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टोक्यो पैरालिम्पिक 2020: सुहास के सिल्वर के बाद कृष्णा नागर ने जीता गोल्ड

दूसरी वरीयता प्राप्त कृष्णा नागर ने पुरुष की एसएच6 क्लास फाइनल में हॉन्गकॉन्ग के चु मान केइ को 21-17, 16-21 और 21-17 से हराया। इससे कुछ ही देर पहले नोएडा के डीएम सुहास एलवाई ने भी बैडमिंटन की एक अन्य स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपनी झोली में डाला था।

टोक्यो: आज टोक्यो पैरालिम्पिक 2020 का आखिरी दिन है। लेकिन आखिरी दिन भी भारतीय खिलाड़ियों ने 1 गोल्ड व 1 सिल्वर समेत 2 मेडल झटके। भारत के स्टार पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर ने तोक्यो पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीतते हुए इतिहास रच दिया है।

दूसरी वरीयता प्राप्त कृष्णा नागर ने पुरुष की एसएच6 क्लास फाइनल में हॉन्गकॉन्ग के चु मान केइ को 21-17, 16-21 और 21-17 से हराया। इससे कुछ ही देर पहले नोएडा के डीएम सुहास एलवाई ने भी बैडमिंटन की एक अन्य स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपनी झोली में डाला था।


इस तरह भारत को टूर्नामेंट में 5वां गोल्ड मेडल दिलाया। भारत का यह कुल 19वां मेडल है। उसने 5 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इससे पहले भारत के सुहास यथिराज पुरुष एकल एसएल4 क्लास बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में शीर्ष वरीय फ्रांस के लुकास माजूर से करीबी मुकाबले में हार गए जिससे उन्होंने ऐतिहासिक रजत पदक से अपना अभियान समाप्त किया।


टोक्यो पैरालिम्पिक 2020: नोएडा के डीएम सुहास यथिराज ने जीता सिल्वर मेडल

टोक्यो पैरालंपिक खेलों के आखिरी दिन नोएडा के डीएम और आईएएस अधिकारी सुहास यथिराज ने इतिहास रच दिया है। जापान के टोक्यो शहर में खेले जा रहे पैरालंपिक खेलों के आखिरी दिन सुहास बेशक गोल्ड जीतते-जीतते रह गए, लेकिन सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही उन्होंने भारत की झोली में 18वां मेडल डाल दिया है।

टोक्यो: आज टोक्यो पैरालिम्पिक 2020 का आखिरी दिन है। आज भी भारत को कम से कम एक गोल्ड की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। नोएडा के डीएम और बैडमिंटन खिलाड़ी सुहास यथिराज को फाइनल में हार मिली है और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा है।

टोक्यो पैरालंपिक खेलों के आखिरी दिन नोएडा के डीएम और आईएएस अधिकारी सुहास यथिराज ने इतिहास रच दिया है। जापान के टोक्यो शहर में खेले जा रहे पैरालंपिक खेलों के आखिरी दिन सुहास बेशक गोल्ड जीतते-जीतते रह गए, लेकिन सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही उन्होंने भारत की झोली में 18वां मेडल डाल दिया है। इसी के साथ सुहास पैरालंपिक खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी बन गए हैं। फाइनल में सुहास को फ्रांस के लुकास मजूर के खिलाफ 21-15, 17-21, 15-21 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। पैरालंपिक खेलों में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सुहास एसएल4 कैटेगरी में फिलहाल वर्ल्ड रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है।


शनिवार को सेमीफाइनल में जीत दर्ज करने से पहले ग्रुप चरण में तीन मैच खेले और एक मुकाबले को छोड़कर सभी में उनका प्रदर्शन दबदबा वाला रहा। पहले दो मैचों को 20 मिनट से भी कम समय में अपने नाम करने वाले सुहास ने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 31 मिनट में 21-9, 21-15 से हराया था। 

सुहास ने इसी साल बीजिंग में एशियाई चैम्पियनशिप में भाग लिया और गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले गैर-रैंक वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने 2017 और 2019 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में मेन्स सिंगल्स और डबल्स इवेंट का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने ब्राजील में 2020 में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।


टोक्यो पैरालिंपिक 2020: शूटिंग के P4 मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल SH1 में मनीष नरवाल ने गोल्ड व सिंहराज ने जीता सिल्वर मेडल

मनीष नरवाल ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 का रिकॉर्ड बनाते हुए 218.2 स्कोर किया। वहीं सिंहराज ने 216.7 अंक बनाकर रजत पदक अपने नाम किया।

टोक्यो: भारत के मनीष नरवाल ने मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल एसएच1 निशानेबाजी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। वहीं 39 वर्षीय सिंहराज सिंह अडाना को रजत पदक मिला है। मनीष नरवाल ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 का रिकॉर्ड बनाते हुए 218.2 स्कोर किया। वहीं सिंहराज ने 216.7 अंक बनाकर रजत पदक अपने नाम किया। दोनों निशानेबाज हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले हैं।

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वहीं, हरियाणा सरकार ने टोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक विजेता मनीष नरवाल को 6 करोड़ रुपये और रजत पदक विजेता सिंहराज अधाना को 4 करोड़ रुपये इनाम देने की घोषणा की है।



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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर मनीष नरवाल को बधाई दी है। एक ट्वीट में पीएम ने कहा है, ''मनीष नरवाल की शानदार उपलब्धि। उनका स्वर्ण पदक जीतना भारतीय खेलों के लिए एक विशेष क्षण है। उन्हें बधाई और आने वाले समय के लिए शुभकामनाएं।''

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने पर सिंहराज अधाना को बधाई दी है। एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा है, ''उनके इस करतब से भारत खुश है। उन्हें बधाई और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।''



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सिंहराज की जीत पर उनकी मां वेदवत्ती ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे सिंहराज ने पूरे देश में नाम रोशन कर दिया, ऐसा शेर है मेरा।



अबतक भारत की झोली में 15 पदक

इसके साथ ही टोक्यो ओलंपिक में भारत की पदकों की संख्या 15 हो गई है। भारत ने अब तक तीन गोल्ड, सात सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। टोक्यो पैरालंपिक में निशानेबाजी में भारत का 5 पदक जीत चुका है। अवनि लेखरा ने एक गोल्ड और एक कांस्य पदक अपने नाम किया है। वहीं सिंहराज अडाना ने पैरालंपिक खेलों में 31 अगस्त को पी1 पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 में कांस्य पदक जीता था। अवनि की तरह ही सिंहराज भी टोक्यो पैरालंपिक में दो मेडल अपने नाम किया है। पदक तालिका में भारत 37वें नंबर पर है।

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टोक्यो पैरालिंपिक 2020: अवनि लेखारा ने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन SH1 में जीता ब्रांज मेडल, राष्ट्रपति-पीएम ने दी बधाई

अवनि ने 445.9 के अंतिम स्कोर के साथ कांस्य पदक जीतने का कमाल कर दिखाया है। इससे पहले अवनि ने पैरालिंपिक में भारत को गोल्ड मेडल जीताया था।

टोक्यो: भारत की अवनि लेखरा ने एक बार फिर से देश का नाम टोक्यो पैरालिंपिक 2020 में रोशन किया है और देश को एक और पदक दिलाया है। उन्होंने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन SH1 में कांस्य जीत लिया है। अवनि ने 445.9 के अंतिम स्कोर के साथ कांस्य पदक जीतने का कमाल कर दिखाया है। इससे पहले अवनि ने पैरालिंपिक में भारत को गोल्ड मेडल जीताया था। 


अवनि ने महिलाओं की आर-2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 इवेंट में अवनि ने पहला स्थान हासिल करके गोल्ड मेडल जीता था।  अवनी पैरालिंपिक के इतिहास में 2 पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं हैं। पैरालंपिक में 2 पदक जीतने वाले पहले निशानेबाज  भी बनने का गौरव अवनि ने हासिल कर लिया है। टोक्यो पैरालिंपिक में भारत के खाते में अब 12म पदक हो गए हैं। 


अवनी पहले राउंड के दौर के अंत में 149.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर थी। 19 वर्षीय भारतीय एथलीट प्रोन राउंड के समापन के बाद छठे स्थान पर खिसक गई। 30 शॉट के बाद अवनि के 303.4 अंक हो गए। एलिमिनेशन राउंड की शुरुआत पर अवनि पांचवें स्थान पर आ गई। अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हुए, भारतीय एथलीट दो सीरीज के अंत में स्थायी स्थिति में चौथे स्थान पर आ पहुंची लेकिन इसके बाद  अंतिम कुछ मिनटों में, अवनी ने कांस्य पदक जीतने के लिए बेस्ट स्कोर दर्ज कर इतिहास रच दिया। 

पीएम ने ट्वीट कर अवनि को एक और पदक जीतने पर बधाई दी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'टोक्यो पैरालंपिक में और गौरव, अवनि लखेरा के शानदार प्रदर्शन से उत्साहित हूं। उन्हें कांस्य पदक के लिए बधाई। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं।'


वहीं, राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति ने भी ने भी अवनि लेखारा को बधाई दी है। 



टोक्यो पैरालिंपिक 2020: प्रवीण कुमार ने रचा इतिहास, भारत को ऊंची कूद में दिलाया सिल्वर मेडल

प्रवीण ने 2.07 मीटर की छलांग लगाई और दूसरे स्थान पर रहे। ब्रिटेन के ब्रूम एडवर्ड्स जोनाथन ने 2.10 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। जबकि पोलैंड के पोलैंड के लेपियाटो मासिएजो ने 2.04 मीटर की जंप के साथ कांस्य पदक जीता।

टोक्यो: जापान की राजधानी टोक्यों में चल रहे पैरालिंपिक 2020 में भारत लगातार मेडल्स जीत रहा है। ताजा मामले में पुरुषों की ऊंची कूद प्रतियोगिता (T64)  में भारतीय खिलाड़ी प्रवीण कुमार ने देश को सिल्वर मेडल दिलाया है। इस मुकाबले में नोएडा के रहने वाले प्रवीण ने 2.07 मीटर की छलांग लगाई और दूसरे स्थान पर रहे। ब्रिटेन के ब्रूम एडवर्ड्स जोनाथन ने 2.10 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। जबकि पोलैंड के पोलैंड के लेपियाटो मासिएजो ने 2.04 मीटर की जंप के साथ कांस्य पदक जीता। 

अपनी जीत पर प्रवीण कुमार ने कहा, 'मेडल जीतकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है,मैं अपने कोच(डॉ. सत्यपाल सिंह) को धन्यवाद करता हूं क्योंकि उन्होंने मुझे अब तक सपोर्ट किया। उन्होंने मुझे बहुत प्रेरणा दी है और मैं अपने परिवार, SAI और PCI को भी धन्यवाद करता हूं।'

प्रवीण कुमार की उपलब्धि पर पीएम मोदी ने ट्वीटर कर बधाई दी। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'प्रवीण के पैरालंपिक में सिल्वर पदक जीतने पर गर्व है, यह मेडल उनके कठोर परिश्रम और लगातार मेहनत का परिणाम है, उन्हें बधाइयां। प्रवीण को भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं।'

वहीं, दीपा मलिक (भारतीय पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष) ने भी प्रवीण कुमार को बधाई दी है। उन्होंने कहा, 'भारत के खाते में एक और मेडल आया है। प्रवीण कुमार ने हाई जंप में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा है। अब भारत पैरा एथलेटिक्स में हाई जंप और जैवलिन के लिए जाना जाएगा। प्रवीण कुमार को बहुत-बहुत बधाई।'


टी-64 स्पर्धा में वे खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनका पैर किसी वजह से काटना पड़ा हो और कृतिम पैर के जरिए खड़े होकर खेलते हों। फिलहाल प्रवीण टी-44 कैटेगरी से आते हैं और वह टी-64 में भी हिस्सा ले सकते हैं। वहीं टोक्यो पैरालंपिक में ऊंची कूद स्पर्धा में अब भारत के पदकों की संख्या चार हो गई है।

बता दें कि टोक्यो पैरालिंपिक 2020 में भारत की तरफ से अबतक मरियप्पन थंगवेलु, शरद कुमार और निषाद कुमार पहले ही पदक जीत चुके हैं। 

टोक्यो पैरालंपिक में भारत अब तक 11 मेडल जीत चुका है जिनमें दो स्वर्ण, छह रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। इन खेलों में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। फिलहाल पदक तालिका में भारत 36वें स्थान पर है।


टोक्यो पैरालिंपिक 2020: शरद कुमार ने जीता ब्रांज मेडल, पोलियो की नकली खुराक की वजह से 2 साल की उम्र में हुए थे विक्लांग

शरद चोट के कारण पैरालम्पिक टी42 ऊंची कूद फाइनल से नाम वापिस लेने की सोच रहे थे लेकिन भारत में परिवार से बात करने और स्पर्धा से एक रात पहले भगवद गीता पढने से उन्हें चिंताओं से निजात मिली और उन्होंने कांस्य पदक भी जीता।

टोक्यो: मूल रूप से बिहार के रहने वाले शरद कुमार घुटने ने आज देश का नाम रोशन करते हुए टोक्यो पैरालिंपिक 2020 में ब्रांज मेडल जीता है। वह चोट के कारण पैरालम्पिक टी42 ऊंची कूद फाइनल से नाम वापिस लेने की सोच रहे थे लेकिन भारत में परिवार से बात करने और स्पर्धा से एक रात पहले भगवद गीता पढने से उन्हें चिंताओं से निजात मिली और उन्होंने कांस्य पदक भी जीता।

बिहार की राजधानी पटना में जन्में 29 वर्ष के शरद को सोमवार को घुटने में चोट लगी थी। शरद ने टोक्यो पैरालंपिक खेलों में मंगलवार को 1.83 मीटर के प्रयास के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। शरद ने कहा, 'कांस्य पदक जीतकर अच्छा लग रहा है क्योंकि मुझे सोमवार को अभ्यास के दौरान चोट लगी थी। मैं पूरी रात रोता रहा और नाम वापिस लेने की सोच रहा था। मैंने कल रात अपने परिवार से बात की। मेरे पिता ने मुझे भगवद गीता पढने को कहा और यह भी कहा कि जो मैं कर सकता हूं, उस पर ध्यान केंद्रित करूं न कि उस पर जो मेरे वश में नहीं है। मैंने चोट को भुलाकर हर कूद को जंग की तरह लिया। पदक सोने पे सुहागा रहा।' 

दिल्ली के मॉडर्न स्कूल और किरोड़ीमल कॉलेज से तालीम लेने वाले शरद ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर्स डिग्री ली है। दो वर्ष की उम्र में पोलियो की नकली खुराक दिए जाने से शरद के बाएं पैर में लकवा मार गया था।

दो बार एशियाई पैरा खेलों में चैम्पियन और विश्व चैम्पियनशिप के रजत पदक विजेता शरद ने कहा, ' बारिश में कूद लगाना काफी मुश्किल था। हम एक ही पैर पर संतुलन बना सकते हैं और दूसरे में स्पाइक्स पहनते हैं। मैं अधिकारियों से बात करने की कोशिश की कि स्पर्धा स्थगित की जानी चाहिए लेकिन अमेरिकी ने दोनों पैरों में स्पाइक्स पहने थे। इसलिये स्पर्धा पूरी कराई गई।'


इस मौके पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शरद को बधाई देते हुए अपने फेसबुक वॉल पर लिखे संदेश में कहा, 'बिहार के लाल श्री शरद कुमार को टोक्यो पैरालंपिक 2020 के हाई जंप स्पर्धा में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि वे ऐसे ही राज्य एवं देश का नाम रोशन करते रहें।'


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टोक्यो पैरालिंपिक 2020 में भारत फिलहाल दो गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 ब्रांज मेडल के साथ तीसवें नंबर पर है।


टोक्यो पैरालिंपिक 2020: मरियप्पन थंगावेलु ने ऊंची कूद में दिलाया भारत को रजत पदक

भारतीय एथलीट मरियप्पन थंगावेलु ने ऊंची कूद में देश को सिल्वर मेडल दिलाया है। मंगलवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनलमें जगह बनाने वाले पैरा एथलीट ने पुरुषों की उंची कूच टी63 में रजत पदक पर कब्जा जमाया।

नई दिल्ली: टोक्यो पैरालिंपिक 2020 में भारत के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारतीय एथलीट मरियप्पन थंगावेलु ने ऊंची कूद में देश को सिल्वर मेडल दिलाया है। मंगलवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनलमें जगह बनाने वाले पैरा एथलीट ने पुरुषों की उंची कूच टी63 में रजत पदक पर कब्जा जमाया।

बता दें कि पिछले रियो पैरालिंपिक 2016 खेलों में पुरुषों की टी-42 ऊंची कूद स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर तमिलनाडु के मरियप्पन ने सभी देशवासियों का दिल जीत लिया था।

2019 विश्व पैर एथलीट चैंपियनशिप में भी मरियप्पन ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह भारतीय पैरालिंपिक दल के ध्वजवाहक मरियप्पन रियो की तरह टोक्यो में भी पदक जीतकर अपना वर्चस्व बरकरार रखना चाहेंगे।  


टोक्यो पैरालिंपिक 2020: भाला फेंक में सुमित अंतिल ने 15 मिनट में 3 बार खुद का ही तोड़ा वर्ल्ड रिकार्ड, भारत को दिलाया गोल्ड

सुमिल ने पहले प्रयास में 66.95 मीटर भाला फेंक कर वर्ल्ड रिकार्ड बनाया। इसके कुछ मिनट बाद ही उन्होंने दूसरे प्रयास में 68.08 मीटर भाला फेंकते हुए अपने हुए कुछ मिनट पहले बनाए रिकार्ड तो तोड़ डाला। पांचवें प्रयास में उन्होंने 68.55 मीटर भाला को फेंकते हुए इस इवेंट में तीसरी बार वर्ल्ड रिकार्ड बनाया।

टोक्यो: भारतीय खिलाड़ियों का पैरालिंपिक में शानदार खेल जारी है। भारत के एथलीट सुमित अंतिल ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। 

भालाफेंक इवेंट में एफ 65 में उन्होंने महज 15 मिनट के अंदर में तीन बार वर्ल्ड रिकार्ड को तोड़ते हुए इतिहास रच दिया। भारत को गोल्ड मेडल दिलाने के साथ ही सुमित ने पैरालिंपिक इतिहास में एक ही इवेंट में तीन बार वर्ल्ड रिकार्ड बनाने का नया कमाल कर दिखाया। 


सुमिल ने पहले प्रयास में 66.95 मीटर भाला फेंक कर वर्ल्ड रिकार्ड बनाया। इसके कुछ मिनट बाद ही उन्होंने दूसरे प्रयास में 68.08 मीटर भाला फेंकते हुए अपने हुए कुछ मिनट पहले बनाए रिकार्ड तो तोड़ डाला। पांचवें प्रयास में उन्होंने 68.55 मीटर भाला को फेंकते हुए इस इवेंट में तीसरी बार वर्ल्ड रिकार्ड बनाया।


भारत के लिए यह दिन का दूसरा गोल्ड मेडल आया। इससे पहले निशानेबाजी में पैरा शूटर अवानी लेखरा ने 10 मीटर एयर राइफल्स में स्वर्ण पदक जीता है।


टोक्यो पैरालंपिक 2020: शूटिंग में अवनि लेखारा को गोल्ड, डिस्कस थ्रो में योगेश कठुनिया को सिल्वर, भाला फेंक में देवेंद्र की चांदी और सुंदर सिंह गुर्जर ने भी गाड़ दिया झंडा

द्रेवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंक में रजत पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया तो भाला फेंक में ही सुंदर सिंह गुर्जन ने भी देश का नाम रोशन करते हुए ब्रांज मेडल झटका है। इसके अलाना डिस्कस थ्रो में योगेश कठुनिया ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

टोक्यो: 'खेल दिवस' के अवसर पर यानी रविवार को टोक्यो पैरालांपिक 2020 में भारत की झोली में 2 सिल्वर और एक ब्रांज समेत कुल तीन  पदक आये और आज यानी सोमवार की शुरुआत भी भारत के लिए बहुत ही अच्छी हुई है। भारत की शूटर अवनि लेखारा ने 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मे 249.6 पॉइंट के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया है। पैरालांपिक में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल भी है।

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वहीं, द्रेवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंक में रजत पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया तो भाला फेंक में ही सुंदर सिंह गुर्जन ने भी देश का नाम रोशन करते हुए ब्रांज मेडल झटका है। इसके अलाना डिस्कस थ्रो में योगेश कठुनिया ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

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डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीतने वाले खिलाड़ी योगेश कठुनिया ने अपनी जीत पर कहा कि मैंने सिल्वर मेडल जीता है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा। मैं अपनी माँ और PCI(पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया) को धन्यवाद करना चाहता हूं।

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योगेश कठुनिया की मां मीना देवी ने कहा कि सिल्वर मेडल ही मेरे लिए गोल्ड मेडल है। देश के लिए गोल्ड मेडल लाना बड़ी बात है। तीन साल तक वह व्हीलचेयर में रहा। मेहनत के लिए वह कभी पीछे नहीं हटता है।

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टोक्यो पैरालांपिक 2020: शूटिंग में अवनि लेखारा ने जीता गोल्ड, डिस्कस थ्रो में योगेश ने भी पक्का किया पदक

भारत की शूटर अवनि लेखारा ने 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मे 249.6 पॉइंट के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया है। पैरालांपिक में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल भी है।

टोक्यो: 'खेल दिवस' के अवसर पर यानी रविवार को टोक्यो पैरालांपिक 2020 में भारत की झोली में 2 सिल्वर और एक ब्रांज समेत कुल तीन  पदक आये और आज यानी सोमवार की शुरुआत भी भारत के लिए बहुत ही अच्छी हुई है। भारत की शूटर अवनि लेखारा ने 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मे 249.6 पॉइंट के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया है। पैरालांपिक में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल भी है।

वहीं, दूसरी तरफ ब्राजील के एथलीट क्लोयोडने ने 44.57 मीटर का थ्रो फेंक दिया है। इसके साथ ही अब योगेश दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं और अब वह सिल्वर मेडल जीतने की पोजीशन में हैं। द्रेवेंद्र झाझरिया ने अपने पहले प्रयास में 60.28 का थ्रो फेंका है, जबकि सुंदर सिंह गुर्जर ने दूसरे प्रयास में 62.26 मीटर का थ्रो फेंका है।


टोक्यो पैरालंपिक्स 2020: ऊंची कूद में निषाद कुमार ने देश को दिलाया सिल्वर, डिस्कस थ्रो में विनोद कुमार ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

एक तरफ टेबल टेनिस में भाविना ने सिल्वर जीता तो दूसरी तरफ निषाद कुमार में डिस्कस थ्रो में सिल्वर जीतकर भारत की 'चांदी' कर दी। वहीं, डिस्कस थ्रो में विनोद कुमार ने भी दुनिया को दम दिखाया और ब्रांज मेडल जीता। अबतक भारत के खाते में 2 रजत और 1 ब्रांज मेडल समेत 3 पदक आ चुके हैं।

टोक्यो: खेल दिवस के दिन टोक्यो पैरालंपिक्स 2020 में भारत की चांदी हो गई है। एक तरफ टेबल टेनिस में भाविना ने सिल्वर जीता तो दूसरी तरफ निषाद कुमार में डिस्कस थ्रो में सिल्वर जीतकर भारत की 'चांदी' कर दी। वहीं, डिस्कस थ्रो में विनोद कुमार ने भी दुनिया को दम दिखाया और ब्रांज मेडल जीता। अबतक भारत के खाते में 2 रजत और 1 ब्रांज मेडल समेत 3 पदक आ चुके हैं।



पुरुषों के हाई जंप के फाइनल में भारत के निषाद कुमार ने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ और एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी करने के साथ ही दूसरे प्रयास में 2.06 मीटर की जंप लगाई।


टोक्यो पैरालंपिक में भारत के एथलीट निषाद कुमार ने देश को पुरुष हाई जंप में दूसरा मेडल दिला दिया है। निषाद ने 2.06 मीटर की ऊंची जंप लगाकर सिल्वर मेडल को अपने नाम किया। निषाद  ने मेडल पर कब्जा करने के साथ ही नया एशियाई रिकॉर्ड भी कायम कर दिया है।


इससे पहले सुबह टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने भारत का पैरालंपिक 2020 में खाता खोला और सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। हालांकि, उनको फाइनल मुकाबले में  चीन की खिलाड़ी  यिंग झोऊ के हाथों 0-3 से हार का सामना करना पड़ा और उनका गोल्ड मेडल जीतने का सपना अधूरा रह गया।


टोक्यो पैराओलंपिक 2020: फाइनल में हारीं भाविना पटेल, सिल्वर से करना पड़ा संतोष

भाविना पटेल महिला एकल वर्ग 4 के फाइनल में चीन की झोउ यिंग से हार गईं। टोक्यो में जारी पैरालिंपिक खेलों में भारत का ये पहला पदक है, जो सिल्वर मेडल के रूप में आया है। इस तरह खेल दिवस भारत के लिए खास हो गया है।

टोक्यो: भारतीय पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल को टोक्यो पैरालिंपिक खेलों में रजत पदक से संतोष करना पड़ा है। उन्हें फाइनल में चीन की खिलाड़ी के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

भाविना पटेल महिला एकल वर्ग 4 के फाइनल में चीन की झोउ यिंग से हार गईं। टोक्यो में जारी पैरालिंपिक खेलों में भारत का ये पहला पदक है, जो सिल्वर मेडल के रूप में आया है। इस तरह खेल दिवस भारत के लिए खास हो गया है।


भाविना पटेल को चीन को झोउ यिंग से 3-0 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, बावजूद इसके भारत ने टोक्यो में पैरालिंपिक में पहला पदक जीत लिया है। भाविना पटेल ने रजत पदक जीता और टेबल टेनिस इतिहास में भारत के लिए यह पहला पदक भी है। इस तरह भाविना पटेल ने देश के लिए इतिहास रच दिया है। 

टोक्यो ओलिंपिक खेलों में भी भारत को पहला पदक रजत पदक के रूप में मिला था। व्हीलचेयर पर खेलने वाली भाविना पटेल ने टोक्यो पैरालिंपिक खेलों के फाइनल में पहला गेम 11-7 के अंतर से गंवा दिया था। ऐसे में दूसरे खेल में उनसे उम्मीद थी कि वे वापसी करेंगी, लेकिन दूसरा गेम भी वे 11-5 के अंतर से हार गईं और फिर तीसरे गेम में उनको 11-6 से हार मिली और उनका गोल्ड मेडल जीतने का सपना चकनाचूर हो गया। 


ओलंपिक पहलवान रवि दहिया के नाम पर रखा गया दिल्ली के सरकारी स्कूल का नाम

रवि दहिया के नाम पर दिल्ली सरकार द्वारा स्कूल का नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि वह दिल्ली के सरकारी स्कूल के पूर्व छात्र हैं। केजरीवाल सरकार ने फैसला किया है कि आदर्श नगर में स्थित लड़कों के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (Boys Senior Secondary School) को अब रवि दहिया बाल विद्यालय के नाम से जाना जाएगा।

नई दिल्ली: टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले पहलवान रवि दहिया को दिल्ली सरकार ने कभी भी ना भूलने वाला तोहफा दिया है। दरअसल, दिल्ली सरकार ने उनके नाम पर एक स्कूल का नाम रखा है।

दरअसल, रवि दहिया के नाम पर दिल्ली सरकार द्वारा स्कूल का नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि वह दिल्ली के सरकारी स्कूल के पूर्व छात्र हैं। केजरीवाल सरकार ने फैसला किया है कि आदर्श नगर में स्थित लड़कों के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (Boys Senior Secondary School) को अब रवि दहिया बाल विद्यालय  के नाम से जाना जाएगा। बताया जा रहा है कि रवि दहिया ने इसी सरकारी स्कूल में पढ़ाई की थी। दिल्ली सरकार ने उनके सम्मान में इस स्कूल का नाम बदलकर रवि दहिया बाल विद्यालय रखने का फैसला किया है। 

बताते चलें कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश का नाम रोशन करने वाले पहलवान रवि दहिया ने 10 अगस्त को  दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की थी। रवि दहिया के साथ तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि ओलिंपिक रजत पदक विजेता रवि कुमार दहिया का स्वागत करते हुए खुशी हुई। टोक्यो ओलिंपिक में उनके ऐतिहासिक प्रदर्शन पर उन्हें बधाई दी। रवि दहिया ने अपने प्रदर्शन से भारत को गौरवान्वित किया है और लाखों युवाओं को प्रेरित किया है।


टोक्यो ओलंपिक 2020 के पदकवीरों का होटल अशोका में किया गया सम्मान, पढ़िए-क्या बोले देश के स्टार्स

एयरपोर्ट पर अपने चैंपियन खिलाड़ियों का स्वागत करने वालों की भीड़ जमा थी। लोग ढोल लेकर एक टकटकी लगाए टोक्यो में भारत का झंडा बुलंद करने वाले तमाम खिलाड़ियों का इंतजार कर रहे थे। खिलाड़ी सम्मान समारोह के लिए अशोका होटल पहुंचें। यहां खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने उनका स्वागत किया।

नई दिल्ली: आज टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत का नाम रोशन कर पदक लाने वाले खिलाड़ी स्वदेश पहुंच चुके हैं। इस मौके पर सभी पदक वीरों का सम्मान समारोह राजधानी दिल्ली के होटल अशोका में रखा गया। एयरपोर्ट पर अपने चैंपियन खिलाड़ियों का स्वागत करने वालों की भीड़ जमा थी। लोग ढोल लेकर एक टकटकी लगाए टोक्यो में भारत का झंडा बुलंद करने वाले तमाम खिलाड़ियों का इंतजार कर रहे थे। खिलाड़ी सम्मान समारोह के लिए अशोका होटल पहुंचें। यहां खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने उनका स्वागत किया। 

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क्या कहा 'गोल्डन बॉय' ने

ओलिंपक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा ने कहा, सभी का बहुत बहुत शुक्रिया, सबसे पहले तो मैं यह दिखाना चाहूंगा। ये गोल्ड मेरा नहीं पूरे इंडिया का है और मैं उस दिन से ही अपनी जेब में लेकर घूम रहा हूं इस मेडल को। मैं सही बताउं तो उस दिन से सही तरीके से सो नहीं पाया, खा नहीं पाया लेकिन जब भी मैं इसको निकालकर देख लेता हूं तो लगता है सबकुछ ठीक है, कोई परेशानी नहीं।

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उन्होंने आगे कहा कि मैं ये कहना चाहूंगा मेहनत तो काफी अच्छी हुई थी लेकिन मन में यह लगता था कि काफी तगड़े कॉम्पिटिटर हैं हमारे, और मेरी वर्ल्ड रैंकिम 4 चल रही थी प्रतियोगिता काफी जबरदस्त था वहां।

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नीरज ने आगे कहा कि क्वालीफिकेशन में जैसे मेरा थ्रो लगा तो मुझे लगा यह मेरे लाइफ का सबसे तगड़ा मौका है ओलिंपिक, यह तो मैं नहीं छोड़ूंगा। मुझे लगता है कभी भी विरोधी खिलाड़ी को देखकर घबराना नहीं चाहिए और यह मैंने अपने पहले ओलिंपिक में अनुभव किया है क्योंकि इतना अच्छा कॉम्पिटिशन होने के बाद और इतने अच्छे एथलीट होने के बावजूद भी हमने गोल्ड जीता है तो मुझे लगता है अपना 100 प्रतिशत दो और किसी से घबराओ मत।  

भारत सरकार का शुक्रिया: मनप्रीत सिंह, भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान

पुरुष हॉकी टीम को भारत के लिए 41 साल बाद कांस्य पदक जीतने के लिए सम्मानित किया गया। कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा, भारत सरकार का बहुत शुक्रिया जिनकी तरफ से हमें मुश्किल समय में सहायता दी गई। सरकार का बहुत ही ज्यादा शुक्रगुजार हूं जिनकी तरफ से साफ तौर पर कहा गया था कि जब कभी भी किसी भी तरह की परेशानी हो तो सीधा बात करें। 

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सिर्फ गोल्ड का ही सोचकर खेल रही थी: लवनीना

महिला बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीतने वाली लवनीना ने सम्मान पाने के बाद अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा, मैंने बस गोल्ड के बारे में ही सोचा था, किसी भी और चीज का ध्यान नहीं आया था। मेडल जीतूंगी पहले तो यह भी नहीं था लेकिन जब एक बार आगे बढ़ी तो फिर सामने किस रैंक का मुक्केबाज है कुछ ध्यान नहीं था। मैंने बस गोल्ड का सोचा था और आगे भी देश के लिए जब खेलने जाउंगी गोल्ड की ही सोच रहेगी। 

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...चोट का इलाज ओलंपिक के बाद करा लूंगा !

बजरंग पुनिया को सम्मानित किया गया और स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। कांस्य पदक जीतने वाले पहलवान ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया। मैंने आखिरी बाउट में चोट के बाद भी खेला। मुझे पता था कि विरोधी पहलवान भी मेडल जीतने के लिए आता है तो वह मेरे साथ कोई नरमी नहीं बरतने वाला। मैं जानता था यह आखिरी मौका है अगर चोट बढ़ भी गई फिर भी इसका इलाज मैं ओलिंपिक के बाद करवा लूंगा। 
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सरकार खिलाड़ियों को हर सुविधाएं देगी: अनुराग ठाकुर

खेल मंत्री ने मंच पर खिलाड़ियों का संबोधन करते हुए कहा कि भारत अगले ओलिंपिक में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार खिलाड़ियों को हर तरीके की सुविधा प्रदान करेगी। किसी भी खिलाड़ी को किसी तरह की कोई कमी नहीं होने देगी। 

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भारत के सूरमा खिलाड़ी टोक्यो ओलिंपिक में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत लौटे हैं। इस बार के ओलिंपिक में भारतीय ने मेडल जीतने के मामले में पिछले अपने सारे रिकॉर्ड को तोड़ा और सबसे यादगार पलों के साथ भारत लौटे। भारत में एयरपोर्ट पर चैंपियन खिलाड़ियों का स्वागत बहुत शानदार हुआ।

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भारत ने इस बार के ओलिंपिक में कुल 7 पदक जीते जो लंदन ओलिंपिक में हासिल किए गए 6 से एक ज्यादा रहे। एथलीट नीरज चोपड़ा ने भालाफेंक में गोल्ड मेडल हासिल किया। भारत की एथलीट टीम के स्वदेश वापसी की जानकारी साई (Sports authority of India) ने सभी खिलाड़ी के एयरपोर्ट पर ली गई एक वीडियो के जरिए दी।

ये हैं भारत के पदक वीर

  • नीरज चोपड़ा- एथलेटिक्स- मेन्स जैवलिन थ्रो- गोल्ड मेडल
  • मीराबाई चानू- वेट लिफ्टिंग- वूमेन्स 49 किलो- सिल्वर मेडल
  • रवि कुमार दाहिया- रेसलिंग- मेन्स फ्रीस्टाइल- सिल्वर मेडल
  • पीवी सिंधू- बैडमिंटन- वूमेन्स सिंगल्स- ब्रॉन्ज मेडल
  • लवलीना बोरगोहेन- बॉक्सिंग- वूमेन्स वेल्टरवेट- ब्रॉन्ज मेडल
  • इंडियन मेन्स हॉकी टीम- फील्ड हॉकी- मेन्स टूर्नामेंट- ब्रॉन्ज मेडल
  • बजरंग पूनिया- रेसलिंग- मेन्स फ्रीस्टाइल 65 किलो- ब्रॉन्ज मेडल


मेजर ध्यानचंद स्टेडियम की जगह होटल अशोक में होगा ओलंपिक खिलाड़ियों का सम्मान समारोह, खराब मौसम बना वजह

टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का स्वागत समारोह अब होटल अशोका में किया जाएगा। पहले यह कार्यक्रम मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में किया जाना था लेकिन खराब मौसम की वजह से स्थान में परिवर्तन करना पड़ा।

नई दिल्ली: टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का स्वागत समारोह अब होटल अशोका में किया जाएगा। पहले यह कार्यक्रम मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में किया जाना था लेकिन खराब मौसम की वजह से स्थान में परिवर्तन करना पड़ा।

मिली जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम शाम 6.30 बजे शुरु होगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर समेत पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और भारत सरकार के अधिकारी मौजूद रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खिलाड़ियों से रूबरू हो सकते हैं।

वहीं, दूसरी तरफ भारतीय एथलीट, पुरुष और महिला हॉकी टीम, नीरज चोपड़ा और बजरंग पुनिया आज शाम 5.15 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेंगे। अब सभी लोग एयरपोर्ट से सीधे अशोका होटल जाएंगे। पहले ही भारत लौट चुकी मीरबाई चानू, पीवी सिंधू भी कार्यक्रम में शामिल होंगी।

भारत ने जीते हैं 7 पदक


टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत की झोली में 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 कांस्य समेत कुल 7 मेडल आये हैं। इनमें नीरज चोपड़ा ने जेवलिन थ्रो में गोल्ड, मीरा चानू ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर, रवि दहिया ने कुश्ती में सिल्वर, पी वी सिंधू ने बैडमिंटन में ब्रॉन्ज, लवलीना बारगोहेन ने मुक्केबाजी में ब्रॉन्ज, बजरंग पूनिया ने कुश्ती में ब्रॉन्ज और पुरूष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज जीता है।


टोक्यो ओलंपिक 2020: 'खेलो के महाकुंभ' का समापन, बाय-बाय टोक्यो, मिलते हैं पेरिस में

'खेलों के महाकुंभ' यानि टोक्यो ओलंपिक 2020 का आज समापन हो गया है। इस बार जहां भारत ने मेडल्स जीतने के अपने सारे रिकॉर्ड्स तोड़े तो वहीं गोल्फ और भाला फेंक जैसी प्रतियोगिताएं युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनीं। इस बार ओलंपिक में 205 देशों के हजारों खिलाड़ियों ने हिस्सा लेकर पदक जीतने की कोशिश की।

नई दिल्ली: 'खेलों के महाकुंभ' यानि टोक्यो ओलंपिक 2020 का आज समापन हो गया है। इस बार जहां भारत ने मेडल्स जीतने के अपने सारे रिकॉर्ड्स तोड़े तो वहीं गोल्फ और भाला फेंक जैसी प्रतियोगिताएं युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनीं। इस बार ओलंपिक में 205 देशों के हजारों खिलाड़ियों ने हिस्सा लेकर पदक जीतने की कोशिश की। भारत का टोक्यो ओलंपिक में 7 मेडल के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा। भारत ने 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल समेत 7 मेडल्स जीते। अगला ओलंपिक 2024 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में किया जाएगा। 

टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत का प्रदर्शन

  • भारत को गोल्ड मेडल भाला फेंक के एथलीट नीरज चोपड़ा ने दिलाया
  • वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और पहलवान रवि दहिया ने देश के खाते में सिल्वर मेडल जोड़े
  • बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु, मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन और पहलवान बजरंग पूनिया ने अपने-अपने खेलों में ब्रॉन्ज मेडल देश को दिलाया
  • भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा
  • कुल 7 मेडल के साथ भारत पदक तालिक में 48वें स्थान पर रहा


टोक्यो ओलंपिक 2020 में प्रदर्शन करने वाले टॉप 10 देश

पहला स्थान: अमेरिका ने 39 गोल्ड, 41 सिल्वर और 33 ब्रॉन्ज मेडल जीते, अमेरिका ने कुल 113 पदक जीते
दूसरे स्थान: चीन ने 38 गोल्ड, 32 सिल्वर, 18 ब्रॉन्ज के साथ कुल 88 मेडल जीते
तीसरा स्थान : जापान नें 27 गोल्ड, 14 सिल्वर, 17 ब्रॉन्ज के साथ कुल 58 मेडल जीते
चौथा स्थान: ब्रिटेन ने 22 गोल्ड, 21 सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज के साथ कुल 65 मेडल जीते
पांचवा स्थान: रूस ने 20 गोल्ड, 28 सिल्वर, 23 ब्रॉन्ज के साथ कुल 71 मेडल जीते
छठवां स्थान: ऑस्ट्रेलिया ने 17 गोल्ड, 7 सिल्वर, 22 ब्रॉन्ज के साथ कुल 46 मेडल
सातवां स्थान: नीदरलैंड ने 10 गोल्ड, 12 सिल्वर, 14 ब्रॉन्ज के साथ कुल 36 मेडल जीते
आठवां स्थान: फ्रांस ने 10 गोल्ड, 12 सिल्वर, 11 ब्रॉन्ज के साथ कुल 33 मेडल जीते
नौवां स्थान: जर्मनी ने 10 गोल्ड, 11 सिल्वर, 16 ब्रॉन्ज के साथ कुल 37 मेडल
दसवां नंबर: इटली ने 10 गोल्ड, 10 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज मेडल जीते

.. मिलते हैं पेरिस में!

अगला ओलंपिक 2024 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में होगा. यह XXXIII ओलंपियाड होगा. पेरिस में 26 जुलाई से 11 अगस्त 2024 तक इस खेल का आयोजन प्रस्तावित है. बताते चलें कि कोरोना की वजह से इस बार 2020 में होने वाले ओलंपिक को 2021 में आयोजित किया गया था।


पढ़िए: क्या था रनवे पर 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा का टार्गेट

भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक 2020 में गोल्ड मेडल लाने वाले भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा का टार्गेट उनके विपक्षी द्वारा दिए गए टार्गेट से कहीं ज्यादा था। उन्होंने बताया कि वह ओलंपिक में खेल रहे थे लेकिन उन्हें ऐसा नहीं लग रहा ता कि वह जिन खिलाड़ियों के बीच थे वह उनसे अनजान थे।

नई दिल्ली: भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक 2020 में गोल्ड मेडल लाने वाले भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा का टार्गेट उनके विपक्षी द्वारा दिए गए टार्गेट से कहीं ज्यादा था। उन्होंने बताया कि वह ओलंपिक में खेल रहे थे लेकिन उन्हें ऐसा नहीं लग रहा ता कि वह जिन खिलाड़ियों के बीच थे वह उनसे अनजान थे।


नीरज चोपड़ा ने कहा कि इस साल सबसे जरूरी अंतर्राष्ट्रीय कंपटीशन खेलना था। सभी ने सहयोग दिया। बीच में मुझे जो 2-3 अंतर्राष्ट्रीय कंपटीशन मिले वे मेरे लिए जरूरी थे। इसी वजह से मैं कंपटीशन खेला। ओलंपिक था लेकिन दबाव नहीं था कि मैं बड़े थ्रोअर्स के बीच खेल रहा हूं। उन्होने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि इनके साथ मैं पहले खेला हूं। मैं अपनी परफॉर्मेंस पर काफी फोकस कर पा रहा था। चोट लगने के बाद काफी उतार चढ़ाव आए। आप सभी ने मदद की। मेरी मेहनत तो है ही साथ-साथ आप सभी की भी मेहनत है। सभी सुविधाओं के लिए धन्यवाद।


नीरज चोपड़ा ने आगे कहा कि मैं आशा करता हूं कि AFI खासकर एथलेटिक्स और जैवलिन को और बढ़ावा दे क्योंकि मुझे लगता है कि भारत में बहुत प्रतिभा है। वे धीरे-धीरे सामने आएंगे। ओलंपिक में और अच्छा कर सकते हैं। मुझे लग रहा है कि हम कुछ भी कर सकते हैं।

वहीं, अपने खेल के बारे में नीरज ने बताया कि पहला थ्रो अगर हम अच्छा कर लें तो खुद पर भी कॉन्फिडेंस आ जाता है और दूसरे एथलीट पर दबाव हो जाता है। सेकेंड थ्रो भी काफी स्टेबल थी। कहीं न कहीं मेरे दिमाग में आया कि ओलंपिक रिकॉर्ड के लिए कोशिश करता हूं। अब 90 मीटर के मार्क को हासिल करना है।

मेडल जीतने के सवाल पर नीरज चोपड़ा ने कहा कि ये तो था ही कि मेडल लेकर आना है लेकिन जिस समय फील्ड में होता हूं दिमाग में इधर-उधर की बातें नहीं आतीं। मैं पूरा फोकस इवेंट पर ही करता हूं। रनवे पर खड़ा होता हूं तो मेरा पूरा फोकस थ्रो पर होता है और मैं अपना थ्रो सही से कर पाता हूं।

बता दें कि नीरज चोपड़ा भारतीय ओलंपिक इतिहास के अबतक के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारा फेंक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है।


गोल्ड मेडल नहीं जीतने का दु:ख: बजरंग पुनिया

नका कहना है कि वह अपने प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि वह ओलंपिंक में गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए हैं।

नई दिल्ली: पहलवान बजरंग पुनिया ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर लोगों का दिल जीता लेकिन खुद का दिल नहीं जीत सके। उनका कहना है कि वह अपने प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि वह ओलंपिंक में गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए हैं लेकिन उन्होंने कहा है कि वह 2024 में होने वाले ओलंपिक खेलों में गोल्ड जीतेंगे।


बजरंग पुनिया ने कहा कि सभी देशवासियों को नमस्कार। आप लोगों ने मेरे लिए इतनी दुआएं की, मुझे इतना प्यार और सपोर्ट दिया कि मैंने देश के लिए ओलंपिक में मेडल जीता। रेसलिंग फेडरेशन और हमारी मदद करने वाले स्टॉफ धन्यवाद करता हूं। मुझे भी दुख है कि मैं स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया। 2024 में मैं कोशिश करूंगा कि देश के लिए गोल्ड जीतूं।

बता दें कि पहलवान बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचते हुए 65 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। ब्रॉन्ज के लिए हुए मुकालबे में बजरंग ने कजाकिस्तान के रेसलर दौलेट नियाजबेकोव को 8-0 से हराया।


'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने मिल्खा सिंह को समर्पित किया पदक, बेटे जीव मिल्खा ने कही ये बड़ी बात

'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को दिग्गज धावक मिल्खा सिंह को समर्पित किया। भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद चोपड़ा ने कहा, ‘मिल्खा सिंह स्टेडियम में राष्ट्रगान सुनना चाहते थे। वह अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनका सपना पूरा हो गया।’

नई दिल्ली: 'खेलो के महाकुंभ' यानि टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत के लिए शनिवार का दिन खास रहा। एक तरफ नीरज चोपड़ा ने देश को पहला गोल्ड दिलाया, तो दूसरी तरफ पहलवान बजरंग पूनिया ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को दिग्गज धावक मिल्खा सिंह को समर्पित किया। भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद चोपड़ा ने कहा, ‘मिल्खा सिंह स्टेडियम में राष्ट्रगान सुनना चाहते थे। वह अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनका सपना पूरा हो गया।’

नीरज द्वारा मिल्खा सिंह को सम्मान देने पर उनके पुत्र और स्टार गोल्फर जीव मिल्खा सिंह भावुक हो गए और उन्होंने इसके लिए उनका आभार जताया। जीव ने ट्विटर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, ‘‘पिताजी वर्षों से इसका इंतजार कर रहे थे। एथलेटिक्स में पहले स्वर्ण पदक से उनका सपना आखिर सच हुआ। यह ट्वीट करते हुए मैं रो रहा हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि ऊपर पिताजी की आंखों में भी आंसू होंगे। यह सपना साकार करने के लिये आभार।’’

उन्होंने आगे लिखा, ‘‘आपने न सिर्फ ओलंपिक खेलों में देश के लिये एथलेटिक्स का पहला स्वर्ण पदक जीता, आपने इसे मेरे पिता को समर्पित किया। मिल्खा परिवार इस सम्मान के लिये तहेदिल से आभार व्यक्त करता है।’’

अबतक 7 पदक भारत की झोली में

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 7 मेडल अपने नाम किए। भारत ने 1 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ ओलंपिक का समापन किया है। भारत ने किसी एक ओलंपिक खेल में सर्वाधिक पदक जीतने का नया रिकार्ड बनाया। अब तक भारत का यह ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

नीरज चोपड़ा के गोल्ड के अलावा मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर, पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में ब्रॉन्ज और लवलिना बोरगोहेन ने बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। वहीं भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज और कुश्ती में रवि दहिया ने सिल्वर मेडल जीता।


टोक्यो ओलंपिक 2020: बजरंग पूनिया ने रेसलिंग में जीता कांस्य पदक, कजाकिस्तान के पहलवान को 8-0 से हराया

भारत के पहलवान बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचते हुए 65 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। ब्रॉन्ज के लिए हुए मुकालबे में बजरंग ने कजाकिस्तान के रेसलर दौलेट नियाजबेकोव को 8-0 से हराया।

टोक्यो: 'खेलों के महाकुंभ' यानि टोक्यो ओलंपिक 2020 में आज का दिन भारत के लिए काफी अच्छा रहा एक तरफ भाला फेंक में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड जीता तो दूसरी तरफ भारत के पहलवान बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचते हुए 65 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। ब्रॉन्ज के लिए हुए मुकालबे में बजरंग ने कजाकिस्तान के रेसलर दौलेट नियाजबेकोव को 8-0 से हराया।

महाकुंभ में अपनी पिछले मुकाबलों से अलग इस बार बजरंग ने शुरुआत से ही अटैकिंग रणनीति को तरजीह दी और आखिर तक इसका साथ नहींं छोड़ा, जिसका उन्हें पूरा फायदा मिला। बजरंग ने कमाल का परफॉर्मेंस किया और दोनों राउंड में विरोधी पहलवान पर हावी रहे। इस जीत के साथ ही कुश्ती में इस ओलिंपिक में दो मेडल आ गए हैं। बजरंग से पहले रवि दहिया ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया है। 

अटैकिंग मोड में रहे बजरंग पुनिया

बजरंग ने अपनी पिछले मुकाबले के उलट बजरंग ने इस बार कांस्य के लिए कजाखिस्तान के दौलत नियाजबेकोव के खिलाफ अटैकिंग रणनीति अपनायी। इसका फायदा भी भारतीय पहलवान को मिला और उन्होंने जल्द ही एक प्वाइंट लेकर 1-0 की बढ़त बना लीद। इसके बाद बजरंग डबल लेग के लिए गए, पर दौलत ने बजरंग के दांव को बेकार कर दिया, लेकिन बजरंग की अटैकिंग रणनीति जारी रही और प्रतिद्वंद्वी पहलवान की गलती के कारण बजरंग को एक अंक और मिल गया और उन्होंने पहली बाउट 2- 0 से अपने नाम कर ली

पहली टक्कर में 2-0 की बढ़त के रथ पर सवार बजरंग पुनिया ने फिर से अटैक बनाते हुए दौलत के पैरों पर बहुत ही मजबूत पकड़ बना ली, लेकिन कजाखिस्तान के पहलवान ने शानदार डिफेंस करते हुए संभावित अंक को टाल दिया। बजरंग ने फिर से सिंगल लेग पकड़ा, लेकिन दौलत फिर से पैर छुड़ाने में कामयाब रहे। बजरंग ने इसके बाद जल्द ही दो अंक और लिया और पुनिया ने 4-0 की बढ़त बनाकर काफी हद तक सुनिश्चित किया कि कांस्य भारत के पास आने जा रही है। और इस बढ़त को बजरंग ने कुछ ही सेकेंड बाद 6-0 कर दिया।

बजरंग ने पिछले चार अंक टेक डाउन रणनीति से लिए, लेकिन बस वे दौलत को पलट ही नहीं पाए। इसके बाद बजरंग ने सिंगल लेग रणनीति से दो अंक और लिए और बढ़त भारतीय पहलवान ने बढ़त को 8-0 कर दिया। आखिरी 20 सेकेंड में कजाखिस्तान पहलवान ने कोशिश की, लेकिन दौलत को  सफलता नहीं मिली और बजरंग ने 8-0 से दूसरी बैटल जीतकर भारत के लिए छठा कांस्य जीत लिया।

बता दें कि भारत ने अबतक, एक गोल्ड, दो सिल्वर व 4 कांस्य पदक समेत 7 मेडल अबतक जीते हैं। जोकि भारत के ओलंपिक इतिहास में सर्वाधिक मेडल जीतने का रिकॉर्ड है।


टोक्यो ओलंपिक 2020: 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा से पीएम मोदी ने की फोन पर बात, दिया ये 'मंत्र'

इससे पहले पीएम ने उन्हें ट्विटर पर बधाई देते हुए कहा, 'टोक्यो में क्या इतिहास रचा गया है! नीरज चोपड़ा ने आज जो हासिल किया है उसे हमेशा याद किया जाएगा। युवा नीरज ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने उल्लेखनीय जुनून के साथ खेला और अद्वितीय धैर्य दिखाया। गोल्ड जीतने के लिए उन्हें बधाई।'

टोक्यो: आज भारत के झोली में गोल्ड मेडल लाने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा से पीएम नरेंद्र मोदी ने बात की। पीएम मोदी ने नीरज को जीत के लिए बधाई देते हुए कहा कि बिना दबाव के अपने खेल पर ध्यान दें। नीरज के गोल्ड जीतने के बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फोन पर बात की। उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। बता दें पीएम मोदी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो नीरज चोपड़ा से बातचीत करते नजर आ रहे हैं।


पीएम मोदी वीडियो में कह रहे हैं, ‘बहुत-बहुत बधाई नीरज जी, आपको चोट भी आयी थी फिर भी आपने बड़ा कमाल कर दिया। यह मेहनत के कारण होता है। जब आप जा रहे थे तो मैने आपको देखा आपके चेहरे में आत्मविश्वास था ना कि दबाव। आपने ऐसा काम किया है कि हमारे देश के बच्चों का मन स्पोर्ट्स में करियर बनाने का करेगा। आपके माता और पिता जी को मेरी ओर से प्रणाम कहिये, राधाकृषण जी को बधाई कहिये। तो 15 अगस्त को मिल रहे हैं भैया, बहुत-बहुत बधाई।’

नीरज चोपड़ा से बात करने की जानकारी पीएम मोदी ने ट्वीट करके भी दी। पीएम ने ट्वीट किया, 'गोल्ड जीतने के बाद मैंने नीरज से बात की और उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई। उन्होंने टोक्यो 2020 के दौरान कड़ी मेहनत और तप किया। वो बेहतरीन खेल प्रतिभा और खिलाड़ी भावना का परिचय देते हैं। भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं।'


इससे पहले पीएम ने उन्हें ट्विटर पर बधाई देते हुए कहा, 'टोक्यो में क्या इतिहास रचा गया है! नीरज चोपड़ा ने आज जो हासिल किया है उसे हमेशा याद किया जाएगा। युवा नीरज ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने उल्लेखनीय जुनून के साथ खेला और अद्वितीय धैर्य दिखाया। गोल्ड जीतने के लिए उन्हें बधाई।'


बता दें कि टोक्यो ओलंपिक 2020 का 15वां दिन भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा ने भारत को पहला गोल्ड दिलाया। इसके साथ ही नीरज ने एथलीट में 125 साल का इतिहास भी बदल दिया। एथलीट में 125 साल बाद भारत को गोल्ड मिला है। इसके साथ ही भारत के खाते में 7वां पदक भी आ गया है।

हरियाणा सरकार देगी 6 करोड़ रुपए

टोक्यो ओलंपिक में पहला गोल्ड मेडल जीतने पर हरियाणा सरकार ने नीरज चोपड़ा को 6 करोड़ रुपये, क्लास 1 की नौकरी देने की घोषणा की है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, ये बहुत खुशी का पल है। हमारे लिये बहुत बड़ी उपलब्धि है, देश के लिए उपलब्धि है, हरियाणा के लिए उपलब्धि है। उन्होंने कहा, पंचकूला में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एथलेटिक्स बनाएंगे और उसमें नीरज चोपड़ा को हेड बनाएंगे।


'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा को हरियाणा सरकार देगी 6 करोड़ का ईनाम, CM खट्टर ने कही ये बड़ी बात

सीएम खट्टर ने नीरज चोपड़ा को छह करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार के अलावा प्रथम श्रेणी अधिकारी की सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की है। इसके अलावा हरियाणा में कहीं भी 50 फीसदी के कन्सेशन पर प्लाट देने का भी ऐलान किया है। यही नहीं, नीरज चोपड़ा को पंचकुला में बनने वाले एथलीट सेंटर का हेड भी बनाया जाएगा।

नई दिल्ली: आज टोक्यो ओलंपिक में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा पर अब इनामों की बारिश होनी शुरू हो गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ओलिंपिक में पुरुषों की भाला फेंक में पदक जीतने के लिए नीरज चोपड़ा को 6 करोड़ रुपये के नकद इनाम की घोषणा की।

इतना ही नहीं, सीएम खट्टर ने नीरज चोपड़ा को छह करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार के अलावा प्रथम श्रेणी अधिकारी की सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की है। इसके अलावा हरियाणा में कहीं भी 50 फीसदी के कन्सेशन पर प्लाट देने का भी ऐलान किया है। यही नहीं, नीरज चोपड़ा को पंचकुला में बनने वाले एथलीट सेंटर का हेड भी बनाया जाएगा।


23 वर्षीय नीरज ने स्वर्ण पदक जीतने के लिए चेक गणराज्य की जोड़ी जैकब वाडलेज और विटेज़स्लाव वेस्ली से आगे निकलने के लिए 87.58 का सर्वश्रेष्ठ प्रयास दर्ज किया। यह टोक्यो ओलिंपिक में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। बीजिंग में 2008 में अभिनव बिंद्रा की वीरता के बाद ओलिंपिक इतिहास में देश का दूसरा व्यक्तिगत स्वर्ण पदक भी है।

नीरज चोपड़ा को उनकी जीत के लिए बधाई देते हुए, सीएम मनोहरलाल खट्टर ने कहा कि देश इस पल का लंबे समय से इंतजार कर रहा था और पूरे देश को उन पर गर्व है। इससे पहले मनोहरलाल खट्टर ने भाला फेंक का फाइनल देखते हुए अपनी एक तस्वीर ट्वीट की थी।


टोक्यो ओलंपिक 2020: भारत की झोली में पहला गोल्ड मेडल, भाला फेंक में नीरज चोपड़ा बने 'गोल्डन बॉय'

भारत के ओलिंपिक इतिहास में पहली बार नीरज चोपड़ा के रूप में किसी एथलीट ने जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता और देश का सर गर्व से ऊंचा कर दिया।

टोक्यो: भारत के 23 वर्षीय युवा जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंक एथलीट) नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलिंपिक में देश के लिए इतिहास रच दिया। भारत के ओलिंपिक इतिहास में पहली बार नीरज चोपड़ा के रूप में किसी एथलीट ने जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता और देश का सर गर्व से ऊंचा कर दिया। इस खेल में नीरज से पहले किसी भी एथलीट ने ये कामयाबी हासिल नहीं की थी। वो देश के लिए गोल्ड जीतने वाले पहले एथलीट बन गए। 

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फाइनल राउंड में नीरज चोपड़ा ने कमाल कर दिया और ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में ये मुकाम हासिल करने वाले पहले भारतीय बने। यही नहीं उन्होंने टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भारत को पहला गोल्ड मेडल भी दिलाया। इसके अलावा वो भारत की तरफ से ओलिंपिक इतिहास में गोल्ड मेडल जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी बने। उनसे पहले शूटर अभिनव बिंद्रा ने ये कमाल 2008 बीजिंग ओलिंपिक में 10 मीटर एयर राइफल में किया था।

नीरज के गोल्ड मेडल  के साथ ही टोक्यो ओलंपिक में भारत ने सातवां पदक अपने नाम किया, जो कि देश का ओलंपिक में अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन भी है। भारत का इससे पहले बेस्ट प्रदर्शन छह मेडल के साथ लंदन ओलंपिक में रहा था। टोक्यो ओलंपिक में भारत ने एक गोल्ड, दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। 

राष्ट्रपति ने दी बधाई

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बधाई देते हुए ट्वीट किया- नीरज चोपड़ा की अभूतपूर्व जीत! आपके भाले ने बाधाओं को तोड़ते हुए सोना जीतकर इतिहास रचा है। आपने अपने पहले ओलिंपिक में भारत को पहली बार ट्रैक और फील्ड में पदक दिलाया है। आपका करतब हमारे युवाओं को प्रेरणा देगा। भारत उत्साहित है। हार्दिक बधाई।
 
पीएम ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीरज चोपड़ा को बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया है- टोक्यो में क्या इतिहास रचा गया है! नीरज चोपड़ा ने आज जो हासिल किया है उसे हमेशा याद किया जाएगा। युवा नीरज ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने उल्लेखनीय जुनून के साथ खेला और अद्वितीय धैर्य दिखाया। गोल्ड जीतने के लिए उन्हें बधाई।
 
उपराष्ट्रपति ने दी बधाई

उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नीरज चोपड़ा की जीत पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि क्या अविश्वसनीय उपलब्धि है! नीरज चोपड़ा ने इतिहास रचा और टोक्यो ओलिंपिक में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। उनके इस शानदार कारनामे ने ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में ओलिंपिक पदक के लिए भारत के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है।

पश्चिम बंगाल की सीएम ने दी बधाई

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीरज चोपड़ा को बधाई देते हुए कहा कि ''इतिहास रचा गया है! ओलिंपिक 2020 में स्वर्ण पदक जीतकर भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने गर्व करने से भी अधिक कुछ दिया। आज पूरा देश इस गौरवशाली विजय पर हर्षित होगा। बहुत बहुत बधाई आपको।''


ऐसे कैसे बढ़ेगा इंडिया? सरकार की बेरुखी का नतीजा, चंडीगढ़ की पार्किंग में पर्चियां काटने को मजबूर बॉक्सर रितु

बॉक्सर रितु की कहानी बेदह मार्मिक है। वो अपने पिता और घर चलाने के लिए पार्किंग की पर्चियां काटती हैं। जिस हाथ में बॉक्सिंग के ग्लव्स होने चाहिए थे, उस हाथ में पर्चियां हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे कैसे बढ़ेगा इंडिया?

नई दिल्ली: टोक्यो ओलंपिक चल रहा है और खिलाड़ी अपना दमखम दिखा रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो खेल के मैदान में नहीं बल्कि रोजी-रोटी के लिए या फिर कहें तो मजबूरियों के चलते कहीं और दम दिखा रहे हैं। इसका उदाहरण बॉक्स रितु। देखा जाए तो भारत ने टोक्यो ओलंपिक में अब तक 5 मेडल अपने नाम कर लिए हैं। ये संख्या और भी बढ़ सकती है, मगर खिलाड़ियों के पास सुविधा की कमी के कारण ये संख्या नहीं बढ़ी है।

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बॉक्सर रितु की कहानी बेदह मार्मिक है। वो अपने पिता और घर चलाने के लिए पार्किंग की पर्चियां काटती हैं। जिस हाथ में बॉक्सिंग के ग्लव्स होने चाहिए थे, उस हाथ में पर्चियां हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे कैसे बढ़ेगा इंडिया? 

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एक समाचार एजेंसी ने सोशल मीडिया पर बॉक्सर रितु की कुछ तस्वीरें साझा की है। ये सभी तस्वीरें चंडीगढ़ की हैं। इन तस्वीरों में बॉक्सर रितु पार्किंग की पर्चिंयां काट रही हैं। ऐसे में उनका मनोबल बहुत ही गिर गया है। अपनी स्थिति पर बॉक्सर रितु बताती हैं कि उनको अपने घर का खर्च चलाने के लिए यह काम करना पड़ रहा है। उनके पिता बीमार चल रहे हैं, ऐसे में घर चलाने के लिए उन्हें अपने गेम को छोड़ना पड़ गया। वैसे रितु को तो अपना गेम छोड़ना पड़ा, लेकिन अभावों के बावजूद ओलिंपिक तक पहुंचे कई खिलाड़ियों की घरेलू हालत भी बहुत ठीक नहीं है।

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रितु ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई मैच खेली हैं। मैच में कई मेडल्स भी अपने नाम किया है, मगर कोई भी सरकारी संस्थान सपोर्ट नहीं किया। ना ही किसी संस्थान की तरफ से कोई स्कॉलरशिप मिली। रितु की खबर आने के बाद सोशल मीडिया में इनके समर्थन में कई लोग आए।



लोगों ने सरकार और खासकर खेलमंत्री अनुराग ठाकुर को जमकर खरी खोटी सुनाई है और रितु जैसे खिलाड़ियों के लिए आगे आने को कहा है।


टोक्यो ओलंपिक 2020: गोल्फर अदिति अशोक का सफर खत्म, चौथे स्थान पर रहीं, राष्ट्रपति-पीएम ने बढ़ाया हौसला

अदिति का कुल स्कोर 15 अंडर 269 रहा और वे दो स्ट्रोक्स से पदक जीतने से चूक गईं। ओलंपिक में ऐतिहासिक पदक के करीब पहुंची अदिति ने सुबह दूसरे नंबर से शुरुआत की थी, लेकिन वे बाद में पिछड़ गईं।

टोक्यो: 'खेलों के महाकुंभ' यानि टोक्यो ओलंपिक 2020 से आज एक और निराशा भरी खबर आ रही है। दरअसल, आज भारत की झोली में एक पदक आते-आते रह गया। भारत की अदिति अशोक ओलंपिक खेलों की गोल्फ स्पर्धा में खराब मौसम से प्रभावित चौथे दौर में तीन अंडर 68 का स्कोर करके चौथे स्थान पर रहीं।

अदिति का कुल स्कोर 15 अंडर 269 रहा और वे दो स्ट्रोक्स से पदक जीतने से चूक गईं। ओलंपिक में ऐतिहासिक पदक के करीब पहुंची अदिति ने सुबह दूसरे नंबर से शुरुआत की थी, लेकिन वे बाद में पिछड़ गईं।

रियो ओलंपिक में 41वें स्थान पर रहीं अदिति ने हालांकि शानदार प्रदर्शन किया है। आखिरी दौर में उन्होंने पांचवें, छठे, आठवें, 13वें और 14वें होल पर बर्डी लगाया और नौवें तथा 11वें होल पर बोगी किए। दुनिया की नंबर एक गोल्फर नैली कोरडा ने दो अंडर 69 के साथ 17 अंडर कुल स्कोर करके गोल्ड मेडल जीता। जापान की इनामी मोने फाइनल राउंड में न्यूजीलैंड की लिडिया केओ को पीछे छोड़ कर सिल्वर मेडल हासिल करने में कामयाब रहीं। लिडिया को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। 


राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने बढ़ाया हौसला

अदिती अशोक का हौसला बढ़ाते हुए राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद ने ट्वीट किया, 'आज के ऐतिहासिक प्रदर्शन से आपने(अदिति अशोक) भारतीय गोल्फ को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आपने बेहद शांत और शिष्टता के साथ खेला। धैर्य और कौशल के प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए बधाई'

वहीं, पीएम मोदी ने भी अदिती का हौसला बढ़ाया। उन्होंने ट्वीट किया, 'अदिति अशोक आपने अच्छा खेला। आपने टोक्यो ओलंपिक में जबरदस्त कौशल और संकल्प दिखाया। आपके भविष्य के लिए शुभकामनाएं।'

अदिती के पूर्व कोच तरुण सरदेसाई ने भी अदिती का हौसला बढ़ाया है। उन्होंने कहा, 'अदिति के खेल की शुरुआत भले अच्छी ना रही हो लेकिन बाद में उसने अच्छा खेला। अदिति की क्षमताओं का सबने कम आकलन किया, किसी ने नहीं सोचा था कि वह चौथे स्थान तक पहुंचेगी। जो भी गोल्फ के बारे में जानता है वह अदिती का खेल देखकर चौंका होगा।'


टोक्यो ओलंपिक 2020: भारतीय पहलवान बजरंग पुनिया ने सेमीफाइनल में बनाई जगह, गोल्फर अदिति से भी पदक की उम्मीद

बजरंज पुनिया ने शानदार खेल दिखाते हुए लगातार दूसरे मुकाबले में दमदार जीत हासिल की। इरान के विरोधी मोरटेज़ा चेका घियासी को पटखनी देकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली।

टोक्यो: 'खेलों के महाकुंभ' से एक अच्छी खबर आ रही है। दरअसल,  भारतीय पहलवान बजरंज पुनिया ने शानदार खेल दिखाते हुए लगातार दूसरे मुकाबले में दमदार जीत हासिल की। इरान के विरोधी  मोरटेज़ा चेका घियासी को पटखनी देकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। पहले राउंड में पिछड़ने के बाद बजरंग ने शानदार दांव लगाया और मोरटेज़ा चेका घियासी को चित करते हुए विक्ट्री बाय फॉल से जीत हासिल की और पदक की तरफ अगला कदम बढ़ाया।

गोल्फ में अदिति से पदक की उम्मीद


महिला गोल्फर अदिति अशोक तीसरे दौर में तालिका में दूसरे स्थान पर हैं। फाइनल में एक दिन शेष है और अगर वह इसे बनाए रखती हैं, तो वह भारतीय टीम के लिए रजत पदक जीत सकती हैं। कल भी खराब मौसम की संभावना है। ऐसे में सभी भारतीय उम्मीद लगा रहें होंगे कि मौसम खराब रहे और भारत पदक जीत जाए।

अबतक 5 पदक भारत की झोली में

भारत अब तक टोक्यो में जारी ओलिंपिक में पांच पदक जीत चुका है, जिसमें से दो पदक सिल्वर मेडल के रूप में आए हैं, जबकि तीन पदक कांस्य के रूप में आए हैं। चार व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धाओं में भारत ने पदक जीते हैं, जबकि एक पदक टीम के रूप में आया है, जिसे हॉकी पुरुष टीम ने जीता है।



ओलंपिक इतिहास में 8 गोल्ड, 1 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज, ये है हॉकी टीम इंडिया का दम !

भारतीय हॉकी का ओलंपिक में वह दौर भी था जब सामने वाली टीम मैदान पर भारत के खिलाफ उतरने से पहले जीतने की नहीं बल्कि यह सोचती थी कि आज उसे कितने गोल से हार मिलने वाली है। यानि जीतने की उम्मीद तक नहीं कर सकती थी।

नई दिल्ली: बेशक इस बार लगभग 40 साल बाद हॉकी टीम इंडिया ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा है लेकिन हॉकी में भारत उस समय से इतिहास रचता चला आ रहा है जब दूसरे देशों के खिलाड़ी सही तरीके से हॉकी पकड़ना नहीं जानते थे। मैच के निर्णय एकतरफा हुआ करते थे। भारतीय हॉकी का ओलंपिक में वह दौर भी था जब सामने वाली टीम मैदान पर भारत के खिलाफ उतरने से पहले जीतने की नहीं बल्कि यह सोचती थी कि आज उसे कितने गोल से हार मिलने वाली है। यानि जीतने की उम्मीद तक नहीं कर सकती थी।

एक वक्त था जब गोल्ड मेडल पर सिर्फ एक ही देश का नाम हुआ करता था और वह था भारत। मुकाबला कहीं भी हुआ हो लेकिन गोल्ड भारत की ही झोली में आत था। भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक के इतिहास में अबतक 8 गोल्ड (1928, 1932, 1936, 1948, 1952,    1956, 1964, 1980), एक सिल्वर (1960) और तीन ब्रांज मेडल (1968, 1972, 2020) जीते हैं। ऐसा करने वाली भारत दुनिया की इकलौती हॉकी टीम है।


हॉकी में भारत ने अपना आखिरी मेडल 1980 के मॉस्को में ओलंपिक  में जीता था। उस साल कप्तान वासुदेवन भास्करन की अगुवाई में भारत ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था। उसके बाद से अब तक का भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में आया था। जहाँ पुरुष हॉकी टीम पांचवें स्थान पर रही थी। अब इस जीत के साथ ही 41 साल बाद भारत ने ओलंपिक हॉकी में अपने पदक का सूखा समाप्त कर लिया है। आइए जानते हैं भारत ने कब और किन किन ओलंपिक में हॉकी के मेडल अपने नाम किए हैं। 



ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का इतिहास

भारतीय हॉकी में एक दौर ऐसा भी था जब पूरी दुनिया हमारा लोहा मानती थी। उस दौर में हॉकी के जादूगर महान ध्यान चंद विपक्षी टीम के 11 खिलाड़ियों पर भारी पड़ते थे। भारत ने 1928 से 1956 के बीच लगातार छह बार ओलंपिक हॉकी का गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इस दौर को भारतीय हॉकी का स्वर्णिम युग भी कहा जाता है।


भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक के हॉकी इवेंट में अपना  पहला गोल्ड मेडल साल 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में जीता था। मेजर ध्यानचंद ने इस पूरे ओलंपिक में अकेले सबसे ज्यादा 14 गोल दागे, जबकि भारतीय टीम ने 5 मैचों में कुल 29 गोल किए थे। इस साल फाइनल में भारत का सामना नीदरलैंड से हुआ। मेजर ध्यानचंद की शानदार  हैटट्रिक की बदौलत टीम इंडिया ने ये पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। खास बात ये है कि भारत के खिलाफ इस ओलंपिक में कोई भी टीम एक भी गोल दागने में सफल नहीं हो सकी थी।


इसके बाद भारत ने 1932 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक, 1936 के बर्लिन ओलंपिक, 1948 के लंदन ओलंपिक, 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक और 1956 के मेलबर्न ओलंपिक मिलाकर लगातार छह गोल्ड मेडल अपने नाम किए।


1960 के रोम ओलंपिक के फाइनल में भी बनाई जगह


भारत ने एक बार फिर 1960 के रोम ओलंपिक के फाइनल में भी जगह बनाई। हालांकि भारत लगातार अपना सातवां गोल्ड मेडल जीतने से चूक गया और उसे फाइनल में पाकिस्तान के हाथों 0-1 कार का सामना करना पड़ा। ये भारत का ओलंपिक में पहला और एकमात्र सिल्वर मेडल है।


1964 के टोक्यो ओलंपिक में भारत ने रोम के फाइनल की हार को भूलते हुएँ एक बार फिर जादुई हॉकी का प्रदर्शन किया। फाइनल में एक बार फिर उसके सामने पाकिस्तान की टीम थी। भारत ने रोम ओलंपिक की हार का बदला लेते हुए इस मैच में पाकिस्तान को मात दी और ओलंपिक हॉकी का अपना सातवां गोल्ड मेडल जीत इतिहास रच दिया।


1968 के मेक्सिकों ओलंपिक में पहली बार फाइनल में नहीं पहुंचा भारत 


1968 के मेक्सिकों ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। भारत का ये ओलंपिक हॉकी का पहला ब्रॉन्ज मेडल था। साथ ही 1928 के बाद से ये पहला ओलंपिक था जब भारत हॉकी के फाइनल में जगह नहीं बना पाया था। सेमीफाइनल में भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वेस्ट जर्मनी के खिलाफ हुए मैच में भारत ने जीत दर्ज कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। इसके बाद 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भी भारत को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था।


1976 के मांट्रीयल ओलंपिक भारतीय हॉकी के लिए बेहद खराब रहे थे। ये पहला मौका था जब टीम इंडिया नॉक आउट दौर से पहले ही बाहर हो गई थी। साथ ही 1928 के बाद से ऐसा पहली बार हुआ था कि भारतीय हॉकी टीम को ओलंपिक से ख़ाली हाथ लौटना पड़ा था।


1980 के मॉस्को ओलंपिक में एक बार फिर जीता गोल्ड 


हालांकि 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारत ने एक बार फिर शानदार वापसी की और फाइनल में स्पेन को हराकर ओलंपिक हॉकी का आठवां गोल्ड मेडल अपने नाम किया। ये टोक्यो ओलम्पिक से पहले भारत का आख़िरी मेडल भी था। और अब 41 साल बाद भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीत हॉकी में अपने पदक का सूखा समाप्त कर लिया है।


गोल्ड मेडल- 1928, 1932, 1936, 1948, 1952,    1956, 1964, 1980


सिल्वर मेडल- 1960


ब्रॉन्ज मेडल: 1968, 1972, 2020


टोक्यो ओलंपिक 2020: कांस्य पदक के लिए खेले गए मुकाबले में ब्रिटेन से हारी महिला हॉकी टीम, PM मोदी ने ऐसे बढ़ाया टीम का हौसला

ओलंपिक के कांस्य पदक के मुकाबले में ब्रिटेन ने महिला हॉकी टीम को 4-3 से हरा दिया। इस हार के बाद पूरे देश में निराशा की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा है कि हम महिला हॉकी में एक पदक से चूक गए, लेकिन यह टीम न्यू इंडिया की भावना को दर्शाती है।

टोक्यो: 'खेलों के महाकुंभ' यानि टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक के लिए खेले गए मुकाबले में भारत की महिला हॉकी टीम को ब्रिटेन से हार का सामना करना पड़ा है। ओलंपिक के कांस्य पदक के मुकाबले में ब्रिटेन ने महिला हॉकी टीम को 4-3 से हरा दिया। इस हार के बाद पूरे देश में निराशा की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा है कि हम महिला हॉकी में एक पदक से चूक गए, लेकिन यह टीम न्यू इंडिया की भावना को दर्शाती है।


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पीएम मोदी ने ऐसे बढ़ाया टीम इंडिया का हौसला


पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, ‘’हम महिला हॉकी में एक पदक से चूक गए, लेकिन यह टीम न्यू इंडिया की भावना को दर्शाती है, जहां हम अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और नए मोर्चे बनाते हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ओलंपिक्स में टीम की सफलता भारत की युवा बेटियों को हॉकी को अपनाने और इसमें उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी। इस टीम पर गर्व है।'