेह ने कहा कि मैं पंजशीर में हूं। स्थिति बहुत कठिन है। सालेह ने कहा कि हम पर तालिबान, उनके अल कायदा सहयोगियों, क्षेत्र और उसके बाहर के अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा आक्रमण किया गया है, जैसा कि हमेशा की तरह यह पाकिस्तानियों द्वारा समर्थित है। उन्होंने कहा कि हमने मैदान पर कब्जा कर लिया है, हमने विरोध किया है। प्रतिरोध आत्मसमर्पण करने वाला नहीं है, आतंकवाद के आगे झुकने वाला नहीं है और यह जारी रहने वाला है।  उन्होंने कहा कि कठिनाइयां हैं लेकिन मैं भागा नहीं हूं और न हीं फरार हूं।


गौरतलब है कि 15 अगस्त के दिन तालिबान ने अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा कर लिया। हालांकि, पंजशीर घाटी में वह अपनी धाक नहीं जमा पाया और उसे यहां पंजशीर के लड़ाके कड़ी चुनौती दे रहे हैं।


तालिबान के प्रति ब्रिटेन के रुख में आई नरमी, कहा-'बिना उसके मदद के अपनों को नहीं निकाल सकते थे, बातचीत को हम तैयार'

ब्रिटिश विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने शुक्रवार को कहा कि हम तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं देंगे। लेकिन नई हकीकतों का सामना करने के लिए हम तैयार हैं क्योंकि अफगानिस्तान को सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटा हुआ नहीं देखना चाहते।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर तालिबान द्वारा कब्जा किए जाने के समय कई देश उसके खिलाफ थे। लेकिन अब धीरे-धीरे उसे अन्य देशों का समर्थन मिल रहा है और उसके प्रति कई देश नरमी दिखा रहे हैं। ताजा मामले में तालिबान के प्रति ब्रिटेन के रुख में नरमी आई है।

ब्रिटिश विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने शुक्रवार को कहा कि हम तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं देंगे। लेकिन नई हकीकतों का सामना करने के लिए हम तैयार हैं क्योंकि अफगानिस्तान को सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटा हुआ नहीं देखना चाहते। पाकिस्तान के अपने दौरे में डोमिनिक राब ने कहा कि काबुल से 15,000 लोगों को निकाल पाना संभव नहीं होता, यदि तालिबान सहयोग नहीं करता। 

ब्रिटिश विदेश मंत्री ने कहा कि हम इस सरकार को मान्यता नहीं देंगे। इसके साथ ही ब्रिटिश मंत्री ने कहा कि हम सरकारों की बजाय देश को मान्यता देते हैं। राब ने कहा कि हम सीधे डायलॉग करने और संपर्क को महत्व देते हैं। राब का कॉमेंट यह बताता है कि किस तरह से ब्रिटेन और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की राय तालिबान के शासन को लेकर बदल रही है।

काबुल में तालिबान का शासन स्थापित होने के बाद से ही अमेरिका समेत कई देशों के सुर बदले हुए दिख रहे हैं। यहां तक कि पिछले दिनों काबुल एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले को लेकर भी अमेरिका ने कहा था कि इसमें तालिबान का हाथ नहीं है बल्कि इस्लामिक स्टेट ने ऐसा किया है। 


चीन खोलने जा रहा है 'कंगाल' तालिबान के लिए खजाना, किए ये दो बड़े वादे

अब उसने जो दो बड़े वादे किए हैं उसका खुलासा तालिबान के प्रवक्ता ने किया है। प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि चीन ने अफागनिस्तान में अपने दूतावास को खुला रखने और मदद के लिए खजाना खोलने का वादा किया है।

बीजिंग/काबुल: अफगानिस्तान के खिलाफ जंग की शुरुआत से ही चीन और पाकिस्तान ने तालिबान का जमकर साथ दिया। अब जब तालिबान के अफगान में हालात बद से बदतर हैं और उसके सामने भुखमरी जैसी स्थिति है तो चीन ने तालिबान के लिए अपना खजाना खोला है। चीन ने तालिबान के लिए दो बड़े वादे किए है।

अब उसने जो दो बड़े वादे किए हैं उसका खुलासा तालिबान के प्रवक्ता ने किया है। प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि चीन ने अफागनिस्तान में अपने दूतावास को खुला रखने और मदद के लिए खजाना खोलने का वादा किया है। 

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने ट्वीट किया, ''कतर के दोहा में इस्लामिक समूह के राजनीतिक दफ्तर के सदस्य अब्दुल सालम हनाफी की चीन के उप-विदेश मंत्री वू जियांगहाओ से फोन पर बात हुई है।'' सुहैल के मुताबिक, चीन के उप विदेश मंत्री ने कहा कि काबुल में उनका दूतावास खुला रहेगा और पहले की तुलना में रिश्ते को और मजबूत किया जाएगा। चीन ने कहा कि अफगानिस्तान क्षेत्र के विकास और सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है। प्रवक्ता ने कहा, ''चीन मानवीय सहायता को जारी रखेगा और बढ़ाएगा खासकर कोविड-19 के इलाज के लिए।'' 

दूसरी तरफ, बीजिंग में नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब सवाल पूछा गया तो चीन के प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान में इसका दूतावास दो देशों के बीच लेनदेन के लिए अहम चैनल है और इसका संचालन सामान्य है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, ''हम आशा करते हैं कि तालिबान एक खुला और समावेशी राजनीतिक ढांचा बनाएगा, उदार और स्थिर घरेलू और विदेश नीति अपनाएं और सभी आतंकवादी समूहों से नाता तोड़ ले।''

गौरतलब है कि अफगानिस्तान पर कट्टरपंथी इस्लामिक समूह के कब्जे के बाद दुनिया के अधिकतर देशों ने काबुल में अपने दूतावास बंद कर दिए और 'वेंट एंड वॉच' की नीति अपनाए हुए हैं। हालांकि, चीन ने अमेरिकी की जल्दबाजी में की गई वापसी की आलोचना करते हुए कहा है कि वह तालिबान के साथ दोस्ताना और सहयोगी रिश्ते को मजबूत करने के लिए तैयार है। चीनी नागरिकों की काफी पहले वापसी के बावजूद बीजिंग ने अपने दूतावास को खुला रखा है। 


अफगानिस्तान के हालात खराब लेकिन ये हमारे लिए 'मौका': पाकिस्तान

पाकिस्तान ने यह भी मान लिया है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद वहां के हालात बदल गए हैं। लेकिन पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह इस मौके का इंतजार काफी समय से कर रहा था।

काबुल: तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा किए जाने से पहले और बाद में भी तालिबान का साथ दे रहे पाकिस्तान ने अब उसे 'ज्ञान' दिया है। दरअसल, पाकिस्तान ने तालिबान को नसीहत दी है कि दुनिया उसकी मदद करे और उसे मान्यता दे इसके लिए उसे वैश्विक नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान ने यह भी मान लिया है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद वहां के हालात बदल गए हैं। लेकिन पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह इस मौके का इंतजार काफी समय से कर रहा था।


पाकिस्तान ने भी मान लिया है कि विदेशी सैनिकों की वापसी और तालिबान के कब्जे से उपजे हालात ने अफगानिस्तान को संकट में डाला है। लेकिन साथ ही उसने यह भी कहा है कि आज जो अफगानिस्तान में हो रहा है, उसका उसे लंबे समय से इंतजार था और यह उसके लिए बड़ा मौका है। खुद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ये बातें कही हैं। इस दौरान उन्होंने तालिबान को यह भी नसीहत दी कि दुनिया से मान्यता और मदद पाने के लिए उसे बुद्धि से काम लेते हुए वैश्विक नियमों का पालन करना चाहिए।


जियो टीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस्लामबाद में छठे थिंक टैंक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में जो 'महत्वपूर्ण' घटनाक्रम चल रहा है उसका क्षेत्र और दुनिया पर दूरगामी असर होगा। कुरैशी ने इसे पाकिस्तान के लिए मौका बताते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान को वह पाने का मौका मिला है, जिसके लिए वह लंबे समय से कोशिश कर रहा है।

कुरैशी ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए उसे इस मौके का इंतजार था। हालांकि, सच्चाई यह है कि तालिबान के कब्जे से वहां अशांति और अराजकता फैल गई है। असल में पाकिस्तान को तालिबान राज का इंतजार इसलिए था ताकि वह अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सके और तालिबान को कंट्रोल करने के नाम पर अमेरिका से आर्थिक मदद हासिल कर सके।

विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने पिछले दो दशक में क्षेत्र में सैन्य समाधान की कोशिश की, लेकिन जमीन की सच्चाई को नहीं स्वीकारने की वजह से यह असफल रहा। हालांकि, कुरैशी ने यह माना कि विदेशी सैनिकों की वापसी और राजनीतिक समाधान की अनुपस्थिति ने देश को संकट में डाला है। काबुल में एयरपोर्ट पर बम धमाके का जिक्र करते हुए कुरैशी ने कहा कि यह याद दिलाता है कि देश में स्थिति नाजुक है।


अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार! मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबानी सरकार के मुखिया, मुल्ला उमर का बेटा भी होगा शामिल

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब और शेर मोहम्मद अब्बाद स्तेनकजई तालिबान सरकार में वरिष्ठ पद संभालेंगे।

काबुल: आज से अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन गई है। एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, तालिबान सरकार का नेतृत्व मुल्ला अब्दुल गनी बरादर करेंगे। मुल्ला बरादर तालिबान के कतर स्थित राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख रह चुके हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब और शेर मोहम्मद अब्बाद स्तेनकजई तालिबान सरकार में वरिष्ठ पद संभालेंगे।

तालिबान के एक अधिकारी द्वारा नाम ना उजागर करने की शर्त पर बताया गया है, 'सभी शीर्ष नेता काबुल पहुंच गए हैं, जहां नई सरकार की घोषणा करने की तैयारी अंतिम चरण में है।'

एक अन्य तालिबान सूत्र ने कहा कि तालिबान के सर्वोच्च धार्मिक नेता हैबतुल्लाह अखुनजादा इस्लामी नियमों के तहत शासन और धार्मिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

मुल्ला बरादर के बारे में

  • मुल्ला गनी बरादर को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तान ने साल 2010 में एक ऑपरेशन में गिरफ्तार किया था
  • बरादर 8 साल तक पाकिस्तान की जेल में रहे
  • 2018 में अमेरिकी दबाव के बाद पाकिस्तान ने उसे रिहा कर दिया
  • पाकिस्तान से रिहा होने के बाद बरादर को कतर स्थानांतरित कर दिया गया जहां बरादर दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख नियुक्त किए गए
  • दोहा में बरादर ने उस समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके कारण अमेरिकी सेना को अपने 20 साल के अभियान को वापस लेने का समझौता करना पड़ा


अफगान में 'हार' के बाद अमेरिकियों ने कम कर दी प्रेजिडेंट जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग, अपने भी खफा !

अफगानिस्तान से अमेरिका के सैनकिों की वापसी का असर जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग पर पड़ा है। उनके इस कदम की आलोचना उनके अपने भी कर रहे हैं और नाराज हैं।

न्यूयॉर्क: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग अमेरिकियों ने अफगानिस्तान में मिली 'हार' के बाद कम कर दी है। अफगानिस्तान से अमेरिका के सैनकिों की वापसी का असर जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग पर पड़ा है। उनके इस कदम की आलोचना उनके अपने भी कर रहे हैं और नाराज हैं।


संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। 

एनपीआर और पीबीएस न्यूशोर के साथ एक नए मैरिस्ट नेशनल पोल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग 43 प्रतिशत के अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है, जो उनके राष्ट्रपति बनने के बाद से सबसे कम है। अधिकांश अमेरिकियों ने जो बाइडेन की विदेशी नीति की निंदा की है, जबकि आबादी के एक बड़े हिस्से ने भी अफगानिस्तान में संयुक्त राज्य की भूमिका को "विफल" करार दिया है।

नए पोल की मानें तो फिलहाल जो बाइडेन की अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में अप्रूवल रेटिंग 43 प्रतिशत है। वहीं करीब 56 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने उनकी विदेश नीति के तौर-तरीकों को अस्वीकार किया है। 

मैरिस्ट पोल द्वारा प्रकाशित डेटा से पता चलता है कि करीब अमेरिका की 61 प्रतिशत आबादी अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के खिलाफ है। पोल में कहा गया है कि हालांकि, अमेरिकी इस बारे में निश्चित नहीं हैं कि अफगानिस्तान में वास्तव में क्या होना चाहिए था, मगर एक बड़े बहुमत (लगभग 71 प्रतिशत) का कहना है कि अफगानिस्तान में संयुक्त राज्य की भूमिका विफल साबित हुई है। 


बता दें कि 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था और 31 अगस्त तक अमेरिका ने अपने सभी सैनिकों-नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया। 


आज अफगानिस्तान में चुनी जाएगी तालीबान की सरकार, जानिए-कौन होगा PM और कौन बनेगा सुप्रीम लीडर

अफगानिस्तान के बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच तालिबान अब एक ऐसे राष्ट्र पर शासन करने की उम्मीद कर रहा है जो बहुत अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर है। ऐसे में देखना है कि तालिबान किस तरह से अपने कदम को आगे बढ़ाता है।

काबुल: अफगानिस्तान में आज तालिबानी सरकार का गठन होगा।सूत्रों के मुताबिक तालिबान की ओर से नई सरकार का यह ऐलान जुमे की नमाज के बाद किया जाएगा। 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले लिया। बताते चलें कि अफगानिस्तान पर अब पूरी तरह से तालिबान का कब्जा हो चुका है। अमेरिकी फोर्स भी सोमवार की रात अफगानिस्तान से बाहर निकल गई।


अफगानिस्तान के बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच तालिबान अब एक ऐसे राष्ट्र पर शासन करने की उम्मीद कर रहा है जो बहुत अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर है। ऐसे में देखना है कि तालिबान किस तरह से अपने कदम को आगे बढ़ाता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा इस सरकार के सुप्रीम होंगे और प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति उनके आदेशों के तहत ही काम करेंगे। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के कल्चरल कमिशन के सदस्य अनमुल्लाह समनगनी ने इसकी जानकारी दी है। 


उन्होंने बताया, 'नई सरकार पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया पूरी हो गई है और कैबिनेट को लेकर जरूरी फैसले भी ले लिए गए हैं। हम जिस इस्लामी सरकार का ऐलान करेंगे वह लोगों के लिए उदाहरण होगी। अखुंदजादा के नेतृत्व में सरकार बनने को लेकर कोई शक नहीं है। वह सरकार के मुखिया होंगे और इसपर कोई सवाल ही नहीं किया जा सकता।'


अब अमेरिका पर भड़का तालिबान, जानिए-क्या है मामला

तालिबान ने अमेरिका पर जानबूझकर काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद विमानों और अन्‍य वाहनों को नष्‍ट करने का आरोप लगाया है। तालिबान ने कहा है कि ये सब कुछ बदनीयती की वजह से किया गया है।

काबुल: 'अगर आप किसी चीज को हासिल कर लेते हैं तो ये कोई बड़ी बात नहीं है बल्कि बड़ी बात यह है कि आप उसकी रक्षा और सुरक्षा कितनी कर पा रहे हैं' ये वाक्य आजकल तालिबान पर सटीक बैठ रही है। तालिबान ने अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन उसे गोली और बंदूकों को अलावा और कुछ आता नहीं है। इसलिए उसकी हालत दयनीय होती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, तालिबान के राज वाले अफगानिस्तान में सिर्फ एक महीने का ही राशन बचा हुआ है यानि एक महीने के बाद देश में भुखमरी आ जाएगी। लेकिन इस बीच तालिबान अब अमेरिका पर भड़का हुआ है।


दरअसल, तालिबान ने अमेरिका पर जानबूझकर काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद विमानों और अन्‍य वाहनों को नष्‍ट करने का आरोप लगाया है। तालिबान ने कहा है कि ये सब कुछ बदनीयती की वजह से किया गया है। बताते चलें कि अमेरिका अपने पीछे हजारों की संख्‍या में वाहन, बख्‍तरबंद गाड़ियां, हथियार काबुल में ही छोड़ गया है। जाने से पहले उसने काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद वाहनों को बर्बाद कर दिया था। यही हाल उसने विमानों का किया। जाने से पहले विमानों को उड़ान भरने के काबिल नहीं छोड़ा गया। हेलिकॉप्‍टर्स के न सिर्फ बाहरी शीशे को तोड़ दिया गया, बल्कि उन्‍हें तकनीकी रूप से भी निष्क्रिय कर दिया गया था। अमेरिका ने जाने से पहले अपने अत्‍याधुनिक रॉकेट डिफेंस सिस्‍टम को भी नष्ट कर दिया था।

सैन्य साजो-सामान को निष्क्रिय किए जाने के बाद अमेरिका का कहना था कि तालिबान अब इनका उपयोग नहीं कर सकेगा। जिन विमानों को अमेरिका ने खराब किया है उसमें सी-130जे हरक्‍यूलिस विमान और एमआई-17 हेलिकॉप्‍टर्स समेत कई दूसरे छोटे विमान भी शामिल हैं। इन्‍हीं विमानों को देखकर अब तालिबान अमेरिका पर आग बबूला हो रहा है। तालिबान के नेता अनस हक्‍कानी का कहना है कि अमेरिका वर्षों से हमें बर्बाद करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन काबुल एयरपोर्ट इस बात का गवाह है कि कौन असल में बर्बाद हुआ है।

वहीं, हक्‍कानी का कहना है कि अमेरिका ने देश की राष्‍ट्रीय संपत्ति को बर्बाद किया है । तालिबान के नेता का कहना है कि वो एयरपोर्ट को जल्‍द से जल्‍द शुरू करने पर जोर दे रहे हैं। यही अमीरात के सभी नेता भी चाहते हैं। खुशी की बात ये है कि घुसपैठिए यहां से अब भाग चुके हैं। उनका हर बार तालिबान के हाथों हार ही मिली। यही सच्‍चाई है कि अमेरिका को यहां पर हार मिली इसी वजह से उसको भागना भी पड़ा।


बहुत बड़ा धोखेबाज निकला तालिबान, पंजशीर घाटी की जंग में ले रहा आतंकी संगठन अल-कायदा का साथ

अफगानिस्तान की सत्ता पर बंदूकों के दम पर तालिबान ने सत्ता हासिल करने के बाद अब पंजशीर के शेरों से वह नहीं भिड़ पा रहा है। अब तालिबान ने विश्व से किया हुआ अपना वादा भी तोड़ दिया है। खबर है कि पंजशीर घाटी में लड़ाई के लिए वह अब आतंकी संगठन अल-कायदा का साथ ले रहा है।

काबुल: अफगानिस्तान की सत्ता पर बंदूकों के दम पर तालिबान ने सत्ता हासिल करने के बाद अब पंजशीर के शेरों से वह नहीं भिड़ पा रहा है। अब तालिबान ने विश्व से किया हुआ अपना वादा भी तोड़ दिया है। खबर है कि पंजशीर घाटी में लड़ाई के लिए वह अब आतंकी संगठन अल-कायदा का साथ ले रहा है।

अफगानिस्तान के पंजशीर में प्रतिरोध मोर्चे ने दावा किया है कि आतंकवादी संगठन अलकायदा उनके खिलाफ लड़ाई में तालिबान के साथ मिल गया है। तालिबान और दुनिया के बेहद खूंखार आतंकी संगठन अलकायदा में गठजोड़ को लेकर यह दावा ऐसे समय पर किया गया है जब दुनियाभर में इस बात को लेकर आशंका जाहिर की जा रही है कि अफगानिस्तान में नए निजाम के तहत आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा।  

बता दें कि अहमद मसूद की अगुआई वाले मोर्चे रिजिस्टन्स फोर्स ने ट्वीट किया, ''अल कायदा अफगान प्रतिरोध मोर्चे के खिलाफ लड़ने के लिए तालिबान में शामिल हुआ है। अमेरिका पीछे हट गया, इतिहास खुद को दोहराता है।'' 

अलकायदा और तालिबान के बीच दोस्ती बढ़ने की वजह से भारत की चिंता बढ़ गई है। बता दें कि हाल ही में अलकायदा ने तालिबान को अफगानिस्तान पर कब्जे की बधाई देते हुए कश्मीर सहित दुनिया के कई हिस्सों को आजाद कराने की अपील की है। अलकायदा के अलावा जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकवादी समूह भी तालिबान के साथ रिश्ता मजबूत करने में जुटे हैं।

गौरतलब है कि अलकायदा ने ही अमेरिका पर 9/11 का हमला किया था, जिसके बाद अमेरिका ने इसे खत्म करने के लिए अफगानिस्तान में सेना भेजी थी। अफगानिस्तान से लगभग 20 साल बाद 31 अगस्त को अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान का अंत कर दिया। वहीं, दूसरी तरफ अब अलकायदा खुद को मजबूत करने में जुटा हुआ है और उसका साथ अब तालिबान पंजशीर घाटी में युद्ध के लिए ले रहा है।


अमेरिका का 'मास्टर प्लान', IS-खुरासान के खिलाफ तालिबान को बनाएगा अपना 'हथियार'

पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों की मानें तो अमेरिका अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत यानी आईएस-के (ISIS-K) से लड़ने के लिए तालिबान के साथ सहयोग पर विचार कर रहा है।

नई दिल्ली: कहीं अफगानिस्तान से अमेरिका की सैन्य वापसी आतंकियों के खिलाफ एक बड़ा प्लान तो नहीं है? क्या अमेरिका द्वारा यह कदम आतंकियों के खात्में के लिए उठाया गया है? दरअसल, अमेरिका ने इस तरफ इशारा किया है।

अफगान से अमेरिका की सैन्य वापसी के बाद यदि आतंकी संगठन आईएस-खुरासान यह सोच रहा है कि उसके अच्छे दिन आए गए हैं, तो यह उसकी एक बड़ी भूल होगी। अमेरिका भले ही अफगानिस्तान को छोड़ चुका है, मगर वह आतंकियों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा। इस बार अमेरिका पहले से और ताकतवर होकर आईएस-खुरासान पर वार करेगा और इसमें उसकी मदद तालिबान कर सकता है।

पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों की मानें तो अमेरिका अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत यानी आईएस-के (ISIS-K) से लड़ने के लिए तालिबान के साथ सहयोग पर विचार कर रहा है। एक यूएस समाचार चैनल के मुताबिक, पेंटागन के टॉप अधिकारी ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान को हराने के लिए तालिबान के साथ समन्वय करने पर विचार कर रही है। जब बुधवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष सेना के जनरल मार्क मिली से आतंकवाद विरोधी प्रयास के लिए तालिबान के साथ सेना के हाथ मिलाने को लेकर पूछा गया तो उनका जवाब था कि यह संभव है। 


समाचार चैनल के मुताबिक, ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष आर्मी जनरल मार्क मिली ने कहा कि यह संभव है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों या अन्य के खिलाफ अफगानिस्तान में भविष्य में किसी भी आतंकवाद विरोधी हमले के लिए अमेरिका को तालिबान के साथ समन्वय करना होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि तालिबान एक 'क्रूर' संगठन है और वे बदलते हैं या नहीं यह देखा जाना बाकी है। उन्होंने आगे कहा कि युद्ध में आप वह करते हैं जो आपको मिशन और फोर्स के जोखिम को कम करने के लिए करना चाहिए।

रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने पेंटागन के संवाददाताओं से कहा कि फिलहाल, अफगानिस्तान में तालिबान के भविष्य की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि तालिबान और आईएसआईएस-के कम से कम अफगानिस्तान में एक दूसरे के दुश्मन नहीं तो प्रतिद्वंद्वी जरूर हैं। ऐसे में तालिबान का इस्तेमाल अमेरिका आईएस-के के खिलाफ कर सकता है।


न्यूयॉर्क में आपातकाल की घोषणा, मेयर की लोगों से अपील-घरों से बाहर ना निकलें

अमेरिका के न्यूयॉर्क में भारी बारिश की वजह से मेयर को आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी है। मेयर ने लोगों से अपील की है कि वह अपने घरों में रहें और बिल्कुल भी बाहर ना निकलें। इता नहीं भारी बारिश की वजह से मेट्रो सेवाएं भी स्थगित कर दी गई है।

न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क में भारी बारिश की वजह से मेयर को आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी है। मेयर ने लोगों से अपील की है कि वह अपने घरों में रहें और बिल्कुल भी बाहर ना निकलें। इता नहीं भारी बारिश की वजह से मेट्रो सेवाएं भी स्थगित कर दी गई है।

मेयर बिल डी ब्लासियो ने न्यूयॉर्क शहर में आपातकाल की घोषणा करते हुए ट्विट किया, 'हम आज रात एक ऐतिहासिक मौसम की घटना को सहन कर रहे हैं, जिसमें शहर भर में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, भयंकर बाढ़ और सड़कों पर खतरनाक स्थिति है।' उन्होंने न्यूयॉर्क के लोगों को अंदर रहने और सड़कों और बड़े पैमाने पर पारगमन से बचने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने ट्वीट में मेयर ने लिखा, 'मैं आज रात न्यूयॉर्क शहर में आपातकाल की स्थिति घोषित कर रहा हूं। हम आज रात एक ऐतिहासिक मौसम की घटना का सामना कर रहे हैं, जिसमें शहर भर में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, भयंकर बाढ़ और हमारी सड़कों पर खतरनाक स्थिति है। हम अपनी नजर अपने पावर ग्रिड पर रख रहे हैं। हमने लगभग 5,300 ग्राहकों को बिना बिजली के देखा है। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ घंटों में बारिश थम जाएगी। लेकिन तब तक, फिर से, अगर आप घर में रहे।'

मेयर ने लोगों से अपील की है कि कृपया आज रात सड़कों से दूर रहें और हमारे आपातकालीन सेवाओं को अपना काम करने दें। अगर आप घर से बाहर जाने की सोच रहे हैं तो ऐसा न करें। मेट्रो से दूर रहें। सड़कों से दूर रहें। इन भारी पानी में ड्राइव न करें।


तालिबान का अफगान भुखमरी के कगार पर, बचा है सिर्फ 1 महीने का राशन !

बुधवार को यूनाइटेड नेशन के अधिकारी ने इस संबंध में चेताते हुए कहा कि अफगानिस्तान में इस महीने के बाद जबरदस्त भुखमरी की स्थिति आ सकती है।

काबुल: बंदूकों के दमपर तालिबान ने अफगान की सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन सत्ता चलाना उसके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है। दरअसल, अफगानिस्तान भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है और उसके पास सिर्फ 1 महीने का ही राशन बचा है।


बुधवार को यूनाइटेड नेशन के अधिकारी ने इस संबंध में चेताते हुए कहा कि अफगानिस्तान में इस महीने के बाद जबरदस्त भुखमरी की स्थिति आ सकती है। यूएन अधिकारी ने कहा कि जिस तरह की चुनौतियों से अभी अफगानिस्तान गुजर रहा है उससे वहां खाने की किल्लत पैदा हो सकती है। 

स्थानीय मानवीय समन्वयक रमीज़ अलाकबारोव ने कहा कि देश की एक तिहाई आबादी आपातकालीन स्थिति का सामना कर रही है या फिर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। सर्दी का मौसम आ रहा है और देश सूखे का सामना कर रहा है ऐसे में अफगानिस्तान को काफी पैसों की जरुरत पड़ेगी ताकि लोगों को यहां भुखमरी से बचाया जा सके। 

यूएन के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के तहत पिछले कुछ हफ्तों में यहां हजारों के बीच खाने का सामान वितरित किया गया है। लेकिन अभी भी यहां की एक बड़ी आबादी के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी है। रमीज़ अलाकबारोव ने कहा कि तेजी से सर्दी का मौसम करीब आ रहा है। ऐसे में अगर अफगानिस्तान को और भी ज्यादा फंड नहीं दिया गया तब यहां फूड स्टॉक  सितंबर के अंत तक खत्म हो सकता है। 


सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन

खाने की समस्या के अलावा चिंता की बात यह भी है कि यहां सरकारी कर्मचारियों को पेमेंट भी नहीं मिल रहा और देश की करेंसी की कीमत भी काफी निचले स्तर पर पहुंच गई है। 


कुछ दिनों पहले रोम, स्थिति वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 39 मिलियन लोगों वाले इस देश के 14 मिलियन लोगों के सामने खाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अफगानिस्तान में तीन सालों में यह दूसरी बार सूखे जैसे हालात हैं। तालिबान के कब्जे से पहले भी सूखे जैसे हालात थे। डब्ल्यूपीएफ के आंकड़ों के मुताबिक अफगानिस्तान में लगभग 2 मिलियन बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।


अफगानिस्तान: पंजशीर के लड़ाकों ने मार गिराए 350 से ज्यादा तालिबानी आतंकी, लगभग 50 को बनाया बंदी

पंजशीर पर कब्जे के लिए आगे बढ़े तालिबान लड़ाकों को काफी नुकसान पहुंचा है। पंजशीर के शेरों ने तालिबान के 350 से ज्यादा लड़ाके मार गिराए हैं और 40 से ज्यादा लड़ाकों को पंजशीर की सुरक्षा में लगे नॉर्दर्न एलायंस ने बंदी बना लिया है।

काबुल: पंजशीर घाटी में तालिबान और नेशनल रेजिसटेंस फोर्स के बीच हुई लड़ाई में करीब सात लोगों की मौत हुई है। इसमें दो तालिबान विरोधी गुट के लड़ाके शामिल हैं।

बता दें कि 15 अगस्‍त को तालिबान ने काबुल पर कब्‍जा किया था। इसके बाद भी वो अब तक पंजशीर पर कब्‍जा पाने में नाकाम रहा है। पंजशीर की लड़ाई में तालिबान को इससे पहले भी नाकामी ही हाथ लगी थी। अब एक बार फिर से तालिबान के लिए ये घाटी उसकी नाकामी का सबब बन गई है।

पंजशीर पर कब्जे के लिए आगे बढ़े तालिबान लड़ाकों को काफी नुकसान पहुंचा है। पंजशीर के शेरों ने तालिबान के 350 से ज्यादा लड़ाके मार गिराए हैं और 40 से ज्यादा लड़ाकों को पंजशीर की सुरक्षा में लगे नॉर्दर्न एलायंस ने बंदी बना लिया है।

ट्विटर पर नॉर्दर्न एलायंस (Northern Allianc) की ओर से दावा किया गया है कि बीती रात खावक में हमला करने आए तालिबान के करीब 350 लड़ाकों को ढेर कर दिया गया है, जबकि 40 से अधिक को कब्जे में ले लिया गया है। NRF को इस दौरान कई अमेरिकी वाहन, हथियार हाथ लगे हैं। 

इससे पहले मंगलवार रात में भी पंजशीर के लड़ाकों द्वारा 7 तालीबानी आतंकियों को मारे जाने की खबर मिली थी। अफगानिस्‍तान की अशरफ गनी सरकार के मंत्री बिसमिल्‍लाह मोहम्‍मदी ने एक ट्वीट में बताया है कि पिछली रात तालिबान के आतंकियों ने पंजशीर पर हमला किया था जो नाकाम हो गया। इसमें सात आतंकी मार गिराए गए और कई घायल हो गए। मोहम्‍मदी भी नेशनल रेजिसटेंस ग्रुप के सक्रिय सदस्‍य हैं। हालांकि तालिबान की तरफ से इस बारे में अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। 


अमेरिका ने तालिबान को दी चेतावनी, कहा-'जरूरत पड़ी तो अफगान पर करते रहेंगे ड्रोन हमले'

अफगानिस्तान से बेशक अमेरिका ने अपना सैन्य अभियान खत्म कर लिया है लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने वह अफगानिस्तान पर ड्रोन हमले करता रहेगा।

काबुल: अफगानिस्तान से बेशक अमेरिका ने अपना सैन्य अभियान खत्म कर लिया है लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने वह अफगानिस्तान पर ड्रोन हमले करता रहेगा।

पेंटागन के प्रेस सचिव जान किर्बी ने मंगलवार को कहा कि भले ही अफगानिस्तान में उनकी सैन्य उपस्थिति खत्म हो गई है, लेकिन पेंटागन इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आइएसआइएस-के) और अफगानिस्तान के भीतर अन्य के खिलाफ जरूरत पड़ने पर ड्रोन हमले करना जारी रखेगा।

अमेरिकी ने हाल ही में काबुल एयरपोर्ट के पास हुए आत्मघाती हमले के बाद आइएस के योजनाकार के साथ-साथ रिहायशी इलाके में मौजूद एक संदिग्ध कार पर ड्रोन से हमला किया था। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 170 अफगान नगरिकों की मौत हुई थी। इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आइएसआइएस-के) ने इस हमलों की जिम्मेदारी ली थी। 

फक्स न्यूज ने बताया कि किर्बी ने संकेत दिया है कि अगर भविष्य में खतरा पैदा होता है तो पेंटागन ड्रोन हमलों का इस्तेमाल करेगा।


भारत-तालिबान वार्ता से पाकिस्तान झल्लाया, कहा-'अफगान में अशांति फैला रहा हिंदुस्तान'

पाकिस्तान लगातार भारत पर इस बात का आरोप लगाता रहा है कि भारत अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी कामों में करता रहा है और भारत इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करता रहा है।

नई दिल्ली/काबुल/इस्लामाबाद: भारत और तालिबान के बीच हुई वार्ता से पाकिस्तान बुरी तरह झल्ला गया है। अब उसने भारत पर खीझ निकलते हुए कहा है कि भारत, अफगानिस्तान में अशांति फैलाने का काम कर रहा है।

अब पाकिस्तान इस बात से परेशान हुए जा रहा है कि भारत और तालिबान बातचीत क्यों कर रहे हैं। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि पाकिस्तान, तालिबान के साथ मिलकर भारत को परेशान करने की कोशिश कर सकता है। बता दें कि 31 अगस्त यानी बीते कल भारत और अफगानिस्तान के बीच आधिकारिक वार्ता हुई थी।


चीन में पाकिस्तान के राजदूत हैं मोईन उल हक़। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए भारत, पाकिस्तान और तालिबान को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि कोई भी देश अफगानिस्तान में शांति को लेकर पाकिस्तान से अधिक इच्छुक नहीं है। पाकिस्तान की तरह ही चीन भी एक शांतिपूर्ण और स्थिर अफगानिस्तान चाहता है।

भारत और तालिबान के बीच शुरू हुए बातचीत को लेकर उन्होंने कहा है कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत अफगानिस्तान में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाएगा। इतिहास में भारत ने अफगानिस्तान में शांति के खिलाफ काम किया है।

पाकिस्तान लगातार भारत पर इस बात का आरोप लगाता रहा है कि भारत अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी कामों में करता रहा है और भारत इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करता रहा है।

क्या कहते हैं जानकर

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि तालिबान और भारत के बीच बातचीत से पाकिस्तान का परेशान होना जायज है। पाकिस्तान नहीं चाहता है कि तालिबान और भारत नजदीक आए। शायद इसीलिए पाकिस्तान, भारत और तालिबान के बीच बातचीत से परेशान हो रहा है।


अपने इन 130 बहादुर 'सैनिकों' को अफगान में तालिबान के हाथों मरने के लिए छोड़ गया अमेरिका, हर कदम पर दिया था साथ

अमेरिकी सेना 46 सर्विस डॉग सहित कुल 130 जानवरों को अफगानिस्तान में छोड़ आई है। इसमें पालतू बिल्लियां भी शामिल हैं। हालांकि, पेंटागन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

काबुल: अफगानिस्तान में अमेरिका ने सैन्य अभियान का खात्मा करके अपने सभी सैनिकों को सुरक्षित अपने वापस तो बुला लिया है लेकिन उन जांबाजों को तालिबान के हाथों मरने के लिए छोड़ दिया है जिन्होंने हर कदम पर अमेरिकी फौज की मदद की थी।

तालिबान की डेडलाइन से एक दिन पहले ही अफगानिस्तान छोड़ने वाले यूएस सैनिक मुश्किल वक्त में साथ देने वाले कई अफगानियों के साथ-साथ अपने बहादुर कुत्तों को भी उनके हाल पर छोड़ आये हैं। केज में बंद इन कुत्तों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं और इस शर्मनाक काम के लिए अमेरिका की जमकर आलोचना हो रही है।

बता दें कि अमेरिका से इतर भारतीय दूतावास ने मुश्किल वक्त में अपने सर्विस को अकेला नहीं छोड़ा था। तीनों डॉग्स को काबुल से सुरक्षित बाहर लाया गया था।


अमेरिकी सेना 46 सर्विस डॉग सहित कुल 130 जानवरों को अफगानिस्तान में छोड़ आई है। इसमें पालतू बिल्लियां भी शामिल हैं। हालांकि, पेंटागन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी का कहना है कि यूएस सैनिक किसी सर्विस डॉग को काबुल में छोड़कर नहीं आई। जिन डॉग्स की बात हो रही है वो अमेरिकी मैक्सवेल-जोन्स द्वारा स्थापित काबुल स्मॉल एनिमल रेस्क्यू चैरिटी के हैं। ये कुत्ते अमेरिकी सेना की देखरेख में नहीं थे।

पशु कल्याण समूह अमेरिकन ह्यूमेन  के अध्यक्ष और सीईओ रॉबिन आर गैंजर्ट ने कहा, ‘ये बहादुर कुत्ते सैनिकों की तरह की खतरनाक काम करते हैं, जिंदगियां बचाने का काम करते हैं। उन्हें इस तरह मरने के लिए छोड़ना छोड़ना निंदनीय है। उन्हें बेहतर सेवाएं मिलनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने बहादुरी से हमारे देश की सेवा की है’। इसी तरह कई अन्य गैर सरकार संगठनों ने डॉग्स को बचाने की गुहार लगाते हुए अमेरिका की आलोचना की है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी अमेरिका को निशाना बनाया जा रहा है।

बता दें कि इस पूरे मामले में भारत की तारीफ हो रही है, क्योंकि उसने अमेरिका की तरह अपने डॉग्स को मरने के लिए नहीं छोड़ा। भारतीय दूतावास के कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित किया कि अफगानिस्तान छोड़ते वक्त तीनों सर्विस डॉग्स भी उनके साथ जाएं। 

माया, रूबी और बॉबी नाम के ये डॉग्स काबुल में भारतीय दूतावास में तैनात थे। जब नई दिल्ली ने वहां तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) कर्मियों को भारतीय वायु सेना की मदद से रेस्क्यु किया, तब इन डॉग्स को भी भारत लाया गया।


अफगानिस्तान में नया संविधान रद्द, पुराने के मुताबिक चलेगा देश, ईरान के तर्ज पर सरकार गठन की तैयारी में तालिबान

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ईरान के तर्ज में तालिबान के अफगान में सरकार का गठन होगा। इतना ही नहीं, नए संविधान को भी तालिबान ने रद्द कर दिया है और अब पुराने संविधान के हिसाब से देश चलेगा।

काबुल: अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से ही तालिबान सरकार गठन करने की प्रक्रिया में जुट गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ईरान के तर्ज में तालिबान के अफगान में सरकार का गठन होगा। इतना ही नहीं, नए संविधान को भी तालिबान ने रद्द कर दिया है और अब पुराने संविधान के हिसाब से देश चलेगा।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला अखुन्दज़ादा हो सकते हैं। तालिबानी सरकार के नए सुप्रीम लीडर और उनके अधीन नई सुप्रीम काउंसिल होगी। जिसके 11 से 70 सदस्य हो सकते हैं। साथ ही मुल्ला बरादर या मुल्ला याकूब को अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। आपको बता दें कि मुल्ला याकूब मुल्ला उमर का बेटा है और काफी हार्डलाइनर माना जाता है।

सुप्रीम लीडर अखुन्दज़ादा कांधार में ही रहेंगे और प्रधानमंत्री और सरकार के बाकी मंत्री काबुल से सरकार का संचालन करेंगे। सूत्रों ने बताया कि तालिबान अफगानिस्तान के मौजूदा संविधान को रद्द कर 1964-65 के पुराने संविधान को ही फिर से लागू कर सकता है क्योंकि तालिबान का मानना है कि नया संविधान विदेशी मुल्कों के अधीन बनाया गया था।

अहम बात ये है कि सरकार का गठन अगले 5 से 7 दिनों में हो सकता है और इसे लेकर पिछले 4 दिनों से तालिबानी नेता कांधार में आपसी चर्चा कर रहे हैं। 

सूत्रों ने ये भी बताया कि तालिबान का हार्डलाइनर गुट सत्ता में किसी और को शामिल नहीं करना चाहता है। मगर दोहा ऑफिस के तालिबानी नेता दूसरे पक्षों को भी शामिल करना चाहते हैं।

सूत्रों के मुताबिक तालिबानी सरकार में गैर तालिबानी पक्षों को सुप्रीम काउंसिल और मंत्रालयों दोनों में ही जगह दी जा सकती है। हालांकि देखना ये दिलचस्प होगा कि नार्दन एलायंस और तालिबान के बीच बातचीत में कोई समझौता हो पाता है या नहीं।

बता दें कि नार्दन एलायंस सरकार में बराबर की हिस्सेदारी चाहता है और तालिबान इसके लिए फिलहाल राज़ी है। यही वजह है कि पहले दो चरणों की बातचीत तो सकारात्मक रही मगर सूत्रों के मुताबिक आखिरी की दो वार्ता उतनी सकारात्मक नहीं रही, जितनी पहले की दोनों मुलाकातें थीं।


तालिबान ने दुनिया को दी चेतावनी, कहा-'हमले की भूल न करे कोई भी देश', अफगानियों से की ये अपील

अमेरिकी सैन्य अभियान के अंत की घोषणा के साथ ही अफगानिस्तान पर तालिबान का राज कायम हो गया है। इस बीच तालिबान ने दुनियाभर के देशों को चेतावनी दी है कि कोई भी देश अफगानिस्तान पर हमला करने की भूल ना करे। तालिबान ने कहा कि किसी भी देश को अफगानिस्तान पर हमला करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

काबुल: अमेरिकी सैन्य अभियान के अंत की घोषणा के साथ ही अफगानिस्तान पर तालिबान का राज कायम हो गया है। इस बीच तालिबान ने दुनियाभर के देशों को चेतावनी दी है कि कोई भी देश अफगानिस्तान पर हमला करने की भूल ना करे। तालिबान ने कहा कि किसी भी देश को अफगानिस्तान पर हमला करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

मिली जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की पूरी तरह से वापसी का जश्न मनाने के लिए काबुल में आयोजित एक कार्यक्रम में, तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य अनामुल्ला समांगानी ने अफगानों से देश नहीं छोड़ने बल्कि देश के पुनर्निर्माण के लिए उनके साथ काम करने का आग्रह किया। एक समाचार चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्ट के अनुसार समागानी ने आगे कहा कि देश में असुरक्षा की समस्या का समाधान हो गया है। अब लोग अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। इस्लामिक अमीरात के नेतृत्व में अफगानिस्तान की अगली सरकार क्षेत्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

तालिबान ने अमेरिकी सैनिकों के जाने के कुछ घंटों बाद काबुल हवाई अड्डे पर मीडिया को संबोधित किया और कहा कि जीत सभी अफगानों की है। बता दें कि अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को घोषणा की कि युद्धग्रस्त देश में अमेरिका ने सबसे लंबे समय तक चले युद्ध को समाप्त कर दिया है। 

बता दें कि अमेरिकी सैनिकों की विदाई के साथ ही तालिबान ने काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है। अमेरिकी बलों को ले जाने वाला आखिरी विमान निर्धारित समय से एक दिन पहले सोमवार  मध्य रात्रि को अफगानिस्तान से रवाना हुआ और इसी के साथ अफगानिस्तान में लगभग 20 साल तक चले युद्ध का अंत हो गया।


पाकिस्तान: जन्माष्टमी के दिन नापाक हरकत, भगवान कृष्ण की मूर्ति तोड़ी

पाकिस्तान में हिंदुओं के प्रति अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में एक बार फिर से उपद्रवियों ने हिन्दू मंदिर को निशाना बनाया है। उपद्रवियों ने जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्तियों को तोड़ डाला।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में हिंदुओं के प्रति अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में एक बार फिर से उपद्रवियों ने हिन्दू मंदिर को निशाना बनाया है। उपद्रवियों ने जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्तियों को तोड़ डाला।


मामला सिंध के खिप्रो का है, जहाँ कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा कर रहे हिंदुओं पर कट्टरपंथियों मुस्लिमों ने हमला किया और भगवान कृष्ण की मूर्तियों को भी खंडित कर दिया। बताया जा रहा है कि यह जगह जबरन धर्म परिवर्तन के लिए काफी बदनाम है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में सोमवार (30 अगस्त) को हिंदू समुदाय के लोग अपने त्योहार कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा कर रहे थे, जिससे मुस्लिम कट्टरपंथी भड़क गए। कुछ देर बाद ही कट्टरपंथियों की भीड़ पूजा स्थल पर गई और उन्होंने कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा कर रहे लोगों को मारपीट कर वहाँ से भगा दिया। इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के मूर्ति को भी क्षतिग्रस्त किया। सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें शेयर की जा रही हैं।


पाकिस्तानी एक्टिविस्ट और वकील राहत ऑस्टिन ने ट्वीट कर बताया, ”सिंध के खिप्रो में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। हिंदू भगवान का अपमान किया गया है, क्योंकि वे भगवान कृष्ण का जन्मदिन (जन्माष्टमी) मना रहे थे। पाकिस्तान में इस्लाम के खिलाफ ईशनिंदा के झूठे आरोप में भी मॉब लिंचिंग या मौत की सजा दी जाती है, लेकिन गैर-मुस्लिम देवताओं के खिलाफ अपराध में कोई सजा नहीं होती है।”

उन्होंने आगे लिखा, ”मैं हिंदू धर्म के बारे में गहराई से नहीं जानता। “मंदर” शब्द का अर्थ है मंदिर। मैं उस वीडियो को पोस्ट करने जा रहा हूँ जो मुझे मिला है, जहाँ इस घटना की रिपोर्ट करने वाला व्यक्ति कहता है कि ये मंदिर है। मैंने इसके लिए अस्थायी पूजा स्थल शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन रिपोर्टर ने इसका उल्लेख नहीं किया।” राहत ऑस्टिन ने कहा कि मजे की बात यह है कि आप और मैं, दोनों पाकिस्तान में नहीं रहते। रिपोर्टर पाकिस्तान में रहता है और जब यह घटना हुई तब वह वहीं था।

वहीं, इस वीडियो को पाकिस्तान में ‘द राइज न्यूज’ की पत्रकार और संस्थापक संपादक वींगास (Veengas) ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने ​लिखा कि खिप्रो में जन्माष्टमी पर कुछ लोगों ने तोड़-फोड़ की। क्या दोषियों को सजा मिलेगी? इससे पहले भी उन्होंने हिंदूओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई है।


अफगानिस्तान छोड़ने से पहले अमेरिका ने अपने सैन्य साजो-सामान कर दिया डिसेबल, तालिबानी आतंकी नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल

अमेरिका ने अब स्पष्ट कर दिया है कि तालिबानी उन हथियारों का इस्तेमाल बिल्कुल भीं नहीं कर सकेंगे। क्योंकि उन्हें अमेरिकी सैनिकों द्वारा डिसेबल कर दिया गया है। यानि अब वह सिर्फ कबाड़ बनकर रह गए हैं।

काबुल: लगभग 20 साल बाद अमेरिका का अफगानिस्तान से सैन्य अभियान खत्म हो चुकी है। अमेरिकी सेना के आखिरी विमान ने अपने सैनिकों को लेकर वापस अमेरिका आ चुका है। इस बीच इस तरह की खबरें आ रही थीं कि अमेरिकी सेना के बहुत सारी चीजें काबुल एयरपोर्ट पर रह गई हैं और उनका इस्तेमाल भविष्य में तालिबानी आतंकी कर सकते हैं। लेकिन अमेरिका ने अब स्पष्ट कर दिया है कि तालिबानी उन हथियारों का इस्तेमाल बिल्कुल भीं नहीं कर सकेंगे। क्योंकि उन्हें अमेरिकी सैनिकों द्वारा डिसेबल कर दिया गया है। यानि अब वह सिर्फ कबाड़ बनकर रह गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सोमवार को देश छोड़ने से पहले काबुल एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में मौजूद विमानों, सशस्त्र वाहनों और यहां तक की हाईटेक रॉकेट डिफेंस सिस्टम तक को डिसेबल कर दिया है। अमेरिकी जनरल ने इसकी जानकारी दी है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड के मुखिया जनरल केनेथ मैकेंजी ने बताया कि हामिद करजई एयरपोर्ट पर मौजूद 73 विमानों को सेना ने डिमिलिट्राइज्ड कर दिया है, जिसका अर्थ है कि अब ये विमान इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा, 'वे विमान अब कभी नहीं उड़ सकेंगे...उन्हें कभी भी कोई भी संचालित नहीं कर सकेगा। निश्चित रूप से वे फिर कभी नहीं उड़ पाएंगे।'

मैकेंजी ने आगे बताया, '14 अगस्त को बचाव अभियान शुरू करते हुए अमेरिका ने करीब 6000 सैनिकों को काबुल एयरपोर्ट पर तैनात किया था। इसकी वजह से अब हवाईअड्डे पर 70 MRAP बख्तरबंद वाहनों को भी नष्ट कर दिया गया है। इस तरह के एक वाहन की कीमत करीब 10 लाख डॉलर है। इसके अलावा 27 'हमवीज' वाहन भी डिसेबल कर दिए गए हैं, जिन्हें अब कभी कोई इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

बताते चलें कि अफगानिस्तान में अमेरिका ने रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार रोधी C-RAM सिस्टम भी छोड़ा है, जिसका इस्तेमाल एयरपोर्ट को रॉकेट हमले से बचाने के लिए किया गया था। इसी सिस्टम की वजह से सोमवार को इस्लामिक स्टेट की ओर से 5 रॉकेट हमले होने के बाद भी काबुल एयरपोर्ट सुरक्षित रहा। 

मैकेंजी ने कहा, 'हमने इन सिस्टमों को अफगानिस्तान से अंतिम विमान उड़ने तक आखिरी मिनट तक चलाया। इन सिस्टमों को ब्रेक डाउन करना जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसलिए हमने इन सिस्टमों को डिमिलिट्राइज किया ताकि इसका कोई इस्तेमाल न कर सके।' अमेरिका ने भी मंगलवार की समय-सीमा से पहले अपने सैनिकों की वापसी की पुष्टि की है, जिसके साथ ही, इस युद्धग्रस्त देश में करीब 20 साल की अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समाप्त हो गयी है।


अफगानिस्तान: 20 साल बाद अमेरिका का सैन्य अभियान खत्म, आखिरी विमान ने भरी उड़ान

अफगानिस्तान में पंजशीर घाटी को छोड़कर तालिबान का राज आज पुरी तरह से हो गया है। आज अमेरिकी सैन्य अभियान का लगभग 20 वर्ष बाद अंत हो गया गया और अमेरिका सेना का आखिरी विमान वापस अमेरिका उड़ गया।

काबुल: अफगानिस्तान में पंजशीर घाटी को छोड़कर तालिबान का राज आज पुरी तरह से हो गया है। आज अमेरिकी सैन्य अभियान का लगभग 20 वर्ष बाद अंत हो गया गया और अमेरिका सेना का आखिरी विमान वापस अमेरिका उड़ गया।



अफगानिस्तान में 20 साल तक लंबे युद्ध के बाद अमेरिका ने अपनी आखिरी उड़ान भर ली है। अमेरिकी 31 अगस्त तक अपनी सारी सेना अफगानिस्तान से हटाने वाला था लेकिन तालिबान को दी डेडलाइन से पहले ही उसने देश में अपनी सैन्य उपस्थिति खत्म कर दी है। 


अमेरिका के आखिरी विमान सी-17 ने 30 अगस्त की दोपहर को काबुल के हामिद करजई एयरपोर्ट से उड़ान भरी जिसके साथ ही अफगानिस्तान अब अमेरिकी सेना मुक्त हो गया है। अमेरिका ने जाने से पहले घोषणा कर इस बात की जानकारी दी और कहा कि अपनी पूरी वापसी और सैन्य मिशन की समाप्ति की घोषणा करता है।

यूएस सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल केनेथ मैकेंजी ने सोमवार दोपहर कहा, "मैं यहां अफगानिस्तान से अपनी वापसी के पूरा होने और अमेरिकी नागरिकों, कमजोर अफगानों को निकालने के लिए सैन्य मिशन की समाप्ति की घोषणा करता हूं।" अमेरिका "आखिरी मानवयुक्त विमान अब अफगानिस्तान से निकल रहा है।"

अफगानिस्तान से आखिरी विमान के उड़ जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि अफगानिस्तान में 20 साल से मौजूद उनकी सैन्य उपस्थिति अब खत्म हो गई है। उन्होंने अपने कमांडरों को धन्यवाद देते हुए कहा कि कमांडरों ने बिना किसी और अमेरिकी की जान गंवाए अफगानिस्तान से अपनी निकासी पूरी की।


अमेरिका ने 14 अगस्त के बाद अफगानिस्तान से कुल 123,000 लोगों को निकाला है। इनमें अमेरिकी नागरिक, अमेरिकी सहयोगी और अमेरिकी सहयोगी रहे अफगान नागरिक शामिल थे। यह अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा एयरलिफ्ट मिशन था। बाइडेन ने कहा कि 31 अगस्त को को दोपहर वह अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति आगे न बढ़ाने के फैसले पर लोगों को संबोधित करेंगे।


काबुल एयरपोर्ट पर रॉकेट हमला: IS ने ली रॉकेट हमले की जिम्मेदारी, अमेरिका ने तालिबान से कहा-'अपनी बात पर खरे उतरो'

आतंकी समूह का कहना है कि खिलाफत के लड़ाकों ने 6 रॉकेट्स के जरिए काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अटैक किया था। अमेरिकी एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 5 रॉकेट्स को इंटरसेप्ट किया था।

काबुल: आज काबुल एयरपोर्ट को निशाना बनाते हुए 5 रॉकेट हमले किए गए। इस हमले की जिम्मेदारी खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है। इस्लामिक स्टेट से जुड़े नाशेर न्यूज ने टेलीग्राम चैनल पर हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकी समूह का कहना है कि खिलाफत के लड़ाकों ने 6 रॉकेट्स के जरिए काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अटैक किया था। अमेरिकी एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 5 रॉकेट्स को इंटरसेप्ट किया था। 


इस बीच तालिबान का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से पूरी तरह वापसी होने के साथ ही देश में इस्लामिक स्टेट के हमले रुक जाएंगे। उसकी इस बात को लेकर अमेरिका ने उसपर निशाना साधा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने सोमवार को कहा कि वॉशिंगटन यह उम्मीद करता है कि तालिबान अपनी ओर से किए गए वादों पर खरा उतरेगा। अमेरिकी प्रवक्ता का यह बयान तालिबान के उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उसने कहा था कि हम चाहते हैं कि काबुल में अमेरिका की राजनयिक उपस्थिति बनी रहे। 

नेड प्राइस ने कहा, 'हमने तालिबान की ओर से कई बयान सुने हैं। इनमें से कई बयान सकारात्मक हैं और कई बयानों में उसने कुछ बेहतर करने की बात कही है, लेकिन अंत में हम उसके कामों को देखना चाहते हैं, बातों को नहीं।' इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिका अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क से कोई बात नहीं कर रहा है।

बता दें कि अमेरिका ने हक्कानी ग्रुप को 2012 में आतंकी समूह की सूची में डाला था और अब वह अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद सत्ता का हिस्सा बन गया है। यही नहीं एक बार फिर से अमेरिका ने दोहराया है कि 31 अगस्त को उसके सैनिक अफगानिस्तान से पूरी तरह से लौट आएंगे।


अमेरिका के 'मिशन अफगान' खत्म होने से पहले काबुल एयरपोर्ट पर दागे गए 5 रॉकेट !

अफ़ग़ानिस्तान से अपनी वापसी को पूरा करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका तैयार है। 31 अगस्त आखिरी तारीख है। इससे ठीक पहले सोमवार को रॉकेट्स ने अफ़ग़ान राजधानी काबुल में उड़ान भरी।

काबुल: 31 अगस्त से अफगानिस्तान पर तालिबान का हुकुमत पंजशीर घाटी को छोड़कर पूरी तरह हो जाएगा। इस दिन अमेरिकी सैनिक और उसके राजदूत भी अफगानिस्तान छोड़ देंगे। इस बीच अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने से पहले काबुल एयरपोर्ट पर 5 रॉकेट दागे गए हैं।


अफ़ग़ानिस्तान से अपनी वापसी को पूरा करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका तैयार है। 31 अगस्त आखिरी तारीख है। इससे ठीक पहले सोमवार को रॉकेट्स ने अफ़ग़ान राजधानी काबुल में उड़ान भरी। एक अमेरिकी अधिकारी ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि काबुल हवाईअड्डे पर 5 रॉकेट दागे गए, जिन्हें अमेरिकी मिसाइल रोधी प्रणाली ने इंटरसेप्ट किया है। फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। 

रॉकेट हमले सोमवार सुबह काबुल के सलीम कारवां इलाके में हुए। विस्फोट के बाद गोलीबारी शुरू हो गई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी कौन कर रहा है।एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि उन्होंने तीन धमाकों की आवाज सुनी और फिर आग की तरह आसमान में चमक उठती देखी। धमाकों के बाद लोग दहशत में हैं। 

इस मामले पर अमेरिकी अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। रॉकेट दागे जाने के बाद भी हवाई अड्डे पर अमेरिका का निकासी अभियान जारी है।

कट्टरपंथी इस्लामवादी तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जे के बाद से अमेरिका के नेतृत्व वाली रेस्क्यू उड़ानों में डरे हुए लोगों का पलायन शुरू हो गया। अमेरिका ने काबुल हवाई अड्डे से 114,000 से अधिक लोगों का रेसक्यू किया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर मंगलवार को समाप्त यह अभियान समाप्त हो जाएगा। हजारों अमेरिकी सैनिक अफगान छोड़ देंगे। 


अफगान सीमा पर तालिबान की गोलीबारी में दो पाकिस्‍तानी सैनिक ढेर

पहले तो तालिबान ने टीटीपी को पाकिस्तान का मुद्दा बताते हुए उसे इस मसले पर खुद से निबटने की सलाह दी और फिर भारत के साथ 'अच्छे रिश्ते' की बात कहकर पाकिस्तान को तालिबान सिरदर्द दे दिया है। अब खबर है कि तालिबान के हमले से पाकिस्तान के दो जवानों की मौत हो गई है

इस्‍लामाबाद/काबुल: अफगानिस्तान के खिलाफ जंग में पर्दे के पीछे से तालिबान का साथ देने वाले पाकिस्तान को एक के बाद एक झटके तालिबान ही दे रहा है। पहले तो तालिबान ने टीटीपी को पाकिस्तान का मुद्दा बताते हुए उसे इस मसले पर खुद से निबटने की सलाह दी और फिर भारत के साथ 'अच्छे रिश्ते' की बात कहकर पाकिस्तान को तालिबान सिरदर्द दे दिया है। अब खबर है कि तालिबान के हमले से पाकिस्तान के दो जवानों की मौत हो गई है।

अफगानिस्‍तान की सत्‍ता पर तालिबान के कब्‍जे से इतराए पाकिस्‍तान का गुरूर अब चकनाचूर होता नजर आ रहा है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफगानिस्‍तान की सीमा पार से आतंकियों ने भारी गोलीबारी की है जिसमें पाकिस्तानी सेना के दो जवान मारे गए हैं। यह घटना पाकिस्तान के बजौर जिले में हुई है। समाचार एजेंसी रायटर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद इस तरह की यह पहली घटना है।

हालांकि पाकिस्तानी सेना ने भी दावा किया है कि उसने भी जवाबी कार्रवाई में दो से तीन आतंकियों को मार गिराया है। अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्‍तानी सेना की मीडिया विंग ने पाकिस्तान के खिलाफ गतिविधियों के लिए आतंकियों द्वारा अफगानिस्‍तान की धरती के इस्तेमाल की बात कहते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। पाकिस्‍तानी सेना ने कहा है कि हम यह उम्‍मीद करते हैं कि अफगानिस्तान भविष्‍य में इस तरह की गतिविधियों की इजाजत नहीं देगा।  

इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के उस पार अफगानिस्तान के भीतर से आतंकवादियों ने बाजौर जिले में एक सैन्य चौकी को निशाना बनाकर भारी गोलीबारी की। पाकिस्तानी सेना के जवानों ने भी इस गोलीबारी का जवाब दिया जिसमें दो से तीन आतंकी मारे गए है जबकि तीन से चार जख्‍मी हुए हैं। बता दें कि बीते गुरुवार को बामन सेक्टर में अफगानिस्तान की सीमा के पार से एक जांच चौकी पर आतंकवादी हमले में एक पाकिस्तानी सैनिक की मौत हो गई थी।


अफगानिस्तान: काबुल एयरपोर्ट के समीप धमाका, अमेरिकी एयर स्ट्राइक की खबर

एक बार फिर से काबुल एयरपोर्ट के पास धमाका हुआ है। यह धमाका तब हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 24 से 36 घंटों काबुल एयरपोर्ट पर ब्लास्ट की आशंका जताई थी।

काबुल: एक बार फिर से काबुल एयरपोर्ट के पास धमाका हुआ है। यह धमाका तब हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 24 से 36 घंटों काबुल एयरपोर्ट पर ब्लास्ट की आशंका जताई थी। चश्मदीदों का कहना है कि काबुल में एयरपोर्ट के नजदीक रिहायशी इलाके में यह धमाका हुआ। समाचार एजेंसी एपी ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया है कि यह राकेट से किया गया हमला था जिसमें एक बच्चे की मौत हो गई है।

समाचार एजेंसी रायटर ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि अमेरिका ने काबुल में आइएसआइएस खुरासान (ISIS-K) के आतंकियों को निशाना बनाते हुए यह हमला किया है। शुरुआत में इसे आतंकी हमला समझा गया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि यह उनका सैन्य अभियान था। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के खुरासान मॉड्यूल के आतंकवादियों को निशाना बनाया है। वहीं, न्यूज एजेंसी एपी ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि यह रॉकेट उस गाड़ी पर दागा गया जिसमें इस्लामिक स्टेट के कई फिदायीन हमलावर थे और काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिकों पर हमला करने वाले थे। तालिबान ने भी यही कहा है।

अधिकारियों ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि इस्लामिक स्टेट खुरासान के आतंकी को निशाना बनाने के लिए रॉकेट दागा गया, यह आतंकी संगठन पश्चिमी देशों और तालिबान दोनों का दुश्मन है और गुरुवार को एयरपोर्ट के पास हुए हमले का जिम्मेदार है। उस फिदायीन हमले में 13 अमेरिकी सैनिक के अलावा 150 से अधिक लोग मारे गए।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वह शुरुआती जानकारी दे रहे हैं और इसमें कुछ बदलाव हो सकता है। सोशल मीडिया पर सामने आए फुटेज में दिख रहा है कि एक रिहायशी इलाके में मकानों के ऊपर काला धुआं उठ रहा है। लोग गलियों में भागते हुए दिख रहे हैं। अमेरिका ने यह हमला ऐसे समय पर किया जब उसके सैनिक और नागरिक अब भी काबुल में मौजूद हैं, जो 31 अगस्त तक वहां से निकल जाएंगे।


स्‍थानीय टेलीविजन चैनलों पर आसमान में काला धुंआ उठती फुटेज सामने आई हैं। अभी किसी के हताहत होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि धमाका एयरपोर्ट इलाके के उत्‍तरी ओर हुआ है। वहीं टोलो न्‍यूज की ओर से कहा गया है कि काबुल हवाई अड्डे के पास खाजा बघरा इलाके में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाकर यह हमला किया गया है।


हमास और इजरायल में फिर छिड़ी जंग, किसी ने छोड़े आग के गुब्बारे तो किसी ने बरसाए बम !

इजरायल की वायुसेना ने गाजा में रविवार को हमास के ठिकानों पर हवाई हमला बोला। दरअसल, हमास की ओर से इजरायल में आग के गोलों से भरे गुब्बारे छोड़े जाने के बाद ये घटना सामने आई।

येरूशलम: एक बार फिर से इजरायल औऱ हमास के बीच संघर्ष शुरू हो गया है। इजरायल की वायुसेना ने गाजा में रविवार को हमास के ठिकानों पर हवाई हमला बोला। दरअसल, हमास की ओर से इजरायल में आग के गोलों से भरे गुब्बारे छोड़े जाने के बाद ये घटना सामने आई। 

गाजा के स्थानीय लोगों की इजरायली सैनिकों के साथ हिंसक झड़प भी हुई। इजरायली सेना ने कहा, लड़ाकू विमानों ने हमास के सैन्य ठिकानों पर धावा बोला, जहां हथियार बनाए जा रहे थे और आतंकी प्रशिक्षण दिया जा रहा था।

जानकारी के मुताबिक, जाबलिया के निकट एक खुफिया सुरंग पर भी बम बरसाए गए। इजरायली सेना ने कहा कि ये दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि हमास किस तरह लगातार आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता आया है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। हालांकि इजरायली बमबारी में गाजा पट्टी में किसी के मारे जाने को लेकर कोई खबर अभी तक नहीं है। वहीं वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मिलने के बाद इजरायली पीएम नफ्ताली बेनेट ने कहा कि गाजा के इस्लामिक कट्टरपंथियों की शांति भंग करने की किसी भी कोशिश का माकूल जवाब दिया जाएगा।


इससे पहले हमास के सैकड़ों समर्थकों ने इजराइल के साथ लगती सीमा पर प्रदर्शन किए। हमास समर्थकों ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का मकसद गाजा पट्टी पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने के लिए इजराइल पर दबाव बढ़ाना है। हमास के 2007 में गाजा पट्टी पर नियंत्रण के बाद से इजराइल और मिस्र ने उस पर पाबंदी लगा रखी है।


अफगानिस्तान: काबुल एयरपोर्ट पर अगले 24 या 36 घंटे में हो सकता है एक और अटैक, अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान

वाशिंगटन: अफगानिस्तान में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। काबुल एयरपोर्ट पर ब्लास्ट ले बाद सैकड़ों लोगों की मौत हुई और अब एक बार फिर से हमले की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आशंका जाहिर की है कि अगले 24 से 36 घंटे में फिर से काबुल एयरपोर्ट पर हमला हो सकता है।


अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने शनिवार को चेताया कि अमेरिकी सैन्य कमांडरों का मानना ​​है कि काबुल हवाई अड्डे पर घातक आत्मघाती बम विस्फोट जैसा एक और आतंकवादी हमला "अगले 24-36 घंटों में होने की प्रबल आशंका है।" 


आतंकी हमले की आशंका को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट छोड़ने को भी कहा है। आतंकी हमलों की चेतावनियों से अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा लोगों को निकालने की जो प्रक्रिया चल रही है, उस पर भी असर पड़ रहा है।

काबुल स्थित अमेरिकी दूतावास ने सिक्योरिटी अलर्ट में कहा, "एक विशिष्ट, विश्वसनीय खतरे के कारण सभी अमेरिकी नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट का क्षेत्र तुरंत छोड़ देना चाहिए।" दूतावास ने खतरे की कुछ संभावित जगहों को भी चिन्हित किया है, जिसमें एयरपोर्ट सर्किल का साउथ गेट, आंतरिक मामले का नया मंत्रालय और पंजशीर पेट्रोल स्टेशन के पास का गेट शामिल है।


राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से ब्रीफिंग के बाद, बिडेन ने एक बयान में कहा कि इस्लामिक स्टेट-खुरासान समूह को निशाना बनाते हुए किया गया अमेरिकी ड्रोन हमला "आखिरी नहीं है।" 

बता दें कि काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार को जो आत्मघाती बम धमाके हुए उसकी जिम्मेदारी आईएसआईएस खुरासान ली है। अफगानिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले में ‘आईएसआईएस-के' के दो ‘साजिशकर्ता' मारे जाने की बात सामने आई है।


तालिबान ने पाक को दिया तगड़ा झटका, कहा-'TTP पाकिस्तान का मुद्दा, वह खुद सुलझाए'

तालिबान ने पाक से दो टूक कहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, पाकिस्तान की समस्या है, उसे ही खुद सुलझाना होगा न कि अफगानिस्तान को।

काबुल/इस्लामाबाद: 'आतंक के आका' पाकिस्तान को उसके 'साथी' तालिबान ने तगड़ा झटका दिया है। दरअसल, पाकिस्तान चाहता था कि तहरीक-ए-तालिबान, की समस्या सुलझाने में तालिबान उसकी मदद करेगा, मगर काबुल पर कब्जा जमाने वाले संगठन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है।

तालिबान ने पाक से दो टूक कहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, पाकिस्तान की समस्या है, उसे ही खुद सुलझाना होगा न कि अफगानिस्तान को। तालिबान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी और के लिए अफगान की धरती का इस्तेमाल नहीं होने देगा।


एक पाकिस्तानी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का मुद्दा इमरान खान सरकार को हल करना चाहिए, न कि अफगानिस्तान को। 

प्रवक्ता मुजाहिद ने कहा, 'टीटीपी एक ऐसा मुद्दा है, जिससे पाकिस्तान को निपटना होगा, अफगानिस्तान को नहीं। यह पाकिस्तान, पाकिस्तानी उलेमाओं और धार्मिक हस्तियों की जिम्मेदारी है, तालिबान की नहीं।'
हालांकि, मुजाहिद ने दोहराया कि तालिबान किसी को भी दूसरे देश के खिलाफ अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा। 

मुजाहिद ने कहा, 'हमारा सिद्धांत यह है कि हम किसी और देश में शांति को नष्ट करने के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल किसी को नहीं करने देंगे।' उन्होंने कहा कि अगर टीटीपी यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, अफगान तालिबान को अपना नेता मानता है तो उन्हें उनकी बात सुननी होगी, चाहे वे इसे पसंद करें या नहीं। 


बता दें कि तालिबान की यह फटकार, पाकिस्तान के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने तालिबान से टीटीपी के आतंकियों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा था। साथ ही पाकिस्तान को यह उम्मीद थी कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उसकी बातें सुनी जाएगी, जैसा की गनी सरकार में नहीं होता था। मगर अब जबकि तालिबान ने फटकार लगा दी है, तो अब देखने वाली बात होगी कि पाकिस्तान इस पर क्या रिएक्ट करता है।

बता दें कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) आतंकवादी समूह से संबंधित कई आतंकवादियों को तालिबान ने काबुल पर नियंत्रण करने के बाद अफगानिस्तान की जेलों से रिहा कर दिया है।


अफगानिस्तान: पंजशीर के लड़ाकों ने सीजफायर तोड़ने पर तालिबान को दिया करारा जवाब

पंजशीर में संघर्षविराम के उल्लंघन की वजह से सालेह के लड़ाकों ने तालिबान पर पलटवार किया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूक के दम पर कब्जा जमा चुके तालिबान को कपिसा प्रांत में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। यहां पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के नेतृत्व में मुकाबला कर रहे नेशनल रिज़िस्टन्स फोर्स ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।


दोनों गुटों के बीच यह जंग कपिसा प्रांत के संजन और बगलान के खोस्त वा फेरेंग जिले में हो रही है। पंजशीर में संघर्षविराम के उल्लंघन की वजह से सालेह के लड़ाकों ने तालिबान पर पलटवार किया है।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, तालिबान और रिज़िस्टन्स फोर्स के बीच रविवार को भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें तालिबान को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। तालिबान ने सीजफायर का उल्लंघन किया जिसके बाद उसे मुंह की खानी पड़ी। बताया जा रहा है कि पंजशीर की सीमा पर तालिबान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था, जिसके बाद रिज़िस्टन्स फोर्स ने पलटवार किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। 

बता दें कि पंजशीर एकमात्र वह प्रांत है जिसे तालिबान अभी तक कब्जा नहीं सका है, जिसने अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच 15 अगस्त को तालिबान में प्रवेश के साथ देश को अपने नियंत्रण में ले लिया है।


अफगानिस्तान: काबुल हवाईअड्डे की तेजी से घेराबंदी करने में जुटा तालिबान, फिर से हमले की चेतावनी से दहशत में लोग

अमेरिका सहित विदेशी सेनाओं की वापसी की समय सीमा 31 अगस्त नजदीक आने के साथ ही काबुल एयरपोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह हालात बदल रहे हैं। कई देशों के निकासी अभियान पूरे हो चुके हैं। तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट के चारों तरफ घेरेबंदी बढ़ा दी है।

काबुल: अफगानिस्तान में काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान की घेरेबंदी तेज हो गई है। एयरपोर्ट के चारों तरफ उसने अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। एयरपोर्ट के खाली किए गए क्षेत्रों पर भी वह नियंत्रण करता जा रहा है। अमेरिका सहित विदेशी सेनाओं की वापसी की समय सीमा 31 अगस्त नजदीक आने के साथ ही काबुल एयरपोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह हालात बदल रहे हैं। कई देशों के निकासी अभियान पूरे हो चुके हैं। तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट के चारों तरफ घेरेबंदी बढ़ा दी है।


समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने एयरपोर्ट के बाहर चेक पोस्ट की भी संख्या बढ़ा दी है। तालिबान के अनुसार जिन स्थानों को अमेरिकी सेनाओं ने खाली कर दिया है, उनको धीरे-धीरे नियंत्रण में लिया जा रहा है। तालिबान ने शनिवार को भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी फायर किए। हालांकि शनिवार को उन स्थानों पर लोगों की संख्या बहुत कम थी, जहां पर बम विस्फोट की घटना हुई थी।

समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार काबुल एयरपोर्ट को अपने नियंत्रण में लेने के लिए तालिबान तैयार है। दो तालिबान नेताओं ने बताया कि जैसे ही अमेरिकी सेना एयपोर्ट को खाली करेगी, हम पूरी तरह उसे अपने नियंत्रण में ले लेंगे। एक तालिबान कमांडर ने बताया कि एयरपोर्ट के कई हिस्से पर हमारा नियंत्रण हो गया है। अब केवल वो हिस्सा रह गया है, जो अभी अमेरिकी सेना के नियंत्रण में है।


अफगानिस्तान: केरल के 14 जिहादी बढ़ा सकते हैं भारत की टेंसन, IS ने बदनाम करने के लिए रची ये बड़ी साजिश

तालिबान ने बगराम जेल से केरल के रहने वाले 14 लोगों को रिहा कर दिया और ये केरलवासी फिर जाकर आतंकी समहू इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत (ISKP) का हिस्सा हो गए।

नई दिल्ली/काबुल: अफगानिस्तान पर  तालिबान की हुकूमत होने के बाद से अफगानिस्तान आतंकियों को नया गढ़ बन चुका है। इस बीच भारत के लिए भी एक सिरदर्द या फिर कहें कि नई चुनौती सामने आ गई है।


दरअसल, काबुल एयरपोर्ट पर धमाके के बाद एक एक ऐसी नई जानकारी सामने आई है, जिसेस भारत की चिंता बढ़ सकती है। काबुल पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने बगराम जेल से केरल के रहने वाले 14 लोगों को रिहा कर दिया और ये केरलवासी फिर जाकर आतंकी समहू इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत (ISKP) का हिस्सा हो गए। 


बताया जा रहा है कि बगराम जेल से तालिबान द्वारा रिहा किए जाने के बाद कम से कम 14 केरल के रहने वाले इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत की तरफ से काबुल में बड़े विस्फोट को अंजाम देने की साजिश में लगे हुए हैं। यहां तक कि इनकी ओर से 26 अगस्त को काबुल में तुर्कमेनिस्तान दूतावास के बाहर एक आईईडी डिवाइस को विस्फोट करने की कोशिश भी की गई, जिसे नाकाम कर दिया गया और इसमें दो पाकिस्तानियों के पकड़े जाने की अपुष्ट रिपोर्टें भी हैं।


सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 14 केरलवासियों में से एक ने अपने घर से संपर्क किया, जबकि शेष 13 अभी भी काबुल में इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत यानी ISKP आतंकवादी समूह के साथ फरार हैं। 2014 में इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया और लेवंत के मोसुल पर कब्जा करने के बाद मलप्पुरम, कासरगोड और कन्नूर जिलों के रहने वाले केरलवासी मध्य पूर्व में जिहादी समूह यानी इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए भारत से चले गए थे। इसमें से कुछ आतंकियों के परिवार आईएसकेपी के तहत बसने के लिए अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में आ गए।

माना जा रहा है कि आतंकी संगठन भारत को बदनाम करने के लिए इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। भारत इस बात को लेकर चिंतित है कि तालिबान और उनके हैंडलर्स अफगानिस्तान में आतंकवादी कृत्यों में लिप्त होकर इन कट्टरपंथी केरलवासियों का उपयोग भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए कर सकते हैं। वहीं, दो पाकिस्तानी आतंकियों के पकड़े जाने की काफी विश्वसनीय रिपोर्ट आ रही हैं, जो तुर्कमेनिस्तान दूतावास के बाहर ब्लास्ट करने की फिराक में थे। 

बता दें कि गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई हैं। मृतकों में 90 से ज्यादा अफगानी शामिल थे जबकि 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई थी। वहीं, अमेरिका ने इस हमले के साजिशकर्ता को ड्रोन हमले में मार गिराया है।


काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: अमेरिका ने लिया अपने 13 जवानों की मौत का बदला, 48 घंटे के भीतर साजिशकर्ता IS आतंकी को मार गिराया

काबुल हमले के एक दिन बाद ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में आईएस के आतंकियों के खिलाफ एयरस्ट्राइक की है और हमले के प्लानर यानी साजिशकर्ता को मार गिराया है।

न्यूयॉर्क/काबुल: अफगानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाकों से अमेरिका समेत दुनिया को दहलाने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के अब बुरे दिन शुरू हो गए हैं। काबुल एयरपोर्ट पर हुए धमाकों में अपने 13 जवानों को खोने के बाद अमेरिका कहां चुप बैठने वाला था। अब उसने आतंकियों से बदला लेना शुरू कर दिया है। 


काबुल हमले के एक दिन बाद ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में आईएस के आतंकियों के खिलाफ एयरस्ट्राइक की है और हमले के प्लानर यानी साजिशकर्ता को मार गिराया है। इस तरह से अमेरिका ने काबुल ब्लास्ट के 48 घंटे के भीतर अपने 13 सैनिकों की मौत का बदला आईएसआईएस-के से ले लिया।


पेंटागन के मुताबिक, अमेरिका ने मानवरहित विमान के जरिए आईएस के ठिकाने पर ड्रोन से बमबारी कर काबुल आतंकी हमले के साजिशकर्ता को मार गिराया है। यूएस सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मानव रहित हवाई हमला अफगानिस्तान के नंगहर प्रांत में हुआ। प्रवक्ता ने कहा कि शुरुआती संकेत देते हैं कि टारगेट (काबुल हमले का साजिशकर्ता) को मार दिया गया है, जबकि कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ है।


बता दें कि गुरुवार को काबुल में हुए आत्मघाती हमलों में अमेरिकी नौसैनिक के 13 जवानों की मौत हो गई थी और 160 से अधिक लोग घायल हो गए थे, जिनमें ज्यादातर अफगानी नागरिक थे। इसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आतंकियों को चेताया था कि वह इस काबुल ब्लास्ट का बदला जरूर लेंगे और ढूंढकर इस हमले के साजिशकर्ता को मार गिराएंगे। उन्होंने व्हाइट हाउस में भावुक होते हुए कहा था कि हम इस हमले को न भूलेंगे और न माफ करेंगे, ढूंढकर आतंकियों का शिकार करेंगे।


काबुल एयरपोर्ट पर फिर से शुरू हुईं विमानों की उड़ान, खतरा अभी भी बरकरार, अमेरिका ने फिर से दी आतंकी हमले की चेतावनी

एक बार फिर से शुक्रवार को अफगानिस्तान से फिर निकासी अभियान शुरू हो गया। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने निकासी अभियान को और तेज कर दिया है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद से ही वहां पर हालात बद से बद्तर हो चले हैं। दूसरे देश अपनों को वहां से निकालने में युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं लेकिन गुरुवार को सिलसिलेवार हुई धमाकों में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 13 अमेरिका सैनिक भी शामिल हैं। हालांकि, एक बार फिर से शुक्रवार को अफगानिस्तान से फिर निकासी अभियान शुरू हो गया। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने निकासी अभियान को और तेज कर दिया है।

बता दें कि गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट के साथ ही पास के एक होटल पर हुए दो आत्मघाती हमलों के बाद लोगों को अफगानिस्तान से निकालने के अभियान को रोक दिया गया था। शुक्रवार को यह अभियान फिर शुरू हुआ तो काबुल एयरपोर्ट विमानों की आवाजाही से गूंज उठा। तेजी से खराब होते हालात को देखते हुए अमेरिका समेत कई देश 31 अगस्त की समय सीमा खत्म होने से पहले ही अपने लोगों को निकाल लेना चाहते हैं।


अमेरिका अब तक एक लाख से ज्यादा लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकाल चुका है, जिनमें उसके अपने नागरिक के साथ ही सहयोगी देशों और अफगान शामिल हैं। अमेरिकी मध्य कमान के प्रमुख फ्रैंक मैकेंजी ने कहा कि अभी कम से कम एक हजार अमेरिकी और उसके हजारों अफगान सहयोगियों को बाहर निकाला जाना बाकी है।

धमाकों के बाद काबुल एयरपोर्ट के बाहर तालिबान ने पहरा बढ़ा दिया है। मैकेंजी ने कहा कि और हमलों को रोकने के लिए तालिबान के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। स्वीडन के विदेश मंत्री एन लिंडे ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि काबुल एयरपोर्ट के आसपास बड़े आतंकी हमले की खुफिया सूचना मिली है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में आगे कुछ नहीं बताया।


अफगानिस्तान: अमेरिका ने कर दी ये बड़ी गलती, खतरें में पड़ी हजारों लोगों की जान, तालिबानियों को दे दी यह बड़ी जानकारी

इस लिस्ट में अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड होल्डर्स के अलावा उन अफगानियों की पहचान शामिल है, जिन्होंने पिछले 20 सालों में तालिबान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद की है। अमेरिका के इस कदम से हजारों अफगान की जान खतरे में पड़ गई है।

काबुल: अफगानिस्तान की हालात का जिम्मेदार अमेरिका को विश्व का एक बड़ा धड़ा मान रहा है। वहीं, अमेरिका ने एक और बड़ी गलती कर दी है। दरअसल, उसने तालिबानी आतंकियों को उन लोगों की लिस्ट सौंप दी है जिन्होंने अमेरिका की मदद की थी। दरअसल, काबुल में मौजूद अमेरिकी अधिकारियों ने तालिबान को उन लोगों की लिस्ट सौंप दी है, जिन्हें वह अफगानिस्तान से निकालना चाहता है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि तालिबान उन्हें काबुल एयरपोर्ट आने से ना रोके।

अमेरिका ने तालिबान को उन लोगों की पूरी लिस्ट सौंप दी है, जिन्हें वह अपना दुश्मन मानता है। तालिबान के लड़ाके घर-घर जाकर इनकी तलाश में जुटे थे, लेकिन अब अमेरिका ने उनका काम आसान कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लिस्ट में अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड होल्डर्स के अलावा उन अफगानियों की पहचान शामिल है, जिन्होंने पिछले 20 सालों में तालिबान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद की है। अमेरिका के इस कदम से हजारों अफगान की जान खतरे में पड़ गई है। तालिबान के कब्जे के बाद से ही ये लोग खौफ मैं हैं और जल्द से जल्द अफगानिस्तान से भाग जाना चाहते हैं। अमेरिका के इस कदम पर विशेषज्ञों ने नाराजगी जाहिर की है। 

अमेरिका के एक रक्षा अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा कि वास्तव में उन्होंने तालिबान को 'किल लिस्ट' सौंप दी है। उन्होंने इसे चौंकाने वाला बताया। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब जो बाइडेन से इस रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पक्का नहीं पता है कि ऐसी कोई लिस्ट है। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार भी नहीं किया।


पाकिस्तान आर्मी का नापाक आरोप-'भारत ने भर दिया था अफगानी नेताओं के दिमाग में जहर'

काबुल में एक दिन पहले हुए हमले पर चुप्पी साधते हुए इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के डायरेक्टर जनरल बाबर इफ्तिकार ने तालिबान के कब्जे पर यह कहकर खुशी जताई कि इससे अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव खत्म हो जाएगा।

इस्लामाबाद: पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार को अफगानिस्तान को लेकर कई सवालों के जवाब दिए और तालिबान को लेकर अपनी रणनीति भी बताई। काबुल में एक दिन पहले हुए हमले पर चुप्पी साधते हुए इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के डायरेक्टर जनरल बाबर इफ्तिकार ने तालिबान के कब्जे पर यह कहकर खुशी जताई कि इससे अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव खत्म हो जाएगा।

बाबर इफ्तिकार ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव कम होगा। उन्होंने कहा, ''जो भी अफगानिस्तान में हुआ, हमें समझना होगा कि इसमें भारत की क्या भूमिका है। जो भी निवेश भारत ने अफगानिस्तान में किया है वह केवल पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। उन्हें अफगानिस्तान के लोगों से कोई लगाव नहीं है। उन्होंने अफगान नेताओं और वहां की सेना के दिमाग में जहर भर दिया था, ताकि टीटीपी और आईएस के जरिए पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाया जा सके।'' 

अफगानिस्तान को पाकिस्तान पर निर्भर बताते हुए पाक सेना के जनरल ने दुनिया तालिबान की मदद की भी अपील की। तहरीक-ए-तालिबान से पाकिस्तान को खतरे को लेकर बाबर इफ्तिकार ने कहा, ''टीटीपी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ करता रहा है। तालिबान नेतृत्व ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमान का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ नहीं होगा। हमें विश्वास है कि वह टीटीपी को पाकिस्तान के खिलाफ काम करने से रोकेंगे। पाकिस्तान में टीटीपी का कोई ढांचा नहीं बचा है, इसलिए उन्होंन अफगानिस्तान में शरण ली है। यदि कुछ यहां वे करते हैं तो हम तैयार हैं।''


अफगानिस्तान: इस्लाम को अपने एजेंडे के लिए तालिबान कर रहा इस्तेमाल, इमामों को दिया ये हुक्म

तालिबान ने देश के इमामों से कहा है कि वे शुक्रवार की नमाज के दौरान लोगों को बताएं कि कैसे सरकार के नियमों का पालन करना है।

काबुल: बंदूकों के दम पर अफगानिस्तान पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान अब इस्लाम का भी अपने मकसद के लिए इस्तेमाल करने लगा है। तालिबान ने देश के इमामों से कहा है कि वे शुक्रवार की नमाज के दौरान लोगों को बताएं कि कैसे सरकार के नियमों का पालन करना है। 

गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे पर हुए आतंकी हमले में 95 लोगों की मौत होने के बाद तालिबान ने यह फैसला लिया है। इससे पहले तालिबान ने अफगानिस्तान के इमामों को आदेश दिया था कि वे शुक्रवार की नमाज के मौके पर हमारे खिलाफ आ रही रिपोर्ट्स को नजरअंदाज करते हुए सही जानकारी लोगों को दें। इसके अलावा तालिबान ने इमामों से अपील की थी कि वे लोगों को कहें कि अफगानिस्तान छोड़कर न जाएं। 


तालिबान ने इमामों से कहा कि आप हमारे खिलाफ चल रहे निगेटिव प्रॉपेगेंडा का मुकाबला करें और लोगों को देश छोड़ने से रोकें। दरअसल तालिबान अपनी छवि को बेहतर करने की कोशिशों में जुटा है और इसके लिए वह इमामों का भी इस्तेमाल करना चाहता है। 

तालिबान अफगानिस्तान में पूरी तरह से इस्लाम का शासन चाहता है और इसके लिए वह इमामों का इस्तेमाल कर रहा है। बता दें कि गुरुवार को ही अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के हवाई अड्डे पर भीषण आतंकी हमला हुआ है। इसमें 13 अमेरिकी सैनिकों समेत कुल 95 लोगों की मौत हो चुकी है।


काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: 100 से ज्यादा लोगों की मौत, मृतकों में 90 अफगानी शामिल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कही ये बड़ी बात

अफगानिस्तान के काबुल में एयरपोर्ट के बाहर एक के बाद एक तीन सीरियल धमाकों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिसमें 90 लोग अफगान नागरिक हैं। वहीं डेढ़ सौ से ज्यादा लोग इसमें घायल हैं। मरने वाले लोगों में अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट के बाहर धमाकों में अमेरिका के 13 सैनिकों की भी मौत हुई है।

काबुल: अफगानिस्तान के काबुल में एयरपोर्ट के बाहर एक के बाद एक तीन सीरियल धमाकों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिसमें 90 लोग अफगान नागरिक हैं। वहीं डेढ़ सौ से ज्यादा लोग इसमें घायल हैं। मरने वाले लोगों में अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट के बाहर धमाकों में अमेरिका के 13 सैनिकों की भी मौत हुई है।


पाकिस्तान में रची गई हमले की साजिश

अफगानी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, माना जा रहा है कि काबुल एयरपोर्ट के पास हुई आतंकवादी हमलों की साजिश पाकिस्तान में रची गई है और इस भयंकर हमले के पीछे पाकिस्तान में रहने वाले आईएसआईएस के खूंखार आतंकी असलम फारूक का हाथ हो सकता है। 

चुन-चुनकर आतंकियों को मारेंगे, चुकानी होगी कीमत: अमेरिकी राष्ट्रपति


काबुल एयरपोर्ट पर हुए सिलसिलेवार धमाकों में अबतक 72 से ज्यादा लोगों के मरने की खबर है। इन धमाकों में अमेरिकी मरीन ड्राइव के 12 जवानों की भी मौत हुई है। जवानों की मौत पर अमेरिकी राष्ट्रपति  ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि आतंकियों को इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्हें चुन-चुनकर मारा जाएगा।


काबुल बम धमाकों के बाद आतंकियों को खुलेआम चुनौती देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, 'हम माफ नहीं करेंगे। हम नहीं भूलेंगे। हम चुन-चुनकर तुम्हारा शिकार करेंगे और मारेंगे। आपको इसका अंजाम भुगतना ही होगा।' 


काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: 'आतंक के आका' पाकिस्तान में रची गई साजिश, ISIS के इस आतंकी का नाम आ रहा सामने

काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट में अब पाकिस्तान का कनेक्शन सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हमले की साजिश पाकिस्तान की सरजमीं पर रची गई थी।

काबुल/इस्लामाबाद: आतंकी हमले की बात हो और पाकिस्तान का नाम सामने ना आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता। काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट में अब पाकिस्तान का कनेक्शन सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हमले की साजिश पाकिस्तान की सरजमीं पर रची गई थी।

अफगानी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, माना जा रहा है कि काबुल एयरपोर्ट के पास हुई आतंकवादी हमलों की साजिश पाकिस्तान में रची गई है और इस भयंकर हमले के पीछे पाकिस्तान में रहने वाले आईएसआईएस के खूंखार आतंकी असलम फारूक का हाथ हो सकता है। बता दें कि गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट के पास हुए आतंकी हमलों में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। 

अफगानी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शांति प्रक्रिया के तहत कई 'खतरनाक और खूंखार आतंकी' रिहा किए गए थे। यही आतंकी काबुल हमले के लिए जिम्‍मेदार हो सकते हैं। इसमें पाकिस्‍तान में आईएसआईएस का चेहरा अमीर मावलावी असलम फारूकी भी शामिल है और इस हमले के बीच इसी का हाथ हो सकता है। 

यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह वही आतंकी फारूकी है, जो काबुल के गुरुद्वारा में हुए हमलों में शामिल था, जिसमें 27 लोगों की मौत हुई थी। 4 अप्रैल 2020 को अफगान नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टोरेट यानी एनडीएस ने मावलवी फारूक को गिरफ्तार किया था। 

जांच के दौरान उसने हमले में शामिल होने की बात स्वीकार की थी और विस्फोटों को अंजाम देने में पाकिस्तान की भूमिका को भी स्वीकार किया था। फिलहाल, असलम फारूकी पाकिस्तानी आईएसआईएस-के का चीफ है।


लश्कर-ए-तैयबा में रह चुका है फारूकी

असलम फारूकी पहले लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़ा था और फिर बाद में तहरीक-ए-तालिबान के साथ आ गया। उसने अप्रैल 2019 में आईएसआईएस-के यानी आईएसकेपी प्रमुख के रूप में मावलवी जिया-उल-हक उर्फ अबू उमर खोरासानी की जगह ली। उसके साथ लश्कर-ए-तैयबा के हिस्से के रूप में चार पाकिस्तानी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया था। फारूकी के साथ खैबर पख्तूनख्वा का मसूदुल्लाह, खैबर पख्तूनख्वा का खान मोहम्मद, कराची का सलमान और इस्लामाबाद का अली मोहम्मद गिरफ्तार हुआ था। 

इस बात की बड़ी आशंका है कि जेल से रिहा होने के बाद मावलावी फारूकी और उसके पुराने साथियों ने मिलकर ही काबुल हमले को अंजाम दिया है। पाकिस्‍तानी एजेंसियां भी यह चाहती थीं। 

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्‍तान चाहता है कि क्षेत्र में अस्थिरता आए ताकि आतंकी साजिशों को अंजाम दिया जा सके और विकसित देशों से पैसे लेता रहे। बता दें कि काबुल हमले की जिम्मेवारी भी आईएसआईएस-के ने ही ली है।


काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: अमेरिकी सैनिकों की मौत पर भड़के प्रेसिडेंट बाइडेन, कहा-'चुन-चुनकर आतंकियों को मारेंगे, चुकानी होगी कीमत'

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, 'हम माफ नहीं करेंगे। हम नहीं भूलेंगे। हम चुन-चुनकर तुम्हारा शिकार करेंगे और मारेंगे। आपको इसका अंजाम भुगतना ही होगा।'

वाशिंगटन/काबुल: काबुल एयरपोर्ट पर हुए सिलसिलेवार धमाकों में अबतक 72 से ज्यादा लोगों के मरने की खबर है। इन धमाकों में अमेरिकी मरीन ड्राइव के 12 जवानों की भी मौत हुई है। जवानों की मौत पर अमेरिकी राष्ट्रपति  ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि आतंकियों को इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्हें चुन-चुनकर मारा जाएगा।


इन बम धमाकों में अब तक कुल 72 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालांकि, इन धमाकों के बाद भी अमेरिका अपना निकासी अभियान नहीं रोकेगा। राष्ट्रपति जो बाइडन ने ऐलान किया है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों को निकालने का काम जारी रहेगा। 


काबुल बम धमाकों के बाद आतंकियों को खुलेआम चुनौती देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, 'हम माफ नहीं करेंगे। हम नहीं भूलेंगे। हम चुन-चुनकर तुम्हारा शिकार करेंगे और मारेंगे। आपको इसका अंजाम भुगतना ही होगा।' 

उन्होंने आगे कहा कि काबुल हवाईअड्डे पर हुए हमलों में तालिबान और इस्लामिक स्टेट के बीच मिलीभगत का अब तक कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि हम अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों को बचाएंगे। हम अपने अफगान सहयोगियों को बाहर निकालेंगे और हमारा मिशन जारी रहेगा।

60 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेना के 60 से अधिक जवान घायल हुए हैं और इनकी संख्या बढ़ सकती है। वहीं, रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हवाईअड्डे के पास दो आत्मघाती हमलावरों और बंदूकधारियों ने भीड़ को निशाना बनाकर हमला किया, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका कि रूसी अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए मृतकों के आंकड़ों में मारे गए अमेरिकी नौसैनिकों की संख्या शामिल है या नहीं।


काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: कम से कम 40 लोगों के मरने की खबर, अमेरिका के 4 मरीन कमांडो की भी मौत, 100 से ज्यादा घायल

पहले से ही तालिबान की मार से कराह रहे अफगानिस्तान पर अब आतंकियों की नजर टेढ़ी हो गई है। ताजा मामले में काबुल एयरपोर्ट परिसर में हुए ब्लास्ट की वजह से अबतक कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है। इतना ही नहीं सैकड़ों लोगों के घायल होने की भी खबर मिल रही है।

काबुल: पहले से ही तालिबान की मार से कराह रहे अफगानिस्तान पर अब आतंकियों की नजर टेढ़ी हो गई है। ताजा मामले में काबुल एयरपोर्ट परिसर में हुए ब्लास्ट की वजह से अबतक कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है। इतना ही नहीं सैकड़ों लोगों के घायल होने की भी खबर मिल रही है। इन धमाकों में 4 अमेरिकी मरीन कमांडो के भी मरने की खबर है। वहीं, दूसरी तरफ, भारत, संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका व अन्य देशों ने इस कायराना हमले की निंदा की है। इस बीच यह भी खबर है कि फ्रांस के राजदूत अफगानिस्तान छोड़ेंगे। ऐसा बयान खुद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दिया है।

काबुल हवाईअड्डे के बाहर गुरुवार को एक के बाद एक हुए दो बम धमाकों में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में कई बच्चे भी हैं। हमले में महिलाओं, अमेरिकी सुरक्षा कर्मियों और तालिबान के गार्ड समेत 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। समाचार एजेंसी रायटर ने हमले में चार अमेरिकी मैरीन कमांडो मारे जाने की जानकारी दी है। हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है लेकिन इसे आइएस के आत्मघाती हमलावर की करतूत माना जा रहा है।

अमेरिका समेत पश्चिमी देश हमले के लिए आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) पर शक जता रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया ने एयरपोर्ट पर आइएस द्वारा बम धमाकों की आशंका जताते हुए बुधवार को ही अपने देश के नागरिकों को एयरपोर्ट के बाहर जमा होने से पहले ही रोक दिया था। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने इसे आत्मघाती हमला बताया है। इस हमले में मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है।

तालिबान ने आतंकी वारदात बताया  

तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह ने बम धमाके की घटना को आतंकी वारदात बताया है। हमले की निंदा करते हुए उसने भी आइएस पर हमला कराने का शक जताया है। उधर पेंटागन प्रवक्ता जान किर्बी ने हमले की पुष्टि करते हुए अमेरिकी नागरिकों के हताहत होने की जानकारी दी है। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।  



अफगानिस्तान: तालिबान ने पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई को किया नजरबंद, पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला को किया हाउस अरेस्ट, दोनों सुरक्षा भी हटाई

हामिद करजई को तालिबान ने नजरबंद कर दिया है। इतना ही नहीं खबर तो यह भी है कि अफगानिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुलह परिषद के अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ला को भी उनके घर में कैद कर दिया गया है।

काबुल: तालिबान के साथ मिलकर अफगानिस्तान में अपनी सत्ता चलाने का सपना देख रहे देश के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला को तालिबान ने अच्छा सबक सिखाया है। दरअसल, हामिद करजई को तालिबान ने नजरबंद कर दिया है। इतना ही नहीं खबर तो यह भी है कि अफगानिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुलह परिषद के अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ला को भी उनके घर में कैद कर दिया गया है।

बता दें कि तालिबान ने इन दोनों वरिष्ठ अफगान नेताओं की सुरक्षा को भी हटा दिया है। ये दोनों नेता तालिबान के साथ सरकार बनाने की बातचीत में भी शामिल थे। वहीं, इस बात की भी खबर है कि तालिबान ने इन दोनों नेताओं की कारों को भी जब्त कर लिया है। ऐसे में हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला इस समय पूरी तरह से तालिबान की दया पर आश्रित हैं। 

बताते चलें कि इस सप्ताह की शुरुआत में ही तालिबान ने अफगानिस्तान पर शासन करने वाली अपनी 12 सदस्यीय परिषद में करजई, अब्दुल्ला और तालिबान के सह-संस्थापक अब्दुल गनी बरादर को शामिल किया था। तालिबान 15 अगस्त को राजधानी काबुल के साथ-साथ देश के लगभग सभी अन्य प्रांतों पर नियंत्रण करने के बाद एक नई सरकार बनाने की प्रक्रिया में है। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि तालिबान ने इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को क्यों नजरबंद किया है। इन दोनों नेताओं की तालिबान के साथ काफी समय से नजदीकी थी। तब तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमाया था, तब भी इन दोनों नेताओं ने ही उनके साथ सुलह की बातचीत की थी। ऐसे में हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला की नजरबंदी पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

नेतृत्व परिषद में तीन सबसे शक्तिशाली व्यक्ति तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, दूसरा तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब और तीसरा हक्कानी नेटवर्क का सबसे वरिष्ठ सदस्य खलील हक्कानी होगा। ये तीनों ही अफगानिस्तान की सरकार का सबसे बड़ा चेहरा होंगे। अगर इन तीनों में से किसी एक या दो को सरकार में शामिल नहीं भी किया जाता है तब भी ये पर्दे के पीछे रहकर सरकार को चलाने का काम करेंगे।


Kabul Airport पर दोहरे आत्मघाती बम धमाके में दर्जनों की मौत; IS पर हमले का शक

काबुल एयरपोर्ट (Hamid Karzai International Airport) पर धमाके और हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है

by News9India desk

काबुल: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Hamid Karzai International Airport) पर धमाके की खबर सामने आ रही है. प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि धमाके के बाद एयरपोर्ट पर भारी गोलीबारी भी की गई. इस धमाके में कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. इस बीच अमेरिका-इंग्लैंड ने अपने नागरिकों को एयरपोर्ट से निकल जाने के लिए कहा है. इस हमले के थोड़ी ही देर बाद एयरपोर्ट पर ही दूसरा आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें एक झटके में कम से कम 11 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है.


एयरपोर्ट पर इस्लामिक स्टेट की आहट!
काबुल एयरपोर्ट (Hamid Karzai International Airport) पर धमाके और हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है. इस्लामिक स्टेट ने अफगानिस्तान (Afghanistan) पर तालिबान के कब्जे के बाद कहा था कि तालिबान अमेरिका का पिट्ठू है और उसने अमेरिका के साथ सौदेबाजी की है. इसके बाद इस्लामिक स्टेट (Islamic State) ने हमलों की धमकी दी थी. इस्लामिक स्टेट के इस बयान के बाद अमेरिका (United States of America) और इंग्लैंड (United Kingdom) ने अपने नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट से दूर रहने की सलाह दी थी, क्योंकि भीड़ भाड़ वाले इलाकों को आत्मघाती हमलों (Suicide attacks) के जरिए ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है.

अफगानिस्तान में अब आईएस Vs तालिबान?
अफगानिस्तान के करीब 90 फीसदी इलाके पर तालिबान ने तेजी से कब्जा कर लिया है. उसने अमेरिका-तालिबान डील के तहत विदेशी सैनिकों को 31 अगस्त तक देश छोड़ने की समयसीमा तय की है. वहीं, अफगानिस्तान में कई चरमपंथी गुटों की मौजूदगी रही है. लेकिन अमेरिका के साथ डील में तालिबान ने ये वादा किया था कि वो अफगानिस्तान की धरती को किसी चरमपंथी गुट को इस्तेमाल करने से रोकेगा. इस्लामिक स्टेट अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को इसी डील का नतीजा मानता है और तालिबान को अमेरिकी पिट्ठू बोलता है. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि तालिबान का कार्यक्षेत्र सिर्फ अफगानिस्तान ही है, जबकि इस्लामिक स्टेट पूरी दुनिया पर इस्लामी राज चाहता है. वहीं, अफगानिस्तान के अंदर दोनों के लक्ष्य अलग अलग हैं. ऐसे में दोनों ही आतंकी गुटों में मुठभेड़ होने की आशंका बढ़ गई है.


तालिबान का कबूलनामा, कहा-'हमारा दूसरा घर है पाक, मजहब भी है एक', भारत को लेकर कही ये बात

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, 'अफगानिस्तान की सीमा पाकिस्तान से लगती है। जब धर्म की बात आती है तो हम परंपरागत रूप से करीबी हैं। दोनों ही देशों के लोग आपस में मिले-जुले हैं। इसलिए हम पाकिस्तान से अच्छे संबंधों की उम्मीद रख रहे हैं।'

काबुल: तालिबान ने पाकिस्तान को अपना दूसरा घर बताया है और कहा है कि हमारी सीमाएं लगती हैं और मजहब एक है। इसलिए हम भविष्य में पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंधों की उम्मीद कर रहे हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने यह बात कही है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान दहशतगर्द संगठन तालिबान के कितना करीब है और वह किस तरह से उसके लड़ाकों को ठिकाना देता रहा है।

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, 'अफगानिस्तान की सीमा पाकिस्तान से लगती है। जब धर्म की बात आती है तो हम परंपरागत रूप से करीबी हैं। दोनों ही देशों के लोग आपस में मिले-जुले हैं। इसलिए हम पाकिस्तान से अच्छे संबंधों की उम्मीद रख रहे हैं।'

इसके अलावा तालिबान के प्रवक्ता ने भारत के साथ अच्छे संबंध रखने की भी उम्मीद जताई है। यही नहीं भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर भी तालिबान ने अपनी राय जाहिर की है। तालिबान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को आपस में बैठकर अपने बीच के मुद्दों को हल करना चाहिए। मुजाहिद ने कहा कि तालिबान भारत समेत दुनिया के तमाम देशों से अच्छे संबंध चाहता है।

 पाकिस्तान के चैनल ARY न्यूज से बात करते हुए मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जा जमाने में पाक का कोई रोल नहीं रहा है। तालिबान ने कहा कि पाकिस्तान ने कभी भी अफगानिस्तान के मामलों में दखल नहीं दिया है।


अफगानिस्तान: बेरोजगारी के मुद्दे पर रिपोर्टिंग करना टोलो न्यूज के रिपोर्टर और कैमरामैन को पड़ा भारी, तालिबानियों ने जमकर पीटा

तालिबानियों ने टोलो न्यूज के रिपोर्टर और कैमरामैन को सिर्फ इसलिए अपना निशाना बनाया है क्योंकि वह बेरोजगारी के मुद्दे पर रिपोर्टिंग कर रहे थे।