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जानिए भाजपा ज्वाइन करने के सवाल पर क्या बोले गुलाम नबी आजाद?

वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। आजाद ने लगभग आधी शताब्दी तक कांग्रेस पार्टी में अपनी सेवाएं दी। उन्होंने पार्टी में खुद को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि देश का सबसे पुराना दल अब पुर्ण रूप से नष्ट हो चुका है तथा इसका नेतृत्व आंतरिक चुनाव के नाम पर केवल धोखा दे रहा है। इस्तीफे में गुलाम नबी आजाद ने राहुल गांधी को लेकर कई बातें लिखी।




नई दिल्लीः वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। आजाद ने लगभग आधी शताब्दी तक कांग्रेस पार्टी में अपनी सेवाएं दी। उन्होंने पार्टी में खुद को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि देश का सबसे पुराना दल अब पुर्ण रूप से नष्ट हो चुका है तथा इसका नेतृत्व आंतरिक चुनाव के नाम पर केवल धोखा दे रहा है। इस्तीफे में गुलाम नबी आजाद ने राहुल गांधी को लेकर कई बातें लिखी।

बीजेपी ज्वाइन के सवाल पर क्या बोले गुलाम नबी आजाद

गुलाम नबी आजाद के इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक हलकों में तरह तरह की प्रतिक्रिया देखी गई। देश के लगभग हर राज्य से नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस छोड़ने के बाद बहुत से नेताओं ने यह कयास लगाई की जल्दी ही वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। लेकिन आजाद ने बीजेपी ज्वाइन करने के सवाल पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि, 'मैंने कांग्रेस को छोड़ा है मैं फिलहाल कोई भी पार्टी नहीं ज्वाइन करने वाला।' 

अपनी पार्टी बनाएंगे गुलाम नबी आजाद

कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही नयी पार्टी बनाएंगे और उसकी पहली इकाई जम्मू कश्मीर में बनायी जाएगी। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले आजाद ने से कहा, ‘‘मैं कोई राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए अभी जल्दबाजी में नहीं हूं लेकिन जम्मू कश्मीर में चुनाव होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए, मैंने वहां जल्द ही एक इकाई गठित करने का फैसला किया है।’’ राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे आजाद ने अपनी नयी पार्टी के गठन पर और कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जल्दी जम्मू-कश्मीर जाएंगे और वहां अपना एक राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। इस बार गुलाम नबी आजाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के साथ चुनाव लड़ेंगे।


झारखंड में सियासी भूचाल, लगातार तीसरे दिन सीएम हेमंत सोरेन ने बुलाई यूपीए विधायकों की बैठक

झारखंड में सियासी संकट के बीच बैठकों का दौर जारी है। राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर सीएम हेमंत सोरेन ने फिर यूपीए विधायकों की बैठक बुलाई है। यह बैठक सीएम सोरेन के आवास पर सुबह 11 से शुरू हो गई है। विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए सीएम हेमंत सोरेन लगातार बैठकें कर रहे हैं। शुक्रवार की बैठक में कांग्रेस के तीन विधायक और जेएमएम के तीन विधायक शामिल नहीं हो पाए थे।




नई दिल्लीः झारखंड में सियासी संकट के बीच बैठकों का दौर जारी है। राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर सीएम हेमंत सोरेन ने फिर यूपी विधायकों की बैठक बुलाई है। यह बैठक सीएम सोरेन के आवास पर सुबह 11 से शुरू हो गई है। विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए सीएम हेमंत सोरेन लगातार बैठकें कर रहे हैं। शुक्रवार की बैठक में कांग्रेस के तीन विधायक और जेएमएम के तीन विधायक शामिल नहीं हो पाए थे। कांग्रेस के तीनों विधायक कोलकाता से जमानत पर है लेकिन उन्हें कोलकाता छोड़ने की इजाजत नहीं है। 

सोरेन पर लाभ के पद पर होने का आरोप

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने गुरुवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) पर लाभ के पद पर होने के आरोपों पर अपनी सिफारिश राज्यपाल (Jharkhand Governor) को भेजी थी, जिसमें चुनाव आयोग (EC) ने हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी सिफारिश की है। हालांकि गुरुवार को सीएम दफ्तर की ओर से कहा गया था कि इस संबंध में उन्हें कोई पत्र नहीं मिला। उधर, झारखंड विधानसभा में नेता विपक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है हेमंत सोरेन को सीएम की कुर्सी पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सीएम हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं।


गुलाम नबी आजाद ने छोड़ी कांग्रेस पार्टी, पांच पन्नों में इस्तीफा लिख कर बयान किया दुख

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है। गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पन्नों का इस्तीफा भेजा और अपना दर्द बयान किया। गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के बड़े नेताओं में से एक है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं।



नई दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है। गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पन्नों का इस्तीफा भेजा और अपना दर्द बयान किया। गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के बड़े नेताओं में से एक है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। 

आधी शताब्दी पुराना नाता तोड़ा

गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को अपने इस्तीफे में लिखा कि, "बड़े खेत और बेहद भावुक हृदय के साथ मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना आदर्श तक पुराना नाता तोड़ने का फैसला लिया है"

रिमोट कंट्रोल मॉडल का लगाया आरोप

गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफा पत्र में लिखा, ''2014 में आपके और उसके बाद राहुल गांधी द्वारा नेतृत्व संभाले जाने के बाद, कांग्रेस अपमानजनक ढंग से दो लोकसभा चुनाव हार गई। 2014 से 2022 के बीच 49 विधानसभा के चुनावों में से कांग्रेस 39 में हार गई। पार्टी केवल चार राज्यों के चुनाव जीत पाई और छह में वह गठबंधन की स्थिति बना पाई। दुर्भाग्यवश, आज कांग्रेस केवल दो राज्यों में सरकार चला रही है और दो अन्य राज्यों में यह बहुत सीमांत गठबंधन सहयोगियों में है।"

राहुल गांधी और उनके सुरक्षा गार्ड ले रहे हैं फैसले

गुलाम नबी आजाद ने पत्र में लिखा कि," 2019 के चुनाव के बाद से पार्टी में आई स्थिति पैदा हुई है विस्तार कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के लिए मेहनत करने वाले सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों का अपमान करने से पहले राहुल गांधी ने कभी कुछ नहीं सोचा। हड़बड़ाहट में पद छोड़ने के बाद आपने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। एक पद जिस पर आप भी पिछले 3 वर्षों से काबिज हैं इससे बुरी बात यह कि यूपीए सरकार की संस्थागत अखंडता को ध्वस्त करने वाला रिमोट कंट्रोल मॉडल अब कांग्रेस पार्टी में लागू हो गया है। इससे भी ज्यादा बत्तर यह है कि सभी महत्वपूर्ण निर्णय राहुल गांधी द्वारा लिए जा रहे हैं या उनके सुरक्षा गार्ड और पीए राजनीतिक फैसले कर रहे हैं।

बहुत दिनों से नाराज थे गुलाम नबी आजाद

इससे पहले वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू कश्मीर में कांग्रेस की राज्य प्रचार समिति अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। जिसके बाद कांग्रेस के एक और नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल चुनाव के महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से इस्तीफे का ऐलान कर दिया था। माना जा रहा है कि पार्टी में दोनों ही नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा को नजरअंदाज किया जा रहा था जिससे दुखी होकर कर उन्होंने ऐसा कदम उठाया।


सीएम हेमंत सोरेन के ऊपर लटकी अयोग्यता की तलवार, रणनीति बनाने के लिए विधायकों की बुलाई बैठक

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को यूपीए विधायकों की एक बैठक बुलाई। भारत के चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत झारखंड के राज्यपाल को उनकी सदस्यता रद्द करने के संबंध में रिपोर्ट भेजी है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में विधायकों के साथ भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी।



नई दिल्लीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को यूपीए विधायकों की एक बैठक बुलाई। भारत के चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत झारखंड के राज्यपाल को उनकी सदस्यता रद्द करने के संबंध में रिपोर्ट भेजी है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में विधायकों के साथ भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

गुरुवार को उन्होंने इस विवाद के लिए विपक्षी भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। सोरेन ने कहा, "ऐसा लगता है कि बीजेपी नेताओं और उनकी चाटुकारों ने रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया है जो सीलबंद लिफाफे में है।"उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि भाजपा उनके खिलाफ उनकी याचिका को लेकर आश्वस्त दिख रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराए जाने की मांग के बाद चुनाव आयोग ने सोरेन की विधानसभा सदस्यता के मुद्दे पर राज्यपाल को पत्र भेजा है। भाजपा नेताओं ने सोरेन पर माइनिंग लीज पर देने का आरोप लगाते हुए इसे लाभ के पद और जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन बताया और इस मुद्दे पर राज्यपाल को पत्र लिखा।

पोल पैनल की सिफारिशों पर राज्यपाल का आदेश जारी होने से सोरेन की विधानसभा की सदस्यता खत्म हो सकती है और ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।हालांकि, सोरेन के नेतृत्व वाले झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के पास विधानसभा में बहुमत है और उनके इस्तीफे के बाद, वह फिर से राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।


झारखंड के CM हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द, केन्द्रीय चुनाव आयोग ने राज्यपाल को भेजा पत्र

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता को समाप्त कर दिया गया है। झारखंडी मोर्चा के अध्यक्ष और दो बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन पर यह कार्रवाई खनन पट्टा मामले में की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने राज्यपाल को पत्र भेजा है। ऐसे में राज्यपाल की तरफ से आखिरी फैसला जारी किया जाएगा और उससे ये साफ हो पाएगा की अभी सदस्यता जा रही है तो उससे आगे क्या सोरेन चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं।




नई दिल्लीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता को समाप्त कर दिया गया है। झारखंडी मोर्चा के अध्यक्ष और दो बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन पर यह कार्रवाई खनन पट्टा मामले में की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने राज्यपाल को पत्र भेजा है। ऐसे में राज्यपाल की तरफ से आखिरी फैसला जारी किया जाएगा और उससे ये साफ हो पाएगा की अभी सदस्यता जा रही है तो उससे आगे क्या सोरेन चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं। बता दें कि सत्ता में रहते हुए सोरेन ने खुद ही खदान का पट्टा अपने नाम करवा लिया था। यहीं वह कारण है जिसके चलते उनकी सदस्यता रद्दा की जा रही है। 

बीजेपी ने लगाया था आरोप

बीजेपी ने हेमंत सोरेन पर खुद को को एक खनन पट्टा आवंटित करने का आरोप लगाया था और एक विधायक के रूप में उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी। जबकि हेमंत के बचाव में झारखंड के मुख्यमंत्री की टीम ने चुनाव आयोग के समक्ष इस बात पर जोर दिया है कि चुनाव कानून के ये प्रावधान मामले में लागू नहीं होते। 

क्या जाएंगी हेमंत सोरेन की कुर्सी

संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत, यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या किसी राज्य के विधानमंडल के सदन का कोई सदस्य किसी अयोग्यता के अधीन हो गया है, तो प्रश्न राज्यपाल को भेजा जाएगा जिसका निर्णय अंतिम होगा। इसके अनुसार ‘इस तरह के किसी भी प्रश्न पर कोई निर्णय देने से पहले, राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय प्राप्त करेंगे और उसकी राय के अनुसार कार्य करेंगे।’ सोरेन के वकील ने दलीलें रखे जाने के दौरान कहा कि मामला लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए के तहत नहीं आता है, जो ‘सरकारी अनुबंधों के लिए अयोग्यता’ से संबंधित है।


AAP की CM केजरीवाल के घर इमर्जेंसी बैठक, कई विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं

राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच जारी जुबानी जंग बढ़ती जा रही है। इसी बीच आज 11:00 बजे आम आदमी पार्टी के विधायकों की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर जरूरी बैठक होगी। इस बैठक से पहले बड़ी खबर सामने आ रही है कि, आपके कुछ विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं है। उनसे संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा है।



नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच जारी जुबानी जंग बढ़ती जा रही है। इसी बीच आज 11:00 बजे आम आदमी पार्टी के विधायकों की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर जरूरी बैठक होगी। इस बैठक से पहले बड़ी खबर सामने आ रही है कि, आपके कुछ विधायक पार्टी के संपर्क में नहीं है। उनसे संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा है। 

बीजेपी पर विधायकों को खरीदने का आरोप

आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर विधायकों को खरीदनी और धमकाने का आरोप लगाया है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को कहीं ना कहीं डर है कि कहीं भाजपा उनके विधायक ना तोड़ ले। बताया जा रहा है कि कल शाम को आम आदमी पार्टी की पॉलीटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में तय हुआ कि सभी विधायकों को बुलाया जाए और उनसे बात की जाए। इस बैठक में कौन नेता पहुंच रहा है और कौन नहीं इस पर नजर भी रखी जाएगी। 

4 विधायकों को खरीदने की कोशिश

आपको बता दें कि, बुधवार को 'आप' सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया था। संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी ने हमारे विधायक अजय दत्त, संजीव झा, सोमनाथ भारती और कुलदीप कुमार को खरीदने की कोशिश की। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इन चार विधायकों को पार्टी तोड़कर आने के लिए 20-20 करोड़ रुपए ऑफर किए गए थे और कहां गया था कि अगर वह अपने साथ अन्य विधायकों को लेकर आते हैं तो उन्हें 25 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। 

दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र होने वाला है शुरू

आपको बता दें कि दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र शुक्रवार को शुरू होने जा रहा है यह सख्त दिल्ली में राजनीतिक भूचाल और आबकारी नीति के सिलसिले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यवाही के बीच होने वाला है बीजेपी पर आपके विधायकों को लुभाने के आरोप और एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला इस बार सत्र में जोरों पर रहेगा।


गुजरात: कांग्रेस 15 सितंबर को जारी करेगी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, चुनाव से पहले की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अपने अभियान की शुरुआत 5 सितंबर से करेगी और उम्मीदवारों की पहली सूची 15 सितंबर को जारी की जाएगी। पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा, "भाजपा सरकार के खिलाफ स्पष्ट सत्ता विरोधी लहर है, लोग बदलाव चाहते हैं।




नई दिल्लीः कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अपने अभियान की शुरुआत 5 सितंबर से करेगी और उम्मीदवारों की पहली सूची 15 सितंबर को जारी की जाएगी। पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा, "भाजपा सरकार के खिलाफ स्पष्ट सत्ता विरोधी लहर है, लोग बदलाव चाहते हैं। कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी और हम जीतेंगे।" राजस्थान के मुख्यमंत्री और गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने पार्टी के घोषणापत्र में शामिल कुछ वादों को साझा किया और कहा, "अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो वह पुरानी पेंशन योजना को लागू करेगी, कृषि उपभोक्ताओं को दिन के समय बिजली देगी, और शहरी क्षेत्रों में हम इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करेंगे।"

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की स्थापना करेगी, मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के राजस्थान मॉडल के तहत ऑर्गन ट्रांसप्लांट, मेजर ऑपरेशन समेत सभी स्वास्थ्य सेवाओं को कवर किया जाएगा और नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। कांग्रेस ने किसानों और संबंधित क्षेत्रों के लिए अलग कृषि बजट लाने का भी वादा किया है।


त्रिपुरा में भाजपा को बड़ा झटका, शीर्ष आदिवासी नेता सहित 6,500 लोगों ने छोड़ी पार्टी

त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ा झटका देते हुए शीर्ष आदिवासी नेता हंगशा कुमार त्रिपुरा मंगलवार को आदिवासी आधारित प्रमुख विपक्षी दल तिप्राहा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो गए। बीजेपी और उसके सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के लगभग 6,500 आदिवासियों के साथ, हंग्शा कुमार उत्तरी त्रिपुरा के मानिकपुर में आयोजित एक सार्वजनिक रैली में टीआईपीआरए में शामिल हुए।



नई दिल्लीः त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ा झटका देते हुए शीर्ष आदिवासी नेता हंगशा कुमार त्रिपुरा मंगलवार को आदिवासी आधारित प्रमुख विपक्षी दल तिप्राहा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो गए। बीजेपी और उसके सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के लगभग 6,500 आदिवासियों के साथ, हंग्शा कुमार उत्तरी त्रिपुरा के मानिकपुर में आयोजित एक सार्वजनिक रैली में टीआईपीआरए में शामिल हुए।

टीआईपीआरए सुप्रीमो और त्रिपुरा के पूर्व शाही वंशज प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मन सहित अन्य लोगों ने जनसभा को संबोधित किया जिसमें हजारों आदिवासी पुरुषों और महिलाओं ने भाग लिया। हंगशा कुमार वर्तमान में 30-सदस्यीय त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के विपक्ष के नेता हैं, जिसे एक मिनी-विधान सभा माना जाता है। टीटीएएडीसी में भाजपा के नौ सदस्य हैं, जिसे 6 अप्रैल, 2021 के चुनाव में टीआईपीआरए ने कब्जा कर लिया था।

जब टीआईपीआरए ने पिछले साल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण टीटीएएडीसी पर कब्जा कर लिया, तो 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले त्रिपुरा में माकपा के नेतृत्व वाले वाम, कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास के बाद यह चौथी बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई। संविधान की छठी अनुसूची के तहत 1985 में गठित, टीटीएएडीसी का त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किमी क्षेत्र के दो-तिहाई क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र है और यह 12,16,000 से अधिक लोगों का घर है, जिनमें से लगभग 84 प्रतिशत आदिवासी हैं।


कर्नाटक: येदियुरप्पा ने शुरू की सावरकर रथ यात्रा, सावरकर की देशभक्ति का करेंगे प्रचार

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बी. एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को यहां वीर सावरकर रथ यात्रा की शुरुआत की, ताकि लोगों को उनके योगदान और बलिदान के बारे में जागरूक किया जा सके। पार्टी के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकायों में नामांकित होने के बाद पहली बार ऐतिहासिक शहर मैसूर का दौरा करने वाले येदियुरप्पा ने मैसूर पैलेस के परिसर में कोटे अंजनेय मंदिर से यात्रा शुरू की।


नई दिल्लीः पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बी. एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को यहां वीर सावरकर रथ यात्रा की शुरुआत की, ताकि लोगों को उनके योगदान और बलिदान के बारे में जागरूक किया जा सके। पार्टी के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकायों में नामांकित होने के बाद पहली बार ऐतिहासिक शहर मैसूर का दौरा करने वाले येदियुरप्पा ने मैसूर पैलेस के परिसर में कोटे अंजनेय मंदिर से यात्रा शुरू की।

रथ यात्रा का आयोजन सावरकर फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।येदियुरप्पा ने कहा, "यह चित्रित करना गलत है कि वीर सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे। केवल वे लोग जिन्हें धर्म और राष्ट्र का आईडिया नहीं है, वे इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान दे सकते हैं। विपक्ष के नेता सिद्धारमैया द्वारा वीर सावरकर पर दिए गए बयान उनकी गरिमा के अनुरूप नहीं हैं।" उन्होंने कहा, "अगर वह इस तरह के बयान देते रहे तो राज्य की जनता उन्हें सबक सिखाएगी। हम लोगों के बीच वीर सावरकर की देशभक्ति का प्रचार करेंगे। यह एक शांत तरीके से होने जा रहा है.. हम बड़े समूह इकट्ठा नहीं करेंगे।" रथ यात्रा 30 अगस्त तक मैसूर, मांड्या और चामराजनगर जिलों में चलेगी।

रथ यात्रा के दौरान वीर सावरकर के मूल्यों और सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। फाउंडेशन के संयोजक राजथ ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी भूमिका पर विपक्षी दल और समाज के एक वर्ग द्वारा भ्रम पैदा किया गया है।


पैगंबर पर टिप्पणी मामले में बीजेपी ने विधायक टी राजा सिंह को पार्टी से सस्पेंड किया, 10 दिन में मांगा जवाब

भारतीय जनता पार्टी के विधायक टी राजा को पुलिस ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। विधायक टी राजा पर उनकी पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से सस्पेंड कर दिया है। साक्षी बीजेपी ने विधायक टी राजा सिंह को पत्र लिखकर मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।



हैदराबाद: भारतीय जनता पार्टी के विधायक टी राजा को पुलिस ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। विधायक टी राजा पर उनकी पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से सस्पेंड कर दिया है। साक्षी बीजेपी ने विधायक टी राजा सिंह को पत्र लिखकर मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। आरोप है कि टी राजा ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणियां की थी। उसके बाद लोग काफी गुस्से में थे हैदराबाद में भारी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतर कर टी राजा के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद आज सुबह उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। 

टी राजा के खिलाफ एफ आई आर दर्ज

हैदराबाद दक्षिण क्षेत्र के डीसीपी साईं चैतन्य ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर ली गई है और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। विधायक टी राजा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बीती रात साउथ जोन डीसीपी कार्यालय में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। 

 वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद 

हैदराबाद की गोशामहल सीट से बीजेपी विधायक टी. राजा सिंह ने हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसे लेकर यह विवाद तेज हुआ है। इस वीडियो के बाद उनके खिलाफ बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया है। लोगों ने दबीरपुरा, भवानीनगर, रीनबाजार और मीरचौक पुलिस स्टेशन को घेरकर प्रदर्शन किया। 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में टी. राजा सिंह ने कहा था कि आप लोग हमारे भाईयों के गले काटते हो और वीडियो जारी करते हो। सोचो यदि हिंदू भाई भी ऐसा ही करते हैं तो फिर आप लोगों का क्या होगा। उन्होंने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का जिक्र करते हुए कहा था कि उसने कॉमेडी के नाम पर माता सीता और भगवान राम का अपमान किया था।


कांग्रेस को हिमाचल में बड़ा झटका, प्रदेश अध्यक्ष व उपाध्यक्ष भाजपा में शामिल

भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए इनके दो दिग्गज विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पवन कुमार काजल और कांग्रेस के उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह राणा ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया।



नई दिल्लीः भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए इनके दो दिग्गज विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पवन कुमार काजल और कांग्रेस के उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह राणा ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया।

कांग्रेस के इन दोनों दिग्गज नेताओं का भाजपा में स्वागत करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नवंबर में चुनाव हो सकते हैं और कांग्रेस विधायकों के पार्टी में शामिल होने से भाजपा लगातार मजबूत हो रही है। ठाकुर ने प्रदेश में हर पांच वर्ष में सरकार बदल जाने के रिवाज को तोड़ने का दावा करते हुए कहा कि जिस तरह से कांग्रेस देश भर में समाप्त हो गई है उसी तरह से हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के हिमाचल प्रदेश से जुड़े होने पर गर्व की बात कहते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मार्गदर्शन से ताकत मिलती है और भाजपा 'सरकार नहीं, रिवाज बदलना है' के नारे को लेकर चुनाव लड़ने जा रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने दोनों विधायकों का स्वागत करते हुए कहा कि दो बार के विधायक पवन कुमार काजल, कांगड़ा जिले से आते हैं और ओबीसी समाज के बड़े नेता हैं और लखविंदर सिंह राणा भी दो बार से विधायक बन रहे हैं। इन दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने से पार्टी और मजबूत होगी। बलूनी ने बताता कि ये दोनों नेता मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।


भाजपा में बड़ा बदलाव भाजपा संसदीय बोर्ड से भी बाहर हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सीएम शिवराज

भाजपा से एक बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर कर दिया गया है। दोनों नेताओं को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति में भी शामिल नहीं किया है। केंद्र और बिहार सरकार में मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति से बाहर कर दिया गया है।


नई दिल्लीः भाजपा से एक बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर कर दिया गया है। दोनों नेताओं को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति में भी शामिल नहीं किया है। केंद्र और बिहार सरकार में मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति से बाहर कर दिया गया है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बुधवार को पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति का पुनर्गठन करते हुए इनके नए सदस्यों के नाम की घोषणा कर दी है।

पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते जेपी नड्डा 11 सदस्यीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बी एस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के.लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया को सदस्य के तौर पर संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष संसदीय बोर्ड के सचिव के तौर इसमें शामिल किए गए हैं।

संसदीय बोर्ड के साथ ही नड्डा ने चुनावों में टिकट बंटवारे पर मुहर लगाने वाले केंद्रीय चुनाव समिति का भी पुनर्गठन कर दिया है। पार्टी की 15 सदस्यीय केंद्रीय चुनाव समिति में भी नड्डा अध्यक्ष के तौर पर रहेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदियुरप्पा, सबार्नंद सोनोवाल, के.लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया, भूपेन्द्र यादव, देवेन्द्र फडणवीस, ओम माथुर, और वनथी श्रीनिवासन (पदेन) को इसमें सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष चुनाव समिति में भी सचिव के तौर पर शामिल किए गए हैं।


कश्मीर‌: दो कश्मीरी पंडितों पर आतंकियों ने बरसाई गोलियां, ओवैसी और कांग्रेस ने मोदी सरकार पर 370 के लिए साधा निशाना

जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में कल फील टारगेट किलिंग की गई। दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर आतंकियों ने गोलियों की बौछार कर दी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार दोनों भाई शोपियां के चोटीगाम के एक सेब के बागान में थे। तभी घात लगाए आतंकियों ने उन पर गोलियों की बरसात कर दी। दोनों कश्मीरी पंडितों का नाम सुनील कुमार और पिंटू कुमार बताया जा रहा है। गोलीबारी में एक भाई की मौत हो गई है तो वहीं दूसरा भाई गंभीर रूप से घायल है।



नई दिल्लीः जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में कल फील टारगेट किलिंग की गई। दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर आतंकियों ने गोलियों की बौछार कर दी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार दोनों भाई शोपियां के चोटीगाम के एक सेब के बागान में थे। तभी घात लगाए आतंकियों ने उन पर गोलियों की बरसात कर दी। दोनों कश्मीरी पंडितों का नाम सुनील कुमार और पिंटू कुमार बताया जा रहा है। गोलीबारी में एक भाई की मौत हो गई है तो वहीं दूसरा भाई गंभीर रूप से घायल है। घटना की जानकारी होते ही पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है। कश्मीर में 24 घंटे के अंदर यह दूसरा आतंकी हमला है। आतंकियों ने टारगेट किलिंग के तहत अब तक सैकड़ों लोगों की जान ली है। टारगेट किलिंग से जान गवाने वाले लोगों में पुलिसकर्मी कश्मीरी पंडित और बाहरी मजदूर शामिल है। 

असदुद्दीन ओवैसी ने अलापा 370 का राग 

कश्मीरी पंडितों पर हुए हमले के बहाने (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर 370 का राजा लाते हुए केंद्र सरकार पर हमला किया। ओवैसी ने कहा कि, 'मोदी सरकार ने सोचा था कि 370 हटाने से कश्मीरी पंडितों को फायदा होगा। लेकिन हकीकत यह है कि अब वे असुरक्षित है'। असदुद्दीन ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि कश्मीर में बीजेपी द्वारा नियुक्त एलजी है, मोदी सरकार का प्रशासन है, 370 भी हटाया जा चुका है। लेकिन फिर भी कश्मीरी पंडित असुरक्षित है घाटी को छोड़कर जाना चाहते हैं। यह मोदी सरकार की नाकामी है इस पर गृहमंत्री को जवाब देना चाहिए। 

कांग्रेस ने मोदी-शाह से मांगा जवाब

वहीं, शोपियां में कश्मीरी पंडित भाइयों पर हुए आतंकी हमले को लेकर कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये कहा कि समय आ गया है की पीएम और गृहमंत्री अपनी कश्मीर नीति को लेकर देश को संबोधित करें और श्वेत पत्र पेश करें। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बताए कि आखिर क्यों उसकी कश्मीर नीति विफल रही है।


नीतीश बदल सकते हैं गठबंधन! राजनीतिक सरगर्मी तेज, जेडीयू ने पटना तो बीजेपी ने दिल्ली में बुलाए पदाधिकारी

महाराष्ट्र के बाद अब बिहार की सियासत में गर्मी देखने को मिल रही है। राजनीतिक हालातों को देखते हुए लग रहा है कि जल्द ही बिहार के गठबंधन में कुछ बड़ा फेरबदल हो सकता है। बिहार की राजनीति के लिए अगले 4 से 5 दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इन दिनों में सत्ता परिवर्तन होना संभव है।




नई दिल्लीः महाराष्ट्र के बाद अब बिहार की सियासत में गर्मी देखने को मिल रही है। राजनीतिक हालातों को देखते हुए लग रहा है कि जल्द ही बिहार के गठबंधन में कुछ बड़ा फेरबदल हो सकता है। बिहार की राजनीति के लिए अगले 4 से 5 दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इन दिनों में सत्ता परिवर्तन होना संभव है। 

सत्ताधारी (एनडीए) के गठबंधन सहयोगी जदयू ने अपने सभी एमपी, एमएलए और एमएलसी को पटना बुलाया है। पार्टी के सभी नेताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वह किसी भी तरह से शाम तक हर हाल में पटना पहुंच जाएं। जदयू नेताओं ने कहां कि कुछ भी हो सकता है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि आरसीपी सिंह प्रकरण के बाद उत्पन्न स्थिति पर विचार करने के लिए सब को बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को सीएम आवास पर उनकी बैठक होने वाली है। ललन सिंह ने टीवी चैनलों को दिए अपने बयान में बीजेपी के प्रति पार्टी की नाराज़गी भी मजबूती से उजागर हो रही है। 

बीजेपी नेता भी दिल्ली तलब

इस बीच बीजेपी के दो बड़े नेता बिहार से दिल्ली रवाना हो गए हैं। उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन दिल्ली जा रहे हैं। उनके साथ-साथ सांसद रविशंकर प्रसाद दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उन्हें बुलाया गया है। बीजेपी बिहार उत्पन्न राजनैतिक हालात पर चर्चा कर सकती है। इधर सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कहा गया है कि कोई भी नेता गठबंधन के मुद्दे पर बात नहीं करेंगे। यह भी कहा गया है कि आरसीपी सिंह प्रकरण भी बात नहीं करेंगे इससे तो यही लगता है बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व बिहार के ताजा राजनैतिक हालात पर कोई फैसला लेने पर विचार कर रहा है। 

राजद भी गठबंधन को तैयार

दूसरी और राजद की ओर से भी संकेत दिया गया है गया है कि नीतीश कुमार अगर बीजेपी से अलग हो जाते हैं तो राज्य को अस्थिर नहीं होने दिया जाएगा। मी़डिया रिपोर्ट के अनुसार राजद नेता शिवानंद तिवारी ने साफ कर दिया है कि बीजेपी से अगल होने पर पार्टी नीतीश कुमार को सपोर्ट करेगी। इधर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी नीतीश कुमार की बीत चीत हुई है। जानकारी मिली है कि नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी से फोन पर बात की। उसके बाद कांग्रेस के सभी विधायकों को पटना बुला लिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा है कि वर्तमान सियासी हालात को लेकर पार्टी जनों को पटना बुलाया गया है।


आरसीपी सिंह का नीतीश कुमार पर हमला, डूबता जहाज बोलने पर ललन सिंह ने किया पलटवार

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह इस्तीफा देने के बाद से लगातार जदयू और सीएम किस कुमार पर हमलावर है। अपने ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए जाने के बाद आरसीपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस्तीफा देते हुए सीएम नीतीश पर कई गंभीर आरोप लगाए। आरसीपी सिंह ने कहा कि जदयू एक डूबता हुआ जहाज है। सीएम नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जदयू ने कहां की कौन कहता है नीतीश कुमार 18 घंटे काम करते हैं। सच तो यह है कि वह सुबह 11:00 बजे दफ्तर आते थे और 1:00 बजे खाना खाने चले जाते थे। इतना ही नहीं वह रोज शाम को 6:00 बजे से 9:00 बजे तक यानी 3 घंटे तक भूंजा पार्टी करते थे।




नई दिल्लीः पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह इस्तीफा देने के बाद से लगातार जदयू और सीएम किस कुमार पर हमलावर है। अपने ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए जाने के बाद आरसीपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस्तीफा देते हुए सीएम नीतीश पर कई गंभीर आरोप लगाए। आरसीपी सिंह ने कहा कि जदयू एक डूबता हुआ जहाज है। सीएम नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जदयू ने कहां की कौन कहता है नीतीश कुमार 18 घंटे काम करते हैं। सच तो यह है कि वह सुबह 11:00 बजे दफ्तर आते थे और 1:00 बजे खाना खाने चले जाते थे। इतना ही नहीं वह रोज शाम को 6:00 बजे से 9:00 बजे तक यानी 3 घंटे तक भूंजा पार्टी करते थे। 

खुद पर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि जिन जमीनों को लेकर मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उनसे मेरा कोई लेना देना नहीं है मेरे नाम पर ना तो पटना में और ना ही दिल्ली में कोई जमीन है। जिन जमीनों को लेकर मुझ पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वह जमीने मेरी बेटियों ने खरीदा है। चुनावी हलफनामे में मैंने उन जमीनों का खुलासा इसलिए नहीं किया क्योंकि वह जमीन ए मेरी बेटियों की है मेरी बिटिया लिपि सिंह आईपीएस और लता सिंह मेरे ऊपर डिपेंड नहीं है वहां उनका परिवार है। वह दोनों 10:00 12 साल से स्वतंत्र तरीके से अपना आयकर दाखिल कर रही है। इसलिए कुछ भी खरीदने या बेचने से पहले उन्हें मुझे बताने की जरूरत नहीं है। 

झोला ढोने वालों की पार्टी बनी जदयू

आरसीपी सिंह ने कहा कि सब कुछ का इलाज हो सकता है, ईर्ष्या का नहीं। आज मेरे ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा रहा है। मेरे या मेरी बेटी के नाम पर जो भी जमीन है उसके सारे दस्तावेज हैं। इनकम टैक्स के रिटर्न फाइल में सबका जिक्र है। आज जो लोग पटना में परिक्रमा कर रहे हैं वो कल तक पार्टी का विरोध करते थे। खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते थे। जेडीयू झोला ढोने वालों की पार्टी बनकर रह गई है।

ललन सिंह का पलटवार

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह (ललन) ने प्रेस वार्ता की और आरसीपी सिंह पर जमकर हमला बोला। ललन ने यहां तक कह दिया कि आरसीपी सिंह जदयू की ABCD भी नहीं जानते हैं। जेडीयू डूबता नहीं, दौड़ता जहाज है। इसके साथ ही साफ किया है कि अब जेडीयू मोदी कैबिनेट में शामिल नहीं होगा। बीजेपी के साथ जेडीयू के रिश्ते और मोदी कैबिनेट शामिल होने के सवाल पर ललन सिंह ने कहा कि बीजेपी के साथ सब ठीक है। ललन सिंह ने कहा कि बीजेपी के साथ ऑल इज वेल है। हम केंद्र में कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे। 2019 में पहले ही तय हो गया था कि जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगा। ललन ने आगे कहा कि हमारे खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं। पहले चिराग पासवान मॉडल लाया गया। मगर जेडीयू के खिलाफ कोई षड्यंत्र नहीं चलेगा।


उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान जारी, पीएम मोदी, अमित शाह, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह सहित इन दिग्गजों ने डाला वोट

भारत के नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में सबसे पहले वोट डाला। आज शाम 5:00 बजे तक वोट डाले जाएंगे जिसके बाद वोटों की गिनती होगी। 11 अगस्त को नए उपराष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा। आपको बता दें कि मौजूदा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है।




नई दिल्लीः भारत के नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में सबसे पहले वोट डाला। आज शाम 5:00 बजे तक वोट डाले जाएंगे जिसके बाद वोटों की गिनती होगी। 11 अगस्त को नए उपराष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा। आपको बता दें कि मौजूदा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है। 

भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चयन के लिए मतदान शनिवार सुबह 10 बजे से शुरू हो गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले वोट डालने वाले सांसदों में शामिल थे। मतदान शाम पांच बजे तक चलेगा, जिसके बाद मतगणना होगी। उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रत्याशी और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल 71 वर्षीय जगदीप धनखड़ का मुकाबला विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार 80 वर्षीय मार्गरेट अल्वा से है।

उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद वह मनोनीत सांसद वोट डालेंगे। संसद के दोनों सदनों में कुल 788 सांसद हो सकते हैं। उतरन की 8 सीटें फिलहाल खाली है ऐसे में उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल 780 वोट ही डाले जाएंगे। 

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने डाला वोट

सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोट डाला जिसके बाद सभी सांसद वोट डालने के लिए मतदान केंद्र पर पहुंच रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस सांसद डॉ मनमोहन सिंह ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना वोट डाला दिया है। 

गृहमंत्री अमित शाह ने वोट डाला

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना वोट डाला। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और अश्विनी वैष्णव ने संसद में वोट डाला।


आज होगा उपराष्ट्रपति चुनाव, जगदीप धनखड-मार्गरेट अल्वा मैदान में

भारत का अगला उप राष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला आज होगा आज पता चल जाएगा की जगदीप धनखड़ और मार्गरेट अल्वा में से कौन उपराष्ट्रपति पद पर काबिज होगा। आज धनखड़ और अल्वा में से कोई एक चुनाव में जीत दर्ज करेगा और 11 अगस्त से पहले अपना कार्यभार संभाल लेगा। संसद में आज इसके लिए वोटिंग की जाएगी, जिसमें दोनों सदनों के सभी सदस्य (मनोनीत भी) मतदान करेंगे। ये मतदान प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली द्वारा होगा।



नई दिल्लीः भारत का अगला उप राष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला आज होगा आज पता चल जाएगा की जगदीप धनखड़ और मार्गरेट अल्वा में से कौन उपराष्ट्रपति पद पर काबिज होगा। आज धनखड़ और अल्वा में से कोई एक चुनाव में जीत दर्ज करेगा और 11 अगस्त से पहले अपना कार्यभार संभाल लेगा। संसद में आज इसके लिए वोटिंग की जाएगी, जिसमें दोनों सदनों के सभी सदस्य (मनोनीत भी) मतदान करेंगे। ये मतदान प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली द्वारा होगा। जिसमें जीत के लिए आधे से अधिक बहुमत की आवश्यकता होगी। बता दें कि जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे, जब उनका नाम इस पद के लिए घोषित हुआ। वहीं मार्गरेट अल्वा 4 राज्यों की राज्यपाल रह चुकी हैं।वो 4 बार राज्यसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं।

कौन है जगदीप धनखड़?

धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान राज्य के झुंझुनू जिले के एक छोटे से गाँव 'किठाना' में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा किठाना गांव के स्कूल में हुई। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से पूरी की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।[4] स्कूली शिक्षा के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान के प्रतिष्ठित महाराज कॉलेज जयपुर में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया। यहां से उन्होंने फिजिक्स में BSE की डिग्री ली| साल 1978 में उन्होंने जयपुर विश्वविद्यालय में एलएलबी कोर्स में एडमिशन लिया |कानून की डिग्री लेने के लेने बाद जगदीप धनखड़ ने वकालत शुरू कर दी उसके बाद वो राजनीति में आए कुछ समय पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे हैं और झुंझुनू से लोकसभा सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री रह चुके हैं। उन्हें NDA द्वारा भारत के अगले उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित किया गया है।

कौन है मार्गरेट अल्वा?

मार्गरेट अल्वा का जन्म 14 अप्रैल 1942 को मैंगलूर के पास्कल एम्ब्रोस नजारेथ और एलिजाबेथ नजारेथ के यहाँ हुआ। अल्वा को अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने के लिए बंगलौर ले जाया गया, जहां माउंट कार्मेल कॉलेज और राजकीय लाँ कॉलेज में इनकी शिक्षा-दीक्षा हुई। 24 मई 1964 में उनकी शादी निरंजन अल्वा से हुई। उनकी एक बेटी और तीन बेटे हैं। वो राजस्थान राज्य की राज्यपाल रही हैं। उन्होंने 6 अगस्त 2009 से 14 मई 2012 तक उत्तराखण्ड की पहली महिला राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक वरिष्ठ सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की आम सचिव हैं। वे मर्सी रवि अवॉर्ड से सम्मानित हैं।


कई घंटों हिरासत में रहने के बाद राहुल-प्रियंका गांधी हुए रिहा, महंगाई के विरोध में कांग्रेस ने किया जबरदस्त प्रदर्शन

बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के साथ जीएसटी के मुद्दे पर कांग्रेस ने आज देशव्यापी आंदोलन किया जिसके दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कई घंटों पुलिस लाइंस किंग्सवे कैंप में हिरासत में रखने के बाद सभी कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने रिहा कर दिया है।



नई दिल्लीः बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के साथ जीएसटी के मुद्दे पर कांग्रेस ने आज देशव्यापी आंदोलन किया जिसके दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कई घंटों पुलिस लाइंस किंग्सवे कैंप में हिरासत में रखने के बाद सभी कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने रिहा कर दिया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि थाने के अंदर हमारी अच्छी खातिरदारी की गई लेकिन सरकार की तानाशाही को जनता देख रही है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग महंगाई और बेरोजगारी कम करने को है साथ ही साथ जीएसटी वापस लिया जाना चाहिए। 

कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने केंद्र सरकार के खिलाफ महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तार किया था। इस मामले पर दिल्ली पुलिस ने कहा है कि कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने आज दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत आदेश लागू कर दिए गए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने की कोशिश की, उनके साथ मारपीट भी की और उन्हें घायल कर दिया। उचित कानूनी कार्रवाई की गई।

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी और कई खाद्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाए जाने के खिलाफ शुक्रवार को प्रदर्शन किया। इसके बाद पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुए नेताओं ने काले रंग के कपड़े पहन रखे थे। राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन के लिए मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने इन नेताओं को न्यू पुलिस लाइंस किंग्सवे कैंप में हिरासत में लिया गया।


कांग्रेस के देशव्यापी प्रदर्शन दौरान राहुल- प्रियंका गांधी हिरासत में, कांग्रेस का बड़ा आरोप सांसदों को सड़क पर घसीटा गया

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पार्टी मुख्यालय से अपने कार्यकर्ताओं के साथ पीएम हाउस की तरफ बढ़ रही थी, तभी प्रियंका गांधी को पुलिस ने रोक लिया है। इस दौरान प्रियंका जमीन पर बैठ गईं। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती गाड़ी में बिठाकर हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही प्रदर्शन में एक रैली की अगुवाई कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर बस में बिठाया लिया है उनके साथ कई कांग्रेस सांसदों को हिरासत में लिया गया है।



नई दिल्लीः आज देशभर में बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ कांग्रेस पार्टी प्रदर्शन कर रही है। पार्टी नेता तमाम राज्यों में जोरदार प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। नेताओं का कहना है कि वो इसे लेकर प्रदर्शन करेंगे और अपनी गिरफ्तारी भी देंगे। दिल्ली में कांग्रेस ने पीएम आवास और राष्ट्रपति भवन के घेराव का एलान किया है। जिसके बाद इन इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है। राष्ट्रपति भवन के पास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। 

राहुल गांधी औ प्रियंका गांधी हिरासत में

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पार्टी मुख्यालय से अपने कार्यकर्ताओं के साथ पीएम हाउस की तरफ बढ़ रही थी, तभी प्रियंका गांधी को पुलिस ने रोक लिया है। इस दौरान प्रियंका जमीन पर बैठ गईं। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती गाड़ी में बिठाकर हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही प्रदर्शन में एक रैली की अगुवाई कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर बस में बिठाया लिया है उनके साथ कई कांग्रेस सांसदों को हिरासत में लिया गया है। 

कांग्रेस सांसदों को सड़क पर घसीटा गया

कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। प्रियंका गांधी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हमारे सांसदों को सड़क पर घसीटा गया है। आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी दिल्ली के दौरे पर हैं। जानकारी के अनुसार वो आज कई विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगी।


खड़गे से ईडी ने की 7 घंटे पूछताछ,जयराम रमेश ने कहा उन्हें मार्गरेट अल्वा के डिनर पार्टी में जाना था

नेशनल हेराल्ड केस मामले को लेकर ईडी के अधिकारी यंग इंडिया में लेन देन को लेकर कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे से करीब सात घंटे पूछताछ की। इस मामले में खड़गे पहले ही संसद की कार्यवाही के दौरान सरकार पर निशाना साध चुके हैं। अब पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि संसद सत्र के दौरान ईडी ने हमारे नेता को तलब किया। उन्हें आज रात मार्गरेट अल्वा के लिए आयोजित डिनर पार्टी की मेजबानी करनी थी।



नई दिल्लीः नेशनल हेराल्ड केस मामले को लेकर ईडी के अधिकारी यंग इंडिया में लेन देन को लेकर कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे से करीब सात घंटे पूछताछ की। इस मामले में खड़गे पहले ही संसद की कार्यवाही के दौरान सरकार पर निशाना साध चुके हैं। अब पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि संसद सत्र के दौरान ईडी ने हमारे नेता को तलब किया। उन्हें आज रात मार्गरेट अल्वा के लिए आयोजित डिनर पार्टी की मेजबानी करनी थी।

गुरुवार दोपहर डेढ़ बजे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ईडी अधिकारियों के समक्ष तलब हुए थे। नेशनल हेराल्ड दफ्तर में बुलाए गए खड़गे से ईडी के अधिकारी दिन से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि यंग इंडिया लिमिटेड में लेन-देन को लेकर उनसे पूछताछ हुई। ईडी की पूछताछ पूरी होने के बाद वे करीब सात घंटे बाद बाहर आए।

अब इस प्रकरण पर कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर हमला बोला। पार्टी के सांसद जयराम रमेश ने कहा, 6.5 घंटे हो चुके हैं और हमारे वरिष्ठ नेता और एलओपी मल्लिकार्जुन खड़गे, जिन्हें ईडी ने (संसद) सत्र के बीच में तलब किया था। यह खेदजनक है। उन्हें विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा के लिए शाम 7:30 बजे रात्रिभोज की मेजबानी करनी थी।


नौ नए मंत्रियों को मिली ममता कैबिनेट में जगह, BJP के पोस्टर बॉय भी बने मंत्री

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार में बुधवार को नौ नए मंत्री शामिल किए गए, जिनमें पांच कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और दो राज्य मंत्री हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक इन मंत्रियों के लिए विभागों की घोषणा नहीं की है।


नई दिल्लीः ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार में बुधवार को नौ नए मंत्री शामिल किए गए, जिनमें पांच कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और दो राज्य मंत्री हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक इन मंत्रियों के लिए विभागों की घोषणा नहीं की है।

राज्यपाल ला गणेशन ने जिन पांच कैबिनेट मंत्रियों को शपथ दिलाई उनमें पश्चिम बर्दवान जिले के दुगार्पुर-पूर्व से तृणमूल कांग्रेस के विधायक प्रदीप मजूमदार, कोलकाता के बालीगंज विधानसभा क्षेत्र से बाबुल सुप्रियो, कूचबिहार के दिनहाटा से उदयन गुहा, नैहाटी से पार्थ भौमिक, उत्तर 24 परगना और हुगली जिले के जंगीपारा से स्नेहासिस चक्रवर्ती शामिल हैं।पश्चिम बंगाल में तृणमूल के सत्ता में आने के बाद से मजूमदार राज्य सरकार के प्रमुख कृषि सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। वे बनर्जी के करीबी विश्वासपात्र हैं।

गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल से दो बार भाजपा के लोकसभा सदस्य थे और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थे। हालांकि, 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद वे भाजपा छोड़ तृणमूल में शामिल हो गए और सांसद पद से भी इस्तीफा दे दिया। बाद में वह इस साल की शुरूआत में बालीगंज के उपचुनाव में निर्वाचित हुए। उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद विधानसभा क्षेत्र से सत्यजीत बर्मन और मेल्डा जिले के हरिश्चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र से ताजमुल हुसैन ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली।

हालांकि, अब सभी की निगाहें अपने प्रस्तावित कैबिनेट फेरबदल में विभागों के आवंटन के संबंध में मुख्यमंत्री की घोषणा पर टिकी हैं, जिसमें कुछ मौजूदा भारी मंत्रियों को उनके विभागों से मुक्त किया जा सकता है।


चुनाव से पहले मुफ्त की घोषणा पर केंद्र सरकार चाहती है रोक, मोदी सरकार पर भड़के अरविंद केजरीवाल

चुनाव में जनता के लिए मुफ्त बिजली और पानी जैसी योजनाओं की घोषणा का वादा करके वोट लेनी पर केंद्र सरकार रोक लगाना चाहती है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चुनावों में राजनीतिक दलों की ओर से किए 'मुफ्त' के वादों से आर्थिक संकट पैदा होगा।




नई दिल्लीः चुनाव में जनता के लिए मुफ्त बिजली और पानी जैसी योजनाओं की घोषणा का वादा करके वोट लेनी पर केंद्र सरकार रोक लगाना चाहती है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चुनावों में राजनीतिक दलों की ओर से किए 'मुफ्त' के वादों से आर्थिक संकट पैदा होगा। 

पिछले एक महीने में प्रधानमंत्री मोदी ने तीन मौकों पर 'रेवड़ी कल्चर' को देश के लिए घातक बताया है और जनता से इसे नकारने की अपील भी की है। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पर जोरदार पलटवार करते हुए कहा है कि जनता को मुफ्त सुविधाएं देना रेवड़ी बांटना नहीं है, बल्कि अपने कारोबारी दोस्तों का लोन माफ करना रेवड़ी बांटना है। 

 मोदी सरकार की इस लोकलुभावन वादें पर रोक की मांग पर दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल भड़क उठे। उन्होंने कहा है कि जनता को मुफ्त सुविधाएं देने से नहीं बल्कि 'दोस्तों' को लाखों करोड़ों रुपए का फ्री फायदा देने से संकट आएगा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा है कि बजट के एक हिस्से से ज्यादा फ्री नहीं देने पर विचार किया जाएगा है।

 केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट में सवाल पूछा, ''चुनाव से पहले घोषणाओं पर रोक? क्यों? घोषणाओं से आर्थिक संकट कैसे आएगा? इनका निशाना कही और है। घोषणाओं पर रोक नहीं होनी चाहिए। सरकारी बजट के एक हिस्से से ज्यादा फ्री नहीं देने पर विचार हो सकता है। 'फ्री' में मंत्रियों को सुविधाएं और किसी कंपनी को मुफ्त/सस्ती सुविधा या लोन माफी भी इस रोक में शामिल होनी चाहिए।''

खुद को जनता के लिए 'रेवड़ीवाला' के रूप में प्रचारित करने में जुटे अरविंद केजरीवाल ने कहा, ''क्या हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा फ्री मिलनी चाहिए, हर भारतीय को अच्छा इलाज फ्री मिलना चाहिए या बैंक लूटने वालों के लोन माफ होने चाहिए- देश को इस पर विचार करना चाहिए।'' पिछले दिनों गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि इस मुद्दे पर जनमत संग्रह करा लिया जाए कि लोग मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं चाहते हैं या नहीं। आपको बता दें कि, दिल्ली और पंजाब में सरकार बना चुकी आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली, पानी और मुफ्त बस सफर जैसी लोकलुभावन योजनाओं के सहारे देशभर में विस्तार की कोशिश में जुटी है। गुजरात में भी अरविंद केजरीवाल ने सरकार बनने पर हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है।


महाराष्ट्र के राजनीतिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई, संविधान पीठ के गठन पर भी होगा विचार

शिवसेना पार्टी में मालिकाना हक की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है। उद्धव ठाकरे के ग्रुप से अलग होने के बाद शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में नई सरकार बनी और शिंदे ने बीजेपी के सहयोग से मुख्यमंत्री का पद प्राप्त कर लिया लेकिन अब लड़ाई शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह को लेकर है। एक तरफ एकनाथ शिंदे खुद को असली शिवसैनिक होने का दावा कर रहे हैं तो वही उद्धव ठाकरे भी इस केस में अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं।




नई दिल्लीः शिवसेना पार्टी में मालिकाना हक की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है। उद्धव ठाकरे के ग्रुप से अलग होने के बाद शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में नई सरकार बनी और शिंदे ने बीजेपी के सहयोग से मुख्यमंत्री का पद प्राप्त कर लिया लेकिन अब लड़ाई शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह को लेकर है। एक तरफ एकनाथ शिंदे खुद को असली शिवसैनिक होने का दावा कर रहे हैं तो वही उद्धव ठाकरे भी इस केस में अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं।

इस राजनीतिक विवाद से जुड़े सभी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। यह सुनवाई 1 अगस्त को होने वाली थी जो किसी कारण से टल गई थी। आज यदि 3 अगस्त को कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई का दिन निश्चित किया है। 

इससे पहले 20 जुलाई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने यह संकेत दिया था कि मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन किया जा सकता है। उस दिन कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा था कि वह आपस में बात कर सुनवाई के बिंदुओं का एक संकलन जमा करवाएं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दोनों गुटों के नेताओं की कई याचिकाएं लंबित हैं और इन याचिकाओं में विधायकों की अयोग्यता, राज्यपाल की तरफ से शिंदे गुट को आमंत्रण देने, विश्वास मत में शिवसेना के दो व्हिप जारी होने जैसे कई मसलों को उठाया गया है।

शिंदे-उद्धव दोनों गुटों ने रखी है अपनी-अपनी मांग

उद्धव ठाकरे गुट ने नई याचिका दाखिल कर यह मांग भी की है कि सुप्रीम कोर्ट शिवसेना के चुनाव चिह्न को आवंटित करने के लिए चुनाव आयोग में चल रही प्रक्रिया पर रोक लगाए। उद्धव कैंप की एक और याचिका में लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को भी चुनौती दी गई है। तो वहीं, इस याचिका में शिंदे पक्ष के सांसद राहुल शेवाले को लोकसभा में पार्टी के नेता और भावना गवाले को चीफ व्हिप के रूप में मान्यता दी जाने का विरोध किया गया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिया था निर्देश

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता जैसे मसलों पर यथस्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि मामले से जुड़े विधानसभा के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। आज कोर्ट यह तय कर सकता है कि मामले में उठाए जा रहे संवैधानिक सवालों के चलते क्या उसे 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा जाए। ऐसी सूरत में कोर्ट आगे की सुनवाई की रूपरेखा भी तय कर सकता है। किसी भी पक्ष की ओर से अगर किसी अंतरिम राहत की मांग की जाती है, तो 3 जजों की बेंच उस पर भी विचार कर सकती है।


पार्थ चटर्जी को लेकर TMC में मतभेद, महासचिव कुणाल घोष ने खोला मोर्चा

पार्थ चटर्जी को लेकर टीएमसी में गहरे मतभेद हो गए हैं। एक तरफ ममता बनर्जी की ओर से अब तक पार्थ पर कोई ऐक्शन नहीं लिया गया है तो वहीं पार्टी के महासचिव कुणाल घोष ने ट्वीट कर ऐक्शन की मांग की है। कुणाल घोष ने कहा, 'पार्थ चटर्जी को मंत्री पद और पार्टी के सभी पदों से तत्काल हटा देना चाहिए। उन्हें निष्कासित करना चाहिए। यदि मेरा यह बयान गलत है तो पार्टी के पास हर अधिकार है कि मुझे सभी पदों से हटा दिया जाए।'



नई दिल्लीः पार्थ चटर्जी को लेकर टीएमसी में गहरे मतभेद हो गए हैं। एक तरफ ममता बनर्जी की ओर से अब तक पार्थ पर कोई ऐक्शन नहीं लिया गया है तो वहीं पार्टी के महासचिव कुणाल घोष ने ट्वीट कर ऐक्शन की मांग की है। कुणाल घोष ने कहा, 'पार्थ चटर्जी को मंत्री पद और पार्टी के सभी पदों से तत्काल हटा देना चाहिए। उन्हें निष्कासित करना चाहिए। यदि मेरा यह बयान गलत है तो पार्टी के पास हर अधिकार है कि मुझे सभी पदों से हटा दिया जाए।' इससे पहले भी गिरफ्तारी के बाद रविवार को कुणाल घोष ने कहा था कि इस मामले के चलते पार्टी की छवि खराब होगी।

कुणाल घोष ने रविवार को भी ट्वीट किया था, 'यह मायने नहीं रखता कि कौन सा नेता है और किस पद पर है। यदि कानून की नजर में गलत पाया जाता है तो फिर पार्टी और सरकार की ओर से उसे बख्शा नहीं जाएगा। इस गिरफ्तारी ने विपक्ष को मुद्दा दिया है। यदि यह जांच लंबी चली तो ऐसा ही जारी रहेगा। हम मांग करते हैं कि जल्दी और समयबद्ध जांच हो जाए।' पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद से ही टीएमसी बैकफुट पर नजर आ रही है। ममता बनर्जी या फिर किसी भी नेता ने पार्थ का बचाव नहीं किया है, लेकिन पार्टी के पदों या फिर मंत्री पद से हटाया भी नहीं गया है।

बंगाल कैबिनेट की आज होने वाली है बैठक, हो सकता है बड़ा फैसला

कहा यह भी जा रहा है कि पार्थ को लेकर टीएमसी में आपसी मतभेद भी हैं। बता दें कि आज बंगाल कैबिनेट की बैठक होने वाली है। ऐसे में इस बात के भी कयास लग रहे हैं कि बैठक के दौरान पार्थ चटर्जी को कैबिनेट से हटाने का फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि ममता बनर्जी ने भी बुधवार को कहा था कि मैं किसी एजेंसी के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन उनका इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल को बदनाम करने के लिए नहीं होना चाहिए। पार्थ चटर्जी का नाम लिए बिना ही उन्होंने कहा था कि जो काम करता है, उससे ही गलती होती है। यदि किसी ने गलती की है तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी के खिलाफ मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए।


राष्ट्रपति के अपमान पर संसद में घमासान, सोनिया गांधी और स्मृति इरानी में जुबानी जंग

राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के ऊपर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की अशोभनीय टिप्पणी को लेकर संसद के अंदर गुरुवार को बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच नोकझोंक देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता निर्मला सीतारमण ने सोनिया गांधी पर सांसद के अंदर बीजेपी नेताओं को धमकाने का आरोप लगाया है।





नई दिल्लीः राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के ऊपर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की अशोभनीय टिप्पणी को लेकर संसद के अंदर गुरुवार को बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच नोकझोंक देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता निर्मला सीतारमण ने सोनिया गांधी पर सांसद के अंदर बीजेपी नेताओं को धमकाने का आरोप लगाया है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीजेपी सांसद रमा देवी से सोनिया गांधी की बात हो रही थी उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष ने उसे कहा कि, आई डॉट वांट टू टॉक टू यू (मैं आपसे बात नहीं करना चाहती हूं)

सूत्रों के मुताबिक, जब सोनिया गांधी बीजेपी नेता रमा देवी से बात कर रही थी उस वक्त उनके साथ बिट्टू और गौरव गोगोई थे। सोनिया गांधी उस समय रमा देवी से कह रही थी कि मेरा नाम क्यों लिया जा रहा है? तभी स्मृति इरानी आई और कहा कि ‘ Maam May I help You’. स्मृति ने कहा कि मैने आपका नाम लिया था। तब सोनिया ने कहा कि Dont talk to me… और तब दोनों तरफ के सांसद आ गए और नारेबाजी होने लगी. तब गौरव गोगोई, सुप्रिया सुले ने बीच बचाव किया।

'राष्ट्रपत्नी’ वाले बयान पर निर्मला हमलावर

इधर, राष्ट्रपति वाले बयान पर हमला केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस हर तरह से आदिवासियों को नीचा दिखाने का काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि हम बीजेपी की तरफ से ये मांग करते हैं कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्र से माफी मांगे। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष ने कहा कि वह पहले ही माफी मांग चुके हैं। वह देश को गुमराह कर रही हैं। जबकि अधीर रंजन चौधरी लगातार यह बोल रहे हैं कि माफी मांगने की जरूरत नहीं है।

BJP ने किया प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘‘राष्ट्रपत्नी’’ कहकर संबोधित किए जाने के खिलाफ बृहस्पतिवार को संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। संसद भवन के द्वार संख्या एक के बाहर हाथों में तख्तियां लिए भाजपा की महिला सांसदों ने प्रदर्शन किया। इनमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे भी शामिल थीं। प्रदर्शन कर रही महिला सांसदों ने कांग्रेस से माफी की मांग की। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने चौधरी पर आरोप लगाया कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपत्नी संबोधित कर उनका अपमान किया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा करके चौधरी ने पूरे आदिवासी समुदाय, महिलाओं और गरीबों का अपमान किया है। राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर हमला किया और अधीर की टिप्पणी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से माफी की मांग की।

उन्होंने कांग्रेस नेता की टिप्पणी को ‘‘सेक्सिस्ट’’ (लैंगिक भेदभाव) बताया और कांग्रेस से इसके लिए देश व राष्ट्रपति से माफी मांगने की मांग की। राज्यसभा में शून्काल के दौरान विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच सीतारमण ने कहा कि ऐसा नहीं है कि यह शब्द गलती से कांग्रेस नेता के मुंह से निकल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने जानबूझकर ऐसा किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के लिए ऐसी टिप्पणी राष्ट्रपति के साथ ही महिलाओं का भी अपमान है। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति को राष्ट्रपत्नी कहना ‘सेक्सिस्ट’ टिप्पणी है।’’ सीतारमण ने कहा कि सभी को पता है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को राष्ट्रपति कहकर संबोधित किया जाता है।


यूथ कांग्रेस ने ईडी के दफ्तर पर लगाया बीजेपी कार्यालय का पोस्टर, वीडियो वायरल

सोनिया गांधी से चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले के बीच देशभर में ईडी के खिलाफ कांग्रेसियों का प्रदर्शन देखा जा सकता है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ईडी के दफ्तर में बीजेपी कार्यालय का बोर्ड लगा दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है यूथ कांग्रेस ने इस दौरान यूपी के सामने जाकर नारेबाजी भी की है।


नई दिल्लीः सोनिया गांधी से चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले के बीच देशभर में ईडी के खिलाफ कांग्रेसियों का प्रदर्शन देखा जा सकता है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ईडी के दफ्तर में बीजेपी कार्यालय का बोर्ड लगा दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है यूथ कांग्रेस ने इस दौरान यूपी के सामने जाकर नारेबाजी भी की है। 

दरअसल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को मंगलवार को फिर ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके विरोध में रायपुर में कांग्रेस ने सत्याग्रह किया। इसके अलावा पुजारी पार्क के पास स्थित ईडी कार्यालय का यूथ कांग्रेस ने घेराव किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की और ईडी के बोर्ड के साथ बीजेपी कार्यालय का पोस्टर चिपका दिया।

 रायपुर में कांग्रेस का सत्याग्रह सोनिया गांधी से पूछताछ तक रायपुर के पुराने कांग्रेस भवन के ग्राउंड में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे कांग्रेस के नेता सत्याग्रह में बैठे रहे। कांग्रेस ने इस दौरान केंद्र की बीजेपी सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने कहा कि संवैधानिक तरीके से हम लोग लड़ते रहेंगे और मोदी सरकार को मजबूर कर देंगे। आपकी तानाशाह सरकार ज्यादा दिन की मेहमान नहीं है। हम 2024 में सत्ता में आएंगे और ऐसे लोगों को सबक सिखाएंगे।


शिवसेना में वर्चस्व की लड़ाई के बीच, बालासाहेब ठाकरे की पुत्रवधू ने की सीएम शिंदे से मुलाकात

शिवसेना मैं जारी वर्चस्व की जंग के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। शिव सेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे की पुत्र वधू स्मिता ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की है। स्मिता ठाकरे परिवार की पहली सदस्य हैं जो बगावत के बाद भी जाकर शिंदे से मिली है। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।



नई दिल्लीः शिवसेना मैं जारी वर्चस्व की जंग के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। शिव सेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे की पुत्र वधू स्मिता ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की है। स्मिता ठाकरे परिवार की पहली सदस्य हैं जो बगावत के बाद भी जाकर शिंदे से मिली है। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

उद्धव ठाकरे के भाई जय देव की पत्नी हैं स्मिता ठाकरे

शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के दूसरे बेटे जयदेव ठाकरे की पत्नी स्मिता ठाकरे के उद्धव ठाकरे से मिलने के बाद लोगों में तरह-तरह की बातें उठ रही है। आपको बता दें कि फिलहाल स्मिता ठाकरे राजनीति में सक्रिय नहीं है, लेकिन बालासाहेब ठाकरे के साथ 1995 से सन् 2000 के दौरान शिवसेना में उनका ताकतवर रुतबा हुआ करता था। एकनाथ शिंदे की बगावत की वजह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी से उद्धव ठाकरे को हाथ धोना पड़ा अब स्मिता पटेल और एकनाथ शिंदे की मुलाकात से लोगों में पार्टी छीनने की चर्चा भी तेज हो गई है। 

फिल्म निर्माता स्मिता ठाकरे ने मंगलवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद कहा कि वह (शिंदे) शिवसेना के ‘पुराने’ शिवसैनिक हैं। उन्होंने इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट बताया। दक्षिण मुंबई में सरकारी अतिथि गृह ‘सहयाद्री’ में शिंदे से मुलाकात के बाद स्मिता ने संवाददाताओं से कहा, ‘एकनाथ शिंदे एक पुराने शिवसैनिक हैं, जो मुख्यमंत्री बन गए हैं। मैं यहां उन्हें बधाई देने आई हूं। मैं उन्हें और उनके काम को पिछले कई सालों से जानती हूं। यह शिष्टाचार मुलाकात थी। हम एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं, इसलिए मैं उनसे मिली।'

शिवसेना में बगावत के बारे में पूछे जाने पर स्मिता ने कहा कि वह इसके बारे में कुछ नहीं जानती हैं क्योंकि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और राजनीति में नहीं हैं। स्मिता ने कहा, ‘मैं राजनीति में नहीं हूं. मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानती।’ बता दें कि 1995-99 के दौरान शिवसेना में उनका ताकतवर रुतबा हुआ करता था।


बिहार बन जाता तमिलनाडु अगर ईसाई नहीं होते', DMK नेता के विवादित बयान पर BJP ने पूछा- यही सेक्युलरिज्म है?

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष डीएमके नेता अप्पावु का एक पुराना विवादित वीडियो फिर वायरल हो रहा है। वीडियो में अप्पावु ने कैथोलिक ईसाईयों की तारीफ करते हुए कहा कि अगर तमिलनाडु में ईसाई नहीं होते तो तमिलनाडु भी बिहार की तरह बन जाता। बीजेपी ने अप्पावु के इस वीडियो को लेकर डीएमके पर हिंदू विरोधी पार्टी होने का आरोप लगाया है। वही द्रमुक नेता ने कहा कि बीजेपी केवल राजनीति कर रही है।



नई दिल्लीः तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष डीएमके नेता अप्पावु का एक पुराना विवादित वीडियो फिर वायरल हो रहा है। वीडियो में अप्पावु ने कैथोलिक ईसाईयों की तारीफ करते हुए कहा कि अगर तमिलनाडु में ईसाई नहीं होते तो तमिलनाडु भी बिहार की तरह बन जाता। बीजेपी ने अप्पावु के इस वीडियो को लेकर डीएमके पर हिंदू विरोधी पार्टी होने का आरोप लगाया है। वही द्रमुक नेता ने कहा कि बीजेपी केवल राजनीति कर रही है।

अपने बयान में एम अप्पावु ने कहा था, ''अगर ईसाई फादर और सिस्टर नहीं होते तो तमिलनाडु बिहार की तरह बन जाता। कैथोलिक फादर और सिस्टर की मदद की वजह से आज मैं इस मुकाम पर हूं। तमिलनाडु सरकार आपकी सरकार है। आपने इस सरकार को बनाया है। आपकी प्रार्थनाओं और उपवास ने इस सरकार का गठन किया है। कैथोलिक ईसाई और ईसाई फादर सामाजिक न्याय और द्रविड़ मॉडल सरकार के लिए मुख्य वजह हैं।'' 

विवादित बयान में द्रमुक नेता ने आगे कहा कैथोलिक ईसाईयों को किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। वह अपनी समस्याओं की सूची बनाकर सीधे मुख्यमंत्री को दे मुख्यमंत्री किसी चीज के लिए मना नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि यह सरकार आपकी वजह से हैं। यह आपकी सरकार है और सीएम आपके हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैं आपके साथ हूं अगर तमिलनाडु से कैथोलिक ईसाइयों को हटा दिया जाएगा तो तमिलनाडु के पास कुछ नहीं बचेगा आज तमिलनाडु कैथोलिक ईसाइयों के कंधों पर खड़ा है। 

बीजेपी नेता ने अप्पावु के बयान पर क्या कहा?

एम अप्पावु का यह बयान महीनेभर बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तमिलनाडु बीजेपी के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता नारायणन ने सोशल मीडिया के माध्यम से ही अप्पावु के जरिये डीएमके पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ''क्या यह डीएमके की धर्मनिरपेक्षता है? उन्होंने खुद को एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी कहने का दावा खो दिया है। अब यह साबित करता है कि डीएम एक हिंदू विरोधी पार्टी है।'' एम अप्पावु ने कहा कि उन्होंने बयान दिया था लेकिन उसके छंटे हुए हुस्से वायरल किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ''मैंने जो कुछ भी कहा वह सिर्फ इतिहास है, उस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।"


द्रौपदी मुर्मू के जीतने पर लगा बधाईयों का तांता, रहने के बाद जानिए क्या बोले यशवंत सिन्हा

द्रौपदी मुर्मू ने पहली महिला आदिवासी राष्ट्रीय बनकर नया इतिहास रच दिया है। गुरुवार सुबह से शुरू हुआ गिनती में शाम होते तक द्रौपदी मुर्मू ने बहुमत के आंकड़े को पार कर दिया।




नई दिल्लीः द्रौपदी मुर्मू ने पहली महिला आदिवासी राष्ट्रीय बनकर नया इतिहास रच दिया है। गुरुवार सुबह से शुरू हुआ गिनती में शाम होते तक द्रौपदी मुर्मू ने बहुमत के आंकड़े को पार कर दिया। उनकी जीत पर विपक्ष उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि, मैं राष्ट्रपति चुनाव 2022 में उनकी जीत पर #DroupadiMurmu को दिल से बधाई देता हूं। मुझे और लगभग हर भारतीय को उम्मीद है कि 15 वें राष्ट्रपति के रूप में वह बिना किसी डर या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करेंगी। मैं देशवासियों के साथ उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।

लगा बधाईयों का तांता

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर एनडीए की उम्मीदवार #DroupadiMurmu को बधाई दी। 

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने द्रौपदी मुर्मू को जीत की बधाई दी और कहा कि सरल और विनम्र स्वभाव वाले एक आदिवासी को भारत का राष्ट्रपति बनने का सम्मान मिल रहा है. द्रौपदी मुर्मू के चुनाव ने लोकतंत्र और संविधान में जनता के विश्वास को और मजबूत किया है.

द्रौपदी मुर्मू से पीएम मोदी ने खुद मिलकर, भारत के 15वें राष्ट्रपति चुने जाने पर दी बधाई।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश की नई राष्ट्रपति #DroupadiMurmu को उनकी जीत पर बधाई दी।

मेघालय के सीएम कोनराड संगमा ने कहा कि यह एक महान और ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि राष्ट्रपति का पद अब एक आदिवासी महिला के पास होगा। यह कुछ ऐसा है जो कई साल पहले अकल्पनीय था... मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने हमारे राष्ट्रपति #द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया।

 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने #DroupadiMurmu को भारत का राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि, ''आज वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए चुनी गई हैं। यह भारत की विशेषता है। मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं..''


सोनिया गांधी ED के सामने आज होंगी पेश, कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता करेंगे विरोध प्रदर्शन

नेशनल हेराल्ड मनी लांड्रिंग केस में आज प्रवर्तन निदेशालय सोनिया गांधी से पूछताछ करेगी। इससे पहले ईडी राहुल गांधी से करीब 50 घंटे पूछताछ कर चुकी है। आपको बता दें कि कांग्रेस नेताओं पर घाटे में चल रहे अखबार नेशनल हेराल्ड को धोखाधड़ी और पैसे की हेराफेरी के जरिए हड़पने का आरोप है। सोनिया गांधी आज 12बजे से पहले ईडियट तक पहुंचेगी, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी। सेहत को देखते हुए ईडी ने सोनिया गांधी को विशेष छूट दिए है।



नई दिल्लीः नेशनल हेराल्ड मनी लांड्रिंग केस में आज प्रवर्तन निदेशालय सोनिया गांधी से पूछताछ करेगी। इससे पहले ईडी राहुल गांधी से करीब 50 घंटे पूछताछ कर चुकी है। आपको बता दें कि कांग्रेस नेताओं पर घाटे में चल रहे अखबार नेशनल हेराल्ड को धोखाधड़ी और पैसे की हेराफेरी के जरिए हड़पने का आरोप है। सोनिया गांधी आज 12बजे से पहले ईडियट तक पहुंचेगी, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी। सेहत को देखते हुए ईडी ने सोनिया गांधी को विशेष छूट दिए है। सोनिया गांधी को जरूरी दवाइयों के लिए समय-समय पर ब्रेक दिया जाएगा। 

क्या है मामला 

मामला सन 2012 का है। 1 नवंबर 2012 को बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने केस दर्ज करवाया था, जिसके बाद 26 जून 2014 को सोनिया गांधी राहुल गांधी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया गया 1 अगस्त 2014 को मामला प्रवर्तन निदेशालय में दर्ज किया गया। जिसके बाद 19 दिसंबर 2015 को दिल्ली के पटियाला हाउस से सभी आरोपियों को जमानत मिली। साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए कार्यवाही रद्द करने की मांग से इंकार कर दिया। 2 जून 2022 को सोनिया गांधी से पूछताछ के लिए समन जारी किया गया, जिस पर गांधी ने तबीयत खराब होने पर सुनवाई कुछ दिन टालने की मांग करें जिसके बाद आज सोनिया गांधी ईडी के दफ्तर में पेश हो रही है। इससे पहले राहुल गांधी से करीब 50 घंटे की पूछताछ की जा चुकी है। 

विरोध प्रदर्शन की तैयारी

सोनिया गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर नाराज कांग्रेसी नेता और कांग्रेसी कार्यकर्ता आज तक पर उतरेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ता वा नेता संसद भवन के बाहर गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन करेंगे जिसके बाद नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस मुख्यालय से एड़ी दफ्तर की ओर मार्च भी करेंगे।


विधायकों की अयोग्यता मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई जोरदार बहस,1 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता और एकनाथ शिंदे के शपथ ग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज जोरदार बहस देखने को मिली। उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जिस तरह से सरकार को गिराया गया था, वह लोकतंत्र का मजाक था। उन्होंने कहा कि अयोग्यता की याचिका लंबित होने के बाद भी शपथ ग्रहण का आयोजन किया गया था।


नई दिल्लीः शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता और एकनाथ शिंदे के शपथ ग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज जोरदार बहस देखने को मिली। उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जिस तरह से सरकार को गिराया गया था, वह लोकतंत्र का मजाक था। उन्होंने कहा कि अयोग्यता की याचिका लंबित होने के बाद भी शपथ ग्रहण का आयोजन किया गया था।

 कपिल सिब्बल ने कहा कि शपथग्रहण के लिए याचिका पर फैसला होने तक इंतजार किया जा सकता था, लेकिन यह जल्दी में करा दिया गया। उद्धव गुट की ओर से दलील देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि इस मामले को स्वीकार कर लिया गया तो फिर देश की हर चुनी हुई सरकार बेदखल कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार गैरकानूनी है और इसे बने रहने का कोई हक नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आज कोई भी आदेश देने से इनकार करते हुए 1 अगस्त को अगली सुनवाई का फैसला लिया है। अदालत ने सभी पक्षों को एक सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा है।

उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से राज्य सरकारों को बेदखल किया जाता है तो फिर यह लोकतंत्र पर खतरा है। सिब्बल ने कहा कि अदालत जब तक कोई फैसला नहीं देती, तब तक रुकने की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि जो हो रहा है, वह लोकतांत्रिक संस्थानों का मजाक बनाने जैसा है। वहीं उद्धव ठाकरे का ही पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विधायकों की अयोग्यता के मामले पर फैसले के लिए स्पीकर को अधिकार नहीं देना चाहिए। उद्धव ठाकरे गुट की दलीलों पर जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे समूह ने कहा कि यह मामला दलबदल जैसा नहीं है। यह तो पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र का मसला है।

यही नहीं हरीश साल्वे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने वाली अथॉरिटी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी सीएम को उसकी ही पार्टी के लोग बेदखल कर दें तो फिर उसमें लोकतंत्र के खत्म होने जैसी बात नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि ये संवैधानिक मामले हैं, जिनका समाधान होना जरूरी है।


एनडीए उपराष्ट्रपति उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने किया नामांकन, पीएम मोदी अमित शाह, नितिन गडकरी सहित जेपी नड्डा रहे मौजूद

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने आज नामांकन दाखिल कर दिया है। इस दौरान पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहे। गौरतलब है कि एनडीए की तरफ से जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं, वहीं विपक्ष ने मार्गरेट अल्वा के नाम का इस चुनाव के लिए ऐलान किया है।

नई दिल्लीः एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने आज नामांकन दाखिल कर दिया है। इस दौरान पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहे। गौरतलब है कि एनडीए की तरफ से जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं, वहीं विपक्ष ने मार्गरेट अल्वा के नाम का इस चुनाव के लिए ऐलान किया है। बता दें कि जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं। धनखड़ जाट समुदाय से हैं और उनके गृह राज्य राजस्थान में वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में आते हैं।


टीएमसी के विरोधी हैं धनखड़

जुलाई 2019 में राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के बाद से धनखड़ का राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के साथ लगातार टकराव होता रहा है। धनखड़ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच में रिश्ते कभी भी सामान्य नहीं रहे और कई मौकों पर दोनों के बीच का टकराव साफ नजर आया। कई मौकों पर तो ममता बनर्जी ने प्रोटोकॉल की भी अनदेखी की और उनका यह आचरण सियासी जगत में अक्सर चर्चा का विषय रहा।

उपराष्ट्रपति चुनाव शेड्यूल

नमांकन की आखिरी तिथि - 19 जुलाई
मतदान की तिथि - 6 अगस्त
मतगणना की तिथि - 11 अगस्त


दलितों में भी स्वार्थी की कमी नहीं, मेरे रिश्‍तेदार भी मतलबी, ट्विटर पर फूटा मायावती का गुस्‍सा

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 'भीतरघातियों' पर हमला करते हुए रविवार को एक के बाद एक 3 ट्वीट किए। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए लिखा कि जातिवादी ताकतें बसपा को कमजोर करने के लिए पर्दे के पीछे से साजिशें रच रही है। मायावती ने लिखा कि बसपा को कमजोर करने के लिए कई संगठन बनाए गए जो केवल कागजी हैं इनका असली मकसद केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना हैं।



नई दिल्लीः  उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 'भीतरघातियों' पर हमला करते हुए रविवार को एक के बाद एक 3 ट्वीट किए। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए लिखा कि जातिवादी ताकतें बसपा को कमजोर करने के लिए पर्दे के पीछे से साजिशें रच रही है। मायावती ने लिखा कि बसपा को कमजोर करने के लिए कई संगठन बनाए गए जो केवल कागजी हैं इनका असली मकसद केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना हैं। विरोधियों पर हमले के साथ-साथ उन्होंने अपने भाई आनंद की तारीफ भी की। 

मायावती ने लिखा-'दलित व उपेक्षितों में भी स्वार्थी लोगों की कमी नहीं है, जिसमें मेरे कुछ रिश्तेदार भी हैं व एक ऐसा है जो मेरी गैरहाजिरी में मेरे दिल्ली निवास पर CBI छापे के बाद परिवार सहित चला गया, तबसे ही छोटा भाई आनन्द सरकारी नौकरी छोड़कर परिवार के साथ मेरी सेवा और पार्टी कार्य में लगा है।'

बामसेफ और डीएस-4 को बताया कागजी संगठन 

मायावती ने बामसेफ और डीएस-4 को कागजी संगठन बताया। उन्‍होंने लिखा- 'इन स्वार्थी किस्म के लोगों ने खासकर बामसेफ व डीएस4 आदि के नाम पर अनेकों प्रकार के कागजी संगठन बनाए हुए हैं जो सामाजिक चेतना पैदा करने की आड़ में अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं और अब यही कार्य बीएसपी में कुछ निष्क्रिय हुए लोग भी दूसरे तरीके से कर रहे हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।'


तीस्ता सीतलवाड़ मामले में एसआईटी के हलफनामे के बाद, भाजपा-कॉग्रेस में घमासान

तीस्ता सीतलवाड़ पर एसआईटी के दावे के बाद कांग्रेस और भाजपा में घमासान शुरू हो गया है। अहमद पटेल पर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि, दिव्यांग अनीता पर लगाए गए मनगढ़ंत और शरारतपूर्ण आरोपों का पार्टी पूर्ण रूप से खंडन करती है। यह सब प्रधानमंत्री की सुनियोजित राजनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह गुजरात में हुए दंगों के पाप से मुक्त होना चाहते हैं।


नई दिल्लीः तीस्ता सीतलवाड़ पर एसआईटी के दावे के बाद कांग्रेस और भाजपा में घमासान शुरू हो गया है। अहमद पटेल पर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि, दिव्यांग अनीता पर लगाए गए मनगढ़ंत और शरारतपूर्ण आरोपों का पार्टी पूर्ण रूप से खंडन करती है। यह सब प्रधानमंत्री की सुनियोजित राजनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह गुजरात में हुए दंगों के पाप से मुक्त होना चाहते हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि गुजरात में नरसंहार को रोकने में उनकी अनिच्छा और अक्षमता के कारण ही भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उन्हें राजधर्म याद दिलाने के लिए बाध्य होना पड़ा था। प्रधान मंत्री का राजनीतिक प्रतिशोध तंत्र स्पष्ट रूप से उन राजनीतिक विरोधियों को भी नहीं बख्श रहा, जो अब इस दुनिया में भी नहीं हैं।

जयराम रमेश ने BJP के आरोपों का खंडन किया

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आगे कहा कि एसआईटी अपने राजनैतिक आका की धुन पर नाच रही है और उनके इशारे पर यह उठक-बैठक करती रहेगी। हम जानते हैं कि कैसे एक पूर्व एसआईटी प्रमुख को मुख्यमंत्री को 'क्लीन चिट' देने के एवज़ में एक राजनयिक उत्तरदायित्व के साथ पुरस्कृत किया गया था।
 कोर्ट में चल रहे मामलों में प्रेस के माध्यम से कठपुतली एजेंसियों द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों को तथाकथित रुप से निष्कर्षों के रूप में प्रसारित और प्रचारित करना मोदी-शाह की जोड़ी का जाना-माना तरीका रहा है। ऐसे दिवंगत व्यक्ति को कलंकित किया जा रहा है जो अपने ऊपर लगाए गए ऐसे बेशर्मी भरे झूठे आरोपों का खंडन करने के लिए अब इस दुनिया में नहीं हैं।

तीस्ता सीतलवाड़ पर SIT के दावे

तीस्ता सीतलवाड़ (Teesta Setalvad) द्वारा अहमदाबाद सत्र न्यायालय में दायर जमानत अर्जी के खिलाफ एसआईटी (SIT) द्वारा दायर हलफनामे में सनसनीखेज खुलासा है। हलफनामे में तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार से पैसे लेने का जिक्र है। एसआईटी ने दावा किया कि उसने तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार तीस्ता सीतलवाड़ से दो बार लाखों रुपये स्वीकार किए थे, जिन्होंने सर्किट हाउस में पैसे स्वीकार करने और देखने का भी दावा किया था। यह भी दावा किया है कि गुजरात और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री (Gujarat CM) को बदनाम करने का प्रयास किया गया था।

 


औरंगजेब को ले कर महाराष्ट्र की राजनीति तेज़, संजय रावत का तंज बोले औरंगजेब आपका रिश्तेदार कैसे बना

संजय राउत ने अपने बयान में कहा की असली सरकार तो देवेंद्र फडणवीस ही चला रहे है, एकनाथ शिंदे के हाथ में तो कुछ नही है, आगे उन्होंने कहा की बुलेट ट्रेन जैसे फैसले तो समझा जा सकता है पर ये फैसला गलत है, इस सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार लटक रही है।

नई दिल्ली : औरंगाबाद शहर के नाम को लेकर राजनीति अब और तेज हो गई है, दरअसल उद्धव ठाकरे की सरकार ने अपनी कार्यकाल में बीते दिनों औरंगाबाद का नाम बदल कर संभाजी नगर कर दिया था, जिस फैसले को पलटकर वर्तमान की शिंदे सरकार ने फिर से औरंगाबाद कर दिया है।
मौजूदा सरकार ने इस पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि, उसके लिए प्रक्रिया का ठीक ढंग से पालन नहीं किया गया था और एक बार फिर से इसे कैबिनेट में पास करवाना होगा। वही उद्धव ठाकरे गुट के संजय राउत ने पर हमला करते हुए सवालिया अंदाज में कहा की "औरंगजेब आपका रिश्तेदार कैसे बन गया"

बताते चले की संजय राउत विदर्भ के दो दिन के दौरे पर है इसी बीच उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा की "हिंदुत्व के मुद्दे पर सरकार बनाने वाले लोगो ने ऐसा फैसला किया" उन्होंने आगे कहा की वर्तमान शिंदे सरकार महाराष्ट्र विरोधी है इसीलिए उन्होंने औरंगाबाद और उस्मानाबाद के नाम बदलने के फैसलों को पलट दिया। हाल ही में नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलने का फैसला भी स्थगित है जिसे की हिंदू नेता डी बी पाटिल के नाम पर रखा जाना था।

देवद्र फडणवीस पर भी किया सवाल

संजय राउत ने अपने बयान में कहा की असली सरकार तो देवेंद्र फडणवीस ही चला रहे है, एकनाथ शिंदे के हाथ में तो कुछ नही है, आगे उन्होंने  कहा की बुलेट ट्रेन जैसे फैसले तो समझा जा सकता है पर ये फैसला गलत है, इस सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार लटक रही है।

खुद पर हमला किए जाने पर भी जवाब दिया

उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट की ओर से अपने पर हमला किए जाने पर भी जवाब देते हुए कहा की " क्या मैं शिवसेना का मालिक हूं, शिवसेना बाला साहिब ठाकरे की है, बालासाहब ठाकरे के लिए लाखो शिवसैनिक अपनी जान देने को तैयार है तथा, अगर बालासाहब ठाकरे की शिवसेना के साथ रहना शिवसेना का अंत माना जाता है तो इसकी परिभाषा हमे बदलनी होगी।

शिवसेना के वापस सत्ता में आने का दिया आश्वासन

आगे मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा की शिवसेना एक बार फिर से सत्ता में वापस आयेगी, जो शिवसेना को खत्म करना चाहते थे वो लोग भाजपा के साथ गए है।

संसद में शब्दो की मर्यादा को लेकर भी किया तंज

उन्होंने कहा की संसद में हमे हाथ पैर बांधकर, चेहरे पर गोंद लगाना होता हा, उपमुख्यमंत्री टिकट देते है, माइक खींचते है, शर्ट खींचते है ऐसा लगता है मानो यह सरकार एकनाथ शिंदे की नही देवेंद्र फडणवीस की है और वही असली मुख्यमंत्री है। आगे उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह ठाकरे को भी घेरा और कहा को " वह ठाकरे सरकार के कार्यकाल में संविधान और कानून की बात करते थे अब देखना होगा कि क्या उन्होंने अब इन मुद्दों को समुंद्र में फेंक दिया है।


रुपए की कीमतों में गिरावट के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का सरकार पर तंज

रुपए की कीमतों में गुरुवार को भरी गिरावट दर्ज की गई जिसके बाद रुपया 80 रुपए के आंकड़े को पार कर गया

नई दिल्ली : रुपए की कीमतों में गुरुवार को भरी गिरावट दर्ज की गई जिसके बाद रुपया 80 रुपए के आंकड़े को पार कर गया।

रणदीप सुरजेवाला ने किया सरकार का घेराव 

एक ओर जहां रुपए की कीमतें गिरी वही कांग्रेस को मुद्दा हाथ लग गया और कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर व्यंग करते हुए कहा की रुपया मार्गदर्शक मंडल को पार कर गया।
दरअसल कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा " अब रुपया मार्गदर्शक मंडल की उम्र को भी पार कर गया है, आगे और यह कितना गिरेगा और कब तक गिरेगा, सरकार की विश्वसनीयता और कितनी गिरेगी वाह मोदी जी वाह"।
बताते चले की मार्गदर्शक मंडल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक समूह है।

राहुल गांधी ने भी किया तंज

इसी को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी तंज करते हुए कहा की "रुपए का 80 रुपए पर पहुंचना अमृतकाल है" , उन्होंने अपने ट्वीट में कहा की "रुपए 40 पर स्फूर्तिदायक, 50 पर भारत संकट में, 70 पर आत्मनिर्भर भारत और 80 पर अमृतलाल"
मार्केट के आंकड़ों के अनुसार अमरीकी मुद्रा के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार को रुपए में 18 पैसे की गिरावट के बाद रुपया 80 रुपए प्रति डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
इस महीने लगातार 15वे महीने मुद्रास्फीति 2 अंक में रही है, विशेषज्ञों की माने तो इसका कारण देश का चालू खाते का कैड (घाटा) बढ़ने की आशंका और विदेशी कोषों की निकासी को बताया जा रहा है जिसके कारण रूपए अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।


अशोक स्तंभ को लेकर विपक्ष के सवालों पर स्मृति ईरानी ने किया पलटवार

नए संसद भवन में लगाए गए राष्ट्रीय चिह्न को लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने सवाल खड़े करते हुए सरकार पर हमला बोला है। वहीं अब सत्ता पक्ष की तरफ से भी पलटवार किया गया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और हरदीप सिंह पुरी ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया है।


नई दिल्ली: नए संसद भवन में लगाए गए राष्ट्रीय चिह्न को लेकर कांग्रेस (Congress) समेत तमाम विपक्षी दलों ने सवाल खड़े करते हुए सरकार पर हमला बोला है। वहीं अब सत्ता पक्ष की तरफ से भी पलटवार किया गया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) और हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जिन्होंने खून से होली खेली है, बीजेपी के वर्करों को मारा है, जो जिहाद के नारा देते हैं, ये नारा संवैधानिक पद पर बैठी महिला का है। जिनकी सांसद ने काली माता का अपमान किया है. जिन लोगों ने संविधान को अपने पैरों से कुचला है, वो आज अशोक स्तंभ से डरते हैं। जो लोग मां काली का अपमान करते हैं वो राष्ट्रीय प्रतीक का भी अपमान करते हैं, हैरानी की बात नहीं है।

सरकार की तरफ से दिया गया जवाब

वहीं केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी विपक्ष को जवाब दिया है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि, "मूल सारनाथ प्रतीक 1.6 मीटर ऊंचा है जबकि संसद के नए भवन के शीर्ष पर स्थित विशाल प्रतीक 6.5 मीटर ऊंचाई का है। दो संरचनाओं की तुलना करते समय कोण, ऊंचाई और पैमाने के प्रभाव की सराहना करने की आवश्यकता है। यदि सारनाथ के प्रतीक को बढ़ाया जाए या संसद के नए भवन के प्रतीक को उस आकार में छोटा कर दिया जाए तो कोई अंतर नहीं होगा।"

विपक्ष ने उठाए सवाल

हैदराबाद के सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम द्वारा अनावरण करने को संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन बताया था। उन्होंने कहा कि, "संविधान संसद, सरकार और न्यायपालिका की शक्तियों को अलग करता है। सरकार के प्रमुख के रूप में पीएम को नए संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण नहीं करना चाहिए था।"

वहीं कांग्रेस (Congress) समेत तमाम विरोधी दलों ने बीजेपी (BJP) पर राष्ट्रीय चिह्न को बदलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के राज्य सभा सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि, "सारनाथ में अशोक के स्तंभ पर शेरों के चरित्र और प्रकृति को पूरी तरह से बदलना भारत के राष्ट्रीय चिह्न को बदलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के राज्य सभा सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि, "सारनाथ में अशोक के स्तंभ पर शेरों के चरित्र और प्रकृति को पूरी तरह से बदलना भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान है।

 टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने ट्विटर पर नए और पुराने अशोक स्‍तंभ की तस्‍वीर शेयर की। फिर उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि, "सच कहा जाए, सत्यमेव जयते से सिंघमेव जयते में बदलाव पूरा हुआ है।" इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट कर लिखा कि, "क्षमा करें, मेरा मतलब था कि सत्यमेव जयते से संघीमेव जयते में बदलाव पूरा हो गया है। शेरों को शामिल न करें।"


कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी के बागी तेवर अग्निपथ से जुड़े पत्र पर नहीं किए हस्ताक्षर

हाल ही में जारी की गई अग्निपथ योजना में किसी को खामियां और किसी को फायदे नजर आ रहे है ।क्रिया प्रतिक्रिया के दौर में कांग्रेसी सांसद मनोज तिवारी ने अग्निपथ योजना की तारीफ की थी और उसे देश के भविष्य के लिए उठाया गया एक अहम कदम बताया था ।

नई दिल्ली : हाल ही में जारी की गई अग्निपथ योजना में किसी को खामियां और किसी को फायदे नजर आ रहे है ।क्रिया प्रतिक्रिया के दौर में कांग्रेसी सांसद मनोज तिवारी ने अग्निपथ योजना की तारीफ की थी और उसे देश के भविष्य के लिए उठाया गया एक अहम कदम बताया था ।
इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने एक पत्र जारी किया गया था जिसमें की अग्निपथ योजना का विरोध किया गया था, इस पर सभी समिति के हस्ताक्षर तलब थे, जबकि मनोज तिवारी ने उस पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया, मनोज तिवारी की इस प्रतिक्रिया की कांग्रेस पार्टी को आशा नहीं थी।

 बाकी सांसदों ने की थी तुरंत वापसी की मांग

सोमवार को संसद के मानसून मानसून सत्र से पहले जब केंद्रीय रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह ने समिति के सदस्यों को सैन्य भर्ती पर लाई गई इस योजना जिसका नाम अग्नीपथ योजना है, के बारे में बताया था उसी समय विपक्ष के काफी सांसदों ने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की था। बताते चलें कि मनोज तिवारी ने इससे पहले भी अग्नीपथ योजना पर अपनी पूर्णता सहमति दर्ज नहीं कराई है।


शिवसेना के 16 बागी विधायकों का होगा निलंबन! आज सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक घमासान का अंत आज हो सकता है। आपको बता दें की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा। यह याचिका शिवसेना प्रमुख पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की तरफ से दायर की गई है। इस याचिका में 16 बागी विधायकों (MLAs) को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।


नई दिल्लीः महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक घमासान का अंत आज हो सकता है। आपको बता दें की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा। यह याचिका शिवसेना प्रमुख पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की तरफ से दायर की गई है। इस याचिका में 16 बागी विधायकों (MLAs) को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।

आपको बता दें कि याचिका में जिन 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग दायर की गई है उनमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे का नाम भी शामिल हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट शिदें गुट के खिलाफ फैसला दिया तो राज्य में एक बार फिर सियासी पेंच फंस सकता है। शिंदे बतौर सीएम, और देवेंद्र फडणवीस बतौर डिप्टी सीएम शपथ ले चुके हैं लेकिन इस फैसले के इंतजार के चलते अबतक महाराष्ट्र कैबिनेट विस्तार नहीं हो सका है। 

याचिका में एकनाथ शिंदे, भरतशेट गोगावले, संदिपानराव भुमरे, अब्दुल सत्तार, संजय शिरसाट, यामिनी जाधव, अनिल बाबर, बालाजी किणीकर, तानाजी सावंत, प्रकाश सुर्वे, महेश शिंदे, लता सोनवणे, चिमणराव पाटिल, रमेश बोरनारे, संजय रायमूलकर और बालाजी कल्याणकर, को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।

इस याचिका के साथ ही शिवसेना की ओर से दायर राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका पर भी फैसला आ सकता है। 30 जून को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एकनाथ शिंदे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था।


महाराष्ट्र की सियासत के बाद अब गोवा कांग्रेस पर छाए काले बादल, 9 विधायक भाजपा में हो सकतें हैं शामिल

महाराष्ट्र के बाद अब गोवा में सियासी हलचल शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि यह कांग्रेस पार्टी टूटने के कगार पर आ गई है। कुल 11 विधायकों में से 9 विधायक बगावत पर उतरते दिख रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नौ विधायक जल्दी कांग्रेस को छोड़ बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।


नई दिल्ली: महाराष्ट्र के बाद अब गोवा में सियासी हलचल शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि यह कांग्रेस पार्टी टूटने के कगार पर आ गई है। कुल 11 विधायकों में से 9 विधायक बगावत पर उतरते दिख रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नौ विधायक जल्दी कांग्रेस को छोड़ बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव इस बगावत को रोकने और कांग्रेस की इज्जत को बचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं, हालांकि उनकी कोशिश है नाकाम होती दिख रही है। 

आपको बता दें कि गोवा में कांग्रेस के महेश 11 विधायक हैं। अगर ऐसे में नौ विधायक भाजपा का दामन थाम लेते हैं तो उनके खिलाफ कोई एक्शन भी नहीं लिया जा सकता क्योंकि उनकी संख्या कुल विधायकों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। 

पूर्व सीएम दिगंबर कामत भी बगावत में शामिल

बताया जा रहा है कि बगावत करने वालों में पूर्व सीएम दिगंबर कामत भी शामिल है। जो अपने सभी 9 साथियों के साथ भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिगंबर कामत, माइकल लोबो, यूरो अलेमाओ संकल्प अमोनकार, डिलाईला लोबो, एलेक्स सिक्केरो के साथ केदार नायक और राजेश फलदेसाई का नाम भी लिस्ट में शामिल है।

हालांकि बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर वरिष्ठ नेता दिगंबर कामत ने कहा कि यह सब सिर्फ अफवाह हैं कांग्रेस प्रभारी दिनेश गुंडू राव गोवा में मौजूद है और वह सभी विधायकों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। 

वफादारी की खिलाई थी कसम

इससे पहले सोमवार को शुरू होने वाले गोवा विधानसभा सत्र को लेकर रणनीति बनाने के लिए कांग्रेस दल के प्रभारी दिनेश गुंडू राव ने शनिवार को विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी 11 विधायक शामिल हुए थे। रोचक बात तो यह है कि कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी जीते हुए 11 विधायकों को अलग-अलग धर्म स्थलों में ले जाकर पार्टी से वफादारी करने की कसम खिलाई थी, लेकिन लगता है कि कांग्रेस विधायक उस खाली हुई कसम को अब हजम करने की तैयारी में है।


14-15 जुलाई को RSS का चिंतन शिविर, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बैठक

आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 14 और 15 जुलाई को चिंतन शिविर का आयोजन किया है। 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसको लेकर यह दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित किया गया है।


नई दिल्ली: आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 14 और 15 जुलाई को चिंतन शिविर का आयोजन किया है। 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसको लेकर यह दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित किया गया है। शिवर में आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं के साथ साथ राज्य के मुख्यमंत्री बसवराजा बोम्मई के साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार कतील व अन्य भाजपा नेता भी शामिल होंगे। चिंतन शिविर के मद्देनजर 30 जून को आर एस एस प्रमुख मुकुंद और सुधीर ने बीजेपी अध्यक्ष से बातचीत की थी। करीब 45 मिनट हुई इस चर्चा में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। 

बीजेपी की जीत को लेकर चिंतित आरएसएस

साल 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाजपा की जीत को लेकर चिंतित है। हाल ही में हिजाब विवाद और हलाला के मुद्दों को देखते हुए आर एस एस आगमी चुनाव में बीजेपी की जीत को लेकर चिंतन शिविर में बातचीत करेगी। और यह सुनिश्चित करेगी की किस तरह भाजपा को अधिक से अधिक मतदान प्राप्त हो। इस शिविर में उन विपक्षी दलों को लेकर भी चिंतन किया जाएगा जो लगातार आरएसएस और बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं। दरअसल बीजेपी के नेता कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया को करारा जवाब देने में असमर्थ साबित हुए हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार चिंतन शिविर में भारतीय जनता पार्टी के पुनः सत्ता में आने और सरकार के रोल को लेकर भी चर्चा होगी।

उदयपुर घटना पर आरएसएस का बयान

आर एस एस की ओर से बयान में कहा गया कि समाज हमेशा ऐसी घटनाओं की निंदा करता है। उदयपुर में जो कुछ भी हुआ वह बेहद निंदनीय है और हम मुस्लिम समुदाय से भी इस तरह के कृत्यों की निंदा करने की उम्मीद रखते हैं। बुद्धिजीवियों ने इसकी निंदा की है लेकिन पूरे समाज को इसके खिलाफ बोलना चाहिए। यह घटनाएं हमारे देश हमारे समाज को दूषित करती हैं।


महाराष्ट्र कैबिनेट विस्तार को लेकर सीएम शिंदे ने कही बड़ी बात, बागी विधायकों को बताया क्रांतिकारी

महाराष्ट्र की सियासी खींचतान के बाद अब मंत्रीमंडल विस्तार और विभाग के बंटवारे पर बीजेपी और शिंदे गुट में बातचीत शुरू हो गई है। शुक्रवार देर रात दिल्ली पहुंचे महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की, इसके बाद शनिवार की सुबह उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह से मुलाकात की।


नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासी खींचतान के बाद अब मंत्रीमंडल विस्तार और विभाग के बंटवारे पर बीजेपी और शिंदे गुट में बातचीत शुरू हो गई है। शुक्रवार देर रात दिल्ली पहुंचे महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की, इसके बाद शनिवार की सुबह उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह से मुलाकात की। पार्टी के जानकार लोगों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच कैबिनेट विस्तार पर बातचीत हुई लेकिन दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिंदे और फडणवीस दोनों ने विस्तार पर चर्चा को लेकर चल रही बातों को नकारते हुए कहा कि यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी अभी हमने किसी भी पोर्टफोलियो को सांझा करने की चर्चा नहीं की है।

जानकारी के मुताबिक शिंदे और देवेंद्र फडणवीस जल्द ही सोलापुर जाएंगे वहां से लौटने के बाद विस्तार योजना को अंतिम रूप देंगे। शिंदे ने यह भी कहा कि फडणवीस और उनके जनरल तुषार मेहता के साथ हुई बैठक में ज्यादा कुछ बातचीत नहीं हुई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना द्वारा शिंदे सहित 16 विधायकों को आयोग नोटिस जारी करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा।

मध्यावधि चुनाव की भविष्यवाणी सिर्फ मजाक- शिंदे

शिंदे ने ठाकरे और शरद पवार के मध्यावधि चुनाव को लेकर मजाक बनाते हुए कहा कि चुनाव संविधान के अनुसार होते हैं। हमें मध्यावधि चुनाव में जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि हमारे पास 164 विधायक है और लोकतंत्र में बहुमत मायने रखता है। जो हमारे पास है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमारी सरकार स्थित है और शेष ढाई साल के कार्यकाल को पूरा करने के बाद हम आगे फिर से अपनी सरकार बनाएंगे।

बाला साहब के कदमों पर चल रहे हैं

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बागी विधायकों को बचाते हुए कहा कि शिवसेना के विधायकों ने बगावत कर दी या पैसे के लालच में वह भाजपा में शामिल नहीं हुए यह बगावत नहीं बल्कि एक क्रांति है। शिवसेना से आए हुए विधायक बाला साहब ठाकरे के के कदमों पर चल रहे हैं। बालासाहेब ठाकरे ने खुद कहा था कि अगर उन्हें कांग्रेस या राकांपा के साथ गठबंधन करना पड़ा तो वह पार्टी बंद कर देंगे। मगर सत्ता के लालची नेताओं ने उनके साथ गठबंधन किया और बाला साहब ठाकरे की भावनाओं का निरादर किया है।


इलाके की समस्या बताने पर भड़क गए AAP विधायक, गुस्से में शख्स के सिर में मार दी ईंट

राजधानी दिल्ली में एक और विधायक पर गंभीर आरोप लगे हैं और मुकदमा दर्ज हुआ है। दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक पर मारपीट का आरोप लगा है। पीड़ित शख्स ने आप विधायक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शख्स पर ईंट से हमला किया है।

नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली में एक और विधायक पर गंभीर आरोप लगे हैं और मुकदमा दर्ज हुआ है। दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक पर मारपीट का आरोप लगा है। पीड़ित शख्स ने आप विधायक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शख्स पर ईंट से हमला किया है। अशोक विहार थाना पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।


आप विधायक पर मारपीट का आरोप

जानकारी के मुताबिक, मॉडल टाउन विधानसभा से एमएलए अखिलेश पति त्रिपाठी (Akhilesh Pati Tripathi) का पर ये मारपीट का आरोप लगा है। इलाके के ही रहने वाले गुड्डू हलवाई नाम के एक व्यक्ति का आरोप है कि विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी द्वारा उनके साथ मारपीट की गई ,जानलेवा हमला किया गया है। इसी मामले में पुलिस ने विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी पर संबंधित धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कर दिया। इस मामले में विधायक अखिलेश पति का कहना है कि यह सब राजनीतिक प्रपंच है, किसी भी तरह का कोई हमला उसकी तरफ से नहीं किया गया।

घायल शख्स को कराया अस्पताल में भर्ती

दिल्ली पुलिस ने टेक्स्ट मैसेज के जरिए इस झगड़े की पुष्टि की। दिल्ली पुलिस ने बताया कि 6 जुलाई 2022 को शाम के करीब 4:30 बजे पीसीआर कॉल के द्वारा सूचना मिली थी। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। वहां पर इंजर्ड शख्स गुड्डू हलवाई और एक मुकेश बाबू मिले, जिन्हें पुलिस बाबू जगजीवन राम अस्पताल में इलाज के लिए लेकर पहुंची। घायल गुड्डू हलवाई ने पुलिस को बयान देते हुए बताया कि वह जेलर वाला बाग के पास एक कार्यक्रम में कैटरिंग का काम कर रहा था।

ईंट के टुकड़े से किया हमला

शख्स ने बताया कि इसी दौरान वो स्थानीय विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी से मिला और सीवरेज समस्या की शिकायत करने लगा। इससे विधायक भड़क गए और उसके ऊपर ईंट का टुकड़ा मारा। इसी बीच बचाव में गुड्डू के रिलेटिव महेश बाबू भी आए, वे दोनों घायल हो गए और विधायक पर इन्होंने आरोप लगाया। पुलिस ने बताया कि गुड्डू के माथे पर लेफ्ट साइड में चोट है और मुकेश बाबू के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं मिला है। पुलिस ने आईपीसी की 323 और 341 की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


नया भारत स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत होना चाहिए : PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा, "आंध्र प्रदेश के लंबसिंगी में 'अल्लूरी सीताराम राजू मेमोरियल जन-जातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय' भी बनाया जा रहा है। पिछले साल ही देश ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती को 'राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने की शुरूआत भी की है। विदेशी हुकूमत ने हमारे आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार किए, उनकी संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास किए।"

भीमावरम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को यहां कहा कि नया भारत स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है तो यह सभी देशवासियों की जिम्मेदारी है कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करें। 

उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती समारोह के शुभारंभ के लिए यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "हमारा नया भारत उनके सपनों का भारत होना चाहिए। एक ऐसा भारत जिसमें गरीबों, किसानों, मजदूरों, पिछड़े, आदिवासियों को समान अवसर मिले।"

प्रधानमंत्री ने सीताराम राजू की 30 फीट की कांस्य प्रतिमा के अनावरण के साथ साल भर चलने वाले समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन, मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी, केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी, पूर्व केंद्रीय मंत्री और तेलुगु सुपरस्टार के. चिरंजीवी उपस्थित रहे।

सीताराम राजू को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि महान आदिवासी सेनानी ने 'दम है तो रोक लो' के नारे के साथ अंग्रेजों को चुनौती दी। उन्होंने आगे कहा, "आज देश भी अपने सामने खड़ी चुनौतियों से, कठिनाइयों से इसी साहस के साथ 130 करोड़ देशवासी एकता के साथ, सामथ्र्य के साथ हर चुनौती को कह रहे हैं। दम है तो हमें रोक लो।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "जिस धरती की विरासत इतनी महान हो मैं आज उस धरती को नमन करके अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं। आज एक ओर देश आजादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो साथ ही अल्लूरी सीताराम राजू गारू की 125वीं जयंती का अवसर भी है। 

संयोग से, इसी समय देश की आजादी के लिए हुई 'रम्पा क्रांति' के 100 साल भी पूरे हो रहे हैं। मैं इस ऐतिहासिक अवसर पर 'मण्यम वीरुडु' अल्लूरी सीताराम राजू के चरणों में नमन करते हुये पूरे देश की तरफ से उन्हें आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"

उन्होंने कहा, "आज उनके परिजन भी हमें आशीर्वाद देने के लिए आये, यह हमारा सौभाग्य है। उस महान परंपरा के परिवार के चरणरज लेने का हम सबको सौभाग्य मिला है। मैं आंध्र की इस धरती की महान आदिवासी परंपरा को, इस परंपरा से जन्मे सभी महान क्रांतिकारियों और बलिदानियों को भी आदरपूर्वक नमन करता हूं।"

पीएम मोदी ने कहा, "अल्लूरी सीताराम राजू गारू की 125वीं जन्म-जयंती और रम्पा क्रांति की 100वीं वर्षगांठ को पूरे मनाया जाएगा। पंडरंगी में उनके जन्मस्थान का जीर्णोद्धार, चिंतापल्ली थाने का जीर्णोद्धार, मोगल्लू में अल्लूरी ध्यान मंदिर का निर्माण, ये कार्य हमारी अमृत भावना के प्रतीक हैं। मैं इन सभी प्रयासों के लिए और इस वार्षिक उत्सव के लिए आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम केवल कुछ वर्षों, कुछ क्षेत्रों या कुछ लोगों का इतिहास नहीं है। उन्होंने कहा, "यह इतिहास भारत के कोने-कोने के बलिदान, तप और बलिदान का इतिहास है। हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास हमारी विविधता, संस्कृति और एक राष्ट्र के रूप में हमारी एकता की ताकत का प्रतीक है।"

उन्होंने आगे कहा, "आजादी का संग्राम केवल कुछ वर्षों का, कुछ इलाकों का, या कुछ लोगों का इतिहास सिर्फ नहीं है। ये इतिहास, भारत के कोने-कोने और कण-कण के त्याग, तप और बलिदानों का इतिहास है। हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास, हमारी विविधता की शक्ति का, हमारी सांस्कृतिक शक्ति का, एक राष्ट्र के रूप में हमारी एकजुटता का प्रतीक है। अल्लूरी सीताराम राजू गारू भारत की सांस्कृतिक और आदिवासी पहचान, भारत के शौर्य, भारत के आदशरें और मूल्यों के प्रतीक हैं। सीताराम राजू गारू एक भारत, श्रेष्ठ भारत की उस विचारधारा के प्रतीक हैं जो हजारों साल से इस देश को एक सूत्र में जोड़ती आई है।"

मोदी ने कहा कि भारत के अध्यात्मवाद ने अल्लूरी सीताराम राजू को करुणा और दया की भावना, आदिवासी समाज के लिए पहचान और समानता की भावना, ज्ञान और साहस दिया। अल्लूरी सीताराम राजू के युवाओं और रम्पा विद्रोह में अपने प्राणों की आहुति देने वालों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनका बलिदान आज भी पूरे देश के लिए ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत है।

पीएम मोदी ने कहा, "स्वतंत्रता आंदोलन में देश की आजादी के लिए युवाओं ने आगे आकर नेतृत्व किया था। आज नए भारत के सपने को पूरा करने के लिए आज के युवाओं को आगे आने का ये सबसे उत्तम अवसर है। 

आज देश में नए अवसर हैं, नए-नए आयाम खुल रहे हैं। नई सोच है, नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं। इन संभावनाओं को साकार करने के लिए बड़ी संख्या में हमारे युवा ही इन जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर उठाकर के देश को आगे बढ़ा रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "आंध्र प्रदेश वीरों और देशभक्तों की धरती है। यहां पिंगली वेंकैया जैसे स्वाधीनता नायक हुये, जिन्होंने देश का झण्डा तैयार किया। ये कन्नेगंटी हनुमंतु, कन्दुकूरी वीरेसलिंगम पंतुलु और पोट्टी श्रीरामूलु जैसे नायकों की धरती है। 

यहां उय्या-लावाडा नरसिम्हा रेड्डी जैसे सेनानियों ने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई थी। आज अमृतकाल में इन सेनानियों के सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी हम सभी देशवासियों की है।"

उन्होंने कहा, "130 करोड़ देशवासियों की है। हमारा नया भारत इनके सपनों का भारत होना चाहिए। एक ऐसा भारत- जिसमें गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़ा, आदिवासी सबके लिए समान अवसर हों। पिछले आठ सालों में देश ने इसी संकल्प को पूरा करने के लिए नीतियां भी बनाईं, और पूरी निष्ठा से काम भी किया है।"

पीएम मोदी ने कहा, "आंध्र प्रदेश के लंबसिंगी में 'अल्लूरी सीताराम राजू मेमोरियल जन-जातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय' भी बनाया जा रहा है। पिछले साल ही देश ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती को 'राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने की शुरूआत भी की है। विदेशी हुकूमत ने हमारे आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार किए, उनकी संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास किए।"

प्रधानमंत्री ने कहा, स्किल इंडिया मिशन के जरिए आज आदिवासी कला-कौशल को नई पहचान मिल रही है। 'वोकल फॉर लोकल' आदिवासी कला कौशल को आय का साधन बना रहा है। दशकों पुराने कानून जो आदिवासी लोगों को बांस जैसी बम्बू जैसी वन-उपज को काटने से रोकते थे, हमने उन्हें बदलकर वन-उपज पर अधिकार दिये। आज वन उत्पादों को प्रमोट करने के लिए सरकार अनेक नए प्रयास कर रही है।"

"आठ साल पहले तक केवल 12 फॉरेस्ट प्रॉडक्ट्स की एमएसपी पर खरीदी होती थी, लेकिन आज एमएसपी की खरीद लिस्ट में करीब-करीब 90 प्रॉडक्ट्स, वन-उपज के रूप में शामिल किया गया हैं। देश ने वन धन योजना के जरिए वन सम्पदा को आधुनिक अवसरों से जोड़ने का काम भी शुरू किया है। देश में 3 हजार से अधिक वन-धन विकास केंद्रों के साथ ही 50 हजार से ज्यादा वन-धन सेल्फ हेल्प ग्रुप भी काम कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "आदिवासी युवाओं की शिक्षा के लिए 750 एकलव्य मॉडल स्कूलों को भी स्थापित किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा पर जो जोर दिया गया है, उससे भी आदिवासी बच्चों को पढ़ाई में बहुत मदद मिलेगी।"


अब हैदराबाद का बदलेगा नाम! योगी के बाद पीएम मोदी ने भी 'भाग्यनगर' कहकर पुकारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित किया है। इस बैठक में पीएम ने हैदराबाद को भाग्यनगर (Bhagyanagar) कहकर पुकारा।

हैदराबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित किया है। इस बैठक में पीएम ने हैदराबाद को भाग्यनगर (Bhagyanagar) कहकर पुकारा। इसके बाद से हैदराबाद का नाम बदलकर 'भाग्यनगर' किए जाने की चर्चा सोशल मीडिया में तेज हो गई है। 


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) हमेशा से ही हैदराबाद को भाग्यनगर कहकर बुलाता रहा है। 2020 में मेयर इलेक्शन के दौरान भाजपा का प्रचार प्रसार करने हैदराबाद गए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी हैदराबाद को भाग्यनगर कहकर पुकारा था और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि बीजेपी आई तो शहर का नाम बदलकर भाग्यनगर किया जाएगा।

इसके अलावा जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) निकाय चुनाव (Nikay Chunav) में प्रचार के लिए हैदराबाद गए थे और वहां उन्होंने अपने दिन की शुरुआत भाग्यनगर मंदिर के दर्शन के साथ की थी। यह मंदिर 429 साल पुराने हैदराबाद शहर की पहचान चारमीनार से सटा हुआ है। स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया था।


नई सरकार को लेकर शरद पवार की भविष्यवाणी, बोले पांच-छह महीनों में गिर जाएगी सरकार

महाराष्ट्र में लंबे राजनीतिक उलटफेर के बाद एकनाथ शिंदे ने नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्य की विधानसभा में आज फ्लोर टेस्ट में भी वो बहुमत से जीत गए हैं, बीते दिन हुए स्पीकर के चुनाव में शिंदे-बीजेपी सरकार को जीत बेहद आसानी से मिल गई। लेकिन अब एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दावा करते हुए कहा है कि शिंदे सरकार 5-6 महीने ही चल पाएगी।

मुंबई: महाराष्ट्र में लंबे राजनीतिक उलटफेर के बाद एकनाथ शिंदे ने नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्य की विधानसभा में आज फ्लोर टेस्ट में भी वो बहुमत से जीत गए हैं, बीते दिन हुए स्पीकर के चुनाव में शिंदे-बीजेपी सरकार को जीत बेहद आसानी से मिल गई। लेकिन अब एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दावा करते हुए कहा है कि शिंदे सरकार 5-6 महीने ही चल पाएगी। उन्होंने अपने विधायकों को गाइड करते हुए कहा कि, 'ये सरकार पांच से छह महीने चलेगी इसलिए मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहें।'


दरअसल, शरद पवार ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि, महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव होने की पूरी संभावना है। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार पांच से छह में गिर सकती है। बताया जा रहा है शरद पवार ने एनसीपी विधायकों और पार्टी के नेताओं को संबोधित करते हुए ये बातें कही।

शरद पवार का अपने विधायकों को सलाह

जानकारी के मुताबिक शरद पवार ने अपने विधायकों को अहम सलाह दी है। उनके संबोधन में शामिल एक नेता ने बताया कि महाराष्ट्र में नवगठित सरकार अगले पांच से छह महीने में गिर सकती है जिसके लिए हम सभी विधायकों और नेताओं को मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा है।  नेता ने आगे बताया कि, पवार ने ये भी कहा कि शिंदे का समर्थन कर रहे कई बागी विधायक मौजूदा स्थिति से खुश नहीं है। विभागों का बंटवारा होने के बाद इन सभी का असंतोष सामने देखने को मिलेगा जिसका नतीजा सरकार गिरना साबित होगा। पवार ने संबोधन में आगे कहा कि, ये पूरी संभावना है कि इस सब के बाद कई बागी विधायक अपनी मूल पार्टी में वापस आ जाए। उन्होंने कहा कि, पार्टी अध्यक्ष ने विधायकों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादा वक्त बिताने को कहा है।


शिंदे सरकार को मिला बहुमत, अशोक चव्हाण और MVA के 5 विधायक वोटिंग से बाहर

महाराष्ट्र में विश्वासमत पर वोटिंग हो रही है। नए बागी संतोष बांगर ने भी शिंदे सरकार के समर्थन में वोट किया है। कांग्रेस के 5 विधायक गैर हाजिर रहे।

मुंबई: एकनाथ शिंदे सरकार विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान बहुमत साबित कर दिया है। विधानसभा में 164 विधायकों ने समर्थन किया है। स्पीकर का वोट काउंट नहीं किया गया, नहीं तो वोट का यह आंकड़ा 165 हो जाता। अब विरोध में वोटिंग शुरू हो चुकी है‌


महाराष्ट्र में विश्वासमत पर वोटिंग हो रही है। नए बागी संतोष बांगर ने भी शिंदे सरकार के समर्थन में वोट किया है। कांग्रेस के 5 विधायक गैर हाजिर रहे।


शिंदे सरकार का बहुमत परीक्षण आज, ठाकरे गुट को लग सकता है ये बड़ा झटका!

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले लगभग 1 महीने से चल रहे सियासी घमासान का नतीजा आज फ्लोर टेस्ट के तौर पर होगा। फ्लोर टेस्ट से पहले प्रदेश की राजनीति में मैराथन बैठकें हुईं। सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 39 विधायकों के साथ बैठक की। उधर उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी महत्वपूर्ण बैठक की है।

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले लगभग 1 महीने से चल रहे सियासी घमासान का नतीजा आज फ्लोर टेस्ट के तौर पर होगा। फ्लोर टेस्ट से पहले प्रदेश की राजनीति में मैराथन बैठकें हुईं। सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 39 विधायकों के साथ बैठक की। उधर उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी महत्वपूर्ण बैठक की है। फ्लोर टेस्ट को लेकर प्रदेश का हर प्रमुख राजनीतिक धड़ा अपने स्तर पर रणनीति तय करने में जुटा है।


व्हिप को लेकर विवाद 

महाराष्ट्र में स्पीकर के चुनाव को लेकर शिवसेना की ओर से व्हिप जारी किया गया था। पार्टी के दोनों गुटों शिंदे गुट और ठाकरे गुट ने अपने विधायकों को लेकर व्हिप जारी किया था। अब व्हिप जारी करने को लेकर विवाद हो गया है और यह विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच सकता है। शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि अध्यक्ष चुनने को लेकर 39 विधायकों ने हमारे व्हिप का पालन नहीं किया है। शिंदे गुट के पास 39 विधायकों की ताकत है। उद्धव ठाकरे के साथ उनके बेटे आदित्य समेत 16 विधायक हैं। ताजा घटनाक्रम में शिवसेना के ,उद्धव ठाकरे धड़े ने भी शिंदे समेत उनके साथ गए सभी विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार के महत्वपूर्ण विश्वास मत से एक दिन पहले उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा। रविवार रात महाराष्ट्र विधानसभा के नवनियुक्त अध्यक्ष ने शिवसेना विधायक अजय चौधरी को विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया। स्पीकर राहुल नार्वेकर के कार्यालय द्वारा जारी एक पत्र ने शिंदे को शिवसेना के विधायक दल के नेता के रूप में बहाल किया गया और ठाकरे गुट से संबंधित सुनील प्रभु को हटाकर शिंदे खेमे से भरत गोगावाले को शिवसेना के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्त किया।

पत्र के मुताबिक, नया निर्देश शिंदे को शिवसेना के सदन के नेता के रूप में बहाल करता है और सुनील प्रभु की जगह भरत गोगावाले को पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्त करने को भी मान्यता देता है। यह घटनाक्रम ठाकरे गुट के लिए एक बड़ा झटका है, जिसमें 16 विधायक शामिल हैं, जो सोमवार के विश्वास मत के लिए गोगावाले द्वारा जारी किए जाने वाले व्हिप से बंधे होंगे। अगर ये 16 विधायक व्हिप का पालन करने से इनकार करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है।


NCP चीफ शरद पवार का बड़ा बयान, कहा-'अगले 6 माह में गिर सकती है शिंदे की सरकार, चुनाव के लिए रहना होगा तैयार'

शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव होने की संभावना है, क्योंकि शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अगले छह महीने में गिर सकती है।

मुम्बई: महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर करने वाले एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) सरकार की आज असली परीक्षा होगी। शिंदे सरकार आज फ्लोर टेस्ट (Maharashtra Floor Test) का सामना करेगी।

इन सबके बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) का बड़ा बयान सामने आया है। शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव होने की संभावना है, क्योंकि शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अगले छह महीने में गिर सकती है।

पवार ने NCP विधायकों और पार्टी के अन्य नेताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। बैठक में शामिल NCP के एक नेता ने पवार के हवाले से बताया, 'महाराष्ट्र में नवगठित सरकार अगले छह महीनों में गिर सकती है, इसलिए सभी को मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए।'

उन्होंने कहा, 'पवार ने कहा है कि शिंदे का समर्थन कर रहे कई बागी विधायक मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हैं। मंत्रियों को विभागों का बंटवारा होने के बाद उनका असंतोष सामने आएगा, जिसके परिणामस्वरूप अंततः सरकार गिर जाएगी।' 

पवार ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रयोग की विफलता के कारण कई बागी विधायक अपनी मूल पार्टी में लौट आएंगे। बैठक में शामिल रहे नेता ने यह भी कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने राकांपा विधायकों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिक समय बिताने को कहा है।


उपराष्ट्रपति चुनाव में BJP सबसे मजबूत, जीतने के लिए किसी के साथ की जरूरत नहीं

देश में राष्ट्रपति (President Election) के साथ-साथ उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice-President Election) की चर्चा तेज हो गई है। भारत के मौजूदा राष्ट्रपति वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) का 11 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अब उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी सबकी नजर टिक गई है।

नई दिल्ली: देश में राष्ट्रपति (President Election) के साथ-साथ उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice-President Election) की चर्चा तेज हो गई है। भारत के मौजूदा राष्ट्रपति वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) का 11 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अब उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी सबकी नजर टिक गई है। ऐसा माना जा रहा है कि 21 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर प्रत्याशियों का मंथन शुरू कर दिया है। 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी जहां अन्य पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए पर्याप्त वोट हैं। आइए उपराष्ट्रपति चुनाव का गणित समझाते हैं।


जैसे-जैसे उपराष्ट्रपति चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर प्रत्याशियों का मंथन शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्टे्स की मानें तो उपराष्ट्रपति के लिए कुछ नाम भी सामने आए हैं. लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव का गणित साफ तौर पर ये दिखा रहा है कि बीजेपी को इस चुनाव में कोई दिक्कत नहीं होगी. बीजेपी को जीतने के लिए किसी अन्य पार्टियों के समर्थन की भी जरूरत नहीं होगी.

दोनों सदनों के सांसद करते हैं वोटिंग

आपको बता दें कि उपराष्ट्रपति के चुनाव में केवल मनोनीत सांसद समेत केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोटिंग कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा के 543 और राज्यसभा में 232 सांसद वोट करते हैं। इसी साल हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को 3 सीटों का नुकसान हुआ है। इसके बाद राज्यसभा में बीजेपी के पास केवल 92 सांसद बचे हैं। वहीं, निचले सदन लोकसभा में बीजेपी और NDA के पास बहुमत है। हाल ही में हुए उपचुनाव में बीजेपी को दो सीटें हासिल हुईं। इसके बाद लोकसभा में बीजेपी सांसदों की संख्या 303 हो गई।

अगर बीजेपी के लोकसभा और राज्यसभा के कुल सांसदों की संख्या को जोड़ा जाए, तो ये 395 होती है। वहीं उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए केवल 388 वोट चाहिए। यानी बीजेपी के पास जरूरी वोट से 7 वोट ज्यादा हैं। इस तरह ये कहा जा सकता है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी की जीत तय है। बता दें कि चुनाव आयोग ने 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। 6 अगस्त को इसके लिए मतदान होगा।